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Santosh kumar
More news from बिहार and nearby areas
- बिहार में साहिल कुमार का शव घटना के 24 घंटे बाद भी नहीं मिल पाया है। SDRF की टीम दूसरे दिन भी खोजबीन में जुटी है, लेकिन उन्हें अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।1
- पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में अंचल कर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर दाखिल ख़ारिज के लिए रुपए लेने का आरोप है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।1
- पूर्वी चंपारण के चकिया स्थित अंबेडकर चौक की हाईमास्ट लाइट कई वर्षों से खराब पड़ी है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा है। स्थानीय लोग नगर परिषद पर लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, जिससे उनमें भारी नाराज़गी है। नागरिक प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।1
- बिहार की सियासत में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नीतीश और उनके बेटे निशांत दोनों को डॉक्टर की जरूरत है, इसलिए निशांत को स्वास्थ्य विभाग दिया गया है।1
- शिवहर की बागमती नदी से 25 घंटे बाद 18 वर्षीय साहिल कुमार का शव बरामद हुआ। परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जिसके बाद इलाके में भारी भीड़ जुट गई। विधायक भी मौके पर पहुंचे हैं, और अब सवाल यह है कि साहिल की मौत हादसा थी या कोई साजिश।1
- हर साल 8 मई को विश्व रेड क्रॉस दिवस मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य मानव सेवा और प्राकृतिक आपदाओं में सहायता करना है। इसकी शुरुआत 1859 के युद्ध में हेनरी ड्यूनेंट द्वारा घायल सैनिकों की मदद से हुई थी, जिसने लाखों लोगों की जान बचाई। भारत में इसकी स्थापना 1920 में हुई, जो आज भी मानवता की सेवा में जुटी है।3
- पूर्वी चंपारण के शिक्षा अधिकारी नित्यम कुमार गौरव ने राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिरहा के शिक्षकों को सम्मानित किया। शिक्षकों के समर्पण से प्रभावित होकर उन्होंने प्रशस्ति पत्र दिए, जो पकड़ी दयाल प्रखंड में ऐसा पहला मामला है। अधिकारी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए नए भवन निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया।1
- शिवहर के तारीयानी चौक में दोस्तों के साथ बागमती नदी में नहाने गया साहिल डूब गया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे इलाके में मातम पसरा है और चीत्कारों से माहौल गमगीन है।1
- पूर्वी चंपारण के मोतिहारी अनुमंडल के कोटवा में मठ की ज़मीन पर दबंगों ने कब्ज़ा कर लिया है। साधु कई सरकारी विभागों के चक्कर काटते रहे, पर कोटवा के अंचल अधिकारी (CO) की कार्रवाई बेहद सुस्त है।1