पाली जिले से मानवता, सेवा और सामूहिक सहयोग की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पाली कालिका पुलिस की महिला टीम और दिव्यांग सेवा संस्थान के सहयोग से एक लाचार और बेसहारा महिला को नया जीवन मिला। जब यह पीड़ित महिला 'पाली कालिका पुलिस महिला टीम' और 'दिव्यांग सेवा संस्थान, पाली' के पास पहुंची थी, तब उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। वह गहरे मानसिक तनाव और डर में थी, खुद को असहाय महसूस कर रही थी और उसके शरीर पर चोटों के कई निशान थे। परिस्थितियों के कारण उसका लोगों पर से विश्वास पूरी तरह उठ चुका था। इस कठिन परिस्थिति में पाली कालिका पुलिस की महिला टीम और दिव्यांग सेवा संस्थान के सेवादारों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। संस्था में महिला को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण, सम्मान, प्यार और परिवार जैसा माहौल दिया गया। संस्थान द्वारा नियमित देखभाल, स्नान, भोजन और स्नेहपूर्ण व्यवहार के जरिए धीरे-धीरे महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। इस पूरे रेस्क्यू और सेवा अभियान का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब संस्थान और पुलिस के प्रयासों से महिला के परिवार का पता लगा लिया गया। इसके तुरंत बाद, वीडियो कॉल के माध्यम से महिला की बात उसके परिजनों से करवाई गई। अपने बिछड़े हुए परिवार को सामने देख महिला और उसके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जिसे शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है। संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार, अब यह महिला बहुत जल्द कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कर अपने परिवार से दोबारा मिल सकेगी। यह पूरी घटना समाज में जीवित मानवता, निस्वार्थ सेवा भावना और सामूहिक सहयोग की एक बड़ी जीत है।
पाली जिले से मानवता, सेवा और सामूहिक सहयोग की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पाली कालिका पुलिस की महिला टीम और दिव्यांग सेवा संस्थान के सहयोग से एक लाचार और बेसहारा महिला को नया जीवन मिला। जब यह पीड़ित महिला 'पाली कालिका पुलिस महिला टीम' और 'दिव्यांग सेवा संस्थान, पाली' के पास पहुंची थी, तब उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। वह गहरे मानसिक तनाव और डर में थी, खुद को असहाय महसूस कर रही थी और उसके शरीर पर चोटों के कई निशान थे। परिस्थितियों के कारण उसका लोगों पर से विश्वास पूरी तरह उठ चुका था। इस कठिन परिस्थिति में पाली कालिका पुलिस की महिला टीम और दिव्यांग सेवा संस्थान के सेवादारों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। संस्था में महिला को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण, सम्मान, प्यार और परिवार जैसा माहौल दिया गया। संस्थान द्वारा नियमित देखभाल, स्नान, भोजन और स्नेहपूर्ण व्यवहार के जरिए धीरे-धीरे महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। इस पूरे रेस्क्यू और सेवा अभियान का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब संस्थान और पुलिस के प्रयासों से महिला के परिवार का पता लगा लिया गया। इसके तुरंत बाद, वीडियो कॉल के माध्यम से महिला की बात उसके परिजनों से करवाई गई। अपने बिछड़े हुए परिवार को सामने देख महिला और उसके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, जिसे शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है। संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार, अब यह महिला बहुत जल्द कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कर अपने परिवार से दोबारा मिल सकेगी। यह पूरी घटना समाज में जीवित मानवता, निस्वार्थ सेवा भावना और सामूहिक सहयोग की एक बड़ी जीत है।
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- आर्य वीर दल महर्षि दयानंद सरस्वती व्यायाम शाला लाखोटिया में चल रहे आत्मरक्षा और चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर में बच्चों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। इस शिविर में बच्चों को संध्या, योगासन और परम्परागत खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चे वेदमंत्रों को कंठस्थ कर रहे हैं और संस्कृत भाषा के प्रति उनका मान भी बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शिविर की इस सफलता का मुख्य कारण मोबाइल और गपशप से दूरी बनाए रखना है, जिसके चलते बच्चे एकाग्रता से सीख पा रहे हैं।1
- पाली शहर में रेलवे स्टेशन जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित शहीद पार्क की हालत नगर परिषद के नगर निगम में बदलने के बाद से ही बद से बदतर हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार छगनलाल भारद्वाज के अनुसार, इस भीषण गर्मी में यदि कोई बाहर से आने वाला व्यक्ति विश्राम या गर्मी से राहत पाने की उम्मीद में इस पार्क में भ्रमण के लिए आता है, तो उसे निराशा ही हाथ लगती है। अब यह पार्क एक उजड़े हुए चमन जैसा दिखता है। पूर्व में, जब यह नगर परिषद के अधीन था, तब शहीद पार्क की व्यवस्था एक ठेकेदार द्वारा संचालित होती थी, और वहां एक सुरक्षा गार्ड या होमगार्ड जवान भी तैनात रहता था। हालांकि, नगर निगम बनने के बाद से इन सभी व्यवस्थाओं में कमी आई है, जिससे पार्क की देखरेख पूरी तरह से ठप पड़ गई है। स्थानीय लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि ऊँट किस करवट बैठता है, यानी इस समस्या का समाधान कब होगा।1
- सोमवती अमावस्या के पवित्र अवसर पर पाली के उपखंड मजिस्ट्रेट विमलेंद्र सिंह राणावत ने चिमनपुरा स्थित स्थानीय दिव्यांग सेवा संस्थान का विशेष अवलोकन किया। इस पावन अवसर पर संस्थान परिसर में आमजन और गणमान्य लोग भी भारी संख्या में उपस्थित थे। उपखंड मजिस्ट्रेट ने संस्थान परिसर में पहुँचकर वहाँ रह रहे प्रभुजनों (दिव्यांगों एवं ज़रूरतमंदों) के बीच समय बिताया। त्योहार और विशेष धार्मिक महत्व के इस दिन भारी संख्या में उपस्थित लोगों की मौजूदगी में उन्होंने सभी से बेहद आत्मीयता, स्नेह और संवेदनशीलता के साथ मुलाकात की, संस्थान की व्यवस्थाओं को देखा और प्रभुजनों का कुशलक्षेम जाना। चिमनपुरा स्थित संस्थान के पदाधिकारियों और वहाँ उपस्थित बड़ी संख्या में लोगों ने बताया कि सोमवती अमावस्या के पावन दिन पर प्रशासनिक अधिकारी का इस प्रकार ज़मीनी स्तर पर आकर सेवाभाव दिखाना और प्रभुजनों का संबल बढ़ाना समाज के लिए एक अनुपम उदाहरण है। उनके इस संवेदनशील व्यक्तित्व की सभी ने सराहना की, जो समाज को मानवता की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अवलोकन और दौरे के समापन पर संस्थान परिवार तथा उपस्थित सभी लोगों ने उपखंड मजिस्ट्रेट विमलेंद्र सिंह राणावत का इस आत्मीय भेंट और मार्गदर्शन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।4
- राज्य सरकार के निर्देशानुसार, पाली नगर निगम में आयोजित शहरी सेवा शिविर-2026 आमजन के लिए राहत और सामाजिक सुरक्षा का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। इस शिविर के माध्यम से विभिन्न विभागों द्वारा पात्र नागरिकों के प्रकरणों का त्वरित निस्तारण कर उन्हें मौके पर ही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। शिविर के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अनेक पात्र परिवारों को विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पालनहार योजना तथा पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ा। विशेष बात यह रही कि पात्र लाभार्थियों के आवेदन स्वीकृत कर पेंशन स्वीकृति आदेश (PPO) मौके पर ही जारी और वितरित किए गए। शारदा देवी, मंजू देवी और रेखा देवी के प्रकरणों का निस्तारण करते हुए उन्हें विधवा पेंशन योजना से जोड़ा गया और उनके पात्र बच्चों को पालनहार योजना का लाभ दिलाया गया। इन परिवारों को विधवा पेंशन एवं पालनहार योजना से प्रतिमाह लगभग ₹4300 तक की नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत ₹25,000 तक के ऋण हेतु आवेदन भी करवाए गए, जिससे वे स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। वृद्धावस्था पेंशन के पात्र लाभार्थियों जैसे भीमराज, भगवानचंद, बेबी देवी, बाबूलाल, जहेदा, साबिर, सीता देवी सहित अन्य नागरिकों को भी मौके पर ही PPO जारी व वितरित किए गए, जिससे उनके जीवनयापन में आर्थिक सहयोग सुनिश्चित हो सके। शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने लाभार्थियों की समस्याएं सुनकर प्रकरणों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया तथा योजनाओं की जानकारी देकर अधिकाधिक पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित करने का प्रयास किया। नगर निगम आयुक्त, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचकर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं। शहरी सेवा शिविर–2026 राज्य सरकार की 'सरकार आपके द्वार' की अवधारणा को साकार करते हुए आमजन तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।4
- ब्यावर में भीम रोड पर स्थित कमली घाटी के स्तुति हॉस्पिटल के पास रतन सिंह रावत का पता बताया गया है।1
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- रोहट उपखंड क्षेत्र के भाकरी वाला गांव में भीषण पेयजल संकट के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। गांव के रूपनाथ और बावरियों के वास में पिछले कई महीनों से पानी की भारी किल्लत है, जिसके चलते ग्रामीण नाडी किनारे बनी बेरी से पानी लाने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी के चलते एक स्थानीय युवक ट्रैक्टर सहित बेरी में फंस गया। जानकारी के अनुसार, स्थानीय युवक मुकेश बावरी ट्रैक्टर लेकर बेरी से पानी भरने गया था। पानी भरते समय अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर बेरी में जा फंसा। हादसे के दौरान चालक मुकेश बावरी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए ट्रैक्टर से कूदकर अपनी जान बचा ली। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बाद में, कड़ी मशक्कत के बाद हाइड्रो मशीन की सहायता से ट्रैक्टर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह एक बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों ने बताया कि भाकरी वाला गांव में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है, जिसके कारण वे खारा और असुरक्षित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। इस घटना ने एक बार फिर रोहट के भाकरी वाला गांव में व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, और ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की जोरदार मांग की है।2