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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बलिया जिले के 10 विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी है। विभागीय जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमों, मानकों और आवश्यक शर्तों का पालन न करने के कारण की गई है। मान्यता रद्द होने के बाद इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच अपने भविष्य को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें और सही जानकारी के लिए संबंधित विद्यालय तथा जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय से संपर्क करें। विभाग का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे कदम उठाए जाते हैं, जिससे छात्रों के हितों की सुरक्षा और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।

4 hrs ago
user_Jitendra
Jitendra
Local News Reporter गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए बलिया जिले के 10 विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी है। विभागीय जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमों, मानकों और आवश्यक शर्तों का पालन न करने के कारण की गई है। मान्यता रद्द होने के बाद इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच अपने भविष्य को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें और सही जानकारी के लिए संबंधित विद्यालय तथा जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय से संपर्क करें। विभाग का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे कदम उठाए जाते हैं, जिससे छात्रों के हितों की सुरक्षा और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।

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  • गाजीपुर जिले की जमानिया तहसील में स्टांप विक्रेताओं द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया है। हिंदुस्तान न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, विक्रेता ₹10 के स्टांप और ₹10 की टिकट को ₹20-₹20 में बेच रहे हैं। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दो स्टांप और दो टिकट खरीदने पर कुल ₹80 लिए जा रहे हैं, जबकि रजिस्टर में इनकी कीमत मात्र ₹10 ही अंकित की जा रही है। इस मामले की जानकारी एसडीएम जमानिया को भी दी गई है और उन्हें घटना का वीडियो भी भेजा जा चुका है। आरोप है कि सबूत के तौर पर वीडियो उपलब्ध कराने के बावजूद अधिकारी लिखित शिकायत और गवाही की मांग कर रहे हैं और इस गंभीर विषय को नजरअंदाज कर रहे हैं। अब क्षेत्र में यह देखने का विषय है कि अधिकारियों को वीडियो साक्ष्य मिलने के बाद वे इस मनमानी पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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    गाजीपुर जिले की जमानिया तहसील में स्टांप विक्रेताओं द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया है। हिंदुस्तान न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, विक्रेता ₹10 के स्टांप और ₹10 की टिकट को ₹20-₹20 में बेच रहे हैं। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दो स्टांप और दो टिकट खरीदने पर कुल ₹80 लिए जा रहे हैं, जबकि रजिस्टर में इनकी कीमत मात्र ₹10 ही अंकित की जा रही है।

इस मामले की जानकारी एसडीएम जमानिया को भी दी गई है और उन्हें घटना का वीडियो भी भेजा जा चुका है। आरोप है कि सबूत के तौर पर वीडियो उपलब्ध कराने के बावजूद अधिकारी लिखित शिकायत और गवाही की मांग कर रहे हैं और इस गंभीर विषय को नजरअंदाज कर रहे हैं। अब क्षेत्र में यह देखने का विषय है कि अधिकारियों को वीडियो साक्ष्य मिलने के बाद वे इस मनमानी पर क्या कार्रवाई करते हैं।
    user_Praveen Kumar Shrivastav
    Praveen Kumar Shrivastav
    Agricultural organisation गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर अपनी राय स्पष्ट की है। उन्होंने राज्य के मौजूदा सियासी हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में तीसरा मोर्चा ही जनता के लिए एकमात्र विकल्प है।
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    अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर अपनी राय स्पष्ट की है। उन्होंने राज्य के मौजूदा सियासी हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में तीसरा मोर्चा ही जनता के लिए एकमात्र विकल्प है।
    user_Jitendra
    Jitendra
    Local News Reporter गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बस्ती (हर्रैया और कप्तानगंज क्षेत्र) में योगी आदित्यनाथ ने 504 करोड़ रुपये की लागत वाली 77 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस विकास-केंद्रित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर बेहद तीखे राजनीतिक हमले किए। योगी आदित्यनाथ ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सरकारी फंड कब्रिस्तान की दीवारों पर खर्च होते थे, जबकि उनकी सरकार के कार्यकाल में 1500 मंदिरों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कब्रिस्तान बनाम मंदिर के नरेटिव को हवा देते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार कब्रिस्तान और वक्फ के नाम पर अतिक्रमण को बढ़ावा देती थी, जबकि कांवर यात्रा जैसी हिंदू परंपराओं और 'जय श्री राम' के नारों पर रोक लगाती थी। सपा के एक जिलाध्यक्ष की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "कब्रिस्तान के नाम पर कब्जा हो रहा था, सपा जिलाध्यक्ष खुद आए थे। लखनऊ में बैठे लोगों को केवल कब्रिस्तान ही दिखाई देता था।" उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तंज कसा कि अब वे भी भगवा पहनकर कांवर यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, जबकि उनके शासनकाल में हनुमानगढ़ी पर नमाज पढ़ने के प्रयास हुए और कांवर यात्राओं को रोका गया। शिक्षा और युवाओं के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में केवल नकल और बेरोजगारी ही हाथ लगती थी, जबकि आज बेहतर शिक्षा व्यवस्था मौजूद है। 10 जुलाई 2026 को दिया गया यह भाषण केवल एक विकास कार्यक्रम तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भाषण विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दोहरी रणनीति को मजबूत करते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है।
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    उत्तर प्रदेश के बस्ती (हर्रैया और कप्तानगंज क्षेत्र) में योगी आदित्यनाथ ने 504 करोड़ रुपये की लागत वाली 77 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस विकास-केंद्रित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर बेहद तीखे राजनीतिक हमले किए। योगी आदित्यनाथ ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सरकारी फंड कब्रिस्तान की दीवारों पर खर्च होते थे, जबकि उनकी सरकार के कार्यकाल में 1500 मंदिरों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने कब्रिस्तान बनाम मंदिर के नरेटिव को हवा देते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार कब्रिस्तान और वक्फ के नाम पर अतिक्रमण को बढ़ावा देती थी, जबकि कांवर यात्रा जैसी हिंदू परंपराओं और 'जय श्री राम' के नारों पर रोक लगाती थी। सपा के एक जिलाध्यक्ष की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "कब्रिस्तान के नाम पर कब्जा हो रहा था, सपा जिलाध्यक्ष खुद आए थे। लखनऊ में बैठे लोगों को केवल कब्रिस्तान ही दिखाई देता था।" उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तंज कसा कि अब वे भी भगवा पहनकर कांवर यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, जबकि उनके शासनकाल में हनुमानगढ़ी पर नमाज पढ़ने के प्रयास हुए और कांवर यात्राओं को रोका गया।

शिक्षा और युवाओं के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में केवल नकल और बेरोजगारी ही हाथ लगती थी, जबकि आज बेहतर शिक्षा व्यवस्था मौजूद है। 10 जुलाई 2026 को दिया गया यह भाषण केवल एक विकास कार्यक्रम तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भाषण विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दोहरी रणनीति को मजबूत करते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है।
    user_नवोदय वार्ता
    नवोदय वार्ता
    Newspaper publisher मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सकलडीहा क्षेत्र के साईं बाबा मंदिर के समीप शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जहां खेत से पशुओं का चारा लेकर आ रहा एक किसान हाईवोल्टेज बिजली के तार की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया। पीड़ित किसान खेत में कृषि कार्य निपटाकर लौट रहा था, तभी वहां से गुजर रहा लटकता हुआ बिजली का तार अचानक उसकी चपेट में आ गया। तेज करंट की वजह से किसान मौके पर ही बुरी तरह झुलस कर जमीन पर गिर पड़ा। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसान और ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और किसी तरह बिजली आपूर्ति बंद कराई। इसके बाद झुलसे हुए किसान को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। इस घटना की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश फैल गया। मौके पर बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिजली के तार बेहद जर्जर हैं और नीचे लटके हुए हैं। इस संबंध में कई बार स्थानीय बिजली उपकेंद्र और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसी लापरवाही के कारण आज एक गरीब किसान जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। आक्रोशित किसानों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में बिजली के जर्जर तारों और खराब खंभों को तुरंत बदला जाए। उन्होंने मुख्य रूप से खेतों के ऊपर से गुजर रहे ढीले तारों को ऊंचा करने, पुराने व सड़ चुके खंभों को बदलने और पीड़ित किसान के इलाज का पूरा खर्च तथा उचित मुआवजा बिजली विभाग द्वारा दिए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर जल्द ही विद्युत व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करेंगे।
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    उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सकलडीहा क्षेत्र के साईं बाबा मंदिर के समीप शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जहां खेत से पशुओं का चारा लेकर आ रहा एक किसान हाईवोल्टेज बिजली के तार की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया। पीड़ित किसान खेत में कृषि कार्य निपटाकर लौट रहा था, तभी वहां से गुजर रहा लटकता हुआ बिजली का तार अचानक उसकी चपेट में आ गया। तेज करंट की वजह से किसान मौके पर ही बुरी तरह झुलस कर जमीन पर गिर पड़ा। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसान और ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और किसी तरह बिजली आपूर्ति बंद कराई। इसके बाद झुलसे हुए किसान को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

इस घटना की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश फैल गया। मौके पर बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिजली के तार बेहद जर्जर हैं और नीचे लटके हुए हैं। इस संबंध में कई बार स्थानीय बिजली उपकेंद्र और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसी लापरवाही के कारण आज एक गरीब किसान जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

आक्रोशित किसानों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में बिजली के जर्जर तारों और खराब खंभों को तुरंत बदला जाए। उन्होंने मुख्य रूप से खेतों के ऊपर से गुजर रहे ढीले तारों को ऊंचा करने, पुराने व सड़ चुके खंभों को बदलने और पीड़ित किसान के इलाज का पूरा खर्च तथा उचित मुआवजा बिजली विभाग द्वारा दिए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर जल्द ही विद्युत व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करेंगे।
    user_Uday Kumar Ray
    Uday Kumar Ray
    Local News Reporter सकलडीहा, चंदौली, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर महमूद गजनवी से संबंधित एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऐतिहासिक वेशभूषा के माध्यम से भारत पर किए गए उसके आक्रमणों का चित्रण किया गया है। यह वीडियो नाटकीय और सिनेमाई शैली में तैयार किया गया है, जिससे इसके किसी फिल्म, एनीमेशन या एआई-आधारित कंटेंट होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्तमान में इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं है कि यह वीडियो किसके द्वारा बनाया गया है और इसका मूल उद्देश्य क्या है। इतिहासकारों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि महमूद गजनवी ने 11वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप पर कई आक्रमण किए थे। हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि वायरल वीडियो में नाटकीय प्रभाव के लिए संवादों और घटनाओं में बदलाव किए जा सकते हैं, इसलिए ऐसे कंटेंट की ऐतिहासिक प्रामाणिकता को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले प्रमाणिक ऐतिहासिक शोध और स्रोतों पर निर्भर रहना ही उचित है।
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    सोशल मीडिया पर महमूद गजनवी से संबंधित एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऐतिहासिक वेशभूषा के माध्यम से भारत पर किए गए उसके आक्रमणों का चित्रण किया गया है। यह वीडियो नाटकीय और सिनेमाई शैली में तैयार किया गया है, जिससे इसके किसी फिल्म, एनीमेशन या एआई-आधारित कंटेंट होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्तमान में इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं है कि यह वीडियो किसके द्वारा बनाया गया है और इसका मूल उद्देश्य क्या है।

इतिहासकारों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि महमूद गजनवी ने 11वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप पर कई आक्रमण किए थे। हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि वायरल वीडियो में नाटकीय प्रभाव के लिए संवादों और घटनाओं में बदलाव किए जा सकते हैं, इसलिए ऐसे कंटेंट की ऐतिहासिक प्रामाणिकता को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले प्रमाणिक ऐतिहासिक शोध और स्रोतों पर निर्भर रहना ही उचित है।
    user_Jitendra
    Jitendra
    Local News Reporter गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मुंशीपुरा ओवरब्रिज के नीचे एक बिजली के खम्बे में करंट आने से तीन बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पीड़ित बकरी स्वामी और स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली विभाग को मामले की सूचना दी, लेकिन गंभीर लापरवाही दिखाते हुए विभाग ने सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर बिजली की लाइन काटी। बकरी स्वामी इरसाद का साफ कहना है कि यह घटना पूरी तरह से बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने इस खंभे में करंट आने की शिकायत पहले भी कई बार बिजली विभाग से की थी, लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि यह आम जनता के आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहां चौबीसों घंटे लोगों की आवाजाही रहती है। लोगों ने गुस्से में सवाल उठाया कि आज तो तीन बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन अगर इनकी जगह कोई इंसान होता तो इस मौत का जिम्मेदार कौन होता? गुस्साए लोगों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक इस बिजली के पोल को रास्ते से नहीं हटाया जाएगा, तब तक वे मृत जानवरों को भी वहां से नहीं हटने देंगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के मौसम में अक्सर यहां बिजली के खंभों में करंट उतर आता है, लेकिन विभाग इसे नजरअंदाज करता है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
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    उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मुंशीपुरा ओवरब्रिज के नीचे एक बिजली के खम्बे में करंट आने से तीन बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पीड़ित बकरी स्वामी और स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली विभाग को मामले की सूचना दी, लेकिन गंभीर लापरवाही दिखाते हुए विभाग ने सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर बिजली की लाइन काटी। बकरी स्वामी इरसाद का साफ कहना है कि यह घटना पूरी तरह से बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने इस खंभे में करंट आने की शिकायत पहले भी कई बार बिजली विभाग से की थी, लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया है।

इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि यह आम जनता के आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहां चौबीसों घंटे लोगों की आवाजाही रहती है। लोगों ने गुस्से में सवाल उठाया कि आज तो तीन बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन अगर इनकी जगह कोई इंसान होता तो इस मौत का जिम्मेदार कौन होता? गुस्साए लोगों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक इस बिजली के पोल को रास्ते से नहीं हटाया जाएगा, तब तक वे मृत जानवरों को भी वहां से नहीं हटने देंगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के मौसम में अक्सर यहां बिजली के खंभों में करंट उतर आता है, लेकिन विभाग इसे नजरअंदाज करता है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
    user_विनय कुमार श्रीवास्तव
    विनय कुमार श्रीवास्तव
    मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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