बेसिक शिक्षा विभाग ने '2026-27 तक कक्षा-3 का हर बच्चा निपुण' के संकल्प को साकार करने के लिए प्रशिक्षण श्रृंखला को और मजबूत कर दिया है। इसी क्रम में, निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) पर केंद्रित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण का दूसरा चरण सोमवार को लखनऊ के इंदिरानगर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में आरंभ हुआ। प्रशिक्षण के पहले दिन, अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए राज्य संदर्भ समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटरों के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने इस मिशन को प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और लक्ष्य प्राप्ति में मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को निर्णायक बताते हुए उन्हें मिशन का 'सारथी' कहा। उन्होंने इस प्रशिक्षण को औपचारिकता न मानकर मिशन मोड में जमीन पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दूसरे चरण के प्रशिक्षण में प्रदेश के 20 जनपदों से प्रत्येक से दो एसआरजी सदस्य और दो डायट मेंटर भाग ले रहे हैं। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे जिला स्तर पर शिक्षकों और ब्लॉक स्तर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के माध्यम से हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे निपुण भारत मिशन की अवधारणाएं, नवीन शिक्षण पद्धतियां और अधिगम सुधार की रणनीतियां प्रदेश के अंतिम विद्यालय और अंतिम कक्षा-कक्ष तक पहुंच सकें। इस अवसर पर समग्र शिक्षा के वरिष्ठ विशेषज्ञ आनंद पांडेय भी मौजूद रहे। पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण में आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, कैच एप आधारित शिक्षण प्रक्रिया, टेन प्वाइंट ऑफ टीचिंग, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री एवं टीएलएम के उपयोग, प्रभावी कक्षा मूल्यांकन तथा स्कूल व शिक्षकों की प्रेरक सक्सेज स्टोरी जैसे नवाचारी मॉड्यूल पर गहन सत्र आयोजित हो रहे हैं। दीक्षा, निपुण टीचर ऐप और रीडिंग कैंपेन जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक बनाया गया है, जिसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण से प्राप्त समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों और विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में गुणात्मक सुधार हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ निपुण भारत मिशन को प्रदेश में मिशन मोड में लागू किया जा रहा है, ताकि बुनियादी शिक्षा की एक मजबूत नींव तैयार हो सके।
बेसिक शिक्षा विभाग ने '2026-27 तक कक्षा-3 का हर बच्चा निपुण' के संकल्प को साकार करने के लिए प्रशिक्षण श्रृंखला को और मजबूत कर दिया है। इसी क्रम में, निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) पर केंद्रित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण का दूसरा चरण सोमवार को लखनऊ के इंदिरानगर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में आरंभ हुआ। प्रशिक्षण के पहले दिन, अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए राज्य संदर्भ समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटरों के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने इस मिशन को प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और लक्ष्य प्राप्ति में मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को निर्णायक बताते हुए उन्हें मिशन का 'सारथी' कहा। उन्होंने इस प्रशिक्षण को औपचारिकता न मानकर मिशन मोड में जमीन पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दूसरे चरण के प्रशिक्षण में प्रदेश के 20 जनपदों से प्रत्येक से दो एसआरजी सदस्य और दो डायट मेंटर भाग ले रहे हैं। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे जिला स्तर पर शिक्षकों और ब्लॉक स्तर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के माध्यम से हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे निपुण भारत मिशन की अवधारणाएं, नवीन शिक्षण पद्धतियां और अधिगम सुधार की रणनीतियां प्रदेश के अंतिम विद्यालय और अंतिम कक्षा-कक्ष तक पहुंच सकें। इस अवसर पर समग्र शिक्षा के वरिष्ठ विशेषज्ञ आनंद पांडेय भी मौजूद रहे। पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण में आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, कैच एप आधारित शिक्षण प्रक्रिया, टेन प्वाइंट ऑफ टीचिंग, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री एवं टीएलएम के उपयोग, प्रभावी कक्षा मूल्यांकन तथा स्कूल व शिक्षकों की प्रेरक सक्सेज स्टोरी जैसे नवाचारी मॉड्यूल पर गहन सत्र आयोजित हो रहे हैं। दीक्षा, निपुण टीचर ऐप और रीडिंग कैंपेन जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक बनाया गया है, जिसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण से प्राप्त समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों और विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में गुणात्मक सुधार हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ निपुण भारत मिशन को प्रदेश में मिशन मोड में लागू किया जा रहा है, ताकि बुनियादी शिक्षा की एक मजबूत नींव तैयार हो सके।
- रायबरेली के लालगंज कोतवाली क्षेत्र के टिकरान गांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक कलयुगी बेटे ने अपने ही पिता की लाठी-डंडों से बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बेटा मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है और फरार आरोपी की तलाश तेज़ी से की जा रही है।1
- 22 जून को रात 10 बजे, '10 न्यूज़ नेशन' चैनल पर दिनभर की 10 खबरें प्रसारित की जाएँगी।1
- कौशाम्बी जिला मुख्यालय के समदा में न्यायालय में विचाराधीन एक भूमि पर दबंग द्वारा अवैध कब्जा कर निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि इस मामले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी कौशाम्बी से की गई है, लेकिन जिला प्रशासन ने इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की है। शिकायतकर्ता शमशाद खान के मुताबिक, उनके पिता ने समदा गाँव में आराजी संख्या 21 की भूमि खरीदी थी। बाद में इस भूमि को राज्य सरकार ने ले लिया, और इस मामले में उनका राज्य सरकार के साथ मुकदमा न्यायालय में चल रहा है। शमशाद खान ने बताया कि वर्ष 2016 में कोर्ट ऑफ रेवेन्यू प्रयागराज ने आदेश दिया था कि यह भूमि किसी को भी आवंटित न की जाए। इसके बावजूद, जगदीश प्रसाद शिवहरे नामक व्यक्ति कथित तौर पर इसी आराजी संख्या 21 की जमीन पर जबरन अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कर रहा है, जबकि उसकी अपनी आराजी संख्या 19 और 20 है। शमशाद खान का आरोप है कि न्यायालय में वाद के दौरान हो रहे इस अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत जिलाधिकारी कौशाम्बी से करने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है और जिला प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है।3
- कौशाम्बी के महेवाघाट थाना क्षेत्र में सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एंबुलेंस और एक कार की आमने-सामने की भीषण टक्कर हो गई। यह हादसा सरसवां पीएचसी के पास हुआ, जहां टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए। इस दुर्घटना में कार सवार एक महिला और उसके छह माह के बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पति और पुत्री गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, प्रतापगढ़ जनपद के रहने वाले फैजल अपनी पत्नी सयामा फारूखी, छह माह के पुत्र अब्बास और पुत्री मनाल फारूखी के साथ कार से जा रहे थे। इसी दौरान राजापुर की ओर से आ रही एक एंबुलेंस से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची महेवाघाट पुलिस ने सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। उपचार के दौरान सयामा फारूखी और छह माह के मासूम अब्बास की मौत हो गई, जबकि फैजल और उनकी पुत्री मनाल फारूखी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। हादसे के बाद पुलिस ने दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर इस दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार को माना जा रहा है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।4
- कौशांबी जिले के सिराथू ब्लॉक के ग्राम कैमा रामपुर धमावा गौराहार में समर्थ किसान पार्टी (सकिपा) द्वारा सोमवार को एक जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसके तहत पार्टी नेता अजय सोनी की अध्यक्षता में गौराहार में एक बैठक हुई। इस बैठक में ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कों की बदहाली और उनसे हो रही दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। लोगों ने बताया कि जिले के कई मार्गों, विशेषकर सिराथू धाता मार्ग से दिन-रात सैकड़ों की तादाद में बालू के ओवरलोड वाहन गुजरते हैं, जिससे सड़कें लगातार खराब और जर्जर हो रही हैं। अजय सोनी ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जिले भर में रोजाना सैकड़ों ओवरलोड वाहन गुजरते हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से ग्राम कैमा और धमांवा के पास की सड़कों का जिक्र किया, जो ओवरलोड वाहनों की आवाजाही के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। इन खराब सड़कों के चलते लोग लगातार दुर्घटनाओं का शिकार होकर घायल हो रहे हैं। सोनी ने सरकारी स्तर पर ओवरलोड वाहनों की रोकथाम के लिए किसी भी तरह की व्यवस्था न होने पर भी सवाल उठाया, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। बैठक के माध्यम से सकिपा नेताओं ने कौशांबी जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांग है कि जिले भर में रोजाना अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों को चिह्नित किया जाए और उन पर समुचित कार्यवाही की जाए। सकिपा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो समर्थ किसान पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। इस बैठक में अशोक सोनी, भारत सिंह, लाल बहादुर यादव, जुम्मन अली और नरेंद्र मिश्र सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।2
- कौशांबी के महेवाघाट क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि खंड संख्या 16/4 से 16/6 तक का खनन पट्टा अनामिका करवरिया के नाम पर होने के बावजूद, निर्धारित क्षेत्र से बाहर 16/20-22 तक पोकलेन जैसी भारी मशीनों से धड़ल्ले से खनन कराया जा रहा है। ये गतिविधियां खुलेआम जारी हैं और कई वीडियो भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और टास्क फोर्स की चुप्पी चौंकाने वाली है। इलाके के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की है। शिकायतकर्ता राजेश, अश्वनी कुमार पांडेय और आशुतोष कुमार के अनुसार, मौरंग खनन के इस पूरे मामले में करवरिया बंधुओं का इतना दबदबा है कि अधिकारी भी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। हालात यह हैं कि दिन-रात एनजीटी और खनन नियमों को दरकिनार करते हुए वैध सीमा से बाहर खनन जारी है, पर जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रशासनिक नाकामी और दबाव की स्थिति साफ दिखती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश में खनन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के पास है, फिर भी जिले के अधिकारी मौके पर जाकर छापेमारी या कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध खनन चल रहा है। इस अवैध खनन का असर केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। लगातार हो रही खुदाई से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अब जब यह मामला मीडिया में उजागर हो चुका है, तो सबकी नजर शासन-प्रशासन पर टिकी है कि आखिर कब तक इस अवैध खनन पर रोक लगती है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाती है।2
- रायबरेली के ऊंचाहार क्षेत्र में बंदरों के आतंक की एक घटना सामने आई है, जहाँ सोमवार को मकदूमपुर गाँव में मुमताज पुत्र आतिफ नूर पर चार-पांच बंदरों ने हमला कर उसे काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब मुमताज अपने खेत में खेलने गया था। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों ने घायल मुमताज को तत्काल ऊंचाहार सीएचसी पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों द्वारा उसका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों ने पुष्टि की कि बंदर के काटने से घायल हुए बच्चे को उपचार के लिए लाया गया है और उसका इलाज जारी है। पूरे ऊंचाहार क्षेत्र के गाँवों में बंदरों का आतंक लगातार बना हुआ है।1