*चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत पांच पर FIR* *सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन* प्रयागराज। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज, गोरखपुर में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई है। आरोपियों में CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है। *हाईकोर्ट में लंबित है प्रबंध समिति का विवाद* शिकायतकर्ता के मुताबिक सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से कॉलेज का संचालन होता है। सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शिकायत में बताया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार,फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। *फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप* आरोप है कि इसके बावजूद CNI के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल, रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें एक नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया। *प्रबंध समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर कराने का आरोप* शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर कथित सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए। इसमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी सामने आए हैं। बाद में दोनों को कथित दस्तावेजों की वास्तविकता की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और कथित फर्जी नियुक्ति पत्र को निरस्त करने की मांग की। *साइबर कैफे में दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप* शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रयागराज के अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए गए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जाना था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पूर्व में भी कथित तौर पर इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। *पुलिस करेगी डिजिटल साक्ष्यों की जांच* शिकायतकर्ता ने मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित साइबर कैफे, कंप्यूटर, इंटरनेट गतिविधियों और तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। *जांच के बाद साफ होगी आरोपों की हकीकत* कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से फर्जीवाड़ा, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में ही कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता और आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी। *चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत पांच पर FIR* *सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन* प्रयागराज। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज, गोरखपुर में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई है। आरोपियों में CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है। *हाईकोर्ट में लंबित है प्रबंध समिति का विवाद* शिकायतकर्ता के मुताबिक सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से कॉलेज का संचालन होता है। सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शिकायत में बताया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार,फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। *फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप* आरोप है कि इसके बावजूद CNI के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल, रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें एक नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया। *प्रबंध समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर कराने का आरोप* शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर कथित सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए। इसमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी सामने आए हैं। बाद में दोनों को कथित दस्तावेजों की वास्तविकता की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और कथित फर्जी नियुक्ति पत्र को निरस्त करने की मांग की। *साइबर कैफे में दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप* शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रयागराज के अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए गए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जाना था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पूर्व में भी कथित तौर पर इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। *पुलिस करेगी डिजिटल साक्ष्यों की जांच* शिकायतकर्ता ने मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित साइबर कैफे, कंप्यूटर, इंटरनेट गतिविधियों और तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। *जांच के बाद साफ होगी आरोपों की हकीकत* कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से फर्जीवाड़ा, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में ही कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता और आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
*चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत पांच पर FIR* *सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन* प्रयागराज। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज, गोरखपुर में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई है। आरोपियों में CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है। *हाईकोर्ट में लंबित है प्रबंध समिति का विवाद* शिकायतकर्ता के मुताबिक सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से कॉलेज का संचालन होता है। सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शिकायत में बताया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार,फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। *फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप* आरोप है कि इसके बावजूद CNI के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल, रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें एक नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया। *प्रबंध समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर कराने का आरोप* शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर कथित सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए। इसमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी सामने आए हैं। बाद में दोनों को कथित दस्तावेजों की वास्तविकता की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और कथित फर्जी नियुक्ति पत्र को निरस्त करने की मांग की। *साइबर कैफे में दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप* शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रयागराज के अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए गए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जाना था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पूर्व में भी कथित तौर पर इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। *पुलिस करेगी डिजिटल साक्ष्यों की जांच* शिकायतकर्ता ने मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित साइबर कैफे, कंप्यूटर, इंटरनेट गतिविधियों और तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। *जांच के बाद साफ होगी आरोपों की हकीकत* कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से फर्जीवाड़ा, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में ही कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता और आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी। *चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप समेत पांच पर FIR* *सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में फर्जी नियुक्ति का प्रयास करने का आरोप, हाईकोर्ट में प्रबंध समिति का विवाद विचाराधीन* प्रयागराज। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज, गोरखपुर में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जीवाड़े के मामले में कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) के पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई है। आरोपियों में CNI की लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान का नाम भी शामिल है। *हाईकोर्ट में लंबित है प्रबंध समिति का विवाद* शिकायतकर्ता के मुताबिक सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन नामक सोसायटी के माध्यम से कॉलेज का संचालन होता है। सोसायटी की पंजीकृत नियमावली में प्रबंध समिति को कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। वर्तमान में सोसायटी की प्रबंध समिति को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। शिकायत में बताया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार,फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, गोरखपुर मंडल ने 7 मार्च 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट के निर्णय के बिना प्रबंध समिति की बैठक कर उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। *फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप* आरोप है कि इसके बावजूद CNI के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित शह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल, रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें एक नियुक्ति पत्र भी शामिल था, जिसमें रैना निवेदिता सैमुअल को सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही एक कथित अवैध सर्कुलर भी तैयार कराया गया। *प्रबंध समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर कराने का आरोप* शिकायत के अनुसार आरोपियों ने प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों पर दबाव बनाकर कथित सर्कुलर पर हस्ताक्षर भी कराए। इसमें प्रयागराज के एक कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण सालिक मोजेस और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेवरेंट प्रवीण मेसी के नाम भी सामने आए हैं। बाद में दोनों को कथित दस्तावेजों की वास्तविकता की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने हस्ताक्षर वापस लेने और कथित फर्जी नियुक्ति पत्र को निरस्त करने की मांग की। *साइबर कैफे में दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप* शिकायतकर्ता ने एक व्यक्ति से हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि प्रयागराज के अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में कंप्यूटर और इंटरनेट की मदद से कई दस्तावेज तैयार कराए गए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को फंसाने और उसके खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जाना था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग पूर्व में भी कथित तौर पर इस तरह के दस्तावेज तैयार कर लोगों को मुकदमों में फंसाने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। *पुलिस करेगी डिजिटल साक्ष्यों की जांच* शिकायतकर्ता ने मामले में अज्ञात लोगों की भूमिका की भी आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस द्वारा कथित साइबर कैफे, कंप्यूटर, इंटरनेट गतिविधियों और तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पहले कैंट थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। *जांच के बाद साफ होगी आरोपों की हकीकत* कैंट थाना प्रभारी अमरनाथ राय ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से फर्जीवाड़ा, जाली दस्तावेज तैयार करने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में ही कथित फर्जी दस्तावेजों की वास्तविकता और आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
- योगी जी की सरकार में अब रिटायर्ड दरोगा डर गये एससी एसटी ऐक्ट से देखें पूरा सच लोगों में बना चर्चा योगी जी की सरकार में अब रिटायर्ड दरोगा डर गये एससी एसटी ऐक्ट से देखें पूरा सच लोगों में बना चर्चा ? रिटायर्ड दरोगा की अपनी जमीन पर दबंग नहीं बनने दें रहे मकान आप रिटायर्ड दरोगा जी को मनोज भारतीया और उनके परिवार वाले एससी एसटी केस में फसाने की दे रहे हैं धमकियां प्रयागराज एक तरफ योगी सरकार का दावा है की जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है तब से हमारा उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हो गया है भाजपा सरकार में माफिया या तो उत्तर प्रदेश छोड़कर चले गए हैं या तो जेल के काल कोठरी अपनी बची हुई जिंदगी के दिन जिन रहे हैं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का दावा है हमारी सरकार माफियाओं पर पूरी नकेल कस चुकी है एक तरफ योगी सरकार माफियाओं पर नकेल कसने की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ प्रयागराज के थाना नैनी के देवरख के उपरहार में माफियाओ द्वारा खुली चुनौती दी जा रही हैं जहाँ पर पुलिस विभाग में जीवन भर सेवा दे चुके दो दरोगा सहित कुल आधा दर्जन लोगों ने 2018 में एक जमीन रजिस्ट्री कराया और उस जमीन में नीव खोदकर पिलर को खड़ा कर दिया कुछ साल बाद उस जमीन पर पीड़ित जब मकान बनाने जाते हैं तो इसी गाव के कुछ दबंगों द्वारा अपनी जमीन कहकर काम को रोक दिया जाता है और उसी जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा करने की नीयत से निर्माण करना शुरू किया जाता है जब मामले की जानकारी पीड़ित परिवार को हुई तो पीड़ित परिवार परेशान हुआ तब सभी पीड़ित उपजिला अधिकारी करछना से न्याय की गुहार लगाई उपजिला अधिकारी ने जांच कर दबंगों द्वारा किया जा रहा कार्य को रोक दिया पीड़ितों का आरोप है दबंगों द्वारा हम लोगों को धमकी दी जा रही है की इस जमीन को छोड़ दो नहीं तो इस जमीन पर खून खराबा होगा और सभी खाताधारकों के पूरे परिवार को S,CS,T का मुकदमा दर्ज करा कर जेल भेजने की धमकी दी पीड़ित परिवार पूरी तरह डरा सहमा है पीड़ित परिवार न्याय पाने के लिए जिला अधिकारि और DCP यमुनानगर से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई DCP यमुनानगर ने कहा मामले की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी #वायरल #योगी #मोदी #प्रयागराज #राम #करछना #दरोगा सच का प्रतीक न्यूज1
- प्रयागराज: AIMIM पार्टी द्वारा मोहम्मद तालिब को प्रयागराज का वरिष्ठ उपाध्यक्ष और आज़ाद सिद्दीकी को सचिव की दी गयी जिम्मेदारी.... प्रयागराज। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन एआईएमआईएम AIMIM का बढ़ता हुआ कारवां शहर दक्षिण विधानसभा महेवा में एक रूम मीटिंग मोहम्मद तालिब के निवास में आहुत हुई जिसमें सैकड़ों लोगों ने एआईएमआईएम पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर और बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी से प्रभावित होकर महानगर अध्यक्ष अफ़सर महमूद के नेतृत्व में एआईएमआईएम पार्टी की सदस्यता ली। मोहम्मद तालिब को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आज़ाद सिद्दिकी को महानगर सचिव नियुक्त पत्र दिया गया । मुख्य अतिथि प्रदेश सचिव मुजीबुर्रहमान एडवोकेट थे। मीटिंग में मुख्य रूप से उपस्थित लोगों में महानगर उपाध्यक्ष रियाज़ुल हक़ चौधरी, महानगर कार्यकारिणी सदस्य मुहम्मद शहजादे, आयाज़ अली, मोहम्मद ज़ुबैर, अब्दुल्ला, मोहम्मद आसिफ़, मकसूद आलम, इबाद हुसैन, इरफान, बिलाल, कामरान, फरहान, यासिर, आसिम,सैफ, माज़, आवेश, मीजान, इब्राहीम, शाद, आमिर, सलमान, हुमैद, अदनान, आमिर फ़हीम अहमद आदि लोग मौजूद थे।2
- आस्था और उल्लास के साथ निकला ईद-मिलादुन्नबी का जुलूस, या नबी की सदाओं से गूंज उठा संगम शहर राजेश सरकार प्रयागराज। संगम नगरी में 11 रबीउल अव्वल को ईशा की नमाज के बाद जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का पारंपरिक जुलूस अकीदत और बेहद उल्लास के साथ निकाला गया। पैगंबर-ए-इस्लाम की आमद की खुशी में निकले इस मुख्य जुलूस में हजारों की संख्या में जायरीन शामिल हुए। जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और पुलिस महकमा मुस्तैद दिखा।1
- श्री लीला बाबा महाराज मंदिर परिसर में गिरा पुराना पीपल का पेड़ प्रयागराज। बहादुरपुर क्षेत्र के ग्राम सभा लीलापुर कला गांव स्थित श्री लीला बाबा महाराज मंदिर परिसर में बुधवार को एक पुराना पीपल का पेड़ अचानक गिर गया। पेड़ काफी वर्षों पुराना बताया जा रहा है और मंदिर परिसर में लंबे समय से धार्मिक आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र बना हुआ था। पेड़ गिरने की घटना के बाद कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में हलचल का माहौल रहा। संयोग से घटना के समय पेड़ के आसपास कोई श्रद्धालु या ग्रामीण मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, पेड़ काफी पुराना होने के कारण समय के साथ कमजोर हो गया था। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पेड़ का तना और उसकी शाखाएं मंदिर परिसर में गिरने से वहां आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीणों की ओर से गिरे हुए पेड़ को हटाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू किए गए। ग्रामीणों ने बताया कि पीपल का यह पेड़ लंबे समय से मंदिर परिसर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा था। धार्मिक महत्व के कारण स्थानीय लोगों की इससे विशेष आस्था जुड़ी हुई थी। पेड़ के गिरने से ग्रामीणों में निराशा भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मंदिर परिसर में गिरे पेड़ के तने और डालियों को शीघ्र हटवाने की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं के आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो और मंदिर परिसर को जल्द व्यवस्थित किया जा सके।1
- प्रयागराज: झूंसी के राधे कृष्णा मंदिर से जुड़ी सड़क बदहाल, बारिश में जलभराव से राहगीर परेशान प्रयागराज। झूंसी क्षेत्र स्थित राधे कृष्णा मंदिर को मेन रोड से जोड़ने वाली सड़क इन दिनों बदहाली का शिकार है। सामने बसंत हॉस्पिटल होने के बावजूद सड़क की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह पानी भर गया है और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। वीडियो में सड़क पर जमा पानी और खराब सड़क की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। पानी भरे गड्ढों से होकर राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को निकलना पड़ रहा है। जलभराव के कारण सड़क की स्थिति और खराब होती जा रही है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग राधे कृष्णा मंदिर को मुख्य सड़क से जोड़ता है और आसपास के लोगों के साथ-साथ अस्पताल आने-जाने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत और जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के समय समस्या बढ़ जाती है। लोगों ने संबंधित नगर निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सड़क का स्थायी समाधान कराया जाए, गड्ढों की मरम्मत के साथ जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव न हो। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या का संज्ञान लेकर कब तक सड़क की स्थिति सुधारता है।1
- पकरी सेवार का आयुष्मान आरोग्य मंदिर भ्रष्टाचार का शिकार1
- गड्ढे में टवेरा धंसने से मचा हड़कंप मेजा, प्रयागराज। मेजारोड बाजार के पटेल नगर चौराहे से रेलवे स्टेशन बाइपास को जोड़ने वाली सड़क पर मंगलवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब रास्ते से गुजर रही एक टवेरा गाड़ी सड़क पर बने गहरे गड्ढे में जा घुसी। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह मशक्कत कर वाहन को गड्ढे से बाहर निकाला। प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग से सटे इस मार्ग पर करीब 10 से 12 फीट लंबे और लगभग चार फीट गहरे हिस्से में सड़क धंस गई है। इसी दौरान टवेरा वाहन वहां से गुजर रहा था। अचानक सड़क में धंसे हिस्से में वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह घुस गया। वाहन के गड्ढे में फंसते ही आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और काफी प्रयास के बाद वाहन को बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी मिलने पर मेजारोड चौकी प्रभारी हरिओम सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने सड़क की स्थिति को देखते हुए तत्काल बैरिकेडिंग कराकर रास्ते के क्षतिग्रस्त हिस्से को बंद करा दिया, ताकि कोई अन्य वाहन गड्ढे में न फंसे और संभावित हादसे को टाला जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का यह हिस्सा काफी समय से जर्जर था। लगातार बारिश के कारण सड़क और धंस गई, जिससे खतरा बढ़ गया है। मार्ग पर दिनभर छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। लोगों ने संबंधित विभाग से क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। गड्ढे में टवेरा धंसने से मचा हड़कंप मेजा, प्रयागराज। मेजारोड बाजार के पटेल नगर चौराहे से रेलवे स्टेशन बाइपास को जोड़ने वाली सड़क पर मंगलवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब रास्ते से गुजर रही एक टवेरा गाड़ी सड़क पर बने गहरे गड्ढे में जा घुसी। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह मशक्कत कर वाहन को गड्ढे से बाहर निकाला। प्रयागराज-मिर्जापुर राजमार्ग से सटे इस मार्ग पर करीब 10 से 12 फीट लंबे और लगभग चार फीट गहरे हिस्से में सड़क धंस गई है। इसी दौरान टवेरा वाहन वहां से गुजर रहा था। अचानक सड़क में धंसे हिस्से में वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह घुस गया। वाहन के गड्ढे में फंसते ही आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और काफी प्रयास के बाद वाहन को बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी मिलने पर मेजारोड चौकी प्रभारी हरिओम सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने सड़क की स्थिति को देखते हुए तत्काल बैरिकेडिंग कराकर रास्ते के क्षतिग्रस्त हिस्से को बंद करा दिया, ताकि कोई अन्य वाहन गड्ढे में न फंसे और संभावित हादसे को टाला जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का यह हिस्सा काफी समय से जर्जर था। लगातार बारिश के कारण सड़क और धंस गई, जिससे खतरा बढ़ गया है। मार्ग पर दिनभर छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। लोगों ने संबंधित विभाग से क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।1
- सोशल मीडिया की वायरल खबर, ट्रेन में बिना टिकट चढ़े सबइंस्पेक्टर और रेलवे TTE से तीखी बहस और गाली-गलौज... उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर और रेलवे के टीटीई (TTE) के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना अगस्त 2026 की है। घटना की विवाद की वजह दरोगा और उनके साथी पुलिसकर्मी बिना टिकट ट्रेन स्लीपर कोच में सवार हो गए थे। जब ड्यूटी पर तैनात टीटीई ने उनसे टिकट मांगा, तो दरोगा ने टिकट न होने की बात कही और जुर्माना देने से मना कर दिया। जिसको लेकर बहँस शुरू हो गयी इसी दौरान दरोगा ने गुस्से में आकर टीटीई से कहा, क्या तुम्हारे बाप की गाड़ी है, जो चढ़ने नहीं दोगे, इस पर टीटीई ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए तुरंत पलटकर जवाब दिया, क्या तुम्हारे बाप की गाड़ी है जो फ्री में चढ़ोगे, इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात तीखी नोकझोंक से बढ़कर गाली-गलौज तक पहुंच गई। ट्रेन में मौजूद अन्य यात्रियों और पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की और टीटीई को शांत कराया कि वहां महिलाएं भी बैठी हैं।सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूपी पुलिस और रेल मंत्रालय को टैग करके पुलिसकर्मी के इस बर्ताव पर आपत्ति जता रहे हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा कि ये 23 या 24 अगस्त 2026 की लिच्छवी एक्सप्रेस की है, लेकिन अभी तक पुष्टि नहीं पायी है।1