Shuru
Apke Nagar Ki App…
*कुछ लापरवाही से अबतक नही बना यह स्कूल बच्चे शिक्षा से वंजछित आखिर गलती किसकी*
एनामुल हक
*कुछ लापरवाही से अबतक नही बना यह स्कूल बच्चे शिक्षा से वंजछित आखिर गलती किसकी*
More news from बिहार and nearby areas
- भगवान सबके साथ है1
- सांडिया पंचायत में आगामी होने वाले कार्यक्रम को लेकर हरेंद्र प्रसाद मुखिया ने दी जानकारी1
- शिक्षा विभाग, भोजपुर (आरा) — सम्मान समारोह — में सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। 📅 दिनांक: 11 अप्रैल 2026 ⏰ समय: प्रातः 11:00 बजे 📍 स्थान: समाहरणालय सभागार, भोजपुर (आरा) आयोजक: शिक्षा विभाग, भोजपुर (आरा) इस अवसर पर जिले के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। सभी संबंधितों की गरिमामयी उपस्थिति सादर अपेक्षित है।2
- ममता के गढ़ आसनसोल में मोदी का रोड शो, शाह की चाल, महिला बिल पर सीडब्ल्यूसी, नितीश का डिमोशन सीएम से सांसद,अखिलेश चाहते पीएम से रिटायर हों नितीश और ट्रंप का वाइफ पतिके साथ एपस्टिन मायने में..... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....1
- Post by Manoj kumar Singh1
- Post by N BHARAT NEWS 3651
- Post by एनामुल हक1
- सबके साथ भगवान है1
- महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय "माटी बोलेगी एक दिन" ना तख़्त रहेगा, ना ताज रहेगा, ये दुनिया है फानी, कहाँ राज रहेगा, ना जब एक भी ये कहानी रहेगी, तो माटी सभी की गवाही कहेगी, तो माटी सभी की गवाही कहेगी। कहेगी ये कुर्सी के झगड़ों की बातें, कहेगी ये झूठी इबारत की रातें, जो जनता के नाम पे खेला गया है, वो हर एक चेहरा उघाड़ा गया है, ये सत्ता की हर चाल पुरानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी। जो वादे थे काग़ज़ पे लिखकर मिटाए, जो सपने थे आँखों में लेकिन बुझाए, चुनावों में जो मीठी बातें सुनाई, हकीकत में जनता ही सबसे रुलाई, ये आँसू की हर एक कहानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी। कहीं धर्म के नाम पे दीवार खड़ी है, कहीं जाति की आग में बस्ती जली है, इंसान ही इंसान से डरने लगा है, मोहब्बत का रिश्ता भी मरने लगा है, ये नफ़रत की हर बदगुमानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी। जो बिकती रही ख़बरों की सच्चाई, जो दबती रही हर तरफ़ से सुनवाई, कलम भी कहीं डर के साए में खोई, आवाज़ भी सच की कहीं जा के रोई, ये स्याही भी अपनी जुबानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी। मगर याद रखना ये बदलेगा मंजर, उठेगा फिर इक सच का जलता हुआ सर, न झूठों का मेला, न डर का बसेरा, जगेगा फिर इंसाफ का वो सवेरा, ये बदलाव की नई कहानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी। कलम ये “परवेज़ भारतीय ” की जब बोलेगी, तो सच की ही ज्वाला ये खोलेगी, न डर सत्ता का, न झूठ का पहरा, ये शब्द बनेंगे जनता का चेहरा, ये आवाज़ नई एक रवानी कहेगी, ये माटी सभी की गवाही कहेगी।2