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टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठी मांग अम्बेडकरनगर। तहसील टांडा क्षेत्र में स्थित दो प्राचीन धार्मिक स्थलों—ग्राम सभा केवटला का केवटला मठ और ग्राम हरेया का प्राचीन राम चौरा मंदिर—इन दिनों जमीन विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों मामलों में एक ओर धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण का सवाल खड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ मामले में बाबा मनीष दास ने आरोप लगाया है कि हरिशंकर दास उर्फ बुलबुली बाबा द्वारा मठ की जमीन अपने नाम दर्ज कराकर गाटा संख्या 308ख, 310, 311, 782घ सहित कई अन्य गाटों की बिक्री की जा रही है। बाबा मनीष दास का कहना है कि मठ की भूमि धार्मिक एवं सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसे निजी रूप से बेचा नहीं जा सकता। उन्होंने कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि जांच के दौरान मूल विवादित गाटा संख्या का उल्लेख करने के बजाय अन्य गाटों का हवाला देकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। इस प्रकरण में लेखपाल विपिन कुमार वर्मा की भूमिका भी विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गलत रिपोर्टों के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया। बाबा मनीष दास ने यह भी आरोप लगाया कि सही रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव और बाबा मनीष दास के विरुद्ध गैरजमानती मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर ग्राम हरेया स्थित प्राचीन राम चौरा मंदिर की लगभग 34 एकड़ बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। मंदिर के महंत हरीलाल दास ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित गाटा संख्या 1040 और 1036क की भूमि पर दबंगों और भू-माफियाओं ने कब्जा कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित कर लिए हैं। शिकायत के अनुसार मंदिर परिसर और धर्मशाला तक को कब्जे और अवैध गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। महंत हरीलाल दास का आरोप है कि जब भी वे कब्जे का विरोध करते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने तहसील, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और शासन स्तर तक कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। दोनों मामलों में एक समानता यह दिखाई दे रही है कि धार्मिक संपत्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं और ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ में ग्रामीण मठ की जमीन बचाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, जबकि राम चौरा मंदिर प्रकरण में महंत भू-माफियाओं के खौफ में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इन दोनों संवेदनशील मामलों में क्या रुख अपनाता है और क्या धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों को विवादों एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

1 hr ago
user_TEESRI AANKHEN
TEESRI AANKHEN
अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago
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टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठी मांग अम्बेडकरनगर। तहसील टांडा क्षेत्र में स्थित दो प्राचीन धार्मिक स्थलों—ग्राम सभा केवटला का केवटला मठ और ग्राम हरेया का प्राचीन राम चौरा मंदिर—इन दिनों जमीन विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों मामलों में एक ओर धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण का सवाल खड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ मामले में बाबा मनीष दास ने आरोप लगाया है कि हरिशंकर दास उर्फ बुलबुली बाबा द्वारा मठ की जमीन अपने नाम दर्ज कराकर गाटा संख्या 308ख, 310, 311, 782घ सहित कई अन्य गाटों की बिक्री की जा रही है। बाबा मनीष दास का कहना है कि मठ की भूमि धार्मिक एवं सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसे निजी रूप से बेचा नहीं जा सकता। उन्होंने कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि जांच के दौरान मूल विवादित गाटा संख्या का उल्लेख करने के बजाय अन्य गाटों का हवाला देकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। इस प्रकरण में लेखपाल विपिन कुमार वर्मा की भूमिका भी विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गलत रिपोर्टों के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया। बाबा मनीष दास ने यह भी आरोप लगाया कि सही रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव और बाबा मनीष दास के विरुद्ध गैरजमानती मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर ग्राम हरेया स्थित प्राचीन राम चौरा मंदिर की लगभग 34 एकड़ बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। मंदिर के महंत हरीलाल दास ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित गाटा संख्या 1040 और 1036क की भूमि पर दबंगों और भू-माफियाओं ने कब्जा कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित कर लिए हैं। शिकायत के अनुसार मंदिर परिसर और धर्मशाला तक को कब्जे और अवैध गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। महंत हरीलाल दास का आरोप है कि जब भी वे कब्जे का विरोध करते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने तहसील, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और शासन स्तर तक कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। दोनों मामलों में एक समानता यह दिखाई दे रही है कि धार्मिक संपत्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं और ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ में ग्रामीण मठ की जमीन बचाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, जबकि राम चौरा मंदिर प्रकरण में महंत भू-माफियाओं के खौफ में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इन दोनों संवेदनशील मामलों में क्या रुख अपनाता है और क्या धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों को विवादों एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

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  • पंजाब में बिहार के लड़कों को बेरहमी से पीटा गया पंजाब में यह कोई नई बात नहीं है हर बार चहे बिहार का हो या युपी का थोडी सी गलती की सज़ा ज्यादा मिलती है पुलिस भी बिहार के लड़कों की गलती देती है
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    पंजाब में बिहार के लड़कों को बेरहमी से पीटा गया 
पंजाब में यह कोई नई बात नहीं है हर बार चहे बिहार का हो या युपी का थोडी सी गलती की सज़ा ज्यादा मिलती है पुलिस भी बिहार के लड़कों की गलती देती है
    user_BALRAM
    BALRAM
    पत्रकार Allapur, Ambedkar Nagar•
    5 hrs ago
  • अंबेडकर नगर के अल्लापुर ब्लॉक के ग्राम सभा इटावा में डांस के दौरान डीजे रोहित की जान चली गई। बताया जा रहा है कि कुछ लोग डांस करते हुए बेकाबू हो गए, जिसके बाद यह घटना हुई।
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    अंबेडकर नगर के अल्लापुर ब्लॉक के ग्राम सभा इटावा में डांस के दौरान डीजे रोहित की जान चली गई। बताया जा रहा है कि कुछ लोग डांस करते हुए बेकाबू हो गए, जिसके बाद यह घटना हुई।
    user_Akash Kumar
    Akash Kumar
    अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्राचीन केवटला मठ की जमीन को लेकर विवाद गरमा गया है। यहाँ एक लेखपाल पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण और बाबा मनीष दास मठ की जमीन बेचने की कथित साजिश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
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    उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्राचीन केवटला मठ की जमीन को लेकर विवाद गरमा गया है। यहाँ एक लेखपाल पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण और बाबा मनीष दास मठ की जमीन बेचने की कथित साजिश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • प्रदेश स्तर पर चिन्हित माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू की 1.5 करोड़ की बड़ी हवेली हुई कुर्क आजमगढ़। पुलिस ने प्रदेश स्तर पर चिन्हित माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुन्टू सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्ति कुर्क की है। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत थाना कोतवाली और जीयनपुर में दर्ज मुकदमों में की गई। पुलिस के अनुसार, ध्रुव सिंह उर्फ कुन्टू सिंह पर हत्या, लूट, रंगदारी, अपहरण, धोखाधड़ी समेत गंभीर अपराधों के कुल 78 मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी थाना जीयनपुर का हिस्ट्रीशीटर और गैंग नंबर IR-36 का लीडर बताया गया है। प्रशासन ने ग्राम छपरा सुल्तानपुर स्थित उसकी चर्चित “बड़ी हवेली” को कुर्क किया है। पुलिस का आरोप है कि इस हवेली का निर्माण और जीर्णोद्धार अवैध धन से कराया गया था तथा यहां गैंग के सदस्यों का जमावड़ा, रंगदारी की रकम का बंटवारा और आपराधिक साजिशें रची जाती थीं।यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन और क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी की मौजूदगी में की गई।पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जनपद में माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
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    प्रदेश स्तर पर चिन्हित माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू की 1.5 करोड़ की बड़ी हवेली हुई कुर्क
आजमगढ़। पुलिस ने प्रदेश स्तर पर चिन्हित माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुन्टू सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्ति कुर्क की है। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत थाना कोतवाली और जीयनपुर में दर्ज मुकदमों में की गई। पुलिस के अनुसार, ध्रुव सिंह उर्फ कुन्टू सिंह पर हत्या, लूट, रंगदारी, अपहरण, धोखाधड़ी समेत गंभीर अपराधों के कुल 78 मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी थाना जीयनपुर का हिस्ट्रीशीटर और गैंग नंबर IR-36 का लीडर बताया गया है। प्रशासन ने ग्राम छपरा सुल्तानपुर स्थित उसकी चर्चित “बड़ी हवेली” को कुर्क किया है। पुलिस का आरोप है कि इस हवेली का निर्माण और जीर्णोद्धार अवैध धन से कराया गया था तथा यहां गैंग के सदस्यों का जमावड़ा, रंगदारी की रकम का बंटवारा और आपराधिक साजिशें रची जाती थीं।यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन और क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी की मौजूदगी में की गई।पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जनपद में माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
    user_शैलेन्द्र पत्रकार
    शैलेन्द्र पत्रकार
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    31 min ago
  • बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! अजीत मिश्रा (खोजी) खाकी और खादी के संरक्षण में 'हरा शिकार', लालगंज में कानून को ठेंगा दिखा रहे वन माफिया! ​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश लालगंज में बेखौफ कुल्हाड़ी: खाकी और खादी के संरक्षण में फल-फूल रहे वन माफिया, कौन है इनका आका? क्या विभाग की 'सेटिंग' से कट रहे हैं हरे पेड़? सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार? कागजों पर पौधारोपण, जमीन पर उजाड़ रहे बाग; आखिर माफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक है प्रशासन? पसड़ा गांव में सरेआम कटा आम का पेड़; डीएम साहब! इन बेखौफ लकड़कट्टों पर कब कसेगा कानूनी शिकंजा? लालगंज में हरियाली का विनाश, ग्रामीणों में उबाल, कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात! बेखौफ माफिया, लाचार प्रशासन और कटती हरियाली; पसड़ा गांव से ग्राउंड रिपोर्ट। लालगंज में माफियाओं का तांडव, सरेआम काटा हरा पेड़, मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज। बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! वाह रे प्रशासन! माफिया काट ले गए हरा पेड़ और जिम्मेदार कर्मचारी अब तक देख रहे हैं 'मुहूर्त'। ​बस्ती। एक तरफ सरकार 'हरिशंकरी' और 'अमृत वन' के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर पौधारोपण का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का पसड़ा गांव वन माफियाओं की क्रूरता का गवाह बन रहा है। यहाँ माफियाओं की कुल्हाड़ी सिर्फ पेड़ पर नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के 'ग्रीन यूपी' के सपनों पर चल रही है। ​दिनदहाड़े 'हरियाली का कत्ल', जिम्मेदार बने तमाशबीन ​पसड़ा गांव में माफियाओं ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए सरेआम हरे आम के पेड़ पर आरा चला दिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह कत्लेआम किसी अंधेरी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे हुआ। बिना किसी विभागीय अनुमति के फलदार पेड़ों को काट दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के कारिंदों ने अपनी आँखें बेच दी हैं या फिर माफियाओं के नोटों की खनक ने उनकी ज़मीर को खामोश कर दिया है? ​सत्ता की हनक या विभाग की मिलीभगत? ​सूचना मिलने के घंटों बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी का मौके पर न पहुंचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर ये कौन से 'सफेदपोश' हैं जिनके संरक्षण में ये माफिया इतने बेखौफ हैं? ​क्या विभाग की मिलीभगत से हो रहा है हरियाली का विनाश? ​आखिर क्यों इन लकड़कट्टों पर नहीं कसा जा रहा कानूनी शिकंजा? ​ग्रामीणों का आक्रोश: "कागजों पर हरियाली, जमीन पर खाली" ​प्रशासन की इस लचर कार्यशैली से पसड़ा गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी को अपनी सूखी लकड़ी काटने के लिए भी सौ चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं माफिया बेधड़क होकर हरे बाग उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ​DM साहब! अब तो फाइल छोड़िए, संज्ञान लीजिए! ​बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से जनता यह पूछ रही है कि क्या इन माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा? क्या ये माफिया सलाखों के पीछे जाएंगे, या फिर एक और 'जांच' का कोरम पूरा करके फाइल दबा दी जाएगी? ​निष्कर्ष: अगर समय रहते इन वन माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्ती मंडल की पहचान सिर्फ 'सूखे जंगलों' के रूप में होगी। दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी समय की मांग है। ​बस्ती की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं!
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    बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग!
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी और खादी के संरक्षण में 'हरा शिकार', लालगंज में कानून को ठेंगा दिखा रहे वन माफिया!
​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
लालगंज में बेखौफ कुल्हाड़ी: खाकी और खादी के संरक्षण में फल-फूल रहे वन माफिया, कौन है इनका आका?
क्या विभाग की 'सेटिंग' से कट रहे हैं हरे पेड़? सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार? कागजों पर पौधारोपण, जमीन पर उजाड़ रहे बाग; आखिर माफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक है प्रशासन?
पसड़ा गांव में सरेआम कटा आम का पेड़; डीएम साहब! इन बेखौफ लकड़कट्टों पर कब कसेगा कानूनी शिकंजा? लालगंज में हरियाली का विनाश, ग्रामीणों में उबाल, कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात!
बेखौफ माफिया, लाचार प्रशासन और कटती हरियाली; पसड़ा गांव से ग्राउंड रिपोर्ट। लालगंज में माफियाओं का तांडव, सरेआम काटा हरा पेड़, मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज।
बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! वाह रे प्रशासन! माफिया काट ले गए हरा पेड़ और जिम्मेदार कर्मचारी अब तक देख रहे हैं 'मुहूर्त'।
​बस्ती। एक तरफ सरकार 'हरिशंकरी' और 'अमृत वन' के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर पौधारोपण का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का पसड़ा गांव वन माफियाओं की क्रूरता का गवाह बन रहा है। यहाँ माफियाओं की कुल्हाड़ी सिर्फ पेड़ पर नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के 'ग्रीन यूपी' के सपनों पर चल रही है।
​दिनदहाड़े 'हरियाली का कत्ल', जिम्मेदार बने तमाशबीन
​पसड़ा गांव में माफियाओं ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए सरेआम हरे आम के पेड़ पर आरा चला दिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह कत्लेआम किसी अंधेरी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे हुआ। बिना किसी विभागीय अनुमति के फलदार पेड़ों को काट दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के कारिंदों ने अपनी आँखें बेच दी हैं या फिर माफियाओं के नोटों की खनक ने उनकी ज़मीर को खामोश कर दिया है?
​सत्ता की हनक या विभाग की मिलीभगत?
​सूचना मिलने के घंटों बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी का मौके पर न पहुंचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर ये कौन से 'सफेदपोश' हैं जिनके संरक्षण में ये माफिया इतने बेखौफ हैं?
​क्या विभाग की मिलीभगत से हो रहा है हरियाली का विनाश?
​आखिर क्यों इन लकड़कट्टों पर नहीं कसा जा रहा कानूनी शिकंजा?
​ग्रामीणों का आक्रोश: "कागजों पर हरियाली, जमीन पर खाली"
​प्रशासन की इस लचर कार्यशैली से पसड़ा गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी को अपनी सूखी लकड़ी काटने के लिए भी सौ चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं माफिया बेधड़क होकर हरे बाग उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​DM साहब! अब तो फाइल छोड़िए, संज्ञान लीजिए!
​बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से जनता यह पूछ रही है कि क्या इन माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा? क्या ये माफिया सलाखों के पीछे जाएंगे, या फिर एक और 'जांच' का कोरम पूरा करके फाइल दबा दी जाएगी?
​निष्कर्ष: अगर समय रहते इन वन माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्ती मंडल की पहचान सिर्फ 'सूखे जंगलों' के रूप में होगी। दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी समय की मांग है।
​बस्ती की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं!
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 16 फरवरी 2027 से होगा दिव्य भव्य रामकथा,राजन जी के भजनों का रसपान कर सकेंगे श्रद्धालु अश्विनी कुमार पाण्डेय संतकबीरनगर जनपद के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य की बात है कि पहली बार पूज्य राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह दिव्य कथा 16 फरवरी से 24 फरवरी तक मुखलिसपुर गायघाट में आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी स्वयं पूज्य राजन जी महाराज ने गोंडा में चल रही कथा के दौरान श्रद्धालुओं को दी। सूचना मिलते ही भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कथा आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कथा के संयोजक महंत बलराम दास वेदांती जी ने बताया कि कथा स्थल को भव्य रूप से सजाया जाएगा तथा हजारों श्रद्धालुओं के बैठने, प्रसाद एवं अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। पूज्य राजन जी महाराज अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण कथा शैली के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनकी कथा सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। संत कबीर नगर में पहली बार उनका आगमन होने से भक्तों में विशेष उत्साह बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।।
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    16 फरवरी 2027 से होगा दिव्य भव्य रामकथा,राजन जी के भजनों का रसपान कर सकेंगे श्रद्धालु
अश्विनी कुमार पाण्डेय 
संतकबीरनगर
जनपद के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य की बात है कि पहली बार पूज्य राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह दिव्य कथा 16 फरवरी से 24 फरवरी तक मुखलिसपुर गायघाट में आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी स्वयं पूज्य राजन जी महाराज ने गोंडा में चल रही कथा के दौरान श्रद्धालुओं को दी। सूचना मिलते ही भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कथा आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कथा के संयोजक महंत बलराम दास वेदांती जी ने बताया कि कथा स्थल को भव्य रूप से सजाया जाएगा तथा हजारों श्रद्धालुओं के बैठने, प्रसाद एवं अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। पूज्य राजन जी महाराज अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण कथा शैली के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनकी कथा सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। संत कबीर नगर में पहली बार उनका आगमन होने से भक्तों में विशेष उत्साह बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।।
    user_Ashwini Kumar Pandey
    Ashwini Kumar Pandey
    पत्रकार Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    3 hrs ago
  • अपने शहर खलीलाबाद का कार्यक्रम.......... SHAILENDRA KUMAR PANDEY
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    अपने शहर खलीलाबाद का कार्यक्रम..........
SHAILENDRA KUMAR PANDEY
    user_Shailendra Pandey
    Shailendra Pandey
    Singing teaching and political work. खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज अजीत मिश्रा (खोजी) अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है। नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल' पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है। डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट? हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया? ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा? SARFAESI एक्ट की धज्जियां नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। जनता पूछ रही है सवाल: क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया? 18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है? जांच की मांग तेज अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
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    बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज
अजीत मिश्रा (खोजी)
अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है।
नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल'
पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है।
डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट?
हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया?
ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता
बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा?
SARFAESI एक्ट की धज्जियां
नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया।
जनता पूछ रही है सवाल:
क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया?
18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है?
जांच की मांग तेज
अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी।
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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