भिवानी के पूर गांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का पारा उस वक्त चढ़ गया जब उनसे महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल पूछे गए। जनता के दर्द पर जवाब देने के बजाय, मंत्री जी कैमरे के सामने ही पत्रकारों की ओर उंगली उठाते हुए दिखाई दिए, जिससे 'सत्ता का घमंड' कैमरे में कैद होता नजर आया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब जनता के ज्वलंत मुद्दों पर सवाल पूछना भी नेताओं को नागवार गुजरने लगा है। महंगाई से त्रस्त जनता जहां जवाब की उम्मीद कर रही है, वहीं सवाल उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश क्यों की जा रही है, इस पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार है, न कि सत्ता के लिए कोई चुनौती। यह सवाल उठाया गया है कि क्या जनप्रतिनिधियों को जनता के कठिन सवालों का जवाब देना चाहिए या गुस्सा दिखाना चाहिए। जनता से अपील की गई है कि वे इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सच खुद सामने आ सके और लोग इसे देख सकें।
भिवानी के पूर गांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का पारा उस वक्त चढ़ गया जब उनसे महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल पूछे गए। जनता के दर्द पर जवाब देने के बजाय, मंत्री जी कैमरे के सामने ही पत्रकारों की ओर उंगली उठाते हुए दिखाई दिए, जिससे 'सत्ता का घमंड' कैमरे में कैद होता नजर आया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब जनता के ज्वलंत मुद्दों पर सवाल पूछना भी नेताओं को नागवार गुजरने लगा है। महंगाई से त्रस्त जनता जहां जवाब की उम्मीद कर रही है, वहीं सवाल उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश क्यों की जा रही है, इस पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार है, न कि सत्ता के लिए कोई चुनौती। यह सवाल उठाया गया है कि क्या जनप्रतिनिधियों को जनता के कठिन सवालों का जवाब देना चाहिए या गुस्सा दिखाना चाहिए। जनता से अपील की गई है कि वे इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सच खुद सामने आ सके और लोग इसे देख सकें।
- बिवानी जिले के जुई स्थित तोशाम मोड़ पर एक ऐसी घटना सामने आई, जहाँ 'फिल्मी अंदाज़' में डंडे चले। इस पूरी घटना के दौरान, वहाँ मौजूद पूरा बाज़ार सिर्फ़ देखता रहा। चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस समय पर घटना स्थल पर नहीं पहुँच पाई।1
- हरियाणा में HTET परीक्षा की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, जो 13 और 14 जून को आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में कुल 2.45 लाख छात्र 820 केंद्रों पर हिस्सा लेंगे, जिसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा 13 जून को शाम के सत्र में, और 14 जून को सुबह व शाम दोनों सत्रों में आयोजित होगी। बोर्ड चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने एक नया और ऐतिहासिक नियम लागू किया है, जिसके तहत OMR शीट खाली छोड़ने वाले छात्रों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से डेढ़ घंटा पहले केंद्रों पर पहुंचना अनिवार्य होगा, जहां उनकी बायोमैट्रिक जांच भी की जाएगी।1
- पूरे क्षेत्र में तापमान का भीषण दौर लगातार जारी है, जिसके चलते आम लोगों को लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रचंड गर्मी से बचने और खुद को सुरक्षित रखने के लिए, सीएमओ ने कुछ आवश्यक उपाय सुझाए हैं।1
- हरियाणा के भिवानी जिले में महंगाई के मुद्दे पर तीखा घमासान जारी है। इस स्थिति के बीच, खट्टर के रिएक्शन को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।1
- NEET पेपर लीक के खिलाफ एक 'बड़ी जंग' छेड़ते हुए, न्याय की मांग को लेकर DC को एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस पेपर लीक के कारण कथित तौर पर 17 मांओं की गोद सूनी हो गई है, जिससे उनके बच्चों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है। ज्ञापन के माध्यम से पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की गुहार लगाई गई है।1
- जिले में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य 16 जून तक संपन्न कर लिया जाएगा। इस सर्वेक्षण के तहत सभी पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित व्यक्तियों को उनके दस्तावेज वापस लौटा दिए जाएंगे।1
- पूरे देश में तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा उनकी किल्लत के कारण इस समय हाहाकार मचा हुआ है। इस गंभीर स्थिति के बीच, रूस और ईरान जैसे देश सस्ते दामों पर तेल उपलब्ध कराने को तैयार हैं। ऐसे में सरकार और जनता के बीच यह अहम सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को इन देशों से सस्ता तेल खरीदना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला है जिसका देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा।1
- भिवानी के पूर गांव में एक घटना के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल महंगाई और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से संबंधित सवालों पर आपा खो बैठे। कैमरे पर कैद हुए इस पल में, मंत्री ने पत्रकारों को उंगली दिखाकर चुप करा दिया, जिसे 'सत्ता का घमंड' बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अपनी उपलब्धियों का बखान कर रहे थे, लेकिन जैसे ही एक रिपोर्टर ने जनता के दर्द, विशेषकर महंगाई और ईंधन की कीमतों पर सवाल उठाया, मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने पत्रकारों को चुप रहने का इशारा करते हुए उन्हें धमकाया। इस घटना के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या लोकतंत्र में जनता के हक के सवाल पूछना एक अपराध है, और क्या सत्ता का यह 'रौब' उचित है। यह स्थिति पत्रकारों के लिए भारी पड़ी है और इसे मंत्री की 'धमकी' वाली उंगली तथा 'पावर' का गुस्सा करार दिया गया है। इस वीडियो को व्यापक रूप से साझा करने का आह्वान किया गया है ताकि 'सच हर आंख तक पहुंचे', साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया है कि क्या नेताओं को जनता के तीखे सवालों से डर लगता है।1