मैहर सिविल अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों के लिए बनाए गए निशुल्क सुलभ शौचालय में अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर पालिका द्वारा तैनात कुछ कर्मचारी इस सुविधा का उपयोग करने के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से ₹10 की वसूली कर रहे हैं। यह राशि खुलेआम उन परिजनों से वसूली जा रही है जो अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों के साथ पहुंचते हैं, जबकि यह सुविधा आम जनता के लिए पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। इस तरह की मनमानी वसूली से गरीब और जरूरतमंद लोगों पर अनावश्यक रूप से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस निष्क्रियता के चलते वसूली करने वाले कर्मचारियों के हौसले और बढ़ गए हैं। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर निशुल्क सुविधा के नाम पर चल रही यह अवैध वसूली कब तक जारी रहेगी और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब सख्त कार्रवाई करेगा।
मैहर सिविल अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों के लिए बनाए गए निशुल्क सुलभ शौचालय में अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर पालिका द्वारा तैनात कुछ कर्मचारी इस सुविधा का उपयोग करने के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से ₹10 की वसूली कर रहे हैं। यह राशि खुलेआम उन परिजनों से वसूली जा रही है जो अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों के साथ पहुंचते हैं, जबकि यह सुविधा आम जनता के लिए पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। इस तरह की मनमानी वसूली से गरीब
और जरूरतमंद लोगों पर अनावश्यक रूप से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस निष्क्रियता के चलते वसूली करने वाले कर्मचारियों के हौसले और बढ़ गए हैं। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर निशुल्क सुविधा के नाम पर चल रही यह अवैध वसूली कब तक जारी रहेगी और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब सख्त कार्रवाई करेगा।
- मैहर जिले के ग्राम पंचायत बढेरूहा में राजस्व विभाग और पटवारी की लापरवाही के कारण एक किसान अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी भूमि की कई बार नाप कराई जा चुकी है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के बावजूद उसे आज तक मौके पर उसकी वास्तविक जमीन नहीं मिल पाई है। किसान कामता प्रसाद पटेल का कहना है कि उनकी जमीन पर सड़क निर्माण कर दिया गया है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते, कई बार अधिकारियों से शिकायत करने और भूमि की नाप कराने के बावजूद, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसी क्रम में, पीड़ित कामता प्रसाद पटेल ने जिला कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी जमीन पर सड़क का निर्माण हुआ है, तो उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।4
- सतना में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाई गईं "स्मार्ट" जुगनू लाइटें केवल दो दिनों तक ही चमक पाईं और फिर पूरी तरह ठप पड़ गईं। इस विफलता पर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने करोड़ों रुपये का गबन किया है और शहर को अंधेरे में धकेल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये लाइटें सिर्फ उद्घाटन समारोह तक ही रोशन थीं, जिसके बाद अब खंभों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार लटकता हुआ दिखाई दे रहा है।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के समीप स्थित फलाहारी आश्रम के पास एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इसकी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुकी हैं। क्षेत्र के लोग और श्रद्धालुओं का कहना है कि तेंदुए की लगातार मौजूदगी से आसपास के लोगों में दहशत व्याप्त है, जिसके कारण शाम होते ही वे घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। वहीं, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग और रेस्क्यू टीम को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि बार-बार तेंदुए के दिखाई देने से रेस्क्यू अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि किसी बड़े हादसे से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल, वन विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की लगातार मांग कर रहे हैं।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के पास स्थित फलाहारी आश्रम के समीप एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस घटना से गहरी दहशत है, खासकर इसलिए क्योंकि तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इसकी वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई हैं। तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण शाम होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं, वहीं माँ शारदा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वन विभाग और रेस्क्यू टीम को इस संबंध में कई बार सूचना दी गई है, लेकिन अभी तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का यह भी कहना है कि बार-बार तेंदुए के दिखाई देने से बचाव अभियान की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जोर दिया है कि किसी बड़े हादसे से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और इलाके में निगरानी बढ़ाई जाए। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, वन विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की गुहार लगा रहे हैं।1
- मैहर माँ शारदा देवी धाम के समीप स्थित फलाहारी आश्रम के पास एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह तेंदुआ पहले भी कई बार इस इलाके में देखा जा चुका है और इससे संबंधित वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुकी हैं। तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं में भारी दहशत व्याप्त है, जिससे शाम होते ही लोग अपने घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। इसके साथ ही, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस मामले में वन विभाग और रेस्क्यू टीम को कई बार सूचना दी गई, लेकिन अब तक तेंदुए को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में भेजने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने बार-बार तेंदुए के दिखाई देने के बावजूद वन विभाग के रेस्क्यू अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि किसी बड़ी अनहोनी से पहले तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए और इलाके में निगरानी बढ़ाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल वन विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की अपील कर रहे हैं।1
- आम आदमी पार्टी ने स्थानीय महत्व के मुद्दों को उठाते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन सरकार की नीतियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान में कथित विफलता को लेकर आयोजित किया गया था।1
- सतना जिला अस्पताल में एक कर्मचारी की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। डॉक्टर को दिखाने आई छात्राओं को ओपीडी के अंदर ही कैद कर लिया गया, जब कर्मचारी ने सारे गेट पर ताला जड़ दिया और खुद गायब हो गया। छात्राओं द्वारा शोर मचाए जाने के बाद, अन्य कर्मचारी ओपीडी पहुंचे और ताला खोलकर उन्हें बाहर निकाला।1
- एक तरफ जहां भारत खुद को वैश्विक मंच पर 'विश्वगुरु' और सुरक्षित पर्यटन केंद्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आई एक खबर ने इन दावों की सच्चाई उजागर कर दी है। दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर स्थित एक होटल में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने एक बार फिर व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे होटलों में अग्निशमन मानकों की घोर अनदेखी को सामने ला दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और होटल में ठहरे कई विदेशी नागरिकों को खिड़कियों से मदद की गुहार लगाते देखा गया। संकरी गलियों और सुरक्षा मानकों की कमी के कारण दमकल कर्मियों को भी राहत कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी। विदेशी सैलानियों के ठहरने के लिए मशहूर इस इलाके में हुए हादसे ने सीधे तौर पर वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को चोट पहुंचाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए एक शर्मनाक स्थिति पैदा हुई है। स्थानीय निवासी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम दुनिया को 'अतिथि देवो भव:' का संदेश देते हैं, लेकिन धरातल पर उनके जीवन की रक्षा के लिए बुनियादी फायर एनओसी और निकास द्वार तक नहीं हैं। इस घटना ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली फायर सर्विस के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि होटल में आपातकालीन निकास या तो बंद थे या उनमें कबाड़ भरा हुआ था, और लगे अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायर्ड थे। इसके अतिरिक्त, संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला होटल तान दिए गए हैं, जहाँ वेंटिलेशन का नामोनिशान नहीं है। हादसे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहाँ लोगों का कहना है कि जब तक शहरों के बुनियादी ढांचे, कानून व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का नहीं बनाया जाता, तब तक 'विश्वगुरु' होने का दावा खोखला ही नजर आएगा। विदेशी नागरिकों की सुरक्षा में हुई यह चूक वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भारत की साख को गहरा धक्का पहुंचा सकती है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और होटल मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या हर बार जागने के लिए किसी बड़े हादसे और मासूमों की जान जाने का इंतजार करना पड़ेगा।1