टिहरी में इंजीनियरों की हड़ताल का 11वां दिन: विकास कार्य ठप, सरकार पर बढ़ा दबाव टिहरी, 02 अप्रैल 2026। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को ग्यारहवें दिन भी जारी रही, जिससे पूरे जनपद में विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। आवश्यक सेवाओं से लेकर बड़े निर्माण कार्य तक प्रभावित होने लगे हैं, जिससे आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टिहरी शाखा के बैनर तले लो०नि०वि० निरीक्षण भवन के सामने इंजीनियरों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार और शासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। महासंघ का कहना है कि उनकी 27 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हड़ताल का असर अब जरूरी सेवाओं पर भी साफ दिखने लगा है। जल संस्थान के 17 कर्मचारी पेयजल निगम के 43 कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे, जिससे पेयजल आपूर्ति समेत कई जरूरी सेवाएं बाधित हो गई हैं। चारधाम यात्रा और निर्माण कार्यों पर असर इंजीनियरों की हड़ताल का सीधा असर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर पड़ा है— चारधाम यात्रा की तैयारियां प्रभावित हॉट मिक्स प्लांट कार्य बंद सेतु (पुल) निर्माण कार्य ठप अन्य विकास परियोजनाएं भी रुकीं नेतृत्व और भागीदारी हड़ताल की अध्यक्षता इं० एस०के० डुकलान और संचालन इं० आयुष कोठारी ने किया। इस दौरान शाखा अध्यक्ष जय प्रकाश भट्ट, सचिव सतीश भट्ट, त्रयम्बक गैरोला, मोहित रावत, सुबोध थपलियाल सहित बड़ी संख्या में इंजीनियर मौजूद रहे। 📋 ये हैं प्रमुख मांगें महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों में से प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं— वेतन विसंगति दूर करना 10, 16, 26 वर्ष पर पदोन्नत वेतनमान 5400 ग्रेड पे के साथ एसीपी लागू करना जल संस्थान व पेयजल निगम का एकीकरण पदोन्नति में समानांतर व्यवस्था पुरानी पेंशन बहाली ऊर्जा निगमों में प्रमोशन सीमा 50% करना इंजीनियरिंग ढांचे का पुनर्गठन उरेडा में वेतन विसंगति समाप्त करना ट्रांसफर एक्ट में संशोधन सरकार पर बढ़ा दबाव लगातार 11 दिन से जारी इस हड़ताल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं—खासतौर पर चारधाम यात्रा से पहले यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। महासंघ ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
टिहरी में इंजीनियरों की हड़ताल का 11वां दिन: विकास कार्य ठप, सरकार पर बढ़ा दबाव टिहरी, 02 अप्रैल 2026। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को ग्यारहवें दिन भी जारी रही, जिससे पूरे जनपद में विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है। आवश्यक सेवाओं से लेकर बड़े निर्माण कार्य तक प्रभावित होने लगे हैं, जिससे आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टिहरी शाखा के बैनर तले लो०नि०वि० निरीक्षण भवन के सामने इंजीनियरों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार और शासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। महासंघ का कहना है कि उनकी 27 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हड़ताल का असर अब जरूरी सेवाओं पर भी साफ दिखने लगा है। जल संस्थान के 17 कर्मचारी पेयजल निगम के 43 कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे, जिससे पेयजल आपूर्ति समेत कई जरूरी सेवाएं बाधित हो गई हैं। चारधाम यात्रा और निर्माण कार्यों पर असर इंजीनियरों की हड़ताल का सीधा असर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर पड़ा है— चारधाम यात्रा की तैयारियां प्रभावित हॉट मिक्स प्लांट कार्य बंद सेतु (पुल) निर्माण कार्य ठप अन्य विकास परियोजनाएं भी रुकीं नेतृत्व और भागीदारी हड़ताल की अध्यक्षता इं० एस०के० डुकलान और संचालन इं० आयुष कोठारी ने किया। इस दौरान शाखा अध्यक्ष जय प्रकाश भट्ट, सचिव सतीश भट्ट, त्रयम्बक गैरोला, मोहित रावत, सुबोध थपलियाल सहित बड़ी संख्या में इंजीनियर मौजूद रहे। 📋 ये हैं प्रमुख मांगें महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों में से प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं— वेतन विसंगति दूर करना 10, 16, 26 वर्ष पर पदोन्नत वेतनमान 5400 ग्रेड पे के साथ एसीपी लागू करना जल संस्थान व पेयजल निगम का एकीकरण पदोन्नति में समानांतर व्यवस्था पुरानी पेंशन बहाली ऊर्जा निगमों में प्रमोशन सीमा 50% करना इंजीनियरिंग ढांचे का पुनर्गठन उरेडा में वेतन विसंगति समाप्त करना ट्रांसफर एक्ट में संशोधन सरकार पर बढ़ा दबाव लगातार 11 दिन से जारी इस हड़ताल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं—खासतौर पर चारधाम यात्रा से पहले यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। महासंघ ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
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-  +10  वेरिकोज वेंस (Varicose Veins) पैरों की नसों में सूजन, फैलाव और मुड़ जाने की एक समस्या है, जिसमें नसें नीली या बैंगनी रंग की होकर त्वचा के ऊपर रस्सी की तरह उभरी हुई दिखाई देती हैं। यह तब होता है जब नसों के वाल्व कमजोर हो जाते हैं, जिससे खून वापस दिल तक जाने के बजाय नसों में जमा होने लगता है।1
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- उत्तरकाशी. गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की दुर्दशा, उसके मरम्तिकरण के लिए BRO के खिलाफ आवाज उठी। चार धाम यात्रियों को यात्रा मार्गों पर विभिन्न पुलिस बैरियर पर ना रोका जाए, बेर्रिएर हटाए जाए गंगोत्री से गोमुख ट्रैकिंग पर डेढ़ सौ से अधिक बढ़ा कर पर्यटकों के लिए खोला जाए।यात्रा के समय हिना बेर्रिएर में स्थानीय टैक्सी वालों को अनावश्यक ना रोका जाए. व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।इन सभी मांगों को लेकर जिलाधिकारी को अवगत करवाया गया कि उपरोक्त मांगे न मानें जाने पर 25 अप्रेल को चार धाम यात्रा को बंद किये जाने की मांग सुलग रही हैं. इस अवसर पर होटल एसोसिएशन अध्यक्ष शैलेंद्र मटूडा, सचिव सुभाष कुमाई, अध्यक्ष संयुक्त संरक्षण समिति अशोक सेमवाल, बस यूनियन गजेंद्र रावत,शैलेश सेमवाल,अजय पुरी,कुशाल नेगी, अनिल नौटियाल,रमेश सेमवाल, कुशाल नेगी, सुरेश राणा, धीरज सेमवाल, कलम सिंह राणा, बलवंत राणा, टैक्सी यूनिन अध्यक्ष आनीष नेगी, चंद्रवीर रावत, सहित समस्त पर्यंटन से जुड़े व्यक्ति शामिल रहे।4
- चतुर्विंशतिः हनुमान जयंती आइए आपको बताते है कि हनुमान जन्मोत्सव क्यों नहीं बोले सनातन धर्म में जयंती शब्द का विस्तार से वर्णन किया है किन्तु आजकल वाहट्सप ज्ञानी अध्यात्म एवं संस्कृत का ज्ञान नहीं होने के कारण अधूरा ज्ञान परोसकर श्री हनुमान जयन्ती नहीं जन्मोत्सव होता है का प्रचार किया जाता है। जबकि, श्री हनुमान जी के भक्तो को सही जानकारी प्राप्त हो, जिसके सम्बन्ध में स्कन्दपुराण में जयंती का अर्थ वर्णन मिलता है। जिसका सार है कि जो देवता-भगवान मानव जीवन को जय और पुण्य प्रदान करे उसे जयन्ती कहते है। इस सम्बन्ध में स्कन्दमहापुराण, निध्यादित्य में उल्लेख है। श्री हनुमान जी चिरंजीवी है ओर आज भी हमारे बीच विराजमान है। जो हमारे जीवन को जय और पुण्य निरन्तर प्रदान कर रहे हैं। हनुमान चालीसा में इस बात का प्रमाण निम्न चौपाई से मिलता है। अन्तकाल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई । और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सूख करही ।। संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमरे हनुमत बलबीरा । अब बताईये जो महाप्रभु श्री हनुमान जी के सानिध्य से आपका अन्तकाल सुधारेंगे वह हनुमत लाल जी की कृपा से सर्व सुख प्राप्त होकर संकटों का निवारण होगा। वह हमारे जीवन में जय और पुण्य प्रदान कर रहे है तो आइयें उनकी जयन्ती को हर्षोउल्लास के साथ मनाते हुए अपने चिरपरिचित एंव आने वाली पीढी को सही मार्गदर्शन देकर अपनी सहभागीता निभाए। हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई श्री सिद्ध हनुमान मंदिर श्री बालाजी धाम झाझरा4
- 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, लेकिन मार्ग की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है चार धाम यात्रा के लिए अब कुछ ही दिनों का समय शेष है। 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हर साल लाखों श्रद्धालु इन धामों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं पिछले वर्ष धराली क्षेत्र में आई आपदा के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग को भारी नुकसान पहुंचा था। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह से वॉश आउट हो गई थी। हालांकि, बीआरओ ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हुए मार्ग को किसी तरह बहाल किया और छोटे वाहनों के लिए अस्थायी मार्ग तैयार किया गया लेकिन इस वर्ष भी यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। नेहरू मार्ग पर कई स्थान ऐसे हैं, जहां अभी भी कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि बीआरओ द्वारा कार्य में धीमी गति बरती जा रही है, जबकि यात्रा शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है। इसी को लेकर जिलाधिकारी के साथ पांच मंदिर समिति, होटल एसोसिएशन और टैक्सी यूनियन ने बैठक की। बैठक के दौरान सभी ने मार्ग की खराब स्थिति पर चिंता जताई और जल्द से जल्द कार्य पूरा कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रशासन और बीआरओ को जल्द से जल्द कार्य पूरा करना चाहिए।” अब देखना होगा कि प्रशासन और बीआरओ कितनी तेजी से काम पूरा कर पाते हैं, ताकि चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा मिल सके।3
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