पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है। पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है।
पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने
मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है। पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो
चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है।
- jo sahi hai uske sath sahi hona chahiye aur sc st act hatna chiye1
- प्रयागराज यानी संगम नगरी। यहां घाट, किला और मंदिरों के साथ-साथ स्ट्रीट फूड का भी अपना अलग क्रेज है। सिर्फ ₹60 में लाजवाब डोसा खाने हों तो पहुंचिए हिम्मतगंज वाले मनोज डोसा ________________________ प्रयागराज। 13 अगस्त 2026/ प्रयागराज यानी संगम नगरी। यहां घाट, किला और मंदिरों के साथ-साथ स्ट्रीट फूड का भी अपना अलग क्रेज है। और अगर बात हो सस्ते में पेट भर खाने की, तो हिम्मतगंज का एक नाम हर स्टूडेंट और फूडी की जुबान पर रहता है मनोज डोसा। लोकेशन ढूंढना एकदम आसान हिम्मतगंज चौराहे से जैसे ही आप दाहिने हाथ पर हनुमान जी के मंदिर की तरफ बढ़ेंगे, मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर आपको भीड़ लगी मिल जाएगी। उसी भीड़ के बीच है मनोज डोसा की छोटी सी लेकिन फेमस दुकान। कॉलेज और कोचिंग वाले बच्चे तो इसे आंख बंद करके पहुंच जाते हैं। ₹60 में स्वाद का धमाका आज के जमाने में जब एक डोसा ₹120-₹150 में मिलता है, वहां मनोज भैया सिर्फ ₹60 में गरमा-गरम क्रिस्पी दोसा परोसते हैं। और ये कोई नाम का डोसा नहीं है। तवा पर पड़ते ही चट से फैला हुआ पतला डोसा, अंदर आलू की मसालेदार सब्जी, ऊपर से घी और सांभर-नारियल चटनी के साथ मिले तो मजा डबल हो जाता है। स्वाद ऐसा कि एक खाने के बाद दूसरा ऑर्डर अपने आप निकल जाता है। सिर्फ डोसा ही नहीं, पूरा मेन्यू है मनोज डोसा नाम से फेमस है, लेकिन यहां का मेन्यू उससे कहीं बड़ा है। बजट में दोस्तों के साथ हंगामा करने के लिए ये जगह बेस्ट है...!! रंजीत कुमार सोनकर (प्रधान संपादक) क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़1
- मदरसा अनवारुल उलूमसे छात्रों ने निकाली गई तिरंगा यात्रा प्रयागराज। आजादी के पर्व को लेकर मिर्ज़ा ग़ालिब रोड स्थित मदरसा अनवारुल उलूम से छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा में मदरसे के छात्र हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ शामिल हुए। इस दौरान मदरसे का स्टाफ भी छात्रों के साथ मौजूद रहा। तिरंगा यात्रा मदरसे से शुरू होकर आसपास के मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। यात्रा के दौरान छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। हाथों में तिरंगा लिए छात्र देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आए। मदरसा स्टाफ ने भी छात्रों का उत्साह बढ़ाया और यात्रा में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर शामिल हुए। विभिन्न मार्गों से भ्रमण करने के बाद तिरंगा यात्रा वापस मदरसे पहुंची, जहां इसका समापन किया गया। इस मौके पर मदरसा स्टाफ ने छात्रों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देश की एकता एवं अखंडता के महत्व के बारे में जानकारी दी। यात्रा के दौरान क्षेत्र में देशभक्ति का माहौल बना रहा। प्रधानाचार्य मौलाना जव्वादुल हैदर रिज़वी, मौलाना रज़ी हैदर,मौलाना ज़रग़ाम हैदर, मौलाना मोहम्मद अब्बास, मौलाना शहरयार रिज़वी, मौलाना शज़ान जव्वादी, मौलाना मुन्तजिर हुसैन,जावेद रिज़वी,कमाल हैदर मोहम्मद रिज़वी आदि मौजूद रहे।2
- *मदरसा अनवारुल उलूमसे छात्रों ने निकाली गई तिरंगा यात्रा* प्रयागराज। आजादी के पर्व को लेकर मिर्ज़ा ग़ालिब रोड स्थित मदरसा अनवारुल उलूम से छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा में मदरसे के छात्र हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ शामिल हुए। इस दौरान मदरसे का स्टाफ भी छात्रों के साथ मौजूद रहा। तिरंगा यात्रा मदरसे से शुरू होकर आसपास के मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। यात्रा के दौरान छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। हाथों में तिरंगा लिए छात्र देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आए। मदरसा स्टाफ ने भी छात्रों का उत्साह बढ़ाया और यात्रा में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर शामिल हुए। विभिन्न मार्गों से भ्रमण करने के बाद तिरंगा यात्रा वापस मदरसे पहुंची, जहां इसका समापन किया गया। इस मौके पर मदरसा स्टाफ ने छात्रों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देश की एकता एवं अखंडता के महत्व के बारे में जानकारी दी।1
- प्रयागराज की हंडिया तहसील अंतर्गत पड़ने वाला गांव कुंदौरा गांव में समिति की देख देख में कुदौंरा महादेव को जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है1
- ### *कौशांबी: अतीक अहमद के बेटे अली का काफिला पहुंचा कोखराज बाईपास, प्रयागराज रवाना* *"छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट से मिली पैरोल"* *कौशाम्बी संदेश संवाददाता* *कौशाम्बी।* अतीक अहमद के बेटे *अली अहमद* का पुलिस काफिला शनिवार को *कौशांबी* पहुंचा। *कोखराज बाईपास* क्रॉस करने के बाद काफिला *प्रयागराज के हटवा* की ओर रवाना हो गया। #### *हाईकोर्ट से मिली पैरोल* अली को *छोटे भाई अबान अहमद* के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए *हाईकोर्ट से पैरोल* मिली है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अली को *सुबह करीब 9 बजे झांसी जिला जेल* से रवाना किया गया था। #### *क्या हुआ था* बताया जा रहा है कि *6 अगस्त 2026* को *झांसी में कार डिवाइडर से टकराने* के बाद अबान अहमद की मौत हो गई थी। अबान के शव को प्रयागराज लाया गया है। सूत्रों के अनुसार *मगरिब की नमाज के बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान* में अबान को *सुपुर्द-ए-खाक* किया जाएगा। #### *सुरक्षा व्यवस्था* काफिले के साथ भारी पुलिस बल मौजूद है। कोखराज बाईपास से लेकर प्रयागराज बॉर्डर तक जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई है। अंतिम संस्कार के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों जनपदों की पुलिस समन्वय कर रही है।1
- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र भी अब हल्ला बोल के मूड में हैं, एनएसयूआई समेत दूसरे छात्र संगठनों ने आज कुलपति के घेराव का ऐलान किया था, छात्रसंघ बहाली, फीस वृद्धि और शिक्षक भर्ती में अनियमितता के मुद्दे पर छात्रों ने घेराव का ऐलान किया था, कुलपति कार्यालय की तरफ जाते समय छात्रों की सुरक्षाकर्मियों और पुलिस से आमना सामना हो गया, यूनिवर्सिटी परिसर में काफ़ी देर तक नोंकझोंक और धक्कामुक्की हुई, छात्र अपनी मांगो पर अड़े रहे, छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते दो घंटे से ज्यादा देर तक यूनिवर्सिटी परिसर का माहौल तनावपूर्ण रहा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र भी अब हल्ला बोल के मूड में हैं, एनएसयूआई समेत दूसरे छात्र संगठनों ने आज कुलपति के घेराव का ऐलान किया था, छात्रसंघ बहाली, फीस वृद्धि और शिक्षक भर्ती में अनियमितता के मुद्दे पर छात्रों ने घेराव का ऐलान किया था, कुलपति कार्यालय की तरफ जाते समय छात्रों की सुरक्षाकर्मियों और पुलिस से आमना सामना हो गया, यूनिवर्सिटी परिसर में काफ़ी देर तक नोंकझोंक और धक्कामुक्की हुई, छात्र अपनी मांगो पर अड़े रहे, छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते दो घंटे से ज्यादा देर तक यूनिवर्सिटी परिसर का माहौल तनावपूर्ण रहा1