पारंपरिक पूजा बहाली को लेकर रूद गांव के ग्रामीणों ने उपायुक्त से लगाई गुहार संवाददाता/देवसुंदर यादव चंदवा। प्रखंड अंतर्गत बरवाटोली पंचायत के ग्राम रूद के सैकड़ों ग्रामीणों ने पारंपरिक प्राकृतिक पूजा-पाठ को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर उपायुक्त लातेहार को आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पूर्वकाल से सरहुल, कर्मा, होलिका दहन, सावन सप्तमी सहित अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान होते आ रहे थे, जिसका शुभारंभ गांव के पहान द्वारा किया जाता था।ग्रामीणों का कहना है कि पूजा-अर्चना बंद रहने के कारण गांव में बीते तीन महीनों के दौरान लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी है तथा कई लोग बीमारी की चपेट में हैं। इससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार इन पूजा-अनुष्ठानों के संचालन के लिए ग्राम स्तर पर लगभग 33.47 एकड़ जमीन भी उपलब्ध है,जिसे वर्तमान में पाहन परिवार अपने अधिकार में रखे हुए हैं। आरोप लगाया गया कि पारिवारिक विवाद के कारण मनोज पाहन, निर्मल पाहन, अशोक पाहन, राम सेवक राम, अर्जुन पाहन, सुखदेव पाहन, बासदेव पाहन, जमुना देवी, राजो देवी, सुमित्रा देवी एवं सुमंती देवी के द्वारा पूजा-पाठ का निर्वहन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि पूजा-अनुष्ठान बंद रहने से गांव में कई अशुभ घटनाएं हो चुकी हैं और भविष्य में भी अनिष्ट की आशंका बनी हुई है। इससे ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की कि संबंधित पक्षों के बीच विवाद का समाधान कराया जाए, ताकि गांव में पुनः पारंपरिक पूजा-अनुष्ठान सुचारू रूप से संपन्न हो सके और सामाजिक सौहार्द कायम रहे। इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी चंदवा को भी सौंपी गई है। आवेदन सौंपने वालों में भगवती देवी, मुरारी महतो, संजय भारती, देवेंद्र महतो, गणेश ठाकुर, उदय मेंस, बीरबल ओला, विजय साहू, मनोज राव, चरण ठाकुर,अजीत उरांव, संजय उरांव, हरमन तिर्की, विजय उरांव, मालती देवी, सीता देवी, संगीता देवी, तारामनी देवी, प्रिया कुमारी, प्यारी कुमारी, शीला देवी, आशा देवी, गंजू भारती, पूनम देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण थे।
पारंपरिक पूजा बहाली को लेकर रूद गांव के ग्रामीणों ने उपायुक्त से लगाई गुहार संवाददाता/देवसुंदर यादव चंदवा। प्रखंड अंतर्गत बरवाटोली पंचायत के ग्राम रूद के सैकड़ों ग्रामीणों ने पारंपरिक प्राकृतिक पूजा-पाठ को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर उपायुक्त लातेहार को आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पूर्वकाल से सरहुल, कर्मा, होलिका दहन, सावन सप्तमी सहित अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान होते आ रहे थे, जिसका शुभारंभ गांव के पहान द्वारा किया जाता था।ग्रामीणों का कहना है कि पूजा-अर्चना बंद रहने के कारण गांव में बीते तीन महीनों के दौरान लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी है तथा कई लोग बीमारी की चपेट में हैं। इससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार इन पूजा-अनुष्ठानों के संचालन के लिए ग्राम स्तर पर लगभग 33.47 एकड़ जमीन भी उपलब्ध है,जिसे वर्तमान में पाहन परिवार अपने अधिकार में रखे हुए हैं। आरोप लगाया गया कि पारिवारिक विवाद के कारण मनोज पाहन, निर्मल पाहन, अशोक पाहन, राम सेवक राम, अर्जुन पाहन,
सुखदेव पाहन, बासदेव पाहन, जमुना देवी, राजो देवी, सुमित्रा देवी एवं सुमंती देवी के द्वारा पूजा-पाठ का निर्वहन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि पूजा-अनुष्ठान बंद रहने से गांव में कई अशुभ घटनाएं हो चुकी हैं और भविष्य में भी अनिष्ट की आशंका बनी हुई है। इससे ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की कि संबंधित पक्षों के बीच विवाद का समाधान कराया जाए, ताकि गांव में पुनः पारंपरिक पूजा-अनुष्ठान सुचारू रूप से संपन्न हो सके और सामाजिक सौहार्द कायम रहे। इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी चंदवा को भी सौंपी गई है। आवेदन सौंपने वालों में भगवती देवी, मुरारी महतो, संजय भारती, देवेंद्र महतो, गणेश ठाकुर, उदय मेंस, बीरबल ओला, विजय साहू, मनोज राव, चरण ठाकुर,अजीत उरांव, संजय उरांव, हरमन तिर्की, विजय उरांव, मालती देवी, सीता देवी, संगीता देवी, तारामनी देवी, प्रिया कुमारी, प्यारी कुमारी, शीला देवी, आशा देवी, गंजू भारती, पूनम देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण थे।
- महुआडांड़ प्रखंड के प्रतापपुर हजरत अंजान शाह दाता मजार में उर्स मुबारक के मौके पर इस बार माहौल पूरी तरह सूफियाना रंग में रंगने वाला है। 26 अप्रैल को आयोजित भव्य कव्वाली कार्यक्रम में मुंबई से चर्चित कव्वाल नईम साबरी और मशहूर कव्वाला शीबा परवीन अपनी दमदार आवाज़ से महफिल में चार चांद लगाएंगे।इस संबध में जेएमएम युवा जिला सचिव परवेज आलम ने बताया कि इस खास कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बड़ी संख्या में जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। उर्स के इस आयोजन को यादगार बनाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।2
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- उपायुक्त कार्यालय के समीप बने व्यायाम शाला का लुप्त उठाता बच्चे सुरयकान्द़ बिधाथी3
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- टाना समुदाय के साथ जनप्रतिनिधियों के उपस्थिति भूमि समस्या को लेकर हुआ वार्तालाप अंचल कार्यालय सेन्हा में बैठक आयोजित कर किया गया1
- चतरा टंडवा में बाबासाहेब की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, विधायक उज्ज्वल कुमार और पूर्व विधायक किशुन दास ने दी श्रद्धांजलि... टंडवा (चतरा): संविधान निर्माता भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती टंडवा प्रखंड में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक उज्ज्वल कुमार और पूर्व विधायक किशुन कुमार दास मुख्य रूप से उपस्थित हुए। महापुरुषों ने किया नमन कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। विधायक उज्ज्वल कुमार ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि बाबासाहेब का जीवन संघर्ष और उनके विचार आज भी हमें समानता और न्याय की राह दिखाते हैं। पूर्व विधायक किशुन दास ने बाबासाहेब को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प दोहराया। प्रशासनिक और सामाजिक भागीदारी कार्यक्रम में न केवल राजनीतिक हस्तियां, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। इस मौके पर एनटीपीसी (NTPC) के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्र के कई पूर्व मुखिया और समाज के तमाम अगवा (बुद्धिजीवी और प्रतिनिधि) मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में बाबासाहेब के शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के नारे को बुलंद किया।1
- Post by Abhay Kumar1
- महुआडांड़ (लातेहार) 2024 में मां की मृत्यु के बाद 10 वर्षीय करण तिर्की और कोमल तिर्की का जीवन संकट में पड़ गया। पिता दीपक तिर्की इस घटना के बाद घर छोड़कर चले गए घर में केवल बुजुर्ग दादा और दादी रह गए, जो बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ हैं। ऐसी स्थिति में दोनों बच्चों को उनकी बुआ के घर रहना पड़ा। हालांकि, बुआ के परिवार में पहले से मौजूद जिम्मेदारियों के बीच बच्चों का रहना धीरे-धीरे पारिवारिक विवाद का कारण बनने लगा। स्थिति बिगड़ती देख बुआ ने सामाजिक सहयोग की तलाश की और आर पी एस सेवा संस्थान से संपर्क किया। संस्थान ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों बच्चों को अपने संरक्षण में ले लिया और उन्हें आश्रय प्रदान किया। संस्था द्वारा बच्चों की देखभाल, शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।1