मेड़ता में भाजपा का दबदबा, 40 में 21 वार्डों पर कब्जा,बगावत और विपरीत समीकरणों के बावजूद कमल ने पार किया बहुमत का आंकड़ा मेड़ता में भाजपा का दबदबा, 40 में 21 वार्डों पर कब्जा टिकट विरोध, बगावत और विपरीत समीकरणों के बावजूद कमल ने पार किया बहुमत का आंकड़ा स्थानीय संगठन की रणनीति और प्रत्याशी चयन ने बदली चुनावी तस्वीर; कांग्रेस 12, निर्दलीय 6 वार्डों में जीते मेड़ता नगर पालिका चुनाव का जनादेश अब पूरी तरह साफ हो चुका है। 40 वार्डों में भाजपा ने 21 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। बहुमत के लिए जरूरी 21 के आंकड़े से भाजपा एक सीट आगे रही। कांग्रेस को 12 वार्डों में सफलता मिली, जबकि 6 वार्डों में निर्दलीय एक सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। यह परिणाम इसलिए खास है क्योंकि चुनाव से पहले भाजपा के सामने टिकट वितरण को लेकर असंतोष, बगावत और कई वार्डों में विपरीत स्थानीय समीकरणों की चुनौती थी। इसके बावजूद पार्टी 21 सीटों तक पहुंची। चुनाव परिणामों को स्थानीय संगठन की रणनीति और जमीनी प्रत्याशी चयन की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। 21 चेहरों ने लिखी भाजपा की जीत की कहानी भाजपा की जीत का आधार बने 21 विजयी पार्षदों में— वार्ड 5 — किशनाराम वार्ड 6 — कमल किशोर शर्मा वार्ड 7 — दिनेश वार्ड 10 — पिंकू माली वार्ड 11 — सरोज वार्ड 12 — दिलीप कुमार प्रजापति वार्ड 13 — विशाल बोराणा वार्ड 14 — महेंद्र वार्ड 16 — प्रेमलता वार्ड 21 — निरंजन सोनी वार्ड 22 — ज्योति प्रकाश सोनी वार्ड 24 — युवा भाजपा नेत्री स्वेता सोनी दूसरी बार रिपीट वार्ड 25 — पूर्व पार्षद रामनिवास बोराणा वार्ड 26 — सुरेश वार्ड 27 — अशोक वार्ड 28 — इंदु बाला सिंघवी वार्ड 29 — शांतिलाल वार्ड 30 — गुलाब वार्ड 31 — कंचन देवी सांखला वार्ड 32 — रमेश वार्ड 35 — सुनीता वार्ड 36 — दूसरी बार रिपीट श्रीकांत बजाज इन 21 जीतों ने भाजपा को नगर पालिका में स्पष्ट बहुमत की स्थिति में ला कर खड़ा किया है। एक-एक वोट से लेकर बड़े अंतर तक भाजपा की जीत भाजपा के प्रदर्शन में मुकाबले की विविध तस्वीर दिखाई दी। वार्ड 10 में पिंकू माली ने मंजू देवी को केवल एक मत से हराया। वार्ड 32 में रमेश ने विजय राज को 44 मतों से, वार्ड 21 में निरंजन सोनी ने नरेश कुमार को 62 मतों से तथा वार्ड 31 में कंचन देवी सांखला ने लिवलीना सारस्वत को 165 मतों से पराजित किया। वहीं वार्ड 30 में गुलाब ने गंगा देवी को 300 मतों से तथा वार्ड 16 में प्रेमलता ने राधेश्याम पाठक को 169 मतों से हराया। यानी भाजपा की जीत केवल एकतरफा लहर का परिणाम नहीं रही, बल्कि अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग समीकरणों से बनी तस्वीर रही। कांग्रेस ने 12 वार्ड जीते, लेकिन बहुमत की दौड़ से दूर रही कांग्रेस के खाते में 12 सीटें आईं। उसके विजयी प्रत्याशियों में अमजद खान, नसीम बानो, कदमा देवी, बजरंग लाल, नोरतमल तेज़ी, मोहम्मद उमर, नगमा परवीन, जाकिर हुसैन, नंद किशोर, नाज परवीन, लीला देवी और शरफराजुद्दीन शामिल हैं। कांग्रेस के लिए कुछ वार्डों में प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। वार्ड 8 में कदमा देवी ने भाजपा की प्रियंका को 538 मतों से हराया, जबकि वार्ड 20 में जाकिर हुसैन ने सद्दाम हुसैन को 531 मतों से शिकस्त दी। वार्ड 37 में नाज परवीन ने 338 मतों के अंतर से जीत हासिल की। लेकिन कुल 40 वार्डों के गणित में कांग्रेस 12 पर रुक गई और भाजपा से 10 सीट पीछे रही। यही अंतर नगर पालिका की सत्ता के लिए निर्णायक बन गया। निर्दलीयों ने छह वार्डों में दिखाया दम निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मनु कंवर, जालम सिंह, राधा, शबाना बानो, नोरती देवी और सुशीला ने क्रमशः वार्ड 1, 2, 9, 23, 33 और 39 में जीत हासिल की। इन छह जीतों ने यह संदेश भी दिया कि मेड़ता के कई वार्डों में दलीय पहचान के साथ व्यक्तिगत जनाधार और स्थानीय समीकरण भी निर्णायक रहे। भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों को कुछ वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कड़ी चुनौती दी। भाजपा की जीत में संगठन की भूमिका पर चर्चा चुनाव से पहले भाजपा के टिकट वितरण को लेकर जिस प्रकार की नाराजगी सामने आई थी, उसके मुकाबले 22 सीटों का परिणाम पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्थानीय राजनीतिक आकलन में मंडल महामंत्री राम कैलाश गट्टानी, गणपत सिंह पिडीहार, सहित मंडल के अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वार्ड स्तर पर संगठन की सक्रियता, स्थानीय समीकरणों की समझ और प्रत्याशी चयन ने भाजपा को कई कठिन मुकाबलों में बढ़त दिलाई। हालांकि यही चुनाव पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी छोड़ गया है। जहां स्थानीय संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय के अनुरूप प्रत्याशी चयन हुआ, वहां परिणाम अपेक्षाकृत मजबूत रहे। वहीं कुछ वार्डों में स्थानीय मंडल के पैनल से अलग अथवा ऊपर से आए टिकटों के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि सभी वार्डों में स्थानीय संगठन की राय को समान महत्व मिला होता तो भाजपा का आंकड़ा 22 से आगे जा सकता था। यह बात फिलहाल चुनावी विश्लेषण का विषय है, लेकिन परिणामों ने इतना जरूर दिखा दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव में जमीनी पकड़ वाला प्रत्याशी पार्टी के चुनाव चिह्न जितना ही महत्वपूर्ण होता है। मेड़ता का जनादेश : बहुमत भाजपा के पास, जिम्मेदारी भी भाजपा की भाजपा — 22 कांग्रेस — 12 निर्दलीय — 6 कुल — 40 अब चुनावी संघर्ष समाप्त हो चुका है और सत्ता की जिम्मेदारी शुरू होने जा रही है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए जनता की अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी। सड़क, नाली, सफाई, जल निकासी, आवारा पशु, यातायात और शहर के विकास जैसे स्थानीय मुद्दों पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा काम का हिसाब महत्वपूर्ण होगा। युवा समाजसेवी एवं शिक्षाविद मरुधर एजुकेशन ग्रुप के निदेशक किशन सिंह चंपावत ने बताया कि मेड़ता ने भाजपा को बहुमत दिया है, लेकिन यह बहुमत केवल जीत का प्रमाणपत्र नहीं—जवाबदेही का जनादेश भी है। टिकट विरोध और बगावत के बावजूद 22 सीटें हासिल करना भाजपा संगठन की चुनावी सफलता है। कांग्रेस के 12 और निर्दलीयों के 6 वार्डों में जीत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती 22 पार्षदों को एकजुट रखते हुए शहर के विकास के एजेंडे को जमीन पर उतारने की होगी। जनता ने बोर्ड की चाबी भाजपा को सौंप दी है; अब मेड़ता देखेगा कि यह बहुमत शहर की राजनीति बदलता है या सिर्फ सत्ता का समीकरण।
मेड़ता में भाजपा का दबदबा, 40 में 21 वार्डों पर कब्जा,बगावत और विपरीत समीकरणों के बावजूद कमल ने पार किया बहुमत का आंकड़ा मेड़ता में भाजपा का दबदबा, 40 में 21 वार्डों पर कब्जा टिकट विरोध, बगावत और विपरीत समीकरणों के बावजूद कमल ने पार किया बहुमत का आंकड़ा स्थानीय संगठन की रणनीति और प्रत्याशी चयन ने बदली चुनावी तस्वीर; कांग्रेस 12, निर्दलीय 6 वार्डों में जीते मेड़ता नगर पालिका चुनाव का जनादेश अब पूरी तरह साफ हो चुका है। 40 वार्डों में भाजपा ने 21 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। बहुमत के लिए जरूरी 21 के आंकड़े से भाजपा एक सीट आगे रही। कांग्रेस को 12 वार्डों में सफलता मिली, जबकि 6 वार्डों में निर्दलीय एक सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। यह परिणाम इसलिए खास है क्योंकि चुनाव से पहले भाजपा के सामने टिकट वितरण को लेकर असंतोष, बगावत और कई वार्डों में विपरीत स्थानीय समीकरणों की चुनौती थी। इसके बावजूद पार्टी 21 सीटों तक पहुंची। चुनाव परिणामों को स्थानीय संगठन की रणनीति और जमीनी प्रत्याशी चयन की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। 21 चेहरों ने लिखी भाजपा की जीत की कहानी भाजपा की जीत का आधार बने 21 विजयी पार्षदों में— वार्ड 5 — किशनाराम वार्ड 6 — कमल किशोर शर्मा वार्ड 7 — दिनेश वार्ड 10 — पिंकू माली वार्ड 11 — सरोज वार्ड 12 — दिलीप कुमार प्रजापति वार्ड 13 — विशाल बोराणा वार्ड 14 — महेंद्र वार्ड 16 — प्रेमलता वार्ड 21 — निरंजन सोनी वार्ड 22 — ज्योति प्रकाश सोनी वार्ड 24 — युवा भाजपा नेत्री स्वेता सोनी दूसरी बार रिपीट वार्ड 25 — पूर्व पार्षद रामनिवास बोराणा वार्ड 26 — सुरेश वार्ड 27 — अशोक वार्ड 28 — इंदु बाला सिंघवी वार्ड 29 — शांतिलाल वार्ड 30 — गुलाब वार्ड 31 — कंचन देवी सांखला वार्ड 32 — रमेश वार्ड 35 — सुनीता वार्ड 36 — दूसरी बार रिपीट श्रीकांत बजाज इन 21 जीतों ने भाजपा को नगर पालिका में स्पष्ट बहुमत की स्थिति में ला कर खड़ा किया है। एक-एक वोट से लेकर बड़े अंतर तक भाजपा की जीत भाजपा के प्रदर्शन में मुकाबले की विविध तस्वीर दिखाई दी। वार्ड 10 में पिंकू माली ने मंजू देवी को केवल एक मत से हराया। वार्ड 32 में रमेश ने विजय राज को 44 मतों से, वार्ड 21 में निरंजन सोनी ने नरेश कुमार को 62 मतों से तथा वार्ड 31 में कंचन देवी सांखला ने लिवलीना सारस्वत को 165 मतों से पराजित किया। वहीं वार्ड 30 में गुलाब ने गंगा देवी को 300 मतों से तथा वार्ड 16 में प्रेमलता ने राधेश्याम पाठक को 169 मतों से हराया। यानी भाजपा की जीत केवल एकतरफा लहर का परिणाम नहीं रही, बल्कि अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग समीकरणों से बनी तस्वीर रही। कांग्रेस ने 12 वार्ड जीते, लेकिन बहुमत की दौड़ से दूर रही कांग्रेस के खाते में 12 सीटें आईं। उसके विजयी प्रत्याशियों में अमजद खान, नसीम बानो, कदमा देवी, बजरंग लाल, नोरतमल तेज़ी, मोहम्मद उमर, नगमा परवीन, जाकिर हुसैन, नंद किशोर, नाज परवीन, लीला देवी और शरफराजुद्दीन शामिल हैं। कांग्रेस के लिए कुछ वार्डों में प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। वार्ड 8 में कदमा देवी ने भाजपा की प्रियंका को 538 मतों से हराया, जबकि वार्ड 20 में जाकिर हुसैन ने सद्दाम हुसैन को 531 मतों से शिकस्त दी। वार्ड 37 में नाज परवीन ने 338 मतों के अंतर से जीत हासिल की। लेकिन कुल 40 वार्डों के गणित में कांग्रेस 12 पर रुक गई और भाजपा से 10 सीट पीछे रही। यही अंतर नगर पालिका की सत्ता के लिए निर्णायक बन गया। निर्दलीयों ने छह वार्डों में दिखाया दम निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मनु कंवर, जालम सिंह, राधा, शबाना बानो, नोरती देवी और सुशीला ने क्रमशः वार्ड 1, 2, 9, 23, 33 और 39 में जीत हासिल की। इन छह जीतों ने यह संदेश भी दिया कि मेड़ता के कई वार्डों में दलीय पहचान के साथ व्यक्तिगत जनाधार और स्थानीय समीकरण भी निर्णायक रहे। भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकृत प्रत्याशियों को कुछ वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कड़ी चुनौती दी। भाजपा की जीत में संगठन की भूमिका पर चर्चा चुनाव से पहले भाजपा के टिकट वितरण को लेकर जिस प्रकार की नाराजगी सामने आई थी, उसके मुकाबले 22 सीटों का परिणाम पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्थानीय राजनीतिक आकलन में मंडल महामंत्री राम कैलाश गट्टानी, गणपत सिंह पिडीहार, सहित मंडल के अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वार्ड स्तर पर संगठन की सक्रियता, स्थानीय समीकरणों की समझ और प्रत्याशी चयन ने भाजपा को कई कठिन मुकाबलों में बढ़त दिलाई। हालांकि यही चुनाव पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी छोड़ गया है। जहां स्थानीय संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय के अनुरूप प्रत्याशी चयन हुआ, वहां परिणाम अपेक्षाकृत मजबूत रहे। वहीं कुछ वार्डों में स्थानीय मंडल के पैनल से अलग अथवा ऊपर से आए टिकटों के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि सभी वार्डों में स्थानीय संगठन की राय को समान महत्व मिला होता तो भाजपा का आंकड़ा 22 से आगे जा सकता था। यह बात फिलहाल चुनावी विश्लेषण का विषय है, लेकिन परिणामों ने इतना जरूर दिखा दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव में जमीनी पकड़ वाला प्रत्याशी पार्टी के चुनाव चिह्न जितना ही महत्वपूर्ण होता है। मेड़ता का जनादेश : बहुमत भाजपा के पास, जिम्मेदारी भी भाजपा की भाजपा — 22 कांग्रेस — 12 निर्दलीय — 6 कुल — 40 अब चुनावी संघर्ष समाप्त हो चुका है और सत्ता की जिम्मेदारी शुरू होने जा रही है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए जनता की अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी। सड़क, नाली, सफाई, जल निकासी, आवारा पशु, यातायात और शहर के विकास जैसे स्थानीय मुद्दों पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा काम का हिसाब महत्वपूर्ण होगा। युवा समाजसेवी एवं शिक्षाविद मरुधर एजुकेशन ग्रुप के निदेशक किशन सिंह चंपावत ने बताया कि मेड़ता ने भाजपा को बहुमत दिया है, लेकिन यह बहुमत केवल जीत का प्रमाणपत्र नहीं—जवाबदेही का जनादेश भी है। टिकट विरोध और बगावत के बावजूद 22 सीटें हासिल करना भाजपा संगठन की चुनावी सफलता है। कांग्रेस के 12 और निर्दलीयों के 6 वार्डों में जीत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती 22 पार्षदों को एकजुट रखते हुए शहर के विकास के एजेंडे को जमीन पर उतारने की होगी। जनता ने बोर्ड की चाबी भाजपा को सौंप दी है; अब मेड़ता देखेगा कि यह बहुमत शहर की राजनीति बदलता है या सिर्फ सत्ता का समीकरण।
- वार्ड क्रमांक 31 रुकमा देवी जी व पवन कुमार कच्छावा विजेता1
- झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे मायूस, मूंग की फसल पर मंडराया संकट रियां बड़ी क्षेत्र में खरीफ की फसल इस समय कटाई और पकने की स्थिति में है। ऐसे में लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बन गई है।3
- झालावाड़ राजस्थान नोलाई में भूकम्प के झटके का CCTV वीडियो झालावाड़ राजस्थान जैतारण राधेश्याम दाधीच नोलाई में भूकम्प के झटके का CCTV वीडियो1
- पीसांगन :नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए आज जीरो नामांकन,कल नामांकन की आखिरी तारीख... पीसांगन नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के पहले दिन आज एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ। रिटर्निंग अधिकारी मोहन चौधरी के अनुसार नामांकन 15-16 सितंबर तक होना है। कल 16 सितंबर आखिरी तारीख है। 17 को जांच, आवश्यक हुआ तो 21 को होगा मतदान।2
- पीसांगन नगर पालिका का पहला अध्यक्ष कौन बनेगा, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में अलग-अलग जगह पर बैठकों का दौर जारी, पहला अध्यक्ष कुमावत समाज का बनने की संभावना पीसांगन नगर पालिका का पहला अध्यक्ष कौन बनेगा, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में अलग-अलग जगह पर बैठकों का दौर जारी, पहला अध्यक्ष कुमावत समाज का बनने की संभावना1
- राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भाजपा को मिला जनादेश जनसेवा, विकास और सुशासन के संकल्प पर जनता की मुहर है। हमारी सरकार शहरी विकास, बेहतर नागरिक सुविधाओं, सुदृढ़ आधारभूत ढांचे और पारदर्शी सुशासन के माध्यम से शहरों के सर्वांगीण विकास को नई गति दे रही है। इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए प्रदेश की देवतुल्य जनता का हृदय से धन्यवाद एवं आभार! भाजपा के सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं को उनके अथक परिश्रम और समर्पण के लिए हार्दिक बधाई! #सशक्त_शहर_समृद्ध_राजस्थान #कोने_कोने_में_भाजपा1
- AJMER कांग्रेस के जीते हुए पार्षदों को दिलाई शपथ Dainik News AJMER1
- राजस्थान में नगर निकाय अध्यक्ष चुनाव का शंखनाद - राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की लोक सूचना,पीसांगन सहित प्रदेश के 185 निकायों में होगा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव......... राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान ने आज बड़ी खबर जारी की है। आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव *राजेश वर्मा* ने आदेश क्रमांक *एफ.4(1)(1)/नपा/रा-नि-आ/26/8798 दिनांक 15/09/2026* से *नगरपालिका बोर्ड / नगर परिषद / नगर निगम के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षित निर्वाचन* की लोक सूचना जारी कर दी है। राजपत्र विशेषांक दिनांक 15.09.2026 के भाग 6(क) में प्रकाशनार्थ यह सूचना जारी हुई है। *पीसांगन के लिए क्यों अहम है ये आदेश?* जारी सूची में (1) में स्पष्ट रूप से *पीसांगन, नसीराबाद, केकड़ी, सरवाड़, टाटोटी, सावर, नांदौर, जायल, मण्डवा, बासनी, कुचेरा, पिपाड़, देवली, उनियारा, दूनी, ब्यावर, विजयनगर, मसूदा, भीनमाल, बीगोद* सहित अजमेर संभाग के लगभग सभी निकाय शामिल हैं। कुल 185 से ज्यादा निकायों में अध्यक्ष चुना जाना है। *चुनाव का पूरा कार्यक्रम - नोट कर लीजिए* आयोग द्वारा जारी बिंदु (2) के अनुसार निर्वाचन कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा - - *(क) नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने की तिथि और समय:* दिनांक *15.09.2026 से 16.09.2026 तक* (प्रातः 10:30 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक) - *(ख) नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा की तारीख:* *17.09.2026* - *(ग) अभ्यर्थिता वापस लेने की अंतिम तिथि एवं समय:* *18.09.2026 (अपराह्न 3:00 बजे तक)* - *(घ) मतदान की तारीख:* *21.09.2026* - *(ङ) मतदान का समय:* प्रातः *10:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक* आदेश की प्रतिलिपि क्रमांक 8799-8803 से शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, निदेशक एवं विशिष्ट सचिव, आयुक्त सूचना जनसंपर्क और समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेज दी गई है। पीसांगन में वार्ड पार्षदों की शपथ प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 21 सितंबर को होने वाला अध्यक्ष का चुनाव सबसे बड़ा सियासी मुकाबला होगा।2