मानव सभ्यता के विकास में मुख्य भूमिका कुम्हारों की थी और आगे व्यवस्था परिवर्तन में भी रहेगी....... *100% सही बात* — इतिहास का सबसे बड़ा सबक यही है: *“भीड़ जीत नहीं दिलाती, दिशा दिलाती है।”* *1. आपका तर्क आंकड़ों से परखते हैं* *85% बनाम 15%* का जो उदाहरण आप दे रहे हैं, वो बाबासाहेब आंबेडकर ने भी कहा था — “गुलामी का कारण संख्या नहीं, *चेतना का अभाव* है।” *क्यों 85% फिर भी पीछे रहा?* 1. *बंटवारा*: 85% लोग 6000 जातियों में टूटे। 15% लोग संगठित रहे। 2. *संसाधन पर कब्जा*: शिक्षा, जमीन, शस्त्र, शास्त्र — चारों पर एकाधिकार। 3. *नैरेटिव कंट्रोल*: कौन पढ़ेगा, कौन पढ़ाएगा, इतिहास कौन लिखेगा — ये तय करने की ताकत। 4. *दूरगामी सोच*: 100 साल का प्लान बनाकर चलना vs आज का राशन देखना। *नतीजा*: संख्या बड़ी थी, पर *एजेंडा छोटा था*। इसलिए गुलामी बरकरार रही। *2. दूरगामी सोच = असली ताकत — 3 मिसाल* 1. *चाणक्य*: अकेला ब्राह्मण, पर 15 साल का प्लान। नंद वंश गया, मौर्य बना। संख्या नहीं, नीति जीती। 2. *अंग्रेज*: मुट्ठीभर व्यापारी आए। “फूट डालो राज करो” की सोच। 20 करोड़ के देश पर 200 साल राज। 3. *अमूल*: 1946 में 2 गांव, 247 लीटर दूध। वर्गीज कुरियन की सोच — “किसान मालिक बनेगा”। आज 3.6 करोड़ लीटर रोज, 18,000 करोड़ का टर्नओवर। *सोच ने संख्या को पीछे छोड़ दिया*। *3. आज अतिपिछड़ा समाज के लिए मतलब क्या* आप वंचित अतिपिछड़ी जातियां, 40% आबादी — संख्या कम नहीं है। *पर सोच क्या है?* - *शॉर्ट टर्म*: मेरा बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ ले, मेरी TC मार्कशीट आदि सबकुछ फ्री हो जाए अर्थात सस्ती शिक्षा। - *लॉन्ग टर्म*: मेरी पूरी जाति SC लिस्ट में आए, मेरा क्लस्टर CFC ले, मेरा लड़का अफसर बने और पॉलिसी बनाए। *फर्क*: पहला सोचने वाला 500 रु बचाता है। दूसरा सोचने वाला 500 करोड़ की ग्रांट खींच लाता है। *4. तो अब करना क्या है — दूरगामी सोच के 4 स्तंभ* 1. *शिक्षा*: डिग्री नहीं, *एजेंडा पढ़ो*। कानून, अर्थशास्त्र, टेक्नोलॉजी — ताकि कल फाइल तुम पास करो। 2. *अर्थ*: नौकरी नहीं, *उद्यम*। आपका 10 करोड़ का डेयरी क्लस्टर,5 करोड़ का भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा प्लान, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों को संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी दिलाने का प्रयास आदि इसी का उदाहरण है ताकि 1000 नहीं लाखों करोड़ों लोगों को मालिक बनाया जा सके यकीनन। 3. *संगठन*: जाति नहीं बल्कि *मुद्दा* जोड़ो। “SC लिस्ट + CFC + फ्री TC मार्कशीट + शिल्पकार आरक्षण आदि” — जो भी इस पर हां, वो अपना अन्यथा शेष सभी ध्रुव विरोधी। 4. *नैरेटिव*: रोना नहीं, *रिकॉर्ड* बनाओ। अनिल प्रजापति का नाम इसलिए उभर रहा है क्योंकि उसने सामूहिक विकास की धारणा से संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी संबंधी अपील दाखिल की, भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा की मुहिम चला रहे, यहां तक कि छात्र जीवन से अपने आपको सामाजिक संघर्ष में झोंक दिए— सबकुछ लिखित, संवैधानिक, दूरगामी। *निचोड़* *85% गुलाम इसलिए रहे क्योंकि वो 85% थे ही नहीं* — वो 6000 टुकड़े थे। *15% राज इसलिए किए क्योंकि वो 1 मकसद थे*। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान का काम लगभग 40% वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित भूमिहीन मजदुरा वर्गों को *1 मकसद* देना है: *“संवैधानिक हक + भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा+ आर्थिक ताकत = राजनीतिक हिस्सेदारी”*। संख्या आपके पास है। *अब सोच भी आपकी हो गई तो गुलामी का सवाल ही खत्म*। क्लस्टर पास कराओ, सस्ती व समान शिक्षा की मुहिम बढ़ाओ तथा शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत संवैधानिक हक अधिकार व सामाजिक न्याय दिलाओ— जो जाति जाति की गुटबाजी के वशीभूत निजी स्वार्थ में समाज को टुकड़े टुकड़े गैंग में बांटने से नहीं, बल्कि एकीकरण की सोच का वास्तविक सबूत होगा। भीड़ नहीं, *बुद्धि* जिताएगी। और बुद्धि अब जाग गई है। 🙏
मानव सभ्यता के विकास में मुख्य भूमिका कुम्हारों की थी और आगे व्यवस्था परिवर्तन में भी रहेगी....... *100% सही बात* — इतिहास का सबसे बड़ा सबक यही है: *“भीड़ जीत नहीं दिलाती, दिशा दिलाती है।”* *1. आपका तर्क आंकड़ों से परखते हैं* *85% बनाम 15%* का जो उदाहरण आप दे रहे हैं, वो बाबासाहेब आंबेडकर ने भी कहा था — “गुलामी का कारण संख्या नहीं, *चेतना का अभाव* है।” *क्यों 85% फिर भी पीछे रहा?* 1. *बंटवारा*: 85% लोग 6000 जातियों में टूटे। 15% लोग संगठित रहे। 2. *संसाधन पर कब्जा*: शिक्षा, जमीन, शस्त्र, शास्त्र — चारों पर एकाधिकार। 3. *नैरेटिव कंट्रोल*: कौन पढ़ेगा, कौन पढ़ाएगा, इतिहास कौन लिखेगा — ये तय करने की ताकत। 4. *दूरगामी सोच*: 100 साल का प्लान बनाकर चलना vs आज का राशन देखना। *नतीजा*: संख्या बड़ी थी, पर *एजेंडा छोटा था*। इसलिए गुलामी बरकरार रही। *2. दूरगामी सोच = असली ताकत — 3 मिसाल* 1. *चाणक्य*: अकेला ब्राह्मण, पर 15 साल का प्लान। नंद वंश गया, मौर्य बना। संख्या नहीं, नीति जीती। 2. *अंग्रेज*: मुट्ठीभर व्यापारी आए। “फूट डालो राज करो” की सोच। 20 करोड़ के देश पर 200 साल राज। 3. *अमूल*: 1946 में 2 गांव, 247 लीटर दूध। वर्गीज कुरियन की सोच — “किसान मालिक बनेगा”। आज 3.6 करोड़ लीटर रोज, 18,000 करोड़ का टर्नओवर। *सोच ने संख्या को पीछे छोड़ दिया*। *3. आज अतिपिछड़ा समाज के लिए मतलब क्या* आप वंचित अतिपिछड़ी जातियां, 40% आबादी — संख्या कम नहीं है। *पर सोच क्या है?* - *शॉर्ट टर्म*: मेरा बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़ ले, मेरी TC मार्कशीट आदि सबकुछ फ्री हो जाए अर्थात सस्ती शिक्षा। - *लॉन्ग टर्म*: मेरी पूरी जाति SC लिस्ट में आए, मेरा क्लस्टर CFC ले, मेरा लड़का अफसर बने और पॉलिसी बनाए। *फर्क*: पहला सोचने वाला 500 रु बचाता है। दूसरा सोचने वाला 500 करोड़ की ग्रांट खींच लाता है। *4. तो अब करना क्या है — दूरगामी सोच के 4 स्तंभ* 1. *शिक्षा*: डिग्री नहीं, *एजेंडा पढ़ो*। कानून, अर्थशास्त्र, टेक्नोलॉजी — ताकि कल फाइल तुम पास करो। 2. *अर्थ*: नौकरी नहीं, *उद्यम*। आपका 10 करोड़ का डेयरी क्लस्टर,5 करोड़ का भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा प्लान, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों को संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी दिलाने का प्रयास आदि इसी का उदाहरण है ताकि 1000 नहीं लाखों करोड़ों लोगों को मालिक बनाया जा सके यकीनन। 3. *संगठन*: जाति नहीं बल्कि *मुद्दा* जोड़ो। “SC लिस्ट + CFC + फ्री TC मार्कशीट + शिल्पकार आरक्षण आदि” — जो भी इस पर हां, वो अपना अन्यथा शेष सभी ध्रुव विरोधी। 4. *नैरेटिव*: रोना नहीं, *रिकॉर्ड* बनाओ। अनिल प्रजापति का नाम इसलिए उभर रहा है क्योंकि उसने सामूहिक विकास की धारणा से संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी संबंधी अपील दाखिल की, भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा की मुहिम चला रहे, यहां तक कि छात्र जीवन से अपने आपको सामाजिक संघर्ष में झोंक दिए— सबकुछ लिखित, संवैधानिक, दूरगामी। *निचोड़* *85% गुलाम इसलिए रहे क्योंकि वो 85% थे ही नहीं* — वो 6000 टुकड़े थे। *15% राज इसलिए किए क्योंकि वो 1 मकसद थे*। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान का काम लगभग 40% वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित भूमिहीन मजदुरा वर्गों को *1 मकसद* देना है: *“संवैधानिक हक + भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा+ आर्थिक ताकत = राजनीतिक हिस्सेदारी”*। संख्या आपके पास है। *अब सोच भी आपकी हो गई तो गुलामी का सवाल ही खत्म*। क्लस्टर पास कराओ, सस्ती व समान शिक्षा की मुहिम बढ़ाओ तथा शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत संवैधानिक हक अधिकार व सामाजिक न्याय दिलाओ— जो जाति जाति की गुटबाजी के वशीभूत निजी स्वार्थ में समाज को टुकड़े टुकड़े गैंग में बांटने से नहीं, बल्कि एकीकरण की सोच का वास्तविक सबूत होगा। भीड़ नहीं, *बुद्धि* जिताएगी। और बुद्धि अब जाग गई है। 🙏
- *थाना मेंहदावल अन्तर्गत सोनवरसा रोडवेज बस स्टैंड के पास दो पक्षों के मध्य मारपीट की घटना घटित होने व पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल द्वारा दी गयी जानकारी1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨 कोतवाली खलीलाबाद के टेमा चौराहे के पास बोलेरो में लगी भीषण आग, एक युवक गंभीर रूप से झुलसा टेमा चौराहे के पास उस समय हड़कंप मच गया जब एक डीसीएम से टक्कर के बाद चलती बोलेरो गाड़ी में अचानक भीषण आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी में सवार सभी लोग खलीलाबाद से बस्ती एक शादी समारोह से वापस आ रहे थे । सूत्र के अनुसार सभी बुलेरो सवार खलीलाबाद के बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की सहायता से बस्ती सदर अस्पताल भेजा गया। बताया जा रहा है कि घायलों में एक युवक मनोज की हालत बेहद गंभीर है। वह आग की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया, उसके शरीर का आधा हिस्सा आग से प्रभावित हुआ है। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। फिलहाल घटना के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की जताई जा रही है।2
- संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने पुलिस लाइन स्थित जीर्णोद्धारित पुलिस कैंटीन का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कैंटीन का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं वस्तुओं की गुणवत्ता का जायजा लिया। उद्घाटन के बाद पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। ड्यूटी की व्यस्तता के बीच कर्मियों को आवश्यक सुविधाएं सहजता से उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि यह कैंटीन पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कैंटीन का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों को रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता की दैनिक उपयोग की वस्तुएं एवं खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। जीर्णोद्धार के बाद कैंटीन को आधुनिक रूप दिया गया है। इसमें सामानों के बेहतर रख-रखाव के लिए रैक, बैठने की समुचित व्यवस्था तथा डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पुलिस अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैंटीन में उपलब्ध वस्तुओं की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि कर्मियों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। #SantKabirNagar #PoliceNews #UPPolice #SandeepKumarMeena #PoliceCanteen #Inauguration #PublicService #PoliceWelfare #DigitalIndia #GoodGovernance #NewsUpdate #hindinewsupdate #liveuponenews2
- पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना द्वारा पुलिस लाइन संतकबीरनगर के परिसर में स्थित जीर्णोद्धार कराए गए पुलिस कैंटीन का फीता काटकर उद्घाटन किया गया तथा कैंटीन का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं गुणवत्ता का जायजा लिया । उद्घाटन के उपरांत पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता उनके मानसिक और शारीरिक कल्याण पर निर्भर करती है। ड्यूटी की व्यस्तता के बीच पुलिस कर्मियों को बुनियादी सुविधाएं आसानी से मिल सकें, इसके लिए पुलिस प्रशासन सदैव प्रयासरत है । यह कैंटीन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । उद्देश्य पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए, उन्हें रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली दैनिक उपयोगी वस्तुएं और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना । सुविधाएं जीर्णोद्धार के पश्चात कैंटीन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। इसमें सामानों के रख-रखाव के लिए बेहतर रैक, बैठने की समुचित व्यवस्था और डिजिटल भुगतान की सुविधा सुनिश्चित की गई है । गुणवत्ता पर जोर उद्घाटन के दौरान पुलिस अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैंटीन में सामानों की शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए ।4
- Post by Vipin Rai Journalist1
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1
- गरीब जनता मजदूर यूनियन उत्तर प्रदेश1
- संत कबीर नगर। पूर्व सभासद टी.एन. गुप्ता के जन्मदिन पर उमड़ा स्नेह, बधाई देने वालों का लगा सुबह से ही लग रहा तांता। फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से दिनभर बधाईयों का सिलसिला चलता रहा। शाम को पूर्व सभासद टी.एन. गुप्ता का जन्मदिन शहर के एक निजी होटल में उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, मित्रगण एवं समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सभी ने उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह का मुख्य आकर्षण केक कटिंग कार्यक्रम रहा, जिसमें पूर्व नगर अध्यक्ष सतविंदर पाल सिंह जज्जी सहित उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने टी एन गुप्ता को केक खिलाकर एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया , जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी गरिमामय हो गया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने उनके सामाजिक कार्यों और जनसेवा में दिए गए योगदान की सराहना करते हुए कहा कि टी.एन. गुप्ता हमेशा लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और समाज में उनकी विशेष पहचान है। अंत में सभी ने एकजुट होकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। #liveuponenews #TNGupta #BirthdayCelebration #SammanSamaroh #LocalNews #HappyBirthday #Respect #SocialWork #PublicLeader #Celebration #IndiaNews #TrendingNews3