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शराब के नशे में पत्नी ने पति को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला तमाश बीन सिर्फ वीडियो बनाते रहें मानवता हुई शर्मशार वीडियो बनाने के वजाय बचाव या गुहार लगाया होता तो बच सकती थी पति की जान शराब के नशे में पत्नी ने पति को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला तमाश बीन सिर्फ वीडियो बनाते रहें मानवता हुई शर्मशार वीडियो बनाने के वजाय बचाव या गुहार लगाया होता तो बच सकती थी पति की जान मामला #उत्तरप्रदेश के जनपद #अंबेडकरनगर अंतर्गत कोतवाली #अकबरपुर का है #pmo #PMOIndia #UttarPradesh #AmbedkarNagar #akbarpur #YogiAdityanath #MYogiAdityanath #police #UPPolice MYogiAdityanath DM Ambedkarnagar UP Police अम्बेडकरनगर पुलिस Narendra Modi Ambedkarnagar Police #india #viral #video #reels

7 hrs ago
user_Suyash Kumar Mishra
Suyash Kumar Mishra
City Star Civil Lines, Central Delhi•
7 hrs ago

शराब के नशे में पत्नी ने पति को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला तमाश बीन सिर्फ वीडियो बनाते रहें मानवता हुई शर्मशार वीडियो बनाने के वजाय बचाव या गुहार लगाया होता तो बच सकती थी पति की जान शराब के नशे में पत्नी ने पति को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला तमाश बीन सिर्फ वीडियो बनाते रहें मानवता हुई शर्मशार वीडियो बनाने के वजाय बचाव या गुहार लगाया होता तो बच सकती थी पति की जान मामला #उत्तरप्रदेश के जनपद #अंबेडकरनगर अंतर्गत कोतवाली #अकबरपुर का है #pmo #PMOIndia #UttarPradesh #AmbedkarNagar #akbarpur #YogiAdityanath #MYogiAdityanath #police #UPPolice MYogiAdityanath DM Ambedkarnagar UP Police अम्बेडकरनगर पुलिस Narendra Modi Ambedkarnagar Police #india #viral #video #reels

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  • अज्ञात चोरों ने नगदी व चांदी सोने के जेवरात किए चोरी पुलिस से की गई शिकायत मल्लावां थाना क्षेत्र के भूड मडेया मजरा बाबटमऊ थाना मल्लावां निवासी शिवराज पुत्र रूपलाल ने पुलिस को दी तहरी में बताया कि उनके घर पर छत नहीं पड़ी है दीवार के साथ छप्पर पड़ा हुआ है छप्पर के अंदर रखा बक्सा जिसमें अज्ञात चोर ने बक्शा उठाकर उसमें लकी नगदी व सोने चांदी के जेवरात चोरी कर लिए हैं इस संबंध में पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की है पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है। यह घटना 1 अप्रैल की रात की बताई जा रही है।
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    अज्ञात चोरों ने नगदी व चांदी सोने के जेवरात किए चोरी पुलिस से की गई शिकायत मल्लावां थाना क्षेत्र के भूड मडेया मजरा बाबटमऊ थाना मल्लावां निवासी शिवराज पुत्र रूपलाल ने पुलिस को दी तहरी में बताया कि उनके घर पर छत नहीं पड़ी है दीवार के साथ छप्पर पड़ा हुआ है छप्पर के अंदर रखा बक्सा जिसमें अज्ञात चोर ने बक्शा उठाकर उसमें लकी नगदी व सोने चांदी के जेवरात चोरी कर लिए हैं इस संबंध में पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की है पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है। 
यह घटना 1 अप्रैल की रात की बताई जा रही है।
    user_Crime 7 india news 📰📰📰📰📰
    Crime 7 india news 📰📰📰📰📰
    Newspaper advertising department सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    16 min ago
  • Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    1
    Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    user_न्यूज़ आइकॉन 24
    न्यूज़ आइकॉन 24
    Press advisory सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    54 min ago
  • अवैध शराब के धंधे का बड़ा खुलासा देखिए पूरा वीडियो में
    1
    अवैध शराब के धंधे का बड़ा खुलासा देखिए पूरा वीडियो में
    user_Vinod Rastogi
    Vinod Rastogi
    चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • Post by Bharatiya Jan KRANTI SENA
    1
    Post by Bharatiya Jan KRANTI SENA
    user_Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Bharatiya Jan KRANTI SENA
    Political party office Karol Bagh, Central Delhi•
    3 hrs ago
  • नई दिल्ली: कहते हैं कि जब घर पर आंच आती है, तो दीवारें भी बोलने लगती हैं। कुछ ऐसा ही मंजर दिल्ली के ऐतिहासिक शालीमार गांव में पिछले एक महीने से देखने को मिल रहा है। यहाँ की गलियों में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि अपने हकों के लिए लड़ते लोगों की आवाज़ें गूंज रही हैं। 7 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह 'घर बचाओ आंदोलन' आज एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। ​संघर्ष का आगाज़ और सामूहिक शक्ति ​यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उस जज़्बे की कहानी है जहाँ पूरा गांव एक परिवार बन गया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति यहाँ की महिलाएं हैं। वीडियो और ज़मीनी रिपोर्टों से साफ़ झलकता है कि कैसे गांव की माताएं और बहनें अपने घरों के काम छोड़कर सड़कों और चौपालों पर डटी हुई हैं। ​सांझी रसोई: एकता का प्रतीक ​आंदोलन के दौरान एक बहुत ही भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है—सामूहिक रसोई। यहाँ कोई अमीर या गरीब नहीं है। गांव की महिलाएं अपने घरों से खुद आटा, सब्जियां और अन्य राशन लेकर आ रही हैं। ​निस्वार्थ सेवा: पुरुष और महिलाएं मिलकर पूड़ियाँ बेल रहे हैं, सब्ज़ियां बना रहे हैं और आंदोलनकारियों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। ​अनुदान: आलू से लेकर अनाज तक, सब कुछ गांव के लोगों द्वारा स्वेच्छा से दान किया गया है, जो यह दर्शाता है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समूचे अस्तित्व की है। ​आमरण अनशन और प्रशासन की चुप्पी ​आंदोलन स्थल पर लगे बैनरों पर साफ़ लिखा है—"घर बचाओ आंदोलन, आमरण अनशन"। फरवरी की सर्द रातों से लेकर मार्च की तपिश तक, ये ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनकी मांग स्पष्ट है: उनके पुरखों की ज़मीन और उनके आशियानों को किसी भी तरह की विकास परियोजनाओं या अतिक्रमण की कार्रवाई के नाम पर उजाड़ा न जाए। ​"जिन हाथों में शक्ति भरी है, राज मुकुट पहनाने की, उन हाथों में ताकत भी है, सर से ताज हटाने की।" — आंदोलन स्थल पर गूंजते नारे। ​निष्कर्ष ​शालीमार गांव का यह आंदोलन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 'भारत माता की जय' के नारों और एकता की इस गूँज ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय एकजुट होता है, तो वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है। 2026 का यह 'घर बचाओ आंदोलन' दिल्ली के नागरिक अधिकारों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
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    नई दिल्ली: कहते हैं कि जब घर पर आंच आती है, तो दीवारें भी बोलने लगती हैं। कुछ ऐसा ही मंजर दिल्ली के ऐतिहासिक शालीमार गांव में पिछले एक महीने से देखने को मिल रहा है। यहाँ की गलियों में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि अपने हकों के लिए लड़ते लोगों की आवाज़ें गूंज रही हैं। 7 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह 'घर बचाओ आंदोलन' आज एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
​संघर्ष का आगाज़ और सामूहिक शक्ति
​यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उस जज़्बे की कहानी है जहाँ पूरा गांव एक परिवार बन गया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति यहाँ की महिलाएं हैं। वीडियो और ज़मीनी रिपोर्टों से साफ़ झलकता है कि कैसे गांव की माताएं और बहनें अपने घरों के काम छोड़कर सड़कों और चौपालों पर डटी हुई हैं।
​सांझी रसोई: एकता का प्रतीक
​आंदोलन के दौरान एक बहुत ही भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है—सामूहिक रसोई। यहाँ कोई अमीर या गरीब नहीं है। गांव की महिलाएं अपने घरों से खुद आटा, सब्जियां और अन्य राशन लेकर आ रही हैं।
​निस्वार्थ सेवा: पुरुष और महिलाएं मिलकर पूड़ियाँ बेल रहे हैं, सब्ज़ियां बना रहे हैं और आंदोलनकारियों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं।
​अनुदान: आलू से लेकर अनाज तक, सब कुछ गांव के लोगों द्वारा स्वेच्छा से दान किया गया है, जो यह दर्शाता है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समूचे अस्तित्व की है।
​आमरण अनशन और प्रशासन की चुप्पी
​आंदोलन स्थल पर लगे बैनरों पर साफ़ लिखा है—"घर बचाओ आंदोलन, आमरण अनशन"। फरवरी की सर्द रातों से लेकर मार्च की तपिश तक, ये ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनकी मांग स्पष्ट है: उनके पुरखों की ज़मीन और उनके आशियानों को किसी भी तरह की विकास परियोजनाओं या अतिक्रमण की कार्रवाई के नाम पर उजाड़ा न जाए।
​"जिन हाथों में शक्ति भरी है, राज मुकुट पहनाने की, उन हाथों में ताकत भी है, सर से ताज हटाने की।"
— आंदोलन स्थल पर गूंजते नारे।
​निष्कर्ष
​शालीमार गांव का यह आंदोलन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 'भारत माता की जय' के नारों और एकता की इस गूँज ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय एकजुट होता है, तो वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है। 2026 का यह 'घर बचाओ आंदोलन' दिल्ली के नागरिक अधिकारों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
    user_Vinay Kumar Upadhyay
    Vinay Kumar Upadhyay
    सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • Post by Raj Kumar
    1
    Post by Raj Kumar
    user_Raj Kumar
    Raj Kumar
    कोतवाली, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • Post by TIME NEWS 9 INDIA
    1
    Post by TIME NEWS 9 INDIA
    user_TIME NEWS 9 INDIA
    TIME NEWS 9 INDIA
    Local News Reporter यमुना विहार, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    1
    Post by न्यूज़ आइकॉन 24
    user_न्यूज़ आइकॉन 24
    न्यूज़ आइकॉन 24
    Press advisory सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
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