प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, आध्यात्मिक तीर्थ स्थल एवं पर्यटन केंद्र पवित्र नगरी अमरकंटक में ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी (भीमसैनी ग्यारस) और स्वाती नक्षत्र के पावन संयोग पर गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इन श्रद्धालुओं ने स्नान, ध्यान, पूजन-अर्चन एवं दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। सुबह से ही श्रद्धालुओं का नर्मदा तटों पर आना शुरू हो गया था। श्रद्धालु अपने परिवारजनों एवं स्वजनों के साथ मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर जप, तप, साधना और पूजा-अर्चना में लगे रहे। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम स्थल स्थित पवित्र कुंड में आचमन एवं स्नान कर नर्मदा मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने मां नर्मदा के समक्ष अपने परिवार की कुशलता, सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, यश एवं उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की। अनेक श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती संपन्न की। निर्जला एकादशी के अवसर पर पुष्पराजगढ़ अंचल, अनूपपुर, कोतमा, बुढार, धनपुरी, शहडोल, गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, लोरमी एवं मुंगेली सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे। इनके अतिरिक्त, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ अर्जित करने के लिए आए। नर्मदा नदी के रामघाट, कोटितीर्थ कुंड, पुष्कर बांध तथा आरंडी संगम सहित विभिन्न स्नान स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं द्वारा स्नान, ध्यान एवं पूजन-अर्चन का क्रम जारी रहा। हालांकि, गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण किसानों का खेती-किसानी के कार्यों, खासकर जुताई एवं बुवाई में व्यस्त होना माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत एवं स्नान वर्ष की सभी एकादशियों के समान ही पुण्यफल प्रदान करने वाला माना जाता है। इसी कारण इस पावन अवसर पर अमरकंटक में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिली।
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, आध्यात्मिक तीर्थ स्थल एवं पर्यटन केंद्र पवित्र नगरी अमरकंटक में ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी (भीमसैनी ग्यारस) और स्वाती नक्षत्र के पावन संयोग पर गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इन श्रद्धालुओं ने स्नान, ध्यान, पूजन-अर्चन एवं दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। सुबह से ही श्रद्धालुओं का नर्मदा तटों पर आना शुरू हो गया था। श्रद्धालु अपने परिवारजनों एवं स्वजनों के साथ मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर जप, तप, साधना और पूजा-अर्चना में लगे रहे। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम स्थल स्थित पवित्र कुंड में आचमन एवं स्नान कर नर्मदा मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने मां नर्मदा के समक्ष अपने परिवार की कुशलता, सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, यश एवं उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की। अनेक श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विधिवत पूजन-अर्चन एवं आरती संपन्न की। निर्जला एकादशी के अवसर पर पुष्पराजगढ़ अंचल, अनूपपुर, कोतमा, बुढार, धनपुरी, शहडोल, गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, लोरमी एवं मुंगेली सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे। इनके अतिरिक्त, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ अर्जित करने के लिए आए। नर्मदा नदी के रामघाट, कोटितीर्थ कुंड, पुष्कर बांध तथा आरंडी संगम सहित विभिन्न स्नान स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं द्वारा स्नान, ध्यान एवं पूजन-अर्चन का क्रम जारी रहा। हालांकि, गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण किसानों का खेती-किसानी के कार्यों, खासकर जुताई एवं बुवाई में व्यस्त होना माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत एवं स्नान वर्ष की सभी एकादशियों के समान ही पुण्यफल प्रदान करने वाला माना जाता है। इसी कारण इस पावन अवसर पर अमरकंटक में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिली।
- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को सुबह लगभग 11:30 बजे पवित्र नगरी अमरकंटक पहुँचकर मां नर्मदा उद्गम मंदिर में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने बाबा अमरकंठ महादेव का जलाभिषेक, पूजन-अर्चन एवं आरती कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की। पूर्व मुख्यमंत्री श्री बघेल अपनी पत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल, परिजनों और मित्र प्रदीप शर्मा के साथ मां नर्मदा उद्गम कुंड पहुँचे, जहाँ उन्होंने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन कर मां नर्मदा के दरबार में मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। नर्मदा मंदिर के पुजारी पंडित उमेश द्विवेदी (बंटी महाराज) ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका संपूर्ण पूजन-अर्चन संपन्न कराया। पूजन के बाद उन्होंने बाबा अमरकंठ महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक किया और मंदिर परिसर की परिक्रमा की, साथ ही 11 रुद्र महादेव मंदिर में भी दर्शन कर शीश नवाया। परिक्रमा के दौरान श्री बघेल ने अपने परिवार के साथ मंदिर परिसर में स्मृति स्वरूप छायाचित्र भी खिंचवाए। नर्मदा मंदिर के पुजारियों ने उन्हें मां नर्मदा की पावन चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया और प्रसाद भेंट करते हुए उनके यशस्वी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन तथा राजनीतिक उन्नति की मंगलकामना की।1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- कोरिया जिले के रामरामगढ़ में एक स्कूल की छात्रा ने कलेक्टर से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा के संबंध में सवाल पूछा।1
- उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में मातम, सब्र और कुर्बानी की याद दिलाने वाला मोहर्रम का पर्व पूरे अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। नगर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित इमामबाड़ा से पारंपरिक ताज़िया जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। "या हुसैन... या हुसैन" की सदाओं और गमगीन माहौल के बीच यह जुलूस नगर की विभिन्न गलियों और प्रमुख मार्गों से होकर वार्ड क्रमांक 2 स्थित कर्बला पहुंचा, जहाँ धार्मिक परंपरा के अनुसार ताज़िया को ठंडा किया गया। इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम, हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है, जो गम और मातम का महीना माना जाता है। इस अवसर पर लोगों ने खामोशी, सब्र और इंसानियत का पैगाम दिया। जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने नौहाख़्वानी और मातम के जरिए कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की, जबकि कई स्थानों पर लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों के लिए शर्बत और पानी की सबील भी लगाई, जिससे इंसानियत और भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। ताज़िया के कर्बला पहुंचने पर, वहाँ पहले से मौजूद लोगों ने अदब और एहतराम के साथ अंतिम रस्में अदा कीं और मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। इस आयोजन में मुस्लिम समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों की भी उपस्थिति देखी गई, जो नगर की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द का प्रतीक बना। प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे, जिससे पूरा जुलूस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। पाली में वर्षों से मोहर्रम का जुलूस इसी परंपरा के साथ निकाला जाता रहा है, और यह पर्व एक बार फिर यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि हज़रत इमाम हुसैन की शहादत केवल एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हक़, सच्चाई और इंसाफ की लड़ाई का प्रतीक है।2
- चार जंगली प्रवासी हाथियों का एक समूह 37 दिन बाद छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा को फिर से पार कर अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र में प्रवेश कर गया है। ये हाथी 24 जून की रात 8:50 बजे जैतहरी क्षेत्र के चोलना, बचहाटोला, छातापटपर और पड़रिया गांवों से होते हुए गूजरनाला पार कर जिले में दाखिल हुए। गुरुवार को दिन भर उन्होंने धनगवां बीट के जंगल में विश्राम किया, और देर शाम जंगल से निकलकर जैतहरी नगर के प्रमुख मार्गों, तालाब, सम्राट होटल, बस स्टैंड और रेलवे लाइन को पार किया। शुक्रवार की सुबह तक, वे तिपान नदी को पार कर गोबरी बीट के झुरहीतलैया जंगल में पहुँचकर दिन भर आराम कर रहे थे। अपने विचरण के दौरान, इन चारों प्रवासी हाथियों ने तीन दिनों के भीतर दो घरों में तोड़फोड़ की है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों के खेतों और बाड़ियों में लगी विभिन्न प्रकार की फसलें, सब्जियां, आम और कटहल जैसे पेड़ों को तोड़कर फलों को खाकर काफी नुकसान पहुँचाया है। वन विभाग, पुलिस विभाग और ग्रामीणों ने मिलकर हाथियों के विचरण पर लगातार निगरानी रखी, जिसमें जिला मुख्यालय अनूपपुर के वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल का भी सहयोग रहा। इस निरंतर सतर्कता और ग्रामीण जनों के सहयोग के कारण कोई भी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हो सकी। हालांकि, 25 जून की रात 11:45 से 12:00 बजे के बीच, जब हाथियों का यह समूह जैतहरी नगर के मुख्य मार्ग पर था, तब एक उपद्रवी युवक को लंबे डंडे से बार-बार हाथियों पर हमला करते और उन्हें मारने की कोशिश करते देखा गया। मूल पाठ में इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की गई है कि वन विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा इस उपद्रवी युवक की पहचान कर उसके विरुद्ध वन्यजीव के साथ मारपीट करने पर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।1
- उमरिया जिले के पनपथा बफर क्षेत्र की पलझा बीट में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक 5 वर्षीय बाघ के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद, आक्रोशित ग्रामीण बाघ को तत्काल क्षेत्र से हटाने की मांग पर अड़ गए। वन विभाग ने ग्रामीणों की मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 6 घंटे के भीतर बाघ का सफल रेस्क्यू कर लिया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को 4 विभागीय हाथियों की मदद से अंजाम दिया गया, जहाँ वन अमले ने प्रशिक्षित हाथियों की सहायता से बाघ को ट्रैक किया, उसे सुरक्षित पकड़ा और फिर बहेरहा इनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए बाघ की गतिविधियों और व्यवहार की लगातार निगरानी की जाएगी। इस सफल कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती को सामने लाती है।2