Google Map की गलतियों, भारी ट्रैफिक जाम और जानबूझकर किए गए धरना-प्रदर्शन-चक्का जाम के कारण हुई बाधाओं के चलते सैकड़ों विद्यार्थियों को NEET परीक्षा देने से रोक दिया गया। कहीं मात्र 30 सेकंड, तो कहीं 1 मिनट, 2-2 मिनट या 5 मिनट की देरी होने पर इन छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया। अनेक स्थानों पर निर्दोष बच्चों और उनके अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे लगातार मिन्नतें करते रहे, गिड़गिड़ाते रहे और यहाँ तक कि परीक्षा केंद्र पर उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों के पैर भी पकड़ते रहे। जहाँ बच्चे अपने हक की बात कर रहे थे, वहीं अभिभावक उनके भविष्य की दुहाई दे रहे थे, लेकिन कथित तौर पर निष्ठुर और निर्दयी अधिकारी-कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा। ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें 'ऊपर' से ही दया न करने या विशेष एवं भारी सख्ती बरतने के आदेश थे। धर्मेंद्र प्रधान से यह सवाल पूछा गया है कि क्या ऐसे निठल्ले जनप्रतिनिधियों, अधिकारी और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत है, जो अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, अपना कार्य नहीं करते, या कर्तव्य पालन में कोताही बरतते हैं? या फिर सारी जोर आजमाइश केवल निर्दोष बच्चों और उनके अभिभावकों पर ही की जाती है? यह भी सवाल उठाया गया कि ये अधिकारी-कर्मचारी खुद तो पेपर लीक या पेपर आउट होने जैसी घटनाओं को रोक नहीं पाते, लेकिन बच्चों को परीक्षा देने से रोक रहे हैं। कहीं यह कार्रवाई बच्चों और उनके अभिभावकों द्वारा पेपर लीक के विरोध का 'बदला' तो नहीं थी? इस अमानवीय व्यवहार के कारण कहीं 30 सेकंड, कहीं 1-2 मिनट और कहीं 4-5 मिनट की देरी से सैकड़ों विद्यार्थी NEET परीक्षा से वंचित रह गए। रोते, बिलखते और पैर पकड़ते रहे बच्चों तथा उनके अभिभावकों के प्रति निष्ठुर और निर्दयी अधिकारी-कर्मचारियों का दिल फिर भी नहीं पसीजा।
Google Map की गलतियों, भारी ट्रैफिक जाम और जानबूझकर किए गए धरना-प्रदर्शन-चक्का जाम के कारण हुई बाधाओं के चलते सैकड़ों विद्यार्थियों को NEET परीक्षा देने से रोक दिया गया। कहीं मात्र 30 सेकंड, तो कहीं 1 मिनट, 2-2 मिनट या 5 मिनट की देरी होने पर इन छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया। अनेक स्थानों पर निर्दोष बच्चों और उनके अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे लगातार मिन्नतें करते रहे, गिड़गिड़ाते रहे और यहाँ तक कि परीक्षा केंद्र पर उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों के पैर भी पकड़ते रहे। जहाँ बच्चे अपने हक की बात कर रहे थे, वहीं अभिभावक उनके भविष्य की दुहाई दे रहे थे, लेकिन कथित तौर पर निष्ठुर और निर्दयी अधिकारी-कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा। ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें 'ऊपर' से ही दया न करने या विशेष एवं भारी सख्ती बरतने के आदेश थे। धर्मेंद्र प्रधान से यह सवाल पूछा गया है कि क्या ऐसे निठल्ले जनप्रतिनिधियों, अधिकारी और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत है, जो अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, अपना कार्य नहीं करते, या कर्तव्य पालन में कोताही बरतते हैं? या फिर सारी जोर आजमाइश केवल निर्दोष बच्चों और उनके अभिभावकों पर ही की जाती है? यह भी सवाल उठाया गया कि ये अधिकारी-कर्मचारी खुद तो पेपर लीक या पेपर आउट होने जैसी घटनाओं को रोक नहीं पाते, लेकिन बच्चों को परीक्षा देने से रोक रहे हैं। कहीं यह कार्रवाई बच्चों और उनके अभिभावकों द्वारा पेपर लीक के विरोध का 'बदला' तो नहीं थी? इस अमानवीय व्यवहार के कारण कहीं 30 सेकंड, कहीं 1-2 मिनट और कहीं 4-5 मिनट की देरी से सैकड़ों विद्यार्थी NEET परीक्षा से वंचित रह गए। रोते, बिलखते और पैर पकड़ते रहे बच्चों तथा उनके अभिभावकों के प्रति निष्ठुर और निर्दयी अधिकारी-कर्मचारियों का दिल फिर भी नहीं पसीजा।
- NEET की परीक्षा कल आयोजित होने वाली है, जिसके मद्देनजर राज्य सरकार ने व्यापक प्रबंध किए हैं। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि सभी छात्र बिना किसी चिंता के परीक्षा दे सकें। हालांकि, इन सभी व्यवस्थाओं के बीच, सरकार की संवेदनशीलता पर तीखे सवाल उठाए गए हैं: क्या यह सरकार एक पिता की पीड़ा को समझ पाएगी, और क्या यह बच्चों की मानसिक स्थिति को कभी समझने में सक्षम होगी?1
- इंदौर क्राइम ब्रांच की विशेष जाँच दल (SIT) ने लॉ छात्र अक्षय मालवीय को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वह NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर छात्रों के साथ ऑनलाइन ठगी करता था। आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी पोस्ट के ज़रिए छात्रों को आकर्षित करता और उनसे ऑनलाइन भुगतान करवाता था। जाँच में खुलासा हुआ है कि उसने UPI के माध्यम से 30 से अधिक लोगों से पैसे वसूले। ठगी के लिए वह पुराने प्रश्नपत्रों और अध्ययन सामग्री को संपादित करके उन्हें नए पेपर के नाम पर बेचता था। फिलहाल पुलिस इस ठगी के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जाँच कर रही है।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ मात्र 30 सेकंड की देरी के कारण छात्रों का सपना टूट गया। NEET परीक्षा केंद्र के बाहर कई छात्र फूट-फूटकर रोते हुए नज़र आए, क्योंकि इस मामूली विलंब के चलते उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका और उनके परीक्षा देने की उम्मीदें धराशायी हो गईं।1
- भोपाल में स्थित ईपीएस स्कूल एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी प्रतीक्षित है।1
- सिंधी समाज मेला समिति द्वारा 'हिल फ्रॉम द रूट' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सिंधी धर्मशाला, 5 नंबर शिवाजी नगर में आयोजित किया गया।4
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में अयोध्या बायपास रोड पर एक आवास मेले का शुभारंभ किया गया है। यह आयोजन शहर के अयोध्या बायपास रोड पर स्थित आवास मेला स्थल पर शुरू हुआ।1
- सुल्तानपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को भाजपा मंडल सुल्तानपुर और नगर परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें पदाधिकारी, कार्यकर्ता, अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।1
- विश्व योग दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित नगर निगम कार्यालय में नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा योग किया गया।1