मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र से 16 दिन पहले छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश करने वाले चार हाथियों का एक समूह आज सोमवार को घुसरिया बीट के चिचगोहना गांव में अरुण राय के खेत में पहुँचकर धान की फसल को अपना आहार बना रहा है। ये हाथी पिछले 13 दिनों से मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट में ठहरे हुए थे, और सोमवार को दिनभर लेंगरा डोंगरी पहाड़ के जंगल में बिताने के बाद शाम होते ही जंगल से बाहर आ गए। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सीमा से मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की जैतहरी तहसील एवं वन परिक्षेत्र से लगभग 15 से 17 किलोमीटर दूर स्थित है। इस चार हाथियों के समूह में तीन हाथी 159 दिन पहले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले अंतर्गत कटघोरा वन मंडल के जड़गा वन परिक्षेत्र में रहने वाले 50 से अधिक हाथियों के बड़े समूह से अलग हो गए थे। इन तीनों हाथियों के साथ विगत दो माह से एक बड़ा नर हाथी भी जुड़कर विचरण कर रहा है। यह समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र से निकलकर मध्यप्रदेश के अनूपपुर, शहडोल और डिंडोरी होते हुए विगत 16 दिनों से एक बार फिर छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के क्षेत्र में वापस आ गया है। इस दौरान, उन्होंने एक दिन शिवनी बीट में, दो दिन गुल्लीडांड़ के माडाकोट जंगल में बिताए, और पिछले 13 दिनों से वे घुसरिया बीट के लेंगरा डोंगरी जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे थे, जिसके बाद अब वे चिचगोहना गांव के खेत में धान खा रहे हैं।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र से 16 दिन पहले छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश करने वाले चार हाथियों का एक समूह आज सोमवार को घुसरिया बीट के चिचगोहना गांव में अरुण राय के खेत में पहुँचकर धान की फसल को अपना आहार बना रहा है। ये हाथी पिछले 13 दिनों से मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट में ठहरे हुए थे, और सोमवार को दिनभर लेंगरा डोंगरी पहाड़ के जंगल में बिताने के बाद शाम होते ही जंगल से बाहर आ गए। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सीमा से मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की जैतहरी तहसील एवं वन परिक्षेत्र से लगभग 15 से 17 किलोमीटर दूर स्थित है। इस चार हाथियों के समूह में तीन हाथी 159 दिन पहले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले अंतर्गत कटघोरा वन मंडल के जड़गा वन परिक्षेत्र में रहने वाले 50 से अधिक हाथियों के बड़े समूह से अलग हो गए थे। इन तीनों हाथियों के साथ विगत दो माह से एक बड़ा नर हाथी भी जुड़कर विचरण कर रहा है। यह समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र से निकलकर मध्यप्रदेश के अनूपपुर, शहडोल और डिंडोरी होते हुए विगत 16 दिनों से एक बार फिर छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के क्षेत्र में वापस आ गया है। इस दौरान, उन्होंने एक दिन शिवनी बीट में, दो दिन गुल्लीडांड़ के माडाकोट जंगल में बिताए, और पिछले 13 दिनों से वे घुसरिया बीट के लेंगरा डोंगरी जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे थे, जिसके बाद अब वे चिचगोहना गांव के खेत में धान खा रहे हैं।
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित 'पहचान चूक' का एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और डिजिटल वेरिफिकेशन के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुढार के प्रतिष्ठित नागरिक श्री सत्यजीत शुक्ला के निवास पर बुढार थाना पुलिस की एक टीम अचानक पहुँच गई। पुलिस ने परिवार को बताया कि श्री सत्यजीत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई पुराना आपराधिक मामला लंबित है और वे उसी सिलसिले में पूछताछ तथा कार्रवाई के लिए आए हैं। पुलिस की इस अप्रत्याशित दस्तक से पूरा परिवार हैरान और भारी मानसिक तनाव में आ गया। इस विकट परिस्थिति में श्री सत्यजीत शुक्ला के पुत्र विकास शुक्ला ने घबराने के बजाय सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल पूरी पुलिसिया कार्रवाई की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। कैमरे की मौजूदगी और विकास शुक्ला द्वारा पूछे गए तीखे, तथ्यात्मक और कानूनी सवालों के बाद पुलिस टीम असमंजस में पड़ गई। जब विकास शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों से संबंधित मामले के पुख्ता अभिलेख, केस डायरी और पहचान संबंधी ठोस दस्तावेज मांगे, तब जाकर पुलिसिया तंत्र ने अपनी फाइलें दोबारा जाँचीं। गहन पूछताछ, दस्तावेजों के मिलान और वीडियो ग्राफ़ी के साक्ष्य के सामने आखिरकार बुढार पुलिस को अपनी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक स्वीकार करनी पड़ी। पुलिस ने माना कि उन्हें जिस व्यक्ति की तलाश थी, वह कोई और था और यह भारी भ्रम नाम तथा उपनाम (सत्यजीत शुक्ला) की समानता के कारण उत्पन्न हुआ था। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि इस पीड़ित परिवार के श्री सत्यजीत शुक्ला के नाम पर बुढार थाने में ऐसा कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित है। इसके बाद पुलिस ने परिवार को आश्वस्त किया और वहाँ से लौट गई। हालाँकि, पुलिस की 'सॉरी' के साथ मामला खत्म होने के बावजूद, पत्रकारों और समाजसेवियों ने इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था से कुछ सीधे और कड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ नाम की समानता किसी को भी संदिग्ध बना देगी और क्या शाहडोल पुलिस के पास किसी के घर दबिश देने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' (जैसे पिता का नाम, उम्र, हुलिया, पता और आधार/पहचान पत्र का मिलान) की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही, इस गरिमापूर्ण परिवार को पुलिस के घर पहुँचने से जो मानसिक आघात और सामाजिक असहजता झेलनी पड़ी, उसकी भरपाई कौन करेगा, इस पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह भी पूछा गया कि यदि जागरूक युवा विकास शुक्ला ने पूरी सजगता से वीडियो रिकॉर्डिंग न की होती और तीखे सवाल न पूछे होते, तो क्या पुलिस अपनी गलती इतनी आसानी से मानती या फिर किसी निर्दोष को थाने के चक्कर काटने पड़ते। इस घटना के बाद पीड़ित शुक्ला परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि आधुनिक पुलिसिंग के इस दौर में, जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीएनएस जैसी प्रणालियाँ मौजूद हैं, वहाँ इस तरह की मानवीय और प्रक्रियात्मक त्रुटियां असहनीय हैं। नागरिकों ने भविष्य में बुढार या पूरे शहडोल संभाग में किसी भी अन्य निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों, सम्मान और मानसिक शांति के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा रिकॉर्ड के शत-प्रतिशत सत्यापन की मांग की है।1
- आजाद समाज पार्टी की एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी ने बैठक में संगठन को और अधिक मजबूत करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।1
- केशवाही के पुराना बस स्टैंड पर नया शॉपिंग डेस्टिनेशन, आकृति वस्त्रालय, खुल गया है, जो पूरे परिवार के लिए सभी प्रकार के कपड़े उपलब्ध कराता है। यहाँ ग्राहकों को ब्रांडेड जींस, बैगी शर्ट, टी-शर्ट के साथ-साथ छोटे बच्चों के लिए विशेष वीआईपी प्रिंट टी-शर्ट भी मिलेंगी। महिलाओं के लिए बेहतरीन साड़ियाँ और सलवार सूट भी इस वस्त्रालय की खास पेशकश हैं। आकृति वस्त्रालय अपने ग्राहकों से एक बार सेवा का मौका देने का अनुरोध करता है।1
- चिरमिरी में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) की घोर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी नमक पर आवारा कुत्ते मुँह मार रहे हैं, जिससे गरीबों के हक और उनके लिए निर्धारित सरकारी नमक की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना सीधे तौर पर एसडीएम की अनदेखी और लापरवाही का परिणाम बताई जा रही है, जिसके कारण गरीबों के अधिकार के नमक पर आवारा कुत्ते अपना कब्ज़ा जमा रहे हैं।1
- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने अपने डिंडोरी प्रवास के दौरान कलेक्टर कार्यालय के सभागार में एक प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की भूमिका और मानव अधिकारों के संरक्षण को लेकर विस्तार से जानकारी प्रदान की। कानूनगो ने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के मानव अधिकारों की रक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना है, और वह लगातार इस बात पर कार्य कर रहा है कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कोई भी पात्र व्यक्ति अपने अधिकारों और सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना शासन और प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रियंक कानूनगो ने मीडिया को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि पत्रकार जनसमस्याओं को प्रमुखता से सामने लाने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेसवार्ता के दौरान, उन्होंने पत्रकारों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए और जिले में किए गए अपने भ्रमण, योजनाओं की समीक्षा तथा मानव अधिकारों से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आशीष खरे, अपर कलेक्टर जे.पी. यादव, डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक, जनसंपर्क अधिकारी चेतराम अहिरवार सहित जिला प्रशासन के कई अधिकारी और जिले के पत्रकार उपस्थित रहे।1
- ग्राम पंचायत समनापुर के वार्ड क्रमांक 01 में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे परेशान होकर महिलाओं ने आज जनपद पंचायत समनापुर कार्यालय के सामने खाली बर्तन लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन से इस समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की। महिलाओं ने बताया कि वार्ड में पीने के पानी की स्थिति अत्यंत खराब है और लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों में घोर लापरवाही बरती गई है। ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के ठेकेदार और पीएचई विभाग पर करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद नियमित पेयजल उपलब्ध न कराने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ड में जल्द ही नियमित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगी। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं कि इस गंभीर पेयजल संकट का समाधान कब तक किया जाता है।1
- अनूपपुर जिले के जनपद पंचायत जैतहरी की ग्राम पंचायत चोरभठी में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने ब्रांच चोरभठी में एक एडहाक कमेटी का गठन किया है। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत चोरभठी में मनरेगा के कार्यों और प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। उनका कहना है कि बड़े नेताओं के संरक्षण में ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक 'गले तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए' हैं। महिलाओं ने बताया कि मनरेगा में काम करने के बावजूद मजदूरों को वर्षों से मजदूरी नहीं मिली है, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को इससे वंचित किया जा रहा है और अपात्रों को लाभ दिया जा रहा है। जनता द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद, बड़े नेताओं के संरक्षण के कारण भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि सामुदायिक भवन, कूड़ा घर और मुक्ति धाम का निर्माण कार्य अधूरा है, लेकिन उसकी पूरी राशि निकालकर गबन कर ली गई है। मनरेगा के कामों में ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन का अंधाधुंध प्रयोग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को काम नहीं मिल रहा और उन्हें रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है। महिला समिति ने रामबाई राठौर के संघर्ष की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें अकेला न समझे, बल्कि पंचायत चोरभठी के सभी न्याय और अमन पसंद नागरिक उनके साथ खड़े हैं। महिलाओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच कर भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने में ढिलाई की जाती है, तो वे चुप नहीं बैठेंगी। इस दौरान, एडवा की प्रांतीय उपाध्यक्ष कामरेड नीना शर्मा और जिला अध्यक्ष कामरेड पार्वती राठौर ने संबोधित करते हुए कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर चुके हैं, और महिलाओं का उत्पीड़न व बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने 12 जून को जिला मुख्यालय अनूपपुर में होने वाले जगी प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए महिलाओं से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया। इसके बाद एडहाक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से श्याम बाई को संयोजक और रामबाई राठौर व गीता बाई राठौर को सहसंयोजक बनाया गया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने 12 जून को जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन की रणनीति भी बनाई है।1
- शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ बुढार पुलिस ने बिना पुख्ता जाँच और सत्यापन के एक निर्दोष परिवार, शुक्ला परिवार, को भारी मानसिक तनाव दिया। पुलिस की कथित पहचान चूक के कारण उन्हें शर्मिंदगी और परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, बुढार क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक श्री सत्यजीत शुक्ला के निवास पर अचानक बुढार थाना पुलिस की एक टीम पहुँच गई। पुलिस ने परिजनों को बताया कि श्री सत्यजीत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई पुराना आपराधिक मामला लंबित है और वे उसी सिलसिले में पूछताछ और कार्रवाई के लिए आए हैं। पुलिस को अचानक दरवाजे पर देखकर पूरा परिवार हैरान और परेशान हो गया, लेकिन श्री सत्यजीत शुक्ला के पुत्र विकास शुक्ला ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल पूरी पुलिसिया कार्रवाई की वीडियो ग्राफ़ी (लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग) शुरू कर दी। कैमरे की मौजूदगी और विकास शुक्ला द्वारा पूछे गए तथ्यात्मक तथा कानूनी सवालों से पुलिस टीम असमंजस में पड़ गई। जब विकास शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों से संबंधित मामले के पुख्ता अभिलेख, केस डायरी और पहचान संबंधी ठोस दस्तावेज मांगे, तब पुलिस ने अपनी फाइलें दोबारा जाँची। गहन पूछताछ और वीडियो ग्राफ़ी के साक्ष्य के सामने आखिरकार बुढार पुलिस को अपनी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक स्वीकार करनी पड़ी। पुलिस ने माना कि उन्हें जिस व्यक्ति की तलाश थी, वह कोई और है और यह भ्रम नाम और उपनाम (सत्यजीत शुक्ला) की समानता के कारण पैदा हुआ था। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस पीड़ित परिवार के श्री सत्यजीत शुक्ला के नाम पर बुढार थाने में ऐसा कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित है। इसके बाद पुलिस परिवार को आश्वस्त कर लौट गई। इस घटना के बाद पत्रकारों और समाजसेवियों ने प्रशासनिक व्यवस्था से कड़े सवाल पूछे हैं कि क्या नाम की समानता किसी को भी संदिग्ध बना देगी और क्या शाहडोल पुलिस के पास दबिश देने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने इस गरिमापूर्ण परिवार को हुए मानसिक आघात और सामाजिक असहजता का जिम्मेदार कौन है, इस पर भी प्रश्न उठाया। लोगों का कहना है कि यदि विकास शुक्ला ने वीडियो रिकॉर्डिंग न की होती, तो क्या पुलिस इतनी आसानी से अपनी गलती मानती। पीड़ित शुक्ला परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा और कड़े दिशा-निर्देशों की मांग की है, ताकि भविष्य में बुढार या पूरे शहडोल संभाग में किसी भी अन्य निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों, सम्मान और मानसिक शांति के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो।1
- रतलाम स्थित नीलकंठ धाम में एक भक्तिमय आयोजन के तहत नानी बाई के मायरे की भावपूर्ण कथा का श्रवण कराया गया। इस आध्यात्मिक प्रसंग को प्रज्ञा दीदी ने अपने भक्तिमय वर्णन से सुनाया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।1