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एटा के मारहरा से एसएचओ कृष्णकांत लोधी का 20 महीने का कार्यकाल पूरा होने के बाद तबादला हो गया है। उनके विदाई समारोह के दौरान पूरा कस्बा उन्हें सम्मान देने के लिए उमड़ पड़ा। मारहरा में बिताए इन 20 महीनों के दौरान उनके कार्यभार से प्रभावित होकर स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।
Star ToDay Samachar
एटा के मारहरा से एसएचओ कृष्णकांत लोधी का 20 महीने का कार्यकाल पूरा होने के बाद तबादला हो गया है। उनके विदाई समारोह के दौरान पूरा कस्बा उन्हें सम्मान देने के लिए उमड़ पड़ा। मारहरा में बिताए इन 20 महीनों के दौरान उनके कार्यभार से प्रभावित होकर स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।
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- उत्तर प्रदेश के जनपद एटा के जलेसर स्थित आईटीआई विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र के गांव नगला धनीराम में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ रही है। गांव में ललित कुमार पुत्र गंगा सिंह के घर के समीप लगा एक हाईटेंशन विद्युत पोल आधार से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है, जो अब केवल बिजली के तारों के सहारे खड़ा है। बरसात और तेज हवा के दौरान यह पोल कभी भी गिर सकता है, जिसके कारण आसपास रहने वाले परिवारों में इस पोल की वजह से दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या के संबंध में कई बार विद्युत विभाग को सूचित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पोल को नहीं बदला गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और विद्युत विभाग से तत्काल इस क्षतिग्रस्त पोल को बदलने, सुरक्षा व्यवस्था करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है ताकि किसी संभावित जनहानि से बचा जा सके।1
- एटा के राजकीय इण्टर कॉलेज (GIC) से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ओ-लेवल (O Level) की ऑफलाइन परीक्षा देने आए दर्जनों छात्र-छात्राओं का भविष्य सिर्फ चंद मिनटों की देरी की वजह से दांव पर लगा दिया गया। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे निर्धारित था और दूर-दराज से आए मासूम बच्चे और बच्चियाँ सुबह 9:15 बजे ही परीक्षा केंद्र पर पहुँच चुके थे। इसके बावजूद, नियमों की दुहाई देकर कॉलेज के शिक्षकों ने गेट बंद कर दिया और बच्चों को अंदर घुसने नहीं दिया। गेट पर रोते-बिलखते पीड़ित छात्रों ने शिक्षकों के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं और कहा कि थोड़ी बहुत देरी के लिए उन्हें माफ़ कर दिया जाए, वरना उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। लेकिन वहाँ मौजूद निष्ठुर शिक्षकों का दिल नहीं पघला। उन्होंने बच्चियों के आँसू नहीं देखे और बेरहमी से उन्हें परीक्षा देने से वंचित कर दिया, जिससे निराश होकर बच्चे कॉलेज गेट पर ही फूट-फूटकर रोने लगे।4
- अंजू ने दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 23 प्राप्त की है। इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास को मुख्य कारक माना जा रहा है। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है जो पुलिस बल में शामिल होकर देश सेवा का सपना देखते हैं। दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की जांच करने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अंजू की सफलता यह संदेश देती है कि सही रणनीति, नियमित अध्ययन और दृढ़ संकल्प के माध्यम से किसी भी चुनौतीपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा को उत्तीर्ण किया जा सकता है।1
- चोरी की दो अलग-अलग घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए थाना हाथरस गेट पुलिस ने चोरी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 950 ग्राम चांदी के चोरी हुए आभूषण और ₹1,610 नकद बरामद किए हैं। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देश पर गठित टीम ने संदिग्ध व्यक्ति एवं वाहन चेकिंग अभियान के दौरान आरटीओ कार्यालय के पास से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 14 नवंबर 2025 को तवेला गली के रहने वाले गगन वर्मा ने थाना हाथरस गेट में शिकायत दर्ज कराई थी कि चोर उनकी 'साक्षी ज्वैलर्स' नामक दुकान का शटर काटकर करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य के चांदी के आभूषण चुरा ले गए। इसके अलावा, 15 जून 2026 को महादेव कॉलोनी में किराये पर रहने वाले कृष्णपाल ने भी अपने मकान में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। पकड़े गए आरोपियों की पहचान जलालपुर निवासी अनंत और जलालपुर गणेशपुर निवासी सनी सेंगर के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने सुनसान मकानों की रेकी कर चोरी करने की बात स्वीकार की है और साक्षी ज्वैलर्स की दुकान का शटर काटने का जुर्म भी कबूल किया है। प्रभारी निरीक्षक नितिन कसाना के नेतृत्व में पुलिस टीम आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है और उनके खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।2
- हाथरस के कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के मोहल्ला रमनपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में शनिवार दोपहर शॉर्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। यह हादसा विद्यालय की ऊपरी मंजिल पर बने एक कमरे में हुआ। आग लगने की वजह से कमरे में रखा बिस्तर और अन्य सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। राहत की बात यह रही कि विद्यालय में रह रही सभी 21 छात्राएं इस हादसे में पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना के समय सभी छात्राएं नीचे मैस में बैठकर भोजन कर रही थीं, जिसके कारण एक बड़ा हादसा होने से टल गया। कमरे से धुआं उठता देखकर विद्यालय के शिक्षकों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। इस दौरान जब छोटी दमकल का पानी खत्म हो गया, तो विद्यालय की ही पानी की टंकी से पानी का इस्तेमाल कर आग पर काबू पाया गया। घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक चिरंजेव नाथ सिन्हा भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यालय की छात्राओं से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और घटना की पूरी जानकारी ली। इस पूरी घटना में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद थाना क्षेत्र में एक डेढ़ वर्षीय मासूम की निर्मम हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक और त्वरित फैसला सुनाते हुए आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। इस जघन्य अपराध ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें आरोपी ने मासूम को पटककर उसकी हत्या कर दी थी। यह मामला न्याय व्यवस्था की तत्परता का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। वारदात के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महज 6 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अदालत में भी सुनवाई अत्यंत तेजी से पूरी की गई और घटना के केवल 39 दिनों के भीतर आरोपी को दोषी करार दे दिया गया। इस प्रकार, घटना से लेकर फैसले तक की पूरी प्रक्रिया केवल 41 दिनों में संपन्न हो गई, जिसे राज्य में शीघ्र न्याय के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने पुलिस की त्वरित जांच, साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के आधार पर यह सख्त निर्णय लिया। हालांकि, भारतीय कानून के तहत इस मामले में यदि उच्च न्यायालय में अपील की जाती है, तो मृत्युदंड का अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय और आवश्यक होने पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होता है।1