लहरों से लड़कर भी मुस्कुराने वाले तुम्हारे जज़्बे को सलाम। एक ख़त, जलमग्न बिहार के नाम। प्रिय बिहार, तुम्हारा यह रूप हर साल देखता हूँ। जब सावन और भादो के बादल तुम्हारी छाती पर उमड़ते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे नदियाँ अपना कोई पुराना हिसाब माँगने चली आई हों। कोसी, गंडक, कमला और बागमती—ये नदियाँ तुम्हारी धमनियों में बहने वाला रक्त हैं। लेकिन जब यही नदियाँ अपना आपा खो देती हैं, तो तुम्हारे हरे-भरे खेत, मिट्टी के कच्चे घर और अनगिनत सपने उस उफनते पानी में विलीन हो जाते हैं। हर साल की तरह, इस बार भी मैंने तुम्हारी आँखों में वही विवशता और वही पीड़ा देखी है। तुम्हारी कहानी में तबाही का यह अध्याय बार-बार लौटकर आता है। “जहाँ जल ही जीवन है, वहाँ जल ही मृत्यु का तांडव क्यों बन जाता है?” लोग अक्सर पूछते हैं कि इतनी त्रासदियों के बाद भी तुम टूट क्यों नहीं जाते? शायद वे तुम्हारी उस जिद्दी और उर्वर मिट्टी को नहीं जानते, जिसने हर महाप्रलय के बाद फिर से बीज अंकुरित करना सीखा है। वे उन किसानों के हौसले को नहीं समझते, जो बाढ़ का पानी उतरते ही भीगी और दलदली जमीन पर फिर से हल थामकर खड़े हो जाते हैं। तुम्हारी यह अदम्य जीवटता किसी महाकाव्य के अजेय नायक से कम नहीं है। मैं दूर बैठा तुम्हारी इस विडंबना को देखता हूँ और बस यही सोचता हूँ—काश! कोई ऐसी मजबूत और स्थायी व्यवस्था होती, जो सिर्फ नदियों के वेग को ही नहीं, बल्कि तुम्हारे इस सदियों पुराने दर्द को भी हमेशा के लिए रोक पाती। तुम्हारी गोद में सिमटे हुए 15 जिलों के लगभग 48 लाख लोगों को मेरा हृदय से प्रणाम, जो इस जल-प्रलय के बीच भी अपने छप्पर पर बैठकर उम्मीद का एक टिमटिमाता हुआ दीया जलाए हुए हैं। लहरों से लड़कर भी मुस्कुराने वाले तुम्हारे जज़्बे को सलाम। तुम्हारे दर्द में शामिल, 15 जिलों के 48 लाख लोगों के साथ, तुम्हारा एक शुभचिंतक।
लहरों से लड़कर भी मुस्कुराने वाले तुम्हारे जज़्बे को सलाम। एक ख़त, जलमग्न बिहार के नाम। प्रिय बिहार, तुम्हारा यह रूप हर साल देखता हूँ। जब सावन और भादो के बादल तुम्हारी छाती पर उमड़ते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे नदियाँ अपना कोई पुराना हिसाब माँगने चली आई हों। कोसी, गंडक, कमला और बागमती—ये नदियाँ तुम्हारी धमनियों में बहने वाला रक्त हैं। लेकिन जब यही नदियाँ अपना आपा खो देती हैं, तो तुम्हारे हरे-भरे खेत, मिट्टी के कच्चे घर और अनगिनत सपने उस उफनते पानी में विलीन हो जाते हैं। हर साल की तरह, इस बार भी मैंने तुम्हारी आँखों में वही विवशता और वही पीड़ा देखी है। तुम्हारी कहानी में तबाही का यह अध्याय बार-बार लौटकर आता है। “जहाँ जल ही जीवन है, वहाँ जल ही मृत्यु का तांडव क्यों बन जाता है?” लोग अक्सर पूछते हैं कि इतनी त्रासदियों के बाद भी तुम टूट क्यों नहीं जाते? शायद वे तुम्हारी उस जिद्दी और उर्वर मिट्टी को नहीं जानते, जिसने हर महाप्रलय के बाद फिर से बीज अंकुरित करना सीखा है। वे उन किसानों के हौसले को नहीं समझते, जो बाढ़ का पानी उतरते ही भीगी और दलदली जमीन पर फिर से हल थामकर खड़े हो जाते हैं। तुम्हारी यह अदम्य जीवटता किसी महाकाव्य के अजेय नायक से कम नहीं है। मैं दूर बैठा तुम्हारी इस विडंबना को देखता हूँ और बस यही सोचता हूँ—काश! कोई ऐसी मजबूत और स्थायी व्यवस्था होती, जो सिर्फ नदियों के वेग को ही नहीं, बल्कि तुम्हारे इस सदियों पुराने दर्द को भी हमेशा के लिए रोक पाती। तुम्हारी गोद में सिमटे हुए 15 जिलों के लगभग 48 लाख लोगों को मेरा हृदय से प्रणाम, जो इस जल-प्रलय के बीच भी अपने छप्पर पर बैठकर उम्मीद का एक टिमटिमाता हुआ दीया जलाए हुए हैं। लहरों से लड़कर भी मुस्कुराने वाले तुम्हारे जज़्बे को सलाम। तुम्हारे दर्द में शामिल, 15 जिलों के 48 लाख लोगों के साथ, तुम्हारा एक शुभचिंतक।
- 🚨 500 साल पुराने काली मंदिर को भव्य बनाने की पहल, बैठक में जुटे मोहल्लावासी आरा। भलुहीपुर स्थित करीब 500 वर्ष पुराने काली मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पवना मुखिया मंटू सिंह समेत राजू, डीश, आंटो कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। इस दौरान मंटू सिंह ने कहा कि मंदिर हो या मस्जिद, सभी धार्मिक स्थलों के विकास में लोगों को बढ़-चढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की भावना के साथ मंदिर के निर्माण में योगदान देने की अपील की। बैठक में मंदिर को किस तरह से भव्य और आकर्षक स्वरूप दिया जाए, इसको लेकर विस्तार से चर्चा की गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह करीब 500 वर्ष पुराना मंदिर क्षेत्र की आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है। 🙏 भोजपुरवासियों से अपील—आपके सहयोग के बिना काली मंदिर का भव्य निर्माण संभव नहीं है। आइए, अपनी आस्था और विरासत को संवारने में सहयोग करें। 📍 भलुहीपुर | भोजपुर #Bhaluhipur #KaliMandir #Bhojpur #Ara #AraNews #BhojpurNews #KaliMandirVikas #ARNEWS241
- विरेन्द्र मिश्रा प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी शहीद भवन आरा *मां आरण्य देवी मंदिर, आरा* आरा शहर की अधिष्ठात्री देवी हैं *मां आरण्य देवी*। इसी देवी के नाम पर शहर का नाम *आरा* पड़ा है। *1. मंदिर कहां है?* - आरा रेलवे स्टेशन से उत्तर दिशा में, शीश महल चौक से 200 मीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है - संवत् 2005 में स्थापित, संगमरमर का मंदिर, मुख्य द्वार पूरब की तरफ - अभी पुराने भवन को तोड़कर नया बहुमंजिला भवन बनाया जा रहा है *2. मूर्तियां* मंदिर में दो काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां हैं: - *बड़ी मूर्ति* - मां सरस्वती का रूप - *छोटी मूर्ति* - मां महालक्ष्मी का रूप इसीलिए मान्यता है कि यहां पूजा करने से घर में विद्या और धन दोनों आते हैं। 1953 में यहां राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की मूर्तियां भी स्थापित की गईं। *3. इतिहास - 3 युगों से जुड़ा* *त्रेता युग - रामायण काल:* कहा जाता है जब भगवान राम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र बक्सर से जनकपुर धनुष यज्ञ के लिए जा रहे थे, तो उन्होंने यहां गंगा स्नान कर आरण्य देवी की पूजा की थी। यहां पहले घना वन था, इसलिए नाम आरण्य देवी पड़ा। *द्वापर युग - महाभारत काल:* - पांडव वनवास के दौरान आरा में ठहरे थे। उन्होंने आदिशक्ति की पूजा की - रात में मां ने युधिष्ठिर को सपने में कहा कि मेरी प्रतिमा स्थापित करो। तब युधिष्ठिर ने मूर्ति स्थापित की - इस जगह राजा मयूरध्वज की राजधानी रतनपुरा थी। राजा बहुत बड़े दानवीर थे। भगवान कृष्ण ने अर्जुन के साथ आकर उनकी परीक्षा ली। राजा से अपने शेर के भोजन के लिए पुत्र के शरीर का मांस मांगा। राजा-रानी अपने पुत्र को आरे से चीरने लगे तो देवी प्रकट हुईं। उसी आरे के नाम पर शहर का नाम आरा पड़ा *4. मान्यता* - नवरात्र में यहां बहुत बड़ी भीड़ आती है, मन्नत पूरी होने तक भक्त घी के बड़े दीये जलाते हैं - गंगा और सोन नदी का संगम आरा से 10 KM पूरब कोइलवर के बिंद्रा गांव के पास है, जिसे पुराणों में शोध संगम कहा गया है - कुछ पुजारी कहते हैं कि माता सती का एक अंग यहां भी गिरा था आपको आरा जाने का रास्ता या नवरात्रि की पूजा का समय चाहिए?1
- आरा मे सजा गणपति बप्पा का दरबार, 25 साल से शिवसेना रख रहा है प्रतिमा आरा से संजय श्रीवास्तव स्लग।आरा मे सजा गणपति बप्पा का दरबार, 25 साल से शिवसेना रख रहा है प्रतिमा आरा के रमना मैदान में गणपति बप्पा की विधि-विधान से हुई स्थापना, दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु एंकर।आरा की पावन धरती पर सोमवार को गणपति बप्पा का भव्य दरबार सज गया। शिवसेना की भोजपुर इकाई द्वारा आयोजित गणेश चतुर्थी महोत्सव की शुरुआत रमना मैदान स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणपति बप्पा की विधि-विधान से स्थापना एवं पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस वर्ष यह आयोजन अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पूजा-अर्चना के दौरान "गणपति बप्पा मोरया" के जयघोष से रमना मैदान का माहौल भक्तिमय हो गया।1
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- सम्मान क्या होता है इस तस्वीर से पता चलता है नेता लोकसभा प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी ने साबित कर दिया।1
- भारत में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक विकास के दावों के बीच का अंतर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। भारत में बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक विकास के दावों के बीच का अंतर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को दैनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ना, विशेष रूप से ग्रामीण या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों जैसे कि बिहार में, विकास के दावों और धरातल की सच्चाई के बीच के अंतर को दर्शाता है।1
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- 🙏 आरा में सजा गणपति बप्पा का भव्य दरबार, 25 वर्षों की आस्था का उत्सव! 🚩 🎉 “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से भक्तिमय हुआ रमना मैदान 📍 आरा, भोजपुर रमना मैदान स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणपति बप्पा की विधि-विधान से स्थापना के साथ गणेश चतुर्थी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की भोजपुर इकाई द्वारा आयोजित यह महोत्सव 25वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। महिलाओं, बच्चों और युवाओं समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचे और सुख-समृद्धि की कामना की। 🙏 📅 15 सितंबर को विशेष पूजन और 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे भव्य विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी। ❤️ आप भी गणपति बप्पा के दर्शन करें और आशीर्वाद लें। 📲 खबर पसंद आए तो लाइक, शेयर और कमेंट जरूर करें। #गणपति_बप्पा_मोरया #GaneshChaturthi #आरा #भोजपुर #गणेश_चतुर्थी #रमना_मैदान #जनता_की_आवाज_आरा_न्यूज़ #PankajSingh1