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बिहार के पश्चिमी चंपारण से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक वारदात सामने आई है। बगहा के बसंतपुर गांव में एक पिता ने अपने बेटे को पुलिस से बचाने के लिए अपनी ही बहू की हत्या कर दी और शव को 'दृश्यम' फिल्म की तर्ज पर गन्ने के खेत में गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया। यह साजिश दो साल तक दबी रही, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच और दीवार पर मिले खून के धब्बों ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया। हालांकि आरोपी ससुर ने खून के निशानों को बकरे की कुर्बानी बताकर गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया। उसकी निशानदेही पर जब खेत की खुदाई की गई, तो वहां से नरकंकाल और एक घड़ी बरामद हुई, जिससे मृतका की पहचान सुनिश्चित हुई। कोर्ट के आदेश पर अब इस क्रूरता के खिलाफ स्पीड ट्रायल शुरू किया गया है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
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बिहार के पश्चिमी चंपारण से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक वारदात सामने आई है। बगहा के बसंतपुर गांव में एक पिता ने अपने बेटे को पुलिस से बचाने के लिए अपनी ही बहू की हत्या कर दी और शव को 'दृश्यम' फिल्म की तर्ज पर गन्ने के खेत में गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया। यह साजिश दो साल तक दबी रही, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच और दीवार पर मिले खून के धब्बों ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया। हालांकि आरोपी ससुर ने खून के निशानों को बकरे की कुर्बानी बताकर गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया। उसकी निशानदेही पर जब खेत की खुदाई की गई, तो वहां से नरकंकाल और एक घड़ी बरामद हुई, जिससे मृतका की पहचान सुनिश्चित हुई। कोर्ट के आदेश पर अब इस क्रूरता के खिलाफ स्पीड ट्रायल शुरू किया गया है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
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