यूं ही नही बनता काला सोना, काश्तकार के खून पसीने के साथ चढता है दिन रात की चौकसी का रंग- अफीम की खेती में करने लगे नवाचार ताकि अच्छी निकले पैदावार - हरनावदाशाहजी. खेती किसानी में यूं तो नवाचार जैसे हर किसान का जुनून होता है। फसल के लिए खेत तैयार करने से लेकर बीज बुवाई से लेकर फसल कटाई तक हर किसान अपने निकटतम जानकार द्वारा किए जा रहे हर वो प्रयोग अपनाने को आतुर नजर आता है जिसमें फसल की सुरक्षा व अच्छी पैदावार का फायदा मिलता नजर आता हो। लेकिन इस आतुरता के मामले में अफीम काश्तकारों काे देखें तो वो अन्य किसानों से भी एक कदम आगे नजर आते है। क्योंकि उनके सामने ना केवल फसल पालने की चुनौती होती है बल्कि फसल से निकलने वाले दूध (अफीम ) को एक निश्चित मापदंड में सरकार को तौल कराना आवश्यक ड्यूटी होती है। और यदि मापदंड पूरा नही कर पाए तो उसकी सजा के रुप में काश्तकारी लाइसेंस से हाथ धोने का डर रहता है। इसी कारण काश्तकार पूरी जी जान लगाकर अफीम की खेती व लालन पालन करते हैं। शुरू से करते हैं चतराम- रबी की फसल में शामिल अफीम की बुवाई अक्टूबर नवम्बर माह में शुरू हो जाती है। बुवाई से पहले खेत में गोबर की देशी खाद फैलाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाना। उसके बाद क्यारियां बनाकर उपचारित बीज की बुवाई करना। फिर बीज के अंकुरित होने के बाद निराई गुड़ाई की जाती है जिसमें पौधों के बीच दूरी निर्धारित की जाती है। दो महिने बाद तैयार करते हैं सुरक्षा कवच- अफीम की फसल दो महीने में बढिया लहलहाने लगती है और इसी के साथ शुरू हो जाता है फसल का सुरक्षा कवच तैयार करने का सिलसिला। खेत में जंगली जानवरों एवं मवोशियों की दखल रोकनें के लिए खेत के चारों तरफ बाड बंदी की जाती है। उसके बाद क्यारियों पर डंडे गाड कर उनको रस्सियों से जोडकर जाल बुना जाता है ताकि बढते पौधे में डोडे आने के बाद पौधा हवा के झोंकों में गिरे नही। क्योंकि पौधा नाजुक होता है और आडा पड़ जाए तो टूट जाता है जिससे पौधे का विकास रुक जाता है और अफीम का उत्पादन प्रभावित होता है। इस समस्या से बचाव के लिए पिछले कुछ सालों से ज्यादातर काश्तकार इस तरह का जाल बनाने का प्रयोग करने लगे हैं। इसके अलावा खेत के चारों ओर पुरानी साड़ियां बांधकर हवा के वेग को रोकने का जतन करते हैं। डोडे आने के बाद मानव चोर ही नही पंछी चोर भी धावा बोलने की फिराक में रहते हैं। तोते इन डोडों के बडे चोर होते हैं और पूरे चाव से खाते हैं । जिनसे बचाव के लिए खेत में बजूके खडे करने के साथ साथ अब नायलोन की डोरी से बनी जाल फैलैकर पूरी फसल को ढक देते हैं। ताकि पक्षियों के हमले से फसल को बचाया जा सके। परिवार सहित डालते हैं डेरा-अफीम काश्तकार के खेत में यूं तो और भी फसलें होती है लेकिन सबसे ज्यादा चौकसी अफीम की फसल की करनी पडती है। इसलिए सारा परिवार का डेरा खेत पर ही डाल देते हैं जो दिनरात फसल का निगरानी के साथ देखभाल करते हैं। देखभाल के लिए कुछ स्थानों पर लोग अब तकनीकी का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। कस्बे के एक काश्तकार हेमराज लोधा ने बताया कि दो साल पहले सीपीएस का पट्टा आया था ऐसे में फसल की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इस बार भी फसल में जंगली जानवरों का डर बना है तो उनकी निगरानी एवं सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए कहते हैं काला सोना - अफीम की फसल तीन माह से बडी होने पर फूल खिलकर उनसे डोडे बनते हैं। डोडे बडे होने पर इनको विशेष औजार से चीरा लगाकर दूध निकाला जाता है। यह दूध डोडे की बाहरी सतह पर जम कर काला पड़ जाता है। इस काले दूध को ही अफीम या काला सोना कहा जाता है। अफीम के इस दूध को काले सोने की उपमा इसलिए दी गई है कि फसल के डोडे एवं उससे निकलने वाला दूध (अफीम) मादक पदार्थ की श्रेणी में आते हैं जिसका लोग नशे के रुप में उपयोग करते हैं। इस कारण इनकी तस्करी बडी मात्रा में होती है। बताया जाता है कि वैसे तो इन मादक पदार्थों को निर्धारित तय मापदंडों के हिसाब से विभाग को देना होता है लेकिन उसके बावजूद भी इसकी तस्करी के मामले सामने आते हैं। उसकी प्रमुख वजह होती है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके भाव सरकारी भाव के मुकाबले कई गुना तक अधिक होते हैं जो तस्करों के माध्यम से मिल सकते हैं और इसी लालच में कई बार काश्तकार उलझ जाते हैं। लेकिन इन सबसे बढ़कर लक्ष्य काश्तकार का फसल का सही तरीके से पूरी करके घर सुरक्षित आना होता है और यही उसकी उपलब्धि। इसके लिए समय समय पर पूजा अर्चना भी करते हैं तो वहीं चीरा लगाने के लिए पूजा अर्चना करके किसी को जूते चप्पल तक खेत में नही ले जाने देते हैं।
यूं ही नही बनता काला सोना, काश्तकार के खून पसीने के साथ चढता है दिन रात की चौकसी का रंग- अफीम की खेती में करने लगे नवाचार ताकि अच्छी निकले पैदावार - हरनावदाशाहजी. खेती किसानी में यूं तो नवाचार जैसे हर किसान का जुनून होता है। फसल के लिए खेत तैयार करने से लेकर बीज बुवाई से लेकर फसल कटाई तक हर किसान अपने निकटतम जानकार द्वारा किए जा रहे हर वो प्रयोग अपनाने को आतुर नजर आता है जिसमें फसल की सुरक्षा व अच्छी पैदावार का फायदा मिलता नजर आता हो। लेकिन इस आतुरता के मामले में अफीम काश्तकारों काे देखें तो वो अन्य किसानों से भी एक कदम आगे नजर आते है। क्योंकि उनके सामने ना केवल फसल पालने की चुनौती होती है बल्कि फसल से निकलने वाले दूध (अफीम ) को एक निश्चित मापदंड में सरकार को तौल कराना आवश्यक ड्यूटी होती है। और यदि मापदंड पूरा नही कर पाए तो उसकी सजा के रुप में काश्तकारी लाइसेंस से हाथ धोने का डर रहता है। इसी कारण काश्तकार पूरी जी जान लगाकर अफीम की खेती व लालन पालन करते हैं। शुरू से करते हैं चतराम- रबी की फसल में शामिल अफीम की बुवाई अक्टूबर नवम्बर माह में शुरू हो जाती है। बुवाई से पहले खेत में
गोबर की देशी खाद फैलाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाना। उसके बाद क्यारियां बनाकर उपचारित बीज की बुवाई करना। फिर बीज के अंकुरित होने के बाद निराई गुड़ाई की जाती है जिसमें पौधों के बीच दूरी निर्धारित की जाती है। दो महिने बाद तैयार करते हैं सुरक्षा कवच- अफीम की फसल दो महीने में बढिया लहलहाने लगती है और इसी के साथ शुरू हो जाता है फसल का सुरक्षा कवच तैयार करने का सिलसिला। खेत में जंगली जानवरों एवं मवोशियों की दखल रोकनें के लिए खेत के चारों तरफ बाड बंदी की जाती है। उसके बाद क्यारियों पर डंडे गाड कर उनको रस्सियों से जोडकर जाल बुना जाता है ताकि बढते पौधे में डोडे आने के बाद पौधा हवा के झोंकों में गिरे नही। क्योंकि पौधा नाजुक होता है और आडा पड़ जाए तो टूट जाता है जिससे पौधे का विकास रुक जाता है और अफीम का उत्पादन प्रभावित होता है। इस समस्या से बचाव के लिए पिछले कुछ सालों से ज्यादातर काश्तकार इस तरह का जाल बनाने का प्रयोग करने लगे हैं। इसके अलावा खेत के चारों ओर पुरानी साड़ियां बांधकर हवा के वेग को रोकने का जतन करते हैं। डोडे आने के बाद मानव चोर ही नही पंछी चोर भी धावा बोलने की
फिराक में रहते हैं। तोते इन डोडों के बडे चोर होते हैं और पूरे चाव से खाते हैं । जिनसे बचाव के लिए खेत में बजूके खडे करने के साथ साथ अब नायलोन की डोरी से बनी जाल फैलैकर पूरी फसल को ढक देते हैं। ताकि पक्षियों के हमले से फसल को बचाया जा सके। परिवार सहित डालते हैं डेरा-अफीम काश्तकार के खेत में यूं तो और भी फसलें होती है लेकिन सबसे ज्यादा चौकसी अफीम की फसल की करनी पडती है। इसलिए सारा परिवार का डेरा खेत पर ही डाल देते हैं जो दिनरात फसल का निगरानी के साथ देखभाल करते हैं। देखभाल के लिए कुछ स्थानों पर लोग अब तकनीकी का इस्तेमाल भी करने लगे हैं। कस्बे के एक काश्तकार हेमराज लोधा ने बताया कि दो साल पहले सीपीएस का पट्टा आया था ऐसे में फसल की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इस बार भी फसल में जंगली जानवरों का डर बना है तो उनकी निगरानी एवं सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए कहते हैं काला सोना - अफीम की फसल तीन माह से बडी होने पर फूल खिलकर उनसे डोडे बनते हैं। डोडे बडे होने पर इनको विशेष औजार से चीरा लगाकर
दूध निकाला जाता है। यह दूध डोडे की बाहरी सतह पर जम कर काला पड़ जाता है। इस काले दूध को ही अफीम या काला सोना कहा जाता है। अफीम के इस दूध को काले सोने की उपमा इसलिए दी गई है कि फसल के डोडे एवं उससे निकलने वाला दूध (अफीम) मादक पदार्थ की श्रेणी में आते हैं जिसका लोग नशे के रुप में उपयोग करते हैं। इस कारण इनकी तस्करी बडी मात्रा में होती है। बताया जाता है कि वैसे तो इन मादक पदार्थों को निर्धारित तय मापदंडों के हिसाब से विभाग को देना होता है लेकिन उसके बावजूद भी इसकी तस्करी के मामले सामने आते हैं। उसकी प्रमुख वजह होती है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके भाव सरकारी भाव के मुकाबले कई गुना तक अधिक होते हैं जो तस्करों के माध्यम से मिल सकते हैं और इसी लालच में कई बार काश्तकार उलझ जाते हैं। लेकिन इन सबसे बढ़कर लक्ष्य काश्तकार का फसल का सही तरीके से पूरी करके घर सुरक्षित आना होता है और यही उसकी उपलब्धि। इसके लिए समय समय पर पूजा अर्चना भी करते हैं तो वहीं चीरा लगाने के लिए पूजा अर्चना करके किसी को जूते चप्पल तक खेत में नही ले जाने देते हैं।
- रॉयल क्रिकेट क्लब के तत्वाधान में क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ सातलखेड़ी सातलखेड़ी दशहरा मैदान स्थित क्रिकेट मैदान पर रॉयल क्रिकेट क्लब द्वारा क्रिकेट प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ। सरपंच प्रतिनिधि मुकेश कुमार गोठवाल ने पूजा अर्चना कर फीता काटकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। शुभारंभ के दौरान लक्ष्मण सिंह नयागांव, रोशन मंसूरी, बंटी यादव, बीनू यादव, नवीन यादव ,कमल महावर, दीपक मेहरा , मांगीलाल चारण आदि सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।शुभारंभ मैच मोड़क व रॉयल क्रिकेट क्लब सातलखेड़ी के बीच हुआ। मोड़क टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय किया। वही पहले बल्लेबाजी करते हुए मोड़क की टीम ने 87 रन बनाए। जवाब में रॉयल क्रिकेट क्लब सातल खेड़ी 10 रन से पराजित हो गई। मैच के हीरो मोड़क की टीम से धीरज रहे जिन्होंने चार विकेट अपने नाम किए। सरपंच प्रतिनिधि मुकेश कुमार गोठवाल ने बताया कि अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेलकूद अपने जीवन का अंग होना चाहिए ताकि हमारे शारीरिक और मानसिक क्षमता बड़े उन्होंने सभी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें खेल की और अग्रसर होना चाहिए सरपंच प्रतिनिधि ने सभी खिलाड़ियों से परिचय कर मैच का शुभारंभ किया और सभी खिलाड़ियों को बधाई दी।2
- भटवाड़ा अमझार सड़क पर बड़ा हादसा टला दिल्ली से इंदौर जा रही निजी बस रोग साइट से 8 लेने पर जाने के लिए जा रहीं तभी शनिवार सुबह 6 बजे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वें सीधे आ रहा ट्रक नयागांव निर्माणधीन टनल के पास सड़क पर हों रहें किचड़ से बस चालक का संतुलन बिगड़ गया और बस पुणा से दिल्ली जा रहें ट्रक से जा टकराई बस में 15-20 यात्री सवार थें हादसे के बाद यातीयो में चिक पुकार मच गई,सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और राहगीरों कि मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, गनीमत रही कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ घटना में चालक को हल्की-फुल्की चोटी आईं,10
- 500% टैरिफ का झटका: दोस्ती की कीमत चुकाएगा भारत?”1
- 45 सेकंड की कहानी, जो कर देगी आपको हैरान1
- राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ का ताजा अपडेट। चल रहा है बाक युद्ध और आरोपी की लड़ाई मीडिया की सीडीओ पर चढ़कर। हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में गए प्रहलाद गुंजल को कांग्रेस में तबज्जों नहीं मिल रही है। जिला कार्यकारिणी का सदस्य से लेकर प्रदेश में कोई पद नहीं दिया जा रहा है। 2 वर्ष गुजर गए हैं। अब वह अपनी पुरानी गुरु वसुंधरा राजे के इशारे पर स्पीकर ओम बिरला और उनके ओएसडी राजीव दत्ता को बदनाम करने की अंनगर्ल बयान बाजी कर रहे हैं। झूठ बोलने में माहिर प्रहलाद गुंजल जिनकी मीडिया की व्हाइट का खंडन जिनका पाटनरी में स्पीकर ओम बिरला का नाम लिया था। खंडन अमर पंजाबी ग्रुप के डायरेक्टर कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता बद्री गुर्जर कर रहे हैं। पूर्व में शहर अध्यक्ष राकेश जैन ने बहुत गंभीर आरोप लगाए उसका भी वह अभी तक जवाब नहीं दे पाए। कुल मिलाकर प्रहलाद गुंजल अब राज्यसभा में जाने के लिए फड़फड़ा रहे हैं। राज्यसभा तो बहुत दूर विधायक शांति धारीवाल 2029 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं लेने देंगे.। और वह फिर पलटू राम बनकर भाजपा की की शरण में आएंगे।1
- #TughlaqiFarman अब स्कूल परिसर से कुत्ते भगाने का काम करेंगे शिक्षक, शिक्षा को मज़ाक बनाकर रख दिया है इस सरकार ने, हैड माड़साब भी कम कोई न, एक बार में ही ऐसा इलाज किया है कि शायद ही कभी नजर आए...1
- राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ साध्य कालीन ताजा अपडेट। कांग्रेस के नेता प्रहलाद गुर्जर पर तीखा हमला बोला। भाजपा के वरिष्ठ नेता बद्री गुर्जर ने। और कहा कि कांच के घरों में रहने वाले दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। उन्होंने यह भी का कांग्रेस में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसलिए वह जबरदस्ती मीडिया को मैनेज कर अनर्गल बयान दिया करते हैं। और मीडिया की भी छोत उतार देते हैं। उनके चेले बृजेश शर्मा नीटू भाजपा के राज्य में लाखों करोड़ रुपए कमाए। कर पिछले दरवाजे से कांग्रेस में घुस गये और कमाने का समय था। वहां उन्होंने जिला अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव गुंजल से प्रस्ताव पास करवाया। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ईनकी कांग्रेस में घिसाई होने दो रगाड़ाई होने दो। उसके बाद में सदस्य बनेंगे। और नगर निगम के चुनाव में टिकट देने की सोचेंगे। क्या कोटा की जनता के लग रहे हैं। स्पीकर ओम बिरला और उनके ओएसडी राजीव दत्ता एक करोड रुपए की बजरी बेच रहे हैं। कितनी बजरी एक दिन में कहां से निकलेगी। और कहां जाएगी। थोड़ा दिमाग तो लगाते। उनके भाजपा के कार्यकाल में निष्कासित बिल्लू सरदार को निकला गया पूर्व पार्षद बलविंदर सिंह उर्फ बल्लू कितने बड़े भू माफिया हैं। जिन्होंने मां चंबल की गोद को गोद को खोद कर छलनी कर डाला था ।करोड़ों रुपए की मिट्टी वेच दी।छै छै महीने जेल की सजा काटी। वही उनके विधायक के समय फाइनेंसर था। और आज भी वही फाइनेंसर है। उसके बारे में तो कुछ कोटा की जनता सब जानती है। इसलिए कोटा की जनता ने दो बार विधायक के चुनाव मे उन्हें रिजेक्ट किया है ।कांग्रेस में टिकट नहीं मिलना तय है। क्योंकि जब तक शांति धारीवाल है। तब तक प्रहलाद गुंजल का कांग्रेसमें कोई अस्तित्व नहीं है। चुनाव के समय या उससे पूर्व भाजपा की शरण में आएंगे। और फिर लोग उन्हें कहेंगे पलटू राम कितनी बार पार्टी बदलेंगे।1
- #TragicAccident हिमाचल प्रदेश: सिरमौर जिले के हरिपुर धार क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर 400 मीटर खाई में गिरी बस: हादसे में 14 की मौत: दर्जनों घायल...1
- वाहन चेकिंग में खुला साइबर ठगी का जाल, भानपुरा पुलिस ने तीन आरोपी दबोचे 🚨 #भानपुरा #मंदसौर #साइबर_अपराध #पुलिस_सफलता #CrimeNews1