कामयाबी के साथ बढ़ते रिश्ते: अपनत्व या अवसरवाद की परतें खोलती हकीकत प्रतापगढ़। समाज में सफलता का अर्थ अब केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार और रिश्तों की वास्तविकता को उजागर करने वाला आईना बन चुकी है। जैसे ही कोई व्यक्ति संघर्षों को पार कर सफलता की ऊंचाइयों को छूता है, उसके आसपास का माहौल तेजी से बदलने लगता है। जो लोग कभी दूरियां बनाए रखते थे, वही अचानक नजदीकियां बढ़ाने लगते हैं। कामयाबी के साथ बधाइयों का तांता लगना एक सामान्य सामाजिक दृश्य बन चुका है। फोन कॉल, संदेश, सोशल मीडिया पोस्ट और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुट जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यक्ति की सफलता ने उसके चारों ओर एक नया सामाजिक घेरा तैयार कर दिया हो, जिसमें पुराने और नए सभी रिश्तेदार खुद को शामिल करने की होड़ में लगे हों। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष कहीं अधिक गंभीर और विचारणीय है। यही वे लोग होते हैं, जो कभी उस व्यक्ति के संघर्ष के समय उसकी उपेक्षा करते थे, उसकी मेहनत को नजरअंदाज करते थे, या फिर तिरछी नजरों से देखते थे। उस समय न तो अपनत्व दिखाई देता था और न ही समर्थन। परंतु जैसे ही सफलता मिली, वही लोग प्रशंसा के पुल बांधने और नजदीकी का दावा करने में पीछे नहीं रहते। यह प्रवृत्ति समाज के अवसरवादी चरित्र को उजागर करती है। व्यक्ति की पहचान उसके मूल्यों, संघर्ष और व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धियों और हैसियत से तय की जाने लगती है। जाति, वर्ग, सामाजिक दूरी और पुराने मतभेद—सभी कुछ सफलता के सामने गौण हो जाते हैं। यह बदलाव एक ओर जहां सामाजिक स्वीकृति का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या यह अपनत्व वास्तविक है या केवल स्वार्थ से प्रेरित। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रिश्ते, जो केवल सफलता के इर्द-गिर्द बनते हैं, वे लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होते। ये संबंध परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं और इनमें स्थायित्व की कमी होती है। ऐसे लोग व्यक्ति के संघर्ष के साथी नहीं होते, बल्कि उसकी उपलब्धियों के हिस्सेदार बनने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि इन्हें सामाजिक रूप से “अवसरवादी रिश्ते” कहा जाता है। इसके सामाजिक प्रभाव भी कम चिंताजनक नहीं हैं। जब समाज में सफलता को ही रिश्तों का आधार बना दिया जाता है, तो संघर्षरत व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है। लोग केवल सफल लोगों के साथ जुड़ना चाहते हैं, जबकि असफल या संघर्ष कर रहे व्यक्तियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे समाज में असंतुलन और असमानता की भावना को बढ़ावा मिलता है। ऐसे परिदृश्य में सबसे बड़ी चुनौती उस सफल व्यक्ति के सामने होती है, जिसे यह तय करना होता है कि कौन वास्तव में उसका शुभचिंतक है और कौन केवल उसकी सफलता का लाभ उठाना चाहता है। हर मुस्कान, हर बधाई और हर अपनत्व के पीछे की सच्चाई को समझना आवश्यक हो जाता है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि सफलता केवल व्यक्ति की परीक्षा नहीं लेती, बल्कि उसके रिश्तों की भी कसौटी बन जाती है। ऐसे में जरूरत है सजगता और समझदारी की, ताकि व्यक्ति अपने जीवन में सच्चे और स्वार्थी संबंधों के बीच स्पष्ट अंतर कर सके और उन्हीं रिश्तों को महत्व दे, जो उसके संघर्ष के साथी रहे हैं, न कि केवल उसकी कामयाबी के।
कामयाबी के साथ बढ़ते रिश्ते: अपनत्व या अवसरवाद की परतें खोलती हकीकत प्रतापगढ़। समाज में सफलता का अर्थ अब केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार और रिश्तों की वास्तविकता को उजागर करने वाला आईना बन चुकी है। जैसे ही कोई व्यक्ति संघर्षों को पार कर सफलता की ऊंचाइयों को छूता है, उसके आसपास का माहौल तेजी से बदलने लगता है। जो लोग कभी दूरियां बनाए रखते थे, वही अचानक नजदीकियां बढ़ाने लगते हैं। कामयाबी के साथ बधाइयों का तांता लगना एक सामान्य सामाजिक दृश्य बन चुका है। फोन कॉल, संदेश, सोशल मीडिया पोस्ट और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुट जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यक्ति की सफलता ने उसके चारों ओर एक नया सामाजिक घेरा तैयार कर दिया हो, जिसमें पुराने और नए सभी रिश्तेदार खुद को शामिल करने की होड़ में लगे हों। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष कहीं अधिक गंभीर और विचारणीय है। यही वे लोग होते हैं, जो कभी उस व्यक्ति के संघर्ष के समय उसकी उपेक्षा करते थे, उसकी मेहनत को नजरअंदाज करते थे, या फिर तिरछी नजरों से देखते थे। उस समय न तो अपनत्व दिखाई देता था और न ही समर्थन। परंतु जैसे ही सफलता मिली, वही लोग प्रशंसा के पुल बांधने और नजदीकी का दावा करने में पीछे नहीं रहते। यह प्रवृत्ति समाज के अवसरवादी चरित्र को उजागर करती है। व्यक्ति की पहचान उसके मूल्यों, संघर्ष और व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धियों और हैसियत से तय की जाने लगती है। जाति, वर्ग, सामाजिक दूरी और पुराने मतभेद—सभी कुछ सफलता के सामने गौण हो जाते हैं। यह बदलाव एक ओर जहां सामाजिक स्वीकृति का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या यह अपनत्व वास्तविक है या केवल स्वार्थ से प्रेरित। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रिश्ते, जो केवल सफलता के इर्द-गिर्द बनते हैं, वे लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होते। ये संबंध परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं और इनमें स्थायित्व की कमी होती है। ऐसे लोग व्यक्ति के संघर्ष के साथी नहीं होते, बल्कि उसकी उपलब्धियों के हिस्सेदार बनने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि इन्हें सामाजिक रूप से “अवसरवादी रिश्ते” कहा जाता है। इसके सामाजिक प्रभाव भी कम चिंताजनक नहीं हैं। जब समाज में सफलता को ही रिश्तों का आधार बना दिया जाता है, तो संघर्षरत व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है। लोग केवल सफल लोगों के साथ जुड़ना चाहते हैं, जबकि असफल या संघर्ष कर रहे व्यक्तियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे समाज में असंतुलन और असमानता की भावना को बढ़ावा मिलता है। ऐसे परिदृश्य में सबसे बड़ी चुनौती उस सफल व्यक्ति के सामने होती है, जिसे यह तय करना होता है कि कौन वास्तव में उसका शुभचिंतक है और कौन केवल उसकी सफलता का लाभ उठाना चाहता है। हर मुस्कान, हर बधाई और हर अपनत्व के पीछे की सच्चाई को समझना आवश्यक हो जाता है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि सफलता केवल व्यक्ति की परीक्षा नहीं लेती, बल्कि उसके रिश्तों की भी कसौटी बन जाती है। ऐसे में जरूरत है सजगता और समझदारी की, ताकि व्यक्ति अपने जीवन में सच्चे और स्वार्थी संबंधों के बीच स्पष्ट अंतर कर सके और उन्हीं रिश्तों को महत्व दे, जो उसके संघर्ष के साथी रहे हैं, न कि केवल उसकी कामयाबी के।
- Rajesh Manu journalistप्रतापगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेशकृपया शेयर और कमेंट करे1 hr ago
- उत्कृष्ट समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने अपने बहुआयामी सेवा भाव से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। वृद्धाश्रम के वृद्ध माता-पिता की सेवा, महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की सेवा, दीन- हीनो को वस्त्र- कम्बल दान, निरीह पशुओं को चारा तथा जाड़े में बोरे के कोट पहनाने का कार्य, बीमारी को दवा की व्यवस्था प्रदान करना, खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर उनका प्रोत्साहन करना इत्यादि ऐसे कार्य हैं जिनको रोशनलाल उमरवैश्य धर्म का अंग मानकर संपादित करते हैं।1
- प्रतापगढ़ के थाना दिलीपपुर क्षेत्र के पिपरी खालसा गाँव में प्राथमिक विद्यालय में योगेश मिश्र और उनके गुर्गे परवेज एवं एक दर्जन से अधिक अज्ञात गुंडे तोड़ फोड़ कर किये गए निर्माण को क्षति ग्रस्त कर दिया। जिसके बाद ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और दिलीपपुर की पुलिस मौके पर पहुँची तो तनाव को देखते हुए और फोर्स की माँग की थी।1
- प्रतापगढ़। पत्रकार रवि गर्गवंशी की दिल्ली पुलिस द्वारा कथित नाजायज गिरफ्तारी को लेकर विरोध तेज हो गया है। इस मामले में नीरज सिंह के नेतृत्व में अवधकेसरी सेना ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और कड़ी आपत्ति जताई। अवधकेसरी सेना के पदाधिकारियों का आरोप है कि पत्रकार रवि गर्गवंशी को बिना उचित कारण गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। संगठन ने कहा कि एक पत्रकार की आवाज दबाने का प्रयास लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि रवि गर्गवंशी को तत्काल तिहाड़ जेल से रिहा किया जाए। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग की गई। अवधकेसरी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र रिहाई नहीं होती है तो संगठन व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।1
- गर्व करों की आप भारत में हैं, अपने यहां के सब्जी के भाव देखों और अमरीका में सब्जी के भाव देखों... "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा" 🇮🇳🙏👍1
- ✍️ *इधर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बता रहीं हैं कि.. "रुपया ठीक चल रहा है !"*1
- यूपीपीसीएस 2024 में सफलता के शिखर पर जाकर वाणिज्य कर विभाग की अधिकारी बनी अमेठी जिले विकास खंड संग्रामपुर क्षेत्र के नेवादा निवासी तेज बहादुर सिंह की पुत्रवधू व गांव सफल बहू अनुराधा सिंह का आज ससुराल में पहुंचने भव्य स्वागत किया गया। परिजनों ने गांव के आग्रह पर सफल व आदर्श बहू अनुराधा सिंह ने कालिकन शक्ति पीठ पहुंच कर मां कालिका के चरणों में दीप जलाया।इस अवसर पर अनुराधा सिंह ने बताया कि आज हमारी सफलता के पीछे हमारे परिवार व गांव का आशिर्वाद है। इसलिए हमसे अधिक इन लोगों में खुशी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि परिवार मान - सम्मान हर बहू के हाथों में होता है ।इस अवसर पर बृजेश मिश्रा, बृजेन्द्र सिंह लोहा, ज्ञान सिंह, जितेन्द्र सिंह, कमलाकांत उपाध्याय, सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे4
- अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र के एक गांव में महिलाओं के बीच हुई मारपीट का वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना में मां और उसकी बेटी के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कहासुनी के बाद कुछ महिलाएं और पुरुष आपस में भिड़ जाते हैं और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल जाता है। आरोप है कि कुछ लोगों ने एक महिला और उसकी बेटी के साथ मारपीट की, जिससे दोनों को चोटें आईं। घटना के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि छेड़खानी का विरोध करने पर हमला किया गया, जबकि दूसरे पक्ष ने महुआ बिनने को लेकर विवाद होने की बात कही है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच में छेड़खानी के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच तनाव को देखते हुए पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की है। इस दौरान छह लोगों को शांतिभंग की आशंका में पाबंद किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।2
- एसटीएफ प्रयागराज द्वारा गौहत्या के अभियोग में वांछित 50,000/- रुपये के ईनामिया अभियुक्त मो0 इब्राहिम को तेलियरगंज चौराहे लखनऊ प्रयागराज रोड पर आजाद मार्केट के सामने थाना क्षेत्र शिवकुटी प्रयागराज से गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्यवाही के संबंध में-क्षेत्राधिकारी रानीगंज विनय प्रभाकर साहनी ने क्या कहा देखें।1