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क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है? क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है? . निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने एवं उन्हें पदोन्नत करने का अधिकार कम्पनी के मालिको एवं शेयर होल्डर्स के पास होने के कारण निजी क्षेत्र के कर्मचारी एवं मैनेजर निरंतर कुशलता एवं ईमानदारी से कार्य करते है - बस यही वजह है। इसके अलावा कोई वजह नहीं। . ————— . यदि भारत में निचे दिया गया क़ानून लागू कर दिया जाए तो मेरा मानना है कि अगले दिन से ही निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के स्तर को छू लेंगे : यदि किसी फैक्ट्री के शेयर होल्डर्स ( मालिक ) किसी मैनेजर को नौकरी पर रखते है तो उसे 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकालेंगे। और यदि उन्होंने किसी कर्मचारी को नौकरी पर रखा है तो शेयर होल्डर्स उसे अगले 30 वर्षो तक नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। यदि मालिक किसी कर्मचारी के आचरण से पीड़ित है तो वह मेनेजर से शिकायत कर सकते है। और मैनेजर की इच्छा है तो वह अमुक कर्मचारी को नौकरी से निकाल भी सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है। स्पष्टीकरण : शेयर होल्डर्स को मैनेजरो के बारे में जितनी छानबीन करनी है, उसे नौकरी पर रखने से पहले ही करनी होगी। यदि एक बार नौकरी पर रखने के बाद मैनेजर को 5 वर्ष से पहले नौकरी से निकाला नही जा सकेगा । मैनेजरो एवं सभी कर्मचारियों को हर महीने की एक तारीख को तय वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जायेगा। स्पष्टीकरण : यदि नौकर काम पर नही आता है, या केवल टाइम पास करने के लिए घंटे दो घंटे के लिए आकर चला जाता है, तब भी नौकर को पूरे वेतन का भुगतान किया जाएगा। हालांकि शेयर होल्डर्स सम्बंधित यूनिट के मैनेजर से इसकी शिकायत कर सकते है। मैनेजर चाहे तो कर्मचारी को चेतावनी दे सकता है, या उसे नौकरी से निकाल सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है। फैक्ट्री की विभिन्न यूनिट्स के मेनेजरो को यह अधिकार होगा कि वे आपस में सलाह मशविरा करके अपने वेतन, भत्तो, सुविधाओं में वृद्धि करना चाहे तो कर सके। मैनेजर चाहे तो नौकरों के वेतन में भी वृद्धि कर सकते है। स्पष्टीकरण : मैनेजरों ने खुद के वेतन में जो भी वृद्धि की है शेयर होल्डर्स अदा करने के लिए बाध्य होंगे। इसमें विशेष बिंदु यह है कि मैनेजरो का समूह अपनी वेतन वृद्धि के बारे में शेयर होल्डर्स को सिर्फ सूचित करेगा किन्तु उनसे अनुमति नहीं लेगा। यदि फैक्ट्री में पैसा कम है तो मैनेजर शेयर होल्डर्स पर टेक्स या पेनेल्टी लगाकर और पैसा मांग सकते है, या फैक्ट्री के स्वामित्व में स्थित अन्य कोई संपत्तियां बेचकर अपनी पूर्ती कर सकते है। 5 वर्ष बाद शेयर होल्डर्स को अपने मैनेजरों को बदलने का एक दिवसीय मौका मिलेगा। तब वे चाहे तो किसी मैनेजर को बदल सकते है। किन्तु नौकर वही रहेंगे और उन्हें किसी भी सूरत में बदला नही जा सकेगा। यदि शेयर होल्डर्स किसी नौकर के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराते है तो शिकायत की जांच उसकी यूनिट का मैनेजर ही करेगा, एवं अपील किसी अन्य यूनिट के मैनेजर के यहाँ की जा सकेगी। किन्तु शेयर होल्डर्स को नौकरों के खिलाफ जांच करने और फैसला सुनाने का अधिकार नही होगा। यदि कोई शेयर होल्डर्स अपने किसी मैनेजर या नौकर के कार्य से संतुष्ट नही है या नौकर फैक्ट्री को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है, तो वे अमुक मैनेजर को सीधी राह पर लाने के लिए रोड़ पर आकर अनशन, धरने, प्रदर्शन आदि विधियों का प्रयोग कर सकेंगे। किन्तु शेयर होल्डर्स न तो मैनेजरो का वेतन रोक सकेंगे और न ही उन्हें नौकरी से निकाल सकेंगे। यदि अमुक शेयर होल्डर्स समृद्ध है तो सोशल मीडिया आदि पर भी अपना असंतोष वगेरह प्रकट कर सकते है। . शेयर होल्डर्स के लिए सुझाव : . कृपया नौकरी पर रखने से पूर्व अपने मेनेजरो के बारे में गहन जांच पड़ताल करें तथा ईमानदार मैनेजर को ही चुने। बेहतर होगा कि आप मेनेजर का ब्लड टेस्ट करवा ले कि उसमें HBC ( Honest Blood Cells ) यानी ईमानदारू कोशिकाओ का स्तर क्या है। प्रत्येक मनुष्य के खून में ये कोशिकाएं पायी जाती है। पेड मीडिया कर्मी जब भी आपको ईमानदार मेनेजर को नौकरी पर रखने की सलाह देते है तो उनका आशय HBC काउंट चेक करने से ही होता है। HBC टेस्टिंग के बारे और अधिक जानकारी के लिए आप किसी भी पेड मीडिया कर्मी या पेड बुद्धिजीवी से सम्पर्क कर सकते है। . ————- . इस क़ानून के आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ? . मेरा मानना है कि, जल्दी ही फैक्ट्री की अलग अलग यूनिट्स के सभी मैनेजर आपस में गठजोड़ बना लेंगे और नौकर भी इनके गठजोड़ में शामिल हो जायेंगे। यदि शेयर होल्डर्स 5 वर्ष बाद मेनेजरो को बदल भी देंगे तो नियुक्त होने के साथ ही वे भी भ्रष्ट हो जायेंगे। और यदि इत्तिफाक से कोई ईमानदार मैनेजर आ भी जाता है तो शेष मेनेजर मिलकर या तो उसे दबा देंगे या फिर शेष मैनेजरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। . फैक्ट्री को सबसे अधिक नुकसान नौकरों की तरफ से होगा। चूंकि उन्हें 30 वर्ष से पहले किसी भी स्थिति में निकाला नहीं जा सकता अत: उनमे से ज्यादातर भ्रष्ट हो जायेंगे, और ईमानदार मैनेजर के आने के बावजूद नौकरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। जो भी नये मैनेजर आयेंगे, ये भ्रष्ट नौकर जल्द ही उनसे गठजोड़ बना लेंगे। अब मैनेजरों एवं नौकरों का ये गठजोड़ फैक्ट्री में चोरी चकारी करना शुरू करेगा, और धीरे धीरे फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता गिरने लगेगी। और तब एक बिंदु के बाद फैक्ट्री की दशा यह हो जायेगी कि उसे चलाना मुश्किल हो जाएगा। तब मैनेजर वगेरह इसकी विभिन्न यूनिट्स को घूस खाकर बेचना शुरू करेंगे, और एक एक करके सभी यूनिट्स बेच देने के बाद फैक्ट्री बंद हो जायेगी। . यदि आपको ये सब मजाक लग रहा है तो आप वही बात कह रहे है, जो कि 1925 में अहिंसा मूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसा मूर्ती महात्मा चन्द्र शेखर आजाद ने कही थी, तथा 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी ने इस बात को दोहराया था। . भारत में पिछले 70 वर्षो से देश की राजनेतिक व्यवस्था इसी तरीके से चल रही है। ऊपर दी गयी व्यवस्था में यदि आप मैनेजरों की जगह जन प्रतिनिधियों ( विधायक, सांसद, पार्षद, सरपंच ) को तथा नौकरो की जगह सरकारी अधिकारियों को रख ले तो आप इस फैक्ट्री के शेयर होल्डर है !! . भारत के नागरिको के पास शीर्ष सरकारी अधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा भारत के नागरिको के पास सरकारी अधिकारीयों को दण्डित करने की शक्ति भी नहीं है। नागरिको के प्रति वे शून्य जवाबदेह है। उन्हें बस अपने उच्च अधिकारी को खुश रखना होता है। तो वे जनता से जो घूस वसूलते है उसमे से एक हिस्सा उच्च अधिकारियों को दे देते है। और जो अधिकारी ज्यादा घूस ऊपर पहुंचाता है उसकी पदोन्नति के अवसर भी बढ़ जाते है। इस तरह यहाँ नकारात्मक प्रोत्साहन है। . निजी क्षेत्र में मालिक के पास अपने नौकर को नौकरी से निकालने एवं पदोन्नत करने का अधिकार होता है, अत: कर्मचारी अपना बेहतर योगदान देने की कोशिश करते है। . अमेरिका के सरकारी विभागों में भारत की तुलना में कम भ्रष्टाचार क्यों है ? . अमेरिका के नागरिको के पास अपने कई जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारियों जैसे एसपी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, मुख्यमंत्री आदि को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। नौकरी से निकाले जाने के इस भय की वजह से वे जनता के प्रति जवाबदेह बने रहते है, और कार्यकुशलता का प्रदर्शन करते है। यदि कोई अधिकारी निकम्मापन एवं भ्रष्ट आचरण करता है तो वहां के नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें नौकरी से निकाल देते है। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो उसकी सुनवाई करने एवं दंड देने की शक्ति भी वहां के नागरिको के पास है। . मेरा मानना है यदि अमेरिका के नागरिको से वोट वापसी का क़ानून छीन लिया जाए तो महीने भर में ही अमेरिका के सरकारी अधिकारी भारतीय अधिकारियों से भी ज्यादा निकम्मे हो जायेंगे और आम अमेरिकी से किसी न किसी बहाने से घूस वसूलना शुरू कर देंगे। . बहरहाल, हमें अमेरिका की व्यवस्था को बदतर बनाने की जगह इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत के सरकारी विभागों को किस तरह ईमानदार एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है। . भारत के सरकारी विभागों को कार्यकुशल एवं ईमानदार बनाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए ? . मेरा मानना है कि यदि भारत में वोट वापसी एवं जूरी सिस्टम कानून लागू कर दिए जाते है तो भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी, और सरकारी अधिकारीयों की कार्य कुशलता में सुधार होने लगेगा। मैंने इसके लिए जूरी कोर्ट का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे : जिला पुलिस प्रमुख जिला शिक्षा अधिकारी जिला चिकित्सा अधिकारी जिला जूरी प्रशासक मिलावट रोक अधिकारी DD चेयरमेन RBI गवर्नर CBI डायरेक्टर BSNL चेयरमेन सेंसर बोर्ड चेयरमेन जिला जज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रिय जूरी प्रशासक केन्द्रीय सूचना आयुक्त . तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है। . इसके अलावा यदि उपरोक्त अधिकारियों के खिलाफ को शिकायत आती है तो इसकी सुनवाई आम नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। . ====== . जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट जूरी कोर्ट मंच पर देखा जा सकता है।

16 hrs ago
user_Sonu Kumar
Sonu Kumar
गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार•
16 hrs ago
95b17c91-2b6a-44c2-95ed-8d5850c6ac1c

क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है? क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है? . निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने एवं उन्हें पदोन्नत करने का अधिकार कम्पनी के मालिको एवं शेयर होल्डर्स के पास होने के कारण निजी क्षेत्र के कर्मचारी एवं मैनेजर निरंतर कुशलता एवं ईमानदारी से कार्य करते है - बस यही वजह है। इसके अलावा कोई वजह नहीं। . ————— . यदि भारत में निचे दिया गया क़ानून लागू कर दिया जाए तो मेरा मानना है कि अगले दिन से ही निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के स्तर को छू लेंगे : यदि किसी फैक्ट्री के शेयर होल्डर्स ( मालिक ) किसी मैनेजर को नौकरी पर रखते है तो उसे 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकालेंगे। और यदि उन्होंने किसी कर्मचारी को नौकरी पर रखा है तो शेयर होल्डर्स उसे अगले 30 वर्षो तक नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। यदि मालिक किसी कर्मचारी के आचरण से पीड़ित है तो वह मेनेजर से शिकायत कर सकते है। और मैनेजर की इच्छा है तो वह अमुक कर्मचारी को नौकरी से निकाल भी सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है। स्पष्टीकरण : शेयर होल्डर्स को मैनेजरो के बारे में जितनी छानबीन करनी है, उसे नौकरी पर रखने से पहले ही करनी होगी। यदि एक बार नौकरी पर रखने के बाद मैनेजर को 5 वर्ष से पहले नौकरी से निकाला नही जा सकेगा । मैनेजरो एवं सभी कर्मचारियों को हर महीने की एक तारीख को तय वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जायेगा। स्पष्टीकरण : यदि नौकर काम पर नही आता है, या केवल टाइम पास करने के लिए घंटे दो घंटे के लिए आकर चला जाता है, तब भी नौकर को पूरे वेतन का भुगतान किया जाएगा। हालांकि शेयर होल्डर्स सम्बंधित यूनिट के मैनेजर से इसकी शिकायत कर सकते है। मैनेजर चाहे तो कर्मचारी को चेतावनी दे सकता है, या उसे नौकरी से निकाल सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है। फैक्ट्री की विभिन्न यूनिट्स के मेनेजरो को यह अधिकार होगा कि वे आपस में सलाह मशविरा करके अपने वेतन, भत्तो, सुविधाओं में वृद्धि करना चाहे तो कर सके। मैनेजर चाहे तो नौकरों के वेतन में भी वृद्धि कर सकते है। स्पष्टीकरण : मैनेजरों ने खुद के वेतन में जो भी वृद्धि की है शेयर होल्डर्स अदा करने के लिए बाध्य होंगे। इसमें विशेष बिंदु यह है कि मैनेजरो का समूह अपनी वेतन वृद्धि के बारे में शेयर होल्डर्स को सिर्फ सूचित करेगा किन्तु उनसे अनुमति नहीं लेगा। यदि फैक्ट्री में पैसा कम है तो मैनेजर शेयर होल्डर्स पर टेक्स या पेनेल्टी लगाकर और पैसा मांग सकते है, या फैक्ट्री के स्वामित्व में स्थित अन्य कोई संपत्तियां बेचकर अपनी पूर्ती कर सकते है। 5 वर्ष बाद शेयर होल्डर्स को अपने मैनेजरों को बदलने का एक दिवसीय मौका मिलेगा। तब वे चाहे तो किसी मैनेजर को बदल सकते है। किन्तु नौकर वही रहेंगे और उन्हें किसी भी सूरत में बदला नही जा सकेगा। यदि शेयर होल्डर्स किसी नौकर के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराते है तो शिकायत की जांच उसकी यूनिट का मैनेजर ही करेगा, एवं अपील किसी अन्य यूनिट के मैनेजर के यहाँ की जा सकेगी। किन्तु शेयर होल्डर्स को नौकरों के खिलाफ जांच करने और फैसला सुनाने का अधिकार नही होगा। यदि कोई शेयर होल्डर्स अपने किसी मैनेजर या नौकर के कार्य से संतुष्ट नही है या नौकर फैक्ट्री को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है, तो वे अमुक मैनेजर को सीधी राह पर लाने के लिए रोड़ पर आकर अनशन, धरने, प्रदर्शन आदि विधियों का प्रयोग कर सकेंगे। किन्तु शेयर होल्डर्स न तो मैनेजरो का वेतन रोक सकेंगे और न ही उन्हें नौकरी से निकाल सकेंगे। यदि अमुक शेयर होल्डर्स समृद्ध है तो सोशल मीडिया आदि पर भी अपना असंतोष वगेरह प्रकट कर सकते है। . शेयर होल्डर्स के लिए सुझाव : . कृपया नौकरी पर रखने से पूर्व अपने मेनेजरो के बारे में गहन जांच पड़ताल करें तथा ईमानदार मैनेजर को ही चुने। बेहतर होगा कि आप मेनेजर का ब्लड टेस्ट करवा ले कि उसमें HBC ( Honest Blood Cells ) यानी ईमानदारू कोशिकाओ का स्तर क्या है। प्रत्येक मनुष्य के खून में ये कोशिकाएं पायी जाती है। पेड मीडिया कर्मी जब भी आपको ईमानदार मेनेजर को नौकरी पर रखने की सलाह देते है तो उनका आशय HBC काउंट चेक करने से ही होता है। HBC टेस्टिंग के बारे और अधिक जानकारी के लिए आप किसी भी पेड मीडिया कर्मी या पेड बुद्धिजीवी से सम्पर्क कर सकते है। . ————- . इस क़ानून के आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ? . मेरा मानना है कि, जल्दी ही फैक्ट्री की अलग अलग यूनिट्स के सभी मैनेजर आपस में गठजोड़ बना लेंगे और नौकर भी इनके गठजोड़ में शामिल हो जायेंगे। यदि शेयर होल्डर्स 5 वर्ष बाद मेनेजरो को बदल भी देंगे तो नियुक्त होने के साथ ही वे भी भ्रष्ट हो जायेंगे। और यदि इत्तिफाक से कोई ईमानदार मैनेजर आ भी जाता है तो शेष मेनेजर मिलकर या तो उसे दबा देंगे या फिर शेष मैनेजरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। . फैक्ट्री को सबसे अधिक नुकसान नौकरों की तरफ से होगा। चूंकि उन्हें 30 वर्ष से पहले किसी भी स्थिति में निकाला नहीं जा सकता अत: उनमे से ज्यादातर भ्रष्ट हो जायेंगे, और ईमानदार मैनेजर के आने के बावजूद नौकरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। जो भी नये मैनेजर आयेंगे, ये भ्रष्ट नौकर जल्द ही उनसे गठजोड़ बना लेंगे। अब मैनेजरों एवं नौकरों का ये गठजोड़ फैक्ट्री में चोरी चकारी करना शुरू करेगा, और धीरे धीरे फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता गिरने लगेगी। और तब एक बिंदु के बाद फैक्ट्री की दशा यह हो जायेगी कि उसे चलाना मुश्किल हो जाएगा। तब मैनेजर वगेरह इसकी विभिन्न यूनिट्स को घूस खाकर बेचना शुरू करेंगे, और एक एक करके सभी यूनिट्स बेच देने के बाद फैक्ट्री बंद हो जायेगी। . यदि आपको ये सब मजाक लग रहा है तो आप वही बात कह रहे है, जो कि 1925 में अहिंसा मूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसा मूर्ती महात्मा चन्द्र शेखर आजाद ने कही थी, तथा 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी ने इस बात को दोहराया था। . भारत में पिछले 70 वर्षो से देश की राजनेतिक व्यवस्था इसी तरीके से चल रही है। ऊपर दी गयी व्यवस्था में यदि आप मैनेजरों की जगह जन प्रतिनिधियों ( विधायक, सांसद, पार्षद, सरपंच ) को तथा नौकरो की जगह सरकारी अधिकारियों को रख ले तो आप इस फैक्ट्री के शेयर होल्डर है !! . भारत के नागरिको के पास शीर्ष सरकारी अधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा भारत के नागरिको के पास सरकारी अधिकारीयों को दण्डित करने की शक्ति भी नहीं है। नागरिको के प्रति वे शून्य जवाबदेह है। उन्हें बस अपने उच्च अधिकारी को खुश रखना होता है। तो वे जनता से जो घूस वसूलते है उसमे से एक हिस्सा उच्च अधिकारियों को दे देते है। और जो अधिकारी ज्यादा घूस ऊपर पहुंचाता है उसकी पदोन्नति के अवसर भी बढ़ जाते है। इस तरह यहाँ नकारात्मक प्रोत्साहन है। . निजी क्षेत्र में मालिक के पास अपने नौकर को नौकरी से निकालने एवं पदोन्नत करने का अधिकार होता है, अत: कर्मचारी अपना बेहतर योगदान देने की कोशिश करते है। . अमेरिका के सरकारी विभागों में भारत की तुलना में कम भ्रष्टाचार क्यों है ? . अमेरिका के नागरिको के पास अपने कई जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारियों जैसे एसपी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, मुख्यमंत्री आदि को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। नौकरी से निकाले जाने के इस भय की वजह से वे जनता के प्रति जवाबदेह बने रहते है, और कार्यकुशलता का प्रदर्शन करते है। यदि कोई अधिकारी निकम्मापन एवं भ्रष्ट आचरण करता है तो वहां के नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें नौकरी से निकाल देते है। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो उसकी सुनवाई करने एवं दंड देने की शक्ति भी वहां के नागरिको के पास है। . मेरा मानना है यदि अमेरिका के नागरिको से वोट वापसी का क़ानून छीन लिया जाए तो महीने भर में ही अमेरिका के सरकारी अधिकारी भारतीय अधिकारियों से भी ज्यादा निकम्मे हो जायेंगे और आम अमेरिकी से किसी न किसी बहाने से घूस वसूलना शुरू कर देंगे। . बहरहाल, हमें अमेरिका की व्यवस्था को बदतर बनाने की जगह इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत के सरकारी विभागों को किस तरह ईमानदार एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है। . भारत के सरकारी विभागों को कार्यकुशल एवं ईमानदार बनाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए ? . मेरा मानना है कि यदि भारत में वोट वापसी एवं जूरी सिस्टम कानून लागू कर दिए जाते है तो भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी, और सरकारी अधिकारीयों की कार्य कुशलता में सुधार होने लगेगा। मैंने इसके लिए जूरी कोर्ट का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे : जिला पुलिस प्रमुख जिला शिक्षा अधिकारी जिला चिकित्सा अधिकारी जिला जूरी प्रशासक मिलावट रोक अधिकारी DD चेयरमेन RBI गवर्नर CBI डायरेक्टर BSNL चेयरमेन सेंसर बोर्ड चेयरमेन जिला जज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रिय जूरी प्रशासक केन्द्रीय सूचना आयुक्त . तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है। . इसके अलावा यदि उपरोक्त अधिकारियों के खिलाफ को शिकायत आती है तो इसकी सुनवाई आम नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। . ====== . जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट जूरी कोर्ट मंच पर देखा जा सकता है।

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    बिहार भाजपा के पहले मुख्यमंत्री राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुँचे
Samrat Choudhary...
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    1 hr ago
  • ​दरभंगा: जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है, पानी की किल्लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। आज के समय में पानी की बर्बादी रोकना न केवल हमारी ज़रूरत है, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी भी है। ​पानी की बर्बादी पर रोक: अक्सर हम अनजाने में बहुत सारा पानी बर्बाद कर देते हैं, जैसा कि वीडियो के माध्यम से देखा जा सकता है ,जबकि कई हिस्सों में लोग एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाला कल और भी मुश्किल हो सकता है। ​बेजुबानों के लिए बढ़ाया हाथ: इंसान तो अपनी प्यास मांग कर बुझा सकता है, लेकिन इस भीषण गर्मी में पक्षियों और जानवरों का हाल बेहाल है। आपसे अपील की है कि: ​अपनी छत पर मिट्टी के बर्तनों में पानी रखें। ​घर के बाहर या गली के कोने में पानी का इंतजाम करें ताकि आवारा पशु प्यासे न रहें। ​संदेश: आपकी थोड़ी सी जागरूकता किसी की जान बचा सकती है। पानी बचाएं और दूसरों की प्यास बुझाने का जरिया बनें।
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    ​दरभंगा: जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है, पानी की किल्लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। आज के समय में पानी की बर्बादी रोकना न केवल हमारी ज़रूरत है, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी भी है।
​पानी की बर्बादी पर रोक: अक्सर हम अनजाने में बहुत सारा पानी बर्बाद कर देते हैं, जैसा कि वीडियो के माध्यम से देखा जा सकता है ,जबकि कई हिस्सों में लोग एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाला कल और भी मुश्किल हो सकता है।
​बेजुबानों के लिए बढ़ाया हाथ: 
इंसान तो अपनी प्यास मांग कर बुझा सकता है, लेकिन इस भीषण गर्मी में पक्षियों और जानवरों का हाल बेहाल है। आपसे अपील की है कि:
​अपनी छत पर मिट्टी के बर्तनों में पानी रखें।
​घर के बाहर या गली के कोने में पानी का इंतजाम करें ताकि आवारा पशु प्यासे न रहें।
​संदेश: आपकी थोड़ी सी जागरूकता किसी की जान बचा सकती है। पानी बचाएं और दूसरों की प्यास बुझाने का जरिया बनें।
    user_JAN PAD Digital News
    JAN PAD Digital News
    Media company Darbhanga, Bihar•
    1 hr ago
  • दरभंगा जिले के सिमरी थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने पुलिस पर FIR दर्ज नहीं करने और मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला सिमरी थाना क्षेत्र के गौरा गांव का बताया जा रहा है, जहां की रहने वाली रौनक परवीन ने दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। रौनक परवीन का आरोप है कि उनके पति के साथ हुए मारपीट के मामले में सिमरी थाना जानबूझकर FIR दर्ज नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि 28 मार्च को जमीन विवाद को लेकर उनके पति के साथ दूसरे पक्ष के लोगों ने मारपीट की, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए DMCH में भर्ती कराया गया। पीड़िता के अनुसार, DMCH में भर्ती के दौरान उनके पति का फर्द बयान बेंता थाना द्वारा 2 अप्रैल को सिमरी थाना भेजा गया था। उनके पास पोस्ट ऑफिस की रिसीविंग भी मौजूद है, जिससे यह साबित होता है कि फर्द बयान समय पर भेज दिया गया था। लेकिन जब रौनक परवीन सिमरी थाना पहुंची, तो बार-बार उन्हें बताया गया कि फर्द बयान थाना तक पहुंचा ही नहीं है। रौनक परवीन ने आरोप लगाया है कि सिमरी थाना प्रभारी विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर पहले भी FIR दर्ज करने में टालमटोल करते रहे हैं और इस बार भी जानबूझकर मामला दर्ज नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस की लेटलतीफी के कारण ही उनके पति के साथ मारपीट की घटना हुई। पीड़िता ने SSP से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ जल्द से जल्द FIR दर्ज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और पीड़िता को कब तक न्याय मिल पाता है।
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    दरभंगा जिले के सिमरी थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने पुलिस पर FIR दर्ज नहीं करने और मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।
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रौनक परवीन का आरोप है कि उनके पति के साथ हुए मारपीट के मामले में सिमरी थाना जानबूझकर FIR दर्ज नहीं कर रहा है।
उन्होंने बताया कि 28 मार्च को जमीन विवाद को लेकर उनके पति के साथ दूसरे पक्ष के लोगों ने मारपीट की, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए DMCH में भर्ती कराया गया।
पीड़िता के अनुसार, DMCH में भर्ती के दौरान उनके पति का फर्द बयान बेंता थाना द्वारा 2 अप्रैल को सिमरी थाना भेजा गया था।
उनके पास पोस्ट ऑफिस की रिसीविंग भी मौजूद है, जिससे यह साबित होता है कि फर्द बयान समय पर भेज दिया गया था।
लेकिन जब रौनक परवीन सिमरी थाना पहुंची, तो बार-बार उन्हें बताया गया कि फर्द बयान थाना तक पहुंचा ही नहीं है।
रौनक परवीन ने आरोप लगाया है कि सिमरी थाना प्रभारी विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर पहले भी FIR दर्ज करने में टालमटोल करते रहे हैं और इस बार भी जानबूझकर मामला दर्ज नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस की लेटलतीफी के कारण ही उनके पति के साथ मारपीट की घटना हुई।
पीड़िता ने SSP से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ जल्द से जल्द FIR दर्ज करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और पीड़िता को कब तक न्याय मिल पाता है।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    2 hrs ago
  • Post by Santu Kumar SAH
    1
    Post by Santu Kumar SAH
    user_Santu Kumar SAH
    Santu Kumar SAH
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    10 hrs ago
  • दरभंगा:_मिर्जापुर-देकुली स्थित जानकी पोखर मैदान में अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित होगा “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ सम्मेलन” कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में दलित शोषण मुक्ति मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली उपस्थित होंगी
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    दरभंगा:_मिर्जापुर-देकुली स्थित जानकी पोखर मैदान में अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित होगा “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ सम्मेलन”
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में दलित शोषण मुक्ति मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली उपस्थित होंगी
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter Darbhanga, Bihar•
    12 hrs ago
  • Post by सुरेश चौहान
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    Post by सुरेश चौहान
    user_सुरेश चौहान
    सुरेश चौहान
    Salesperson गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    16 hrs ago
  • दरभंगा के SSP के जनता दरबार में लगातार फरियादी अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं कई थाना के खिलाफ भी आवेदन इस महिला की दर्द भरी कहानी सुने क्या आपके भी किसी आवेदक को दबा दिया गया ! #JantaDarbar #jantadarbarsspdarbhanga #sspdarbhanga #simritha #dmdarbhanga #Darbhangapolice #dmch #dmchbetathana
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    दरभंगा के SSP के जनता दरबार में लगातार फरियादी अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं कई थाना के खिलाफ भी आवेदन
इस महिला की दर्द भरी कहानी सुने 
क्या आपके भी किसी आवेदक को दबा दिया गया ! 
#JantaDarbar #jantadarbarsspdarbhanga #sspdarbhanga #simritha #dmdarbhanga #Darbhangapolice #dmch #dmchbetathana
    user_AWAAZ hindustan LIVE AZAAD PATRKAAR
    AWAAZ hindustan LIVE AZAAD PATRKAAR
    Darbhanga, Bihar•
    22 hrs ago
  • बहादुरपुर (दरभंगा) 8 अप्रैल 2026। बेमौसम बारिश से फसलों की हुई भयंकर क्षति के मुआवजा देने, उन्नत किस्म के सरकारी बीज के नाम पर मिलें खराब बीज की वजह से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने, दोषी कंपनी पर कार्रवाई करने, विभिन्न फसलों के खेती से अग्रिम बीज वितरण करवाने आदि मांगों को लेकर सैकड़ों किसान बटाईदारों ने अखिल भारतीय किसान महासभा की दरभंगा जिला परिषद के बैनर तले दरभंगा जिला कृषि पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन बहादुरपुर प्रखंड मुख्यालय से जुलूस के शक्ल में जुटकर अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार, जिला सचिव धर्मेश यादव, प्रवीण कुमार, सूर्य नारायण शर्मा, मकसूदन यादव "नथुनी यादव, केशरी यादव, दामोदर पासवान, अमर राम, हरि पासवान, विनोद सिंह आदि नेतृत्व में निकला । प्रदर्शनकारी जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय पर पहुंच गेट को जामकरके नारेबाजी करने लगे। गेट पर सुर्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए किसान महासभा के राज्य सह सचिव अभिषेक कुमार ने कहा कि बेमौसम बारिश ने जहां किसानों के पूरे मेहनत पर पानी फेर दिया हैं ऊपर से सरकार प्रशासन के फसल क्षति नहीं देने के लिए कागजी आंकलन बना रही हैं। हम जिला प्रशासन/कृषि विभाग को कहने आएं हैं कि जो भी आंकलन करिए किसानों बटाईदारों के फसल का जो नुकसान हुआ है उसका भरपाई करना होगा। नहीं तो आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। सभा को संबोधित करते हुए किसान महासभा के जिला सचिव धर्मेश यादव ने कहा कि कृषि पदाधिकारी को इस बात को अफसोस या ग्लानि भी नहीं हैं कि किसानों को उन्नत बीज के नाम पर खराब बीज दिया गया जो अंकुरित भी नहीं हुआ। सरकार प्रशासन को तो उन किसानों से माफी मांगना चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई करना चाहिए लेकिन शिकायतों के बाद किसानों की बात नहीं सुनी जा रही हैं। प्रदर्शन को प्रवीण यादव, शिवन यादव, केशरी यादव, सुनील यादव, सुरेंद्र यादव, जय नारायण यादव, लक्षो महतो, कोमल कांत यादव, नथुनी यादव, माले नेता हरि पासवान, विनोद सिंह, हरिश्चंद्र पासवान, अमर राम, मिथिलेश मुखिया, माला देवी, गन्नौरी देवी आदि ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कृषि पदाधिकारी के अनुपस्थित में नियुक्त पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा।
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    बहादुरपुर (दरभंगा) 8 अप्रैल 2026।
बेमौसम बारिश से फसलों की हुई भयंकर क्षति के मुआवजा देने, उन्नत किस्म के सरकारी बीज के नाम पर मिलें खराब बीज की वजह से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने, दोषी कंपनी पर कार्रवाई करने, विभिन्न फसलों के खेती से अग्रिम बीज वितरण करवाने आदि मांगों को लेकर सैकड़ों किसान बटाईदारों ने अखिल भारतीय किसान महासभा की दरभंगा जिला परिषद के बैनर तले दरभंगा जिला कृषि पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन बहादुरपुर प्रखंड मुख्यालय से जुलूस के शक्ल में जुटकर अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार, जिला सचिव धर्मेश यादव, प्रवीण कुमार, सूर्य नारायण शर्मा, मकसूदन यादव "नथुनी यादव, केशरी यादव, दामोदर पासवान, अमर राम, हरि पासवान, विनोद सिंह आदि नेतृत्व में निकला । प्रदर्शनकारी जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय पर पहुंच गेट को जामकरके नारेबाजी करने लगे। गेट पर सुर्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए किसान महासभा के राज्य सह सचिव अभिषेक कुमार ने कहा कि बेमौसम बारिश ने जहां किसानों    के पूरे मेहनत पर पानी फेर दिया हैं ऊपर से सरकार प्रशासन के फसल क्षति नहीं देने के लिए कागजी आंकलन बना रही हैं। हम जिला प्रशासन/कृषि विभाग को कहने आएं हैं कि जो भी आंकलन करिए किसानों बटाईदारों के फसल का जो नुकसान हुआ है उसका भरपाई करना होगा। नहीं तो आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। सभा को संबोधित करते हुए किसान महासभा के जिला सचिव धर्मेश यादव ने कहा कि कृषि पदाधिकारी को इस बात को अफसोस या ग्लानि भी नहीं हैं कि किसानों को उन्नत बीज के नाम पर  खराब बीज दिया गया जो अंकुरित भी नहीं हुआ। सरकार प्रशासन को तो उन किसानों से माफी मांगना चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई करना चाहिए लेकिन शिकायतों के बाद किसानों की बात नहीं सुनी जा रही हैं। प्रदर्शन को प्रवीण यादव, शिवन यादव, केशरी यादव, सुनील यादव, सुरेंद्र यादव, जय नारायण यादव, लक्षो महतो, कोमल कांत यादव, नथुनी यादव, माले नेता हरि पासवान, विनोद सिंह, हरिश्चंद्र पासवान, अमर राम, मिथिलेश मुखिया, माला देवी, गन्नौरी देवी आदि ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कृषि पदाधिकारी के अनुपस्थित में नियुक्त पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा।
    user_JAN PAD Digital News
    JAN PAD Digital News
    Media company Darbhanga, Bihar•
    1 hr ago
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