उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन तहसील के कमई गाँव के निवासियों ने जिला विकास अधिकारी को एक पत्र लिखकर गाँव में विकास कार्यों में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जाँच और आवश्यक कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से गाँव में कई विकास कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए गए हैं, जबकि जमीन पर उनकी स्थिति बेहद खराब है और इस संबंध में अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। गाँव में लगभग 8000 की आबादी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा इनका निस्तारण केवल अभिलेखों में कर दिया गया है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। जांच रिपोर्टों में भी गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं; एक रिपोर्ट में पेयजल समस्या से इनकार किया गया, वहीं दूसरी में अधिकारियों ने गंभीर संकट स्वीकार करते हुए चार पानी की टंकियां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। इसके अतिरिक्त, एक आईजीआरएस शिकायत की जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान और पंचायत सहायक की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि वे वास्तव में मौके पर मौजूद नहीं थे, जिसके वीडियो सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। रिपोर्टों में चार पानी की टंकियां लगाने की बात कही गई है, लेकिन मौके पर केवल एक टंकी दिखाई देती है। नई स्थापित टंकी का बेसमेंट निर्माण के तुरंत बाद धंस गया और उसमें दरारें आ गईं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह टंकी पहले से मौजूद मीठे पानी के ट्यूबवेल से लगभग 200 मीटर दूर ही स्थापित की गई है। पेयजल के अलावा, खड़ंजा/सड़क, नालियां, नियमित सफाई, आवास योजना, श्मशान घाट और अन्य मूलभूत विकास कार्यों की भी स्थिति अत्यंत खराब है। कई कार्य अभिलेखों में पूरे दर्शाए गए हैं, जबकि वे या तो अधूरे हैं या हुए ही नहीं हैं। मार्ग निर्माण के कई प्रकरणों पर विभिन्न विभागों (जैसे जिला पंचायत, लोक निर्माण विभाग, और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) द्वारा अलग-अलग आख्या प्रस्तुत की गई हैं, जिसके कारण आज तक मार्ग निर्माण लंबित है। बठैन ड्रेन में अवैध पुलियों के निर्माण के चलते जल निकासी बाधित हो रही है, जिससे वर्षा के समय जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कमई ब्रज क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहाँ श्री विशाखा रमण बिहारी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिला विकास अधिकारी से अनुरोध किया है कि सभी विकास कार्यों का उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए। उन्होंने पेयजल संकट, पानी की टंकियों के निर्माण और जांच रिपोर्टों में विरोधाभास की स्वतंत्र जांच की मांग की है, साथ ही संभावित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की भी अपील की है। उनका कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने, अभिलेखों में गलत तथ्य दर्ज करने, या कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान प्राप्त करने वाले किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि या ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन तहसील के कमई गाँव के निवासियों ने जिला विकास अधिकारी को एक पत्र लिखकर गाँव में विकास कार्यों में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जाँच और आवश्यक कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से गाँव में कई विकास कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए गए हैं, जबकि जमीन पर उनकी स्थिति बेहद खराब है और इस संबंध में अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। गाँव में लगभग 8000 की आबादी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा इनका निस्तारण केवल अभिलेखों में कर दिया गया है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है। जांच रिपोर्टों में भी गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं; एक रिपोर्ट में पेयजल समस्या से इनकार किया गया, वहीं दूसरी में अधिकारियों ने गंभीर संकट स्वीकार करते हुए चार पानी की टंकियां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। इसके अतिरिक्त, एक आईजीआरएस शिकायत की जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान और
पंचायत सहायक की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि वे वास्तव में मौके पर मौजूद नहीं थे, जिसके वीडियो सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। रिपोर्टों में चार पानी की टंकियां लगाने की बात कही गई है, लेकिन मौके पर केवल एक टंकी दिखाई देती है। नई स्थापित टंकी का बेसमेंट निर्माण के तुरंत बाद धंस गया और उसमें दरारें आ गईं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह टंकी पहले से मौजूद मीठे पानी के ट्यूबवेल से लगभग 200 मीटर दूर ही स्थापित की गई है। पेयजल के अलावा, खड़ंजा/सड़क, नालियां, नियमित सफाई, आवास योजना, श्मशान घाट और अन्य मूलभूत विकास कार्यों की भी स्थिति अत्यंत खराब है। कई कार्य अभिलेखों में पूरे दर्शाए गए हैं, जबकि वे या तो अधूरे हैं या हुए ही नहीं हैं। मार्ग निर्माण के कई प्रकरणों पर विभिन्न विभागों (जैसे जिला पंचायत, लोक निर्माण विभाग, और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) द्वारा अलग-अलग आख्या प्रस्तुत की गई हैं, जिसके कारण आज तक मार्ग निर्माण लंबित है। बठैन ड्रेन में अवैध पुलियों के निर्माण के चलते जल निकासी बाधित
हो रही है, जिससे वर्षा के समय जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कमई ब्रज क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहाँ श्री विशाखा रमण बिहारी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिला विकास अधिकारी से अनुरोध किया है कि सभी विकास कार्यों का उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए। उन्होंने पेयजल संकट, पानी की टंकियों के निर्माण और जांच रिपोर्टों में विरोधाभास की स्वतंत्र जांच की मांग की है, साथ ही संभावित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की भी अपील की है। उनका कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने, अभिलेखों में गलत तथ्य दर्ज करने, या कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान प्राप्त करने वाले किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि या ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- गृह, गोपालन, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने 28 जून को डीग के बृजनगर विधानसभा क्षेत्र स्थित फुटाकी गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों द्वारा मिले आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया, साथ ही चुनाव में मिले स्नेह और आशीर्वाद के प्रति सहृदय कृतज्ञता जताई। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे क्षेत्र में विकास कार्यों को निरंतर गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्री ने ग्रामीणों की मांग का सम्मान करते हुए फुटाकी गांव का नाम 'गुरुनानक नगर' करने की सकारात्मक मंशा व्यक्त की, जिसके लिए आवश्यक विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मंत्री ने क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने हेतु स्थानीय राजकीय विद्यालय को सीनियर सेकेंडरी स्कूल में क्रमोन्नत करने, गांव में अटल ज्ञान केंद्र खोलने और ग्राम सेवक भवन का निर्माण कराने के संबंध में विभागीय स्तर पर हरसंभव प्रयास करने का भी भरोसा दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गांव में सीसी सड़क निर्माण कार्य को पूर्ण गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्कूल और पूर्व स्वीकृत डीप-बोर के विद्युत कनेक्शन संबंधी तकनीकी अड़चनों को दूर कर उन्हें तुरंत चालू करने और ग्रामीणों की पेयजल समस्या के समाधान हेतु नए हैंडपंप लगवाने की बात भी कही। कानून व्यवस्था पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए गृह राज्य मंत्री बेढम ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियां, लूटपाट या असामाजिक कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई से कुछ तत्वों को परेशानी हो सकती है, लेकिन सरकार कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेगी और क्षेत्र की शांति व्यवस्था भंग करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मैदानी स्तर की समस्याओं के पारदर्शी समाधान के लिए, मंत्री ने ग्रामीणों को 10-11 सदस्यों की एक स्थानीय समन्वय टीम बनाने का सुझाव दिया, जो गांव की मूलभूत आवश्यकताओं के संबंध में निरंतर संवाद बनाए रखेगी। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं समय-समय पर क्षेत्र का दौरा कर इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।1
- वृंदावन स्थित विश्व प्राचीन बिरला मंदिर पर एक अवैध दारू ठेका बंद कराने की मांग को लेकर एक बाबा तेज अनशन पर बैठे हैं। उनका यह अनशन बिरला मंदिर के पास चल रहे अवैध शराब ठेके को तुरंत बंद कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।1
- दानवीर भामाशाह की जयंती के उपलक्ष्य में एक पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।1
- मथुरा-वृंदावन से सामने आ रही खबर के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और पति मानने वाली देवी इंदुलेखा ने आज ब्रज के मंदिरों और तीर्थस्थलों के आसपास मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर जल समाधि लेने का निर्णय लिया था। देवी इंदुलेखा का तर्क है कि मथुरा-वृंदावन में 'सनातन विचारधारा की सरकार' और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार होने के बावजूद, मंदिरों और धार्मिक स्थलों के पास शराब और मांस की बिक्री जारी है। उनका मानना है कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। निर्धारित समय पर जब वह जल समाधि के लिए पहुंचीं, तो प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और उन्हें जल समाधि लेने से सफलतापूर्वक रोक दिया। घटना स्थल पर काफी देर तक उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास चलता रहा। फिलहाल, स्थिति प्रशासन के नियंत्रण में है और लोग इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।1
- मांस और मदिरा की बिक्री के विरोध में देवी इंदुलेखा श्रृंगार घाट पर जल समाधि लेने पहुंची थीं। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें जल समाधि नहीं लेने दी।1
- डीग शहर के मेला मैदान में अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहीं आशा सहयोगिनियों ने सोमवार दोपहर करीब 12 बजे एक पानी की टंकी पर चढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया। अपनी मांगों का समाधान न होने से नाराज होकर दो आशा सहयोगिनी और दो पुरुष टंकी पर चढ़ गए, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर उपखंड अधिकारी अमित कुमार मीणा, सीओ सीताराम बैरवा, शहर कोतवाली थाना अधिकारी राम नरेश मीणा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय सिंघल, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मान सिंह और प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आशा सहयोगिनियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, जिसमें डॉ. मानसिंह और डॉ. जितेंद्र खुद टंकी की सीढ़ियों पर चढ़कर समझाइश कर रहे थे। हालांकि, आशा सहयोगिनियां अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। काफी मशक्कत के बाद, शाम करीब 4 बजे, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म से दूरभाष/वीडियो कॉल पर बातचीत होने के बाद ही आशा सहयोगिनी और दोनों पुरुष पानी की टंकी से नीचे उतरे। आशा सहयोगिनियों ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी राज्य सरकार और जिला प्रशासन को विभिन्न माध्यमों से कई बार ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों का अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान की आशा सहयोगिनियां कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण, जन-जागरूकता और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनका योगदान सराहनीय रहा है। इसके बावजूद, उन्हें उनके कार्य के अनुरूप उचित मानदेय और सुविधाएं प्राप्त नहीं हो रही हैं।4