ड्राइवरों का बड़ा आंदोलन! बिहारशरीफ में 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना, ड्राइवरों का बड़ा आंदोलन! बिहारशरीफ में 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना, एंकर, बिहारशरीफ मुख्यालय में ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले चालकों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। श्रम कल्याण केंद्र मैदान में आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में चालक शामिल हुए और सरकार से अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की। धरना में शामिल चालकों ने कहा कि सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु को आपदा श्रेणी में शामिल किया जाए और ड्राइवर आयोग का गठन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये मुआवजा, अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा घायल होने पर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। चालकों ने 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना लागू करने और दुर्घटना में चालक की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को तत्काल पेंशन देने की भी मांग उठाई। साथ ही 1 सितंबर को ड्राइवर दिवस घोषित करने की मांग भी की गई। धरना में शामिल चालकों का कहना था कि कोविड काल के दौरान जब लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, तब भी ड्राइवरों ने अपने परिवार से दूर रहकर ईमानदारी से काम किया। इसके बावजूद आज उन्हें सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल रही है। चालकों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 90 दिनों के भीतर उनकी 10 सूत्री मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर के चालक स्टीयरिंग छोड़कर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ड्राइवरों का बड़ा आंदोलन! बिहारशरीफ में 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना, ड्राइवरों का बड़ा आंदोलन! बिहारशरीफ में 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना, एंकर, बिहारशरीफ मुख्यालय में ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले चालकों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। श्रम कल्याण केंद्र मैदान में आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में चालक शामिल हुए और सरकार से अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की। धरना में शामिल चालकों ने कहा कि सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु को आपदा श्रेणी में शामिल किया जाए और ड्राइवर आयोग का गठन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि दुर्घटना में ड्राइवर की मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये मुआवजा, अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा घायल होने पर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। चालकों ने 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना लागू करने और दुर्घटना में चालक की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को तत्काल पेंशन देने की भी मांग उठाई। साथ ही 1 सितंबर को ड्राइवर दिवस घोषित करने की मांग भी की गई। धरना में शामिल चालकों का कहना था कि कोविड काल के दौरान जब लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, तब भी ड्राइवरों ने अपने परिवार से दूर रहकर ईमानदारी से काम किया। इसके बावजूद आज उन्हें सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल रही है। चालकों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 90 दिनों के भीतर उनकी 10 सूत्री मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर के चालक स्टीयरिंग छोड़कर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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- नालंदा, बिहारशरीफ/हरनौत से बड़ी खबर बिहार में नगर निकाय कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है। संघ की हरनौत शाखा द्वारा जारी बैनर के अनुसार, 📅 13 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर 👉 प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में— ✔️ वर्षों से कार्यरत दैनिक और संविदा कर्मियों को स्थायी करना ✔️ ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना ✔️ समान काम के बदले समान वेतन लागू करना ✔️ अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां पूरी करना ✔️ और पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। अब देखना होगा कि इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है। 🎥 कैमरामैन के साथ [आपका नाम], Vande Bharat News, नालंदा1
- नालंदा, बिहारशरीफ/हरनौत से बड़ी खबर बिहार में नगर निकाय कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है। संघ की हरनौत शाखा द्वारा जारी बैनर के अनुसार, 📅 13 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर 👉 प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में— ✔️ वर्षों से कार्यरत दैनिक और संविदा कर्मियों को स्थायी करना ✔️ ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना ✔️ समान काम के बदले समान वेतन लागू करना ✔️ अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां पूरी करना ✔️ और पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। अब देखना होगा कि इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है। 🎥 कैमरामैन के साथ [आपका नाम], Vande Bharat News, नालंदा1
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- नालंदा - पीएम के संबोधन के बाद नालंदा में गूंजा नारी शक्ति वंदन अधिनियम की गूंज कार्यकर्ताओं ने कहा “महिलाओं की ताकत को मिलेगा नया आसमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद नालंदा जिले में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय, मेहनौर में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इस कानून को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। कार्यक्रम में प्रदेश नेत्री सुषमा शाहू और जिलाध्यक्ष राजेश कुमार ने भाग लेते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ेगी। उनके अनुसार, लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से महिलाएं अब निर्णय लेने की मुख्य धारा में आएंगी। नेताओं ने कहा कि यह अधिनियम केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का माध्यम है। इससे गांव-देहात की महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और वे समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकेंगी। कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा, “अब महिलाओं की ताकत को नया आसमान मिलेगा। आने वाले समय में राजनीति से लेकर समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की मजबूत भागीदारी दिखेगी।” कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे देश के विकास की नई दिशा बताया। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि नालंदा में भी ‘नारी शक्ति वंदन’ की गूंज दूर तक सुनाई देने वाली है।4
- प्रशासनिक सवाल उठता है—उद्घाटन के बावजूद अगर मछली बाजार चालू नहीं हो पाया और उससे संभावित रोजगार प्रभावित हो रहा है, तो यह निश्चित ही लापरवाही या सिस्टम की विफलता का संकेत हो सकता है। इसे समझने के लिए कुछ मुख्य बिंदु सामने आते हैं: संभावित कारण प्रशासनिक लापरवाही भवन बन गया लेकिन संचालन शुरू नहीं हुआ—यह अक्सर विभागों के बीच समन्वय की कमी से होता है। लाइसेंस/टेंडर में देरी असर क्या हुआ? सैकड़ों लोगों को मिलने वाला रोजगार रुक गया स्थानीय व्यापारियों और मछुआरों को नुकसान सरकारी पैसे और संसाधनों की बर्बादी आम जनता को सुविधाओं से वंचित होना जिम्मेदार कौन? जिम्मेदारी कई स्तर पर तय हो सकती है: नगर परिषद / नगर निगम संबंधित विभाग (जैसे मत्स्य विभाग) स्थानीय प्रशासन (SDO, DM स्तर) कृषी विभाग ठेकेदार या एजेंसी (अगर काम अधूरा है) रमेन्द्र कुमार Vande Bharat News, बिहारशरीफ नालंदा हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को Like, Subscribe, Share और Comment जरूर करें।1