इंदौर के गांधी हॉल में इन दिनों 'फाइबर टू सिल्क फेब' एक्सपो चल रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा। इस एक्सपो में आंध्र प्रदेश की पारंपरिक कलमकारी साड़ियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जिन्हें दूध और घी में उबालकर पक्के प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता है। साथ ही, गुजरात का महंगा डबल पटोला भी यहाँ मौजूद है। आंध्र प्रदेश के अभिषेक गुप्ता द्वारा लाई गई कलमकारी साड़ियों की हर एक डिजाइन में राधा-कृष्ण, रामायण और महाभारत के प्रसंगों के साथ-साथ मोर और प्राकृतिक सौंदर्य जीवंत हो उठता है। इन साड़ियों को प्योर टसर सिल्क और बेंगलुरु सिल्क पर कई कारीगरों द्वारा हैंड पेंटिंग और हैंड ब्लॉक की मदद से 10 से 15 दिनों में तैयार किया जाता है। फूलों के प्राकृतिक रंगों को स्थायी बनाने के लिए तैयार साड़ी को पारंपरिक रूप से दूध और घी में उबालने की विधि अपनाई जाती है, जिससे रंग कभी उतरते नहीं। आयोजक आशीष गुप्ता ने बताया कि आगामी त्योहारी और वेडिंग सीजन को ध्यान में रखते हुए इस सिल्क फेब का आयोजन किया गया है। यहाँ 40 स्टॉल पर देशभर के बुनकर मलबारी, कांथा, बालूचरी, तनचोई, बनारसी, और जामदानी जैसी विभिन्न प्रकार की साड़ियाँ लेकर आए हैं। इनमें पाटन और राजकोट (गुजरात) का पटोला भी शामिल है, जो मलबरी सिल्क पर बनता है। इस स्टॉल पर कम से कम 40 और अधिकतम 60 दिन में बनने वाला, लाखों की कीमत वाला डबल पटोला भी उपलब्ध है। इसे लेकर आए टम्पी बताते हैं कि पटोला का काम पाटन के लगभग हर पुश्तैनी घर में होता है, और इसे बनाने में लगने वाला लंबा समय कारीगरों के वर्षों के अनुभव और धैर्य को दर्शाता है, क्योंकि साड़ी बुनने से पहले धागे को डिजाइन के अनुरूप कई रंगों में रंगा जाता है। बनारस के मुशाहिद राजा प्योर कतान, मूंगा, चिनिया, रॉ मैंगो, टिशू और मशरू पर तैयार की गई मीनाकारी वाली साड़ियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। इन साड़ियों पर तीन से पाँच धागे तक का बारीकी से काम किया गया है, और इन्हें तैयार होने में 20 से 40 दिन तक का समय लगता है, जो काम की नज़ाकत पर निर्भर करता है। कर्नाटक की मशहूर और सेलिब्रिटीज के वार्डरोब की शोभा बढ़ाने वाली कांजीवरम साड़ियाँ भी इस एक्सपो में खासा आकर्षण बनी हुई हैं।
इंदौर के गांधी हॉल में इन दिनों 'फाइबर टू सिल्क फेब' एक्सपो चल रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा। इस एक्सपो में आंध्र प्रदेश की पारंपरिक कलमकारी साड़ियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जिन्हें दूध और घी में उबालकर पक्के प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता है। साथ ही, गुजरात का महंगा डबल पटोला भी यहाँ मौजूद है। आंध्र प्रदेश के अभिषेक गुप्ता द्वारा लाई गई कलमकारी साड़ियों की हर एक डिजाइन में राधा-कृष्ण, रामायण और महाभारत के प्रसंगों के साथ-साथ मोर और प्राकृतिक सौंदर्य जीवंत हो उठता है। इन साड़ियों को प्योर टसर सिल्क और बेंगलुरु सिल्क पर कई कारीगरों द्वारा हैंड पेंटिंग और हैंड ब्लॉक की मदद से 10 से 15 दिनों में तैयार किया जाता है। फूलों के प्राकृतिक रंगों को स्थायी बनाने के लिए तैयार साड़ी को पारंपरिक रूप से दूध और घी में उबालने की विधि अपनाई जाती है, जिससे रंग कभी उतरते नहीं। आयोजक आशीष गुप्ता ने बताया कि आगामी त्योहारी और वेडिंग सीजन को ध्यान में रखते हुए इस सिल्क फेब का आयोजन किया गया है। यहाँ 40 स्टॉल पर देशभर के बुनकर मलबारी, कांथा, बालूचरी, तनचोई, बनारसी, और जामदानी जैसी विभिन्न प्रकार की साड़ियाँ लेकर आए हैं। इनमें पाटन और राजकोट (गुजरात) का पटोला भी शामिल है, जो मलबरी सिल्क पर बनता है। इस स्टॉल पर कम से कम 40 और अधिकतम 60 दिन में बनने वाला, लाखों की कीमत वाला डबल पटोला भी उपलब्ध है। इसे लेकर आए टम्पी बताते हैं कि पटोला का काम पाटन के लगभग हर पुश्तैनी घर में होता है, और इसे बनाने में लगने वाला लंबा समय कारीगरों के वर्षों के अनुभव और धैर्य को दर्शाता है, क्योंकि साड़ी बुनने से पहले धागे को डिजाइन के अनुरूप कई रंगों में रंगा जाता है। बनारस के मुशाहिद राजा प्योर कतान, मूंगा, चिनिया, रॉ मैंगो, टिशू और मशरू पर तैयार की गई मीनाकारी वाली साड़ियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। इन साड़ियों पर तीन से पाँच धागे तक का बारीकी से काम किया गया है, और इन्हें तैयार होने में 20 से 40 दिन तक का समय लगता है, जो काम की नज़ाकत पर निर्भर करता है। कर्नाटक की मशहूर और सेलिब्रिटीज के वार्डरोब की शोभा बढ़ाने वाली कांजीवरम साड़ियाँ भी इस एक्सपो में खासा आकर्षण बनी हुई हैं।
- चंदननगर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हिस्ट्रीशीटर ड्रग्स तस्कर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तस्कर के पास से 16.47 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की है, जिसकी कीमत लगभग 1.60 लाख रुपये बताई जा रही है। इस गिरफ्तारी के बाद, पुलिस अब मंदसौर और रतलाम से जुड़े एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट की तलाश में जुट गई है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है।1
- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है, जिसमें एक युवक भगवान हनुमान के वेश में बीजेपी का झंडा लिए हुए नाचता हुआ दिखाई दे रहा है। इस रैली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी मंच या वाहन पर उपस्थित थे। यह वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या राजनीतिक कार्यक्रमों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के स्वरूप का इस तरह से उपयोग करना उचित है। इस घटना को लेकर धर्म के सम्मान पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।1
- इंदौर के विद्यासागर स्कूल परिसर में 4 जुलाई 2026 को नवनिर्वाचित छात्र परिषद के औपचारिक पदग्रहण के लिए गरिमामय इन्वेस्टिचर सेरेमनी 2026 का आयोजन किया गया। समारोह का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसे ज्ञान एवं नेतृत्व की भावना का प्रतीक बताया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नवनियुक्त पदाधिकारियों को बैज प्रदान करना रहा, जिन्होंने इस अवसर पर अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सेवा के मूल्यों का पालन करने की शपथ ली। समारोह में विद्यासागर स्कूल के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र डॉ. गौरव भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान विद्यालय के मार्गदर्शक श्री सत्यानारायण जी पटेल, प्राचार्या श्रीमती भावना पुजारी और मुख्य अतिथि डॉ. गौरव भंडारी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधनों से युवा नेतृत्वकर्ताओं को जिम्मेदारी, विनम्रता और समर्पण के साथ नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। नव-निर्वाचित स्कूल कैप्टन अयोनी शर्मा ने भी अपने प्रेरक संबोधन में छात्र परिषद के लिए अपनी दूरदर्शी सोच और संकल्प को साझा किया। कार्यक्रम में अभिभावकों, आमंत्रित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह का एक यादगार क्षण नव-निर्वाचित छात्र परिषद के सदस्यों द्वारा छात्र परिषद रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना रहा, जिसने उनके दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया। कार्यक्रम का समापन स्कूल उप-कप्तान भव्य जोशी द्वारा प्रस्तुत हृदयस्पर्शी धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह समारोह विद्यासागर स्कूल में छात्र नेतृत्व, उत्तरदायित्व और सेवा की भावना के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बना।1
- Available for Sale Locality : इंदौर उज्जैन रोड Property Type : Commercial Plot इंदौर उज्जैन रोड पर अब आपके बजट में रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्लॉट उपलब्ध है अपने सपनों को उड़ान और बनाए अपने सपनों का घर लेने के लिए इस नंबर पर 9516900369 संपर्क करें1
- इंदौर के हंसदास मठ में स्थित गौशाला में गौवंश के प्रति गंभीर लापरवाही का मुद्दा सामने आया है। बताया गया है कि वहाँ गौवंश परेशान स्थिति में है। इस गंभीर विषय पर बजरंग दल से संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की गई है।1
- महू तहसील के सिमरोल थाने से संबंधित एक वीडियो देखने और उसे आगे साझा करने की अपील की गई है। यह वीडियो लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।1
- महाकाल की नगरी में सामने आए शराब खोरी के एक वीडियो को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है।1
- इंदौर शहर में एक वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहाँ कुछ लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि एक वास्तविक वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार बताया जा रहा है। इन आरोपों के पीछे का मकसद पूरे मामले की दिशा बदलना और सच को छिपाना बताया जा रहा है, जिसने मामले की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद के केंद्र में एम.टी.एच. अस्पताल परिसर में संचालित महाकाल संस्था है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि लगभग एक वर्ष पुरानी यह संस्था अपने प्रभाव और सुविधाओं का इस्तेमाल कर स्वयं को सही साबित करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संस्था का पक्ष अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इस पूरे प्रकरण में कई समाजसेवी खुलकर सामने आ गए हैं। उनका दावा है कि वे जल्द ही इंदौर प्रशासन और पुलिस को दस्तावेज़ी एवं तकनीकी साक्ष्य सौंपेंगे, जिसके साथ ही वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। अब शहर में यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इंदौर प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएँगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार लोगों और संबंधित संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पूरे शहर की निगाहें अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।4
- बॉलीवुड का इतिहास और महू का गहरा संबंध है, जिसका एक उदाहरण 1966 में बनी क्लासिक फिल्म 'गबन' है। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म का एक खूबसूरत गाना, 'आया सावन झूम के', इंदौर जिले के हरसोला गांव में शूट किया गया था। इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री साधना मुख्य भूमिका में थे। यह सुपरहिट रोमांटिक गाना महू से लगभग 25 किलोमीटर दूर हरसोला गांव के स्टॉप डैम और पाले पर फिल्माया गया था। फिल्म निर्माताओं को हरसोला का स्टॉप डैम, उसके आसपास का खुला मैदान, बाग-बगीचे, पहाड़ और पानी का नजारा बेहद पसंद आया था। 60 के दशक में जब यहां शूटिंग हुई थी, तब पूरे गांव में हलचल मच गई थी। लोग दूर-दूर से साधना को देखने आए थे, और आज भी बुजुर्ग बताते हैं कि शूटिंग के दौरान दो दिन तक गांव में मेले जैसा माहौल था। आज, 2026 में, फिल्म को पूरे 60 साल हो चुके हैं, लेकिन हरसोला का वह स्टॉप डैम आज भी मौजूद है। मानसून के दौरान यहां का नजारा बिल्कुल फिल्मी लगता है, जहां पानी, हरियाली और शांति 1966 जैसी ही है। कई यूट्यूबर्स और फोटोग्राफर्स अब इस लोकेशन को 'गबन शूटिंग स्पॉट' के नाम से खोजते हैं।1