खेजड़ी संरक्षण पर किसान जागरूकता कार्यशाला हुई आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न रेंज एवं ब्लॉक स्तर से अधिकारी, कर्मचारी, किसान और आमजन ने लिया भाग नागौर,,राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना पंच गौरव की जानकारी आमजन तक पहुंचाने तथा एक जिला एक वनस्पति योजना के अंतर्गत खेजड़ी प्रजाति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से वन विभाग, नागौर के मण्डल परिसर में एक दिवसीय किसान जागरूकता एवं तकनीकी जानकारी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले के विभिन्न रेंज एवं ब्लॉक स्तर से अधिकारी, कर्मचारी, किसान और आमजन ने भाग लिया। कार्यक्रम में खेजड़ी प्रजाति के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण के लिए प्रेरित किया गया, साथ ही बताया गया कि आगामी मानसून सत्र में पौधारोपण के लिए विभागीय नर्सरियों में लगभग दो लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं, इसके साथ ही कुछ पौधे ग्राफ्टेड अथवा थार खेजड़ी के रूप में भी तैयार किए जा रहे हैं। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने खेजड़ी के पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि नागौर जिले के लिए खेजड़ी को जिला-एक वनस्पति के रूप में चुना जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेजड़ी सदियों से स्थानीय लोगों के जीवन, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन का आधार रही है। इसलिए इस प्रजाति का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है । उपस्थित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को खेजड़ी के संरक्षण, पौधारोपण, देखभाल और इसके बहुआयामी लाभों के बारे में तकनीकी जानकारी भी दी। कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद जाखड़, पद्मश्री हिमतराम भांभू, उप वन संरक्षक विजय शंकर पाण्डेय, नागौर तहसीलदार नृसिंह टाक, सहायक वन संरक्षक डॉ. सज्जन कुमार कंवलिया, पंच गौरव प्रभारी ममता बाना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
खेजड़ी संरक्षण पर किसान जागरूकता कार्यशाला हुई आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न रेंज एवं ब्लॉक स्तर से अधिकारी, कर्मचारी, किसान और आमजन ने लिया भाग नागौर,,राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना पंच गौरव की जानकारी आमजन तक पहुंचाने तथा एक जिला एक वनस्पति योजना के अंतर्गत खेजड़ी प्रजाति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से वन विभाग, नागौर के मण्डल परिसर में एक दिवसीय किसान जागरूकता एवं तकनीकी जानकारी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले के विभिन्न रेंज एवं ब्लॉक स्तर से अधिकारी, कर्मचारी, किसान और आमजन ने भाग लिया। कार्यक्रम में खेजड़ी प्रजाति
के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण के लिए प्रेरित किया गया, साथ ही बताया गया कि आगामी मानसून सत्र में पौधारोपण के लिए विभागीय नर्सरियों में लगभग दो लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं, इसके साथ ही कुछ पौधे ग्राफ्टेड अथवा थार खेजड़ी के रूप में भी तैयार किए जा रहे हैं। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने खेजड़ी के पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि नागौर जिले के लिए खेजड़ी को जिला-एक वनस्पति के रूप में चुना जाना एक महत्वपूर्ण कदम
है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेजड़ी सदियों से स्थानीय लोगों के जीवन, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन का आधार रही है। इसलिए इस प्रजाति का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है । उपस्थित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को खेजड़ी के संरक्षण, पौधारोपण, देखभाल और इसके बहुआयामी लाभों के बारे में तकनीकी जानकारी भी दी। कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद जाखड़, पद्मश्री हिमतराम भांभू, उप वन संरक्षक विजय शंकर पाण्डेय, नागौर तहसीलदार नृसिंह टाक, सहायक वन संरक्षक डॉ. सज्जन कुमार कंवलिया, पंच गौरव प्रभारी ममता बाना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- एक आरोपी खेताराम बावरी को किया गया गिरफ्तार। नागौर मृदुल कच्छावा जिला पुलिस अधीक्षक जिला नागौर के निर्देशानुसार की पालना मे आशाराम चौधरी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नागौर एंव जयप्रकाश बेनिवाल वृत्ताधिकारी, वृत्त डेगाना के निकटतम सुपरविजन में अशोक कुमार झाझडिया पुलिस निरीक्षक थानाधिकारी पुलिस थाना थांवला मय थाना स्तरीय घटित टीम के अथक प्रयास से एक जे.सी.बी., एक ट्रेक्टर मय ट्रोली व एक ट्रेक्टर मय कराई को जप्त कर एक मुलजिम खेताराम बावरी को गिरफ्तार किया गया।2
- आईरा समाचार बीकानेर में अचानक कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कई होटल संचालकों का कहना है कि गैस की नियमित सप्लाई नहीं होने से खाना बनाने का काम प्रभावित हो रहा है और कुछ स्थानों पर सीमित मेन्यू के साथ काम चलाना पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और सप्लाई चेन पर असर के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में होटल व्यवसाय और शादी समारोहों पर भी असर पड़ सकता है।1
- Post by Bikaner local news1
- Post by Sanwar Sa1
- वाल्मिकी समाज के युवक का अपहरण कर जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर धारदार हथियार से हमला करने का आरोप वाल्मीकि समाज ने किया पर्दशन गुलाबबाड़ी नाका मदार फाटक पर कुछ लोगो ने वाल्मिकी समाज के दो व्यक्ति पर लाठी, सरिये, चाकू व अन्य हथियारों के साथ लैस होकर आये। ओर गाली-गलौच की। नीच जाति के लोगों तुम्हारी हैसियत नहीं है हम लोगों के साथ बैठने की और आरोपियों में दो लोगों के पास रिवाल्वर भी थी जो हवा में फायर कर रहे थे। मारपीट करने के बाद आरोपियों ने रघुवीर और अर्जुन को घायल अवस्था में उसके घर के बाहर पटक कर फरार हो गये। उक्त हमले से दोनों वाल्मिकी समाज के युवकों के बहुत गम्भीर चोट आई है। जिसमें रघुवीर सारसर के सिर में गम्भीर चोट व पैरों की हड्डी टूट गई व अन्य अन्दुरूनी चोटें आई हैं व अर्जुन कलोसिया के गम्भीर अन्दुरूनी चोटें आई है। उक्त घटना को लेकर व्वाल्मीकि समाज ने जिला कलेक्टर पर पर्दशन कर ज्ञापन दिया,,ओर घटना गम्भीरता से लेकर उक्त प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर आरोपीगणों को जल्द से जल्द गिरफतार करने की माग की1
- अजमेर। गेगल थाना क्षेत्र में गगवाना पुलिया के पास एक सड़क हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार एक वाहन चालक ने सामने से आ रही ब्लैक कलर स्कॉर्पियो (RJ14UJ8121) को बचाने की कोशिश की, इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन चालक घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही गेगल थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। वहीं अजमेर से अग्निशमन विभाग की गाड़ी भी मौके पर पहुंची। पुलिस और अग्निशमन कर्मियों की मदद से घायल चालक को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।3
- भरा ट्रक अंबेलनश होकर पलटा,ट्रक का ड्राइवर हुआ घायल ड्राइवर को हाईवे एम्बुलेंस से पहुचाया जेएलएन अस्प्ताल।।1
- नागौर/गोटन,, क्षेत्र में प्रसिद्ध नागौरी नस्ल की देशी गायों के संरक्षण और प्रजनन को लेकर बड़ी समस्या सामने आ रही है। कस्बे के पशुपालकों का कहना है कि गोटन पशु चिकित्सालय में नागौरी नस्ल का सीमन उपलब्ध नहीं होने के कारण इस देसी नस्ल की प्रजनन दर बढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। स्थानीय पशुपालकों के अनुसार सरकार एक ओर देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आवश्यक संसाधनों की कमी से योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सालय में अन्य नस्लों का सीमन तो उपलब्ध रहता है, लेकिन नागौरी नस्ल का सीमन नहीं होने से पशुपालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। पशुपालक एडवोकेट नरेश कड़वासरा का कहना है कि नागौरी नस्ल क्षेत्र की पहचान रही है और यह नस्ल अपनी मजबूती व अनुकूलता के कारण प्रसिद्ध है। यदि समय रहते इसके संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह नस्ल धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांग की है कि गोटन पशु चिकित्सालय में नागौरी नस्ल का सीमन उपलब्ध कराया जाए, ताकि कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से इस देशी नस्ल की संख्या बढ़ाई जा सके और पशुपालकों को भी लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशुपालन विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर नागौरी नस्ल के सीमन की व्यवस्था की जाए तो क्षेत्र में इस देसी नस्ल की प्रजनन दर बढ़ाई जा सकती है और पशुपालकों की आय में भी इजाफा होगा।2