नाला निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी? 80 फीटा रोड पर ‘नागिन डांस’ करता नाला बना चर्चा का केंद्र, कहीं मोटा तो कहीं पतला—ढलाई में बाहर झांक रही गिट्टी नाला निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी? 80 फीटा रोड पर ‘नागिन डांस’ करता नाला बना चर्चा का केंद्र, कहीं मोटा तो कहीं पतला—ढलाई में बाहर झांक रही गिट्टी धारा लक्ष्य समाचार बाराबंकी। नगर पालिका परिषद नवाबगंज क्षेत्र के 80 फीटा रोड, सोहन टिंबर के पास कराए जा रहे नाला निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तरीके को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। मौके की स्थिति देखकर लोग इसे नाला निर्माण कम और ‘नागिन डांस’ करता हुआ नाला अधिक बता रहे हैं। कहीं नाला चौड़ा दिखाई देता है तो कहीं उसकी चौड़ाई और गहराई में अंतर नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। नाले की ढलाई में जगह-जगह गिट्टी बाहर झांकती दिखाई दे रही है, जिससे निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ढलाई में सीमेंट, बालू और गिट्टी का मिश्रण निर्धारित अनुपात में नहीं रखा गया और पर्याप्त तरीके से कंक्रीटिंग नहीं की गई तो पहली ही बरसात में निर्माण की असली तस्वीर सामने आ सकती है। नाले के निर्माण में एकरूपता न दिखाई देने को लेकर भी स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब निर्माण सरकारी धन से हो रहा है तो इसकी चौड़ाई, गहराई, ढलाई और बेस में समानता क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या निर्माण से पहले इसका तकनीकी निरीक्षण किया गया या फिर ठेकेदार को अपनी सुविधा के अनुसार काम करने की खुली छूट दे दी गई? सबसे बड़ा सवाल नाले की फिलिंग को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फिलिंग के दौरान भी अनियमितता बरती जा रही है। यदि नाले के नीचे और आसपास की भराई को ठीक तरीके से दबाकर मजबूत नहीं किया गया तो बारिश के पानी के दबाव और मिट्टी के बैठने से निर्माण जल्द क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहेगी। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे समय में नाला निर्माण का काम तेजी से नहीं कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ काम पूरा नहीं किया जा रही सिर्फ जल्दबाजी दिखाई दे रही है। सवाल यह भी है कि बारिश के बीच निर्माण सामग्री और फिलिंग की गुणवत्ता को किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है? स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर नाले की चौड़ाई, गहराई, ढलाई की मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता और फिलिंग की जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर यदि कहीं मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद नवाबगंज के जिम्मेदार अधिकारी इस नागिन डांस’ करते नाले की शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं या फिर सरकारी धन से बन रहे इस निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल बारिश के पानी में बहते रहेंगे। वही इस सम्बन्ध में अधिशासी अधिकारी संजय शुक्ला से जब संपर्क किया गया तो उनका फोन नॉटरिचबुल रहा।
नाला निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी? 80 फीटा रोड पर ‘नागिन डांस’ करता नाला बना चर्चा का केंद्र, कहीं मोटा तो कहीं पतला—ढलाई में बाहर झांक रही गिट्टी नाला निर्माण में मानकों की खुलेआम अनदेखी? 80 फीटा रोड पर ‘नागिन डांस’ करता नाला बना चर्चा का केंद्र, कहीं मोटा तो कहीं पतला—ढलाई में बाहर झांक रही गिट्टी धारा लक्ष्य समाचार बाराबंकी। नगर पालिका परिषद नवाबगंज क्षेत्र के 80 फीटा रोड, सोहन टिंबर के पास कराए जा रहे नाला निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तरीके को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। मौके की स्थिति देखकर लोग इसे नाला निर्माण कम और ‘नागिन डांस’ करता हुआ नाला अधिक बता रहे हैं। कहीं नाला चौड़ा दिखाई देता है तो कहीं उसकी चौड़ाई और गहराई में अंतर नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। नाले की ढलाई में जगह-जगह गिट्टी बाहर झांकती दिखाई दे रही है, जिससे निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ढलाई में सीमेंट, बालू और गिट्टी का मिश्रण निर्धारित अनुपात में नहीं रखा गया और पर्याप्त तरीके से कंक्रीटिंग नहीं की गई तो पहली ही बरसात में निर्माण की असली तस्वीर सामने आ सकती है। नाले के निर्माण में एकरूपता न दिखाई देने को लेकर भी स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब निर्माण सरकारी धन से हो रहा है तो इसकी चौड़ाई, गहराई, ढलाई और बेस में समानता क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या निर्माण से पहले इसका तकनीकी निरीक्षण किया गया या फिर ठेकेदार को अपनी सुविधा के अनुसार काम करने की खुली छूट दे दी गई? सबसे बड़ा सवाल नाले की फिलिंग को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फिलिंग के दौरान भी अनियमितता बरती जा रही है। यदि नाले के नीचे और आसपास की भराई को ठीक तरीके से दबाकर मजबूत नहीं किया गया तो बारिश के पानी के दबाव और मिट्टी के बैठने से निर्माण जल्द क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहेगी। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे समय में नाला निर्माण का काम तेजी से नहीं कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ काम पूरा नहीं किया जा रही सिर्फ जल्दबाजी दिखाई दे रही है। सवाल यह भी है कि बारिश के बीच निर्माण सामग्री और फिलिंग की गुणवत्ता को किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है? स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर नाले की चौड़ाई, गहराई, ढलाई की मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता और फिलिंग की जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर यदि कहीं मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद नवाबगंज के जिम्मेदार अधिकारी इस नागिन डांस’ करते नाले की शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं या फिर सरकारी धन से बन रहे इस निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल बारिश के पानी में बहते रहेंगे। वही इस सम्बन्ध में अधिशासी अधिकारी संजय शुक्ला से जब संपर्क किया गया तो उनका फोन नॉटरिचबुल रहा।
- कांवड़ यात्रियों के लिए असेनी मोड़ पर शिविर शुरू: जिला प्रशासन ने श्रावण मास में की विशेष व्यवस्थाएं कांवड़ यात्रियों के लिए असेनी मोड़ पर शिविर शुरू: जिला प्रशासन ने श्रावण मास में की विशेष व्यवस्थाएं जिला संवाददाता -विशाल गुप्ता बाराबंकी, 02 अगस्त 2026। श्रावण मास के अवसर पर कांवड़ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए बाराबंकी के असेनी मोड़ पर चिकित्सा एवं फलाहार शिविर का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देशों पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी, नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल के नेतृत्व में इन शिविरों का आयोजन किया गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) निरंकार सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विद्यांशु शेखर झा ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया। इन शिविरों में स्वास्थ्य विभाग की एक चिकित्सकीय टीम कांवड़ यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है और आवश्यक परामर्श प्रदान कर रही है। जरूरतमंद श्रद्धालुओं को निःशुल्क औषधियां भी वितरित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, यात्रियों को यात्रा के दौरान राहत और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से फल, पेयजल और अन्य आवश्यक जलपान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रावण मास के दौरान कांवड़ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी व्यवस्थाएं पूरी संवेदनशीलता एवं सतर्कता के साथ संचालित की जाएं। उन्होंने विशेष रूप से मार्गों पर स्वच्छता, पेयजल, प्राथमिक उपचार, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन श्रावण मास के दौरान कांवड़ यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी कर रहा है। प्रशासन सेवा, सुरक्षा और सुविधा के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्यरत है।4
- उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक ही संकट है वो है भारतीय जनता पार्टी1
- NEET परीक्षा के साथ साथ और भी कई सारे पेपर लगातार लीक हुए है1
- ट्रक चालक ने ईंधन पर उठाए सवाल, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक ट्रक चालक ने डीजल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ईंधन में कथित मिलावट की शिकायत की है। वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।1
- गालियां नहीं, संस्कार और मार्गदर्शन ही राष्ट्र निर्माण का मार्ग" — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "गालियां नहीं, संस्कार और मार्गदर्शन ही राष्ट्र निर्माण का मार्ग" — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महेश त्यागी, ब्यूरो चीफ, भारत न्यूज़ 24। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से देशवासियों को संयम, सकारात्मक सोच और सभ्य संवाद का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "Abuses never solve anything. Let's guide the misguided. Let's work together. Let's work for Bharat." प्रधानमंत्री के इस संदेश से प्रेरित होकर महेश त्यागी ने भावुक शब्दों में कहा, "कुछ शरारती बच्चों ने मुझे तो गालियां दी ही, मेरी स्वर्गीय मां तक को भी अपशब्द कहे। एक बेटे के लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी की सीख ने मुझे यह एहसास कराया कि यदि कभी दांतों के नीचे हमारी अपनी ही जीभ आ जाए, तो हम अपने दांत नहीं तोड़ते। उसी तरह ये बच्चे भी हमारे अपने हैं। इन्हें नफरत नहीं, बल्कि प्यार, संस्कार और सही मार्गदर्शन की जरूरत है।" उन्होंने आगे कहा, "मैं उन सभी बच्चों को दिल से माफ करता हूं। मेरा किसी से कोई बैर नहीं है। मेरा केवल एक ही सपना है कि मेरा देश निरंतर आगे बढ़े, समाज आगे बढ़े और हमारी युवा पीढ़ी सही दिशा में आगे बढ़े। मैं उन सभी बच्चों से कहना चाहता हूं—आओ, बीती बातों को भूलकर मेरे साथ चलो। हम सब मिलकर एक मजबूत, संस्कारी और विकसित भारत का निर्माण करें।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश आज केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में संवाद, सहिष्णुता, क्षमा और राष्ट्रहित की भावना को मजबूत करने वाला प्रेरक संदेश बनकर उभरा है। यह संदेश बताता है कि गालियों से नहीं, बल्कि प्रेम, संस्कार और मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र मजबूत बनता है।1