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बारा क्षेत्र में काले बादलों का डेरा, तेज तूफान और बारिश की चेतावनी बारा क्षेत्र में आज गुरुवार सुबह से आसमान में काले बादल छाए हुए हैं, जिससे मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। मौसम विभाग ने तेज आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी जारी की है। संभावित खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
Rohit Sharma
बारा क्षेत्र में काले बादलों का डेरा, तेज तूफान और बारिश की चेतावनी बारा क्षेत्र में आज गुरुवार सुबह से आसमान में काले बादल छाए हुए हैं, जिससे मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। मौसम विभाग ने तेज आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी जारी की है। संभावित खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
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- शंकरगढ़ में 'भ्रष्टाचार' पर प्रशासन का सर्जिकल स्ट्राइक: ADM नगर ने खुद कराई बोरवेल की खुदाई, EO को लगाई कड़ी फटकार नगर पंचायत शंकरगढ़ की जनता के लिए आज का दिन 'न्याय की सुबह' जैसा रहा। अनादि टीवी की खबर के जोरदार धमाके के बाद प्रयागराज जिलाधिकारी का चाबुक ऐसा चला कि भ्रष्टाचार के अड्डों में हड़कंप मच गया। डीएम के आदेश पर एडीएम नगर सत्यम मिश्रा व एसडीएम बारा भारी लाव-लश्कर के साथ शंकरगढ़ पहुंचे, तो अधिकारियों और कर्मचारियों के पसीने छूट गए। खबर का महा-असर: फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरी जांच अनादि टीवी द्वारा भ्रष्टाचार और सभासदों के इस्तीफे की खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद प्रशासन गहरी नींद से जागा। जिलाधिकारी ने तत्काल एक विशेष जांच टीम गठित की। आज एडीएम नगर व एसडीएम बारा ने नगर पंचायत कार्यालय में डेरा डाला और नाराज सभासदों के साथ बंद कमरे में मैराथन वार्ता की। सभासदों ने जब भ्रष्टाचार का 'कच्चा चिट्ठा' खोला, तो एडीएम नगर ने बिना देर किए सीधे ग्राउंड जीरो का रुख किया। नगर पंचायत शंकरगढ़ में जांच के दौरान मौके पर खुला राज: जब बाहर निकले समरसेबल और पाइप भ्रष्टाचार की गहराई नापने के लिए एडीएम प्रशासन ने खुद खड़े होकर दो बोरवेल समरसेबल को बाहर निकलवाया। बोरवेल की गहराई और डाले गए पाइपों की एक-एक इंच की जांच की गई। इस दौरान मौके पर मौजूद नगर पंचायत वासियों का गुस्सा भी फूट पड़ा। जनता ने एडीएम के सामने अधिकारियों की मनमानी और धांधली की पोल खोलकर रख दी। लापरवाही पर भड़के ADM,नगर ने EO को दी सख्त चेतावनी स्थलीय निरीक्षण के दौरान बदहाल सफाई व्यवस्था और तकनीकी खामियां देखकर एडीएम नगर का पारा चढ़ गया। उन्होंने अधिशासी अधिकारी (EO) अमित कुमार यादव के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की और दो टूक शब्दों में कहा— "जनता के पैसे की बर्बादी और काम में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" जांच के दौरान खामियां मिलने पर दोषियों पर कार्रवाई' तय! जांच के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए एडीएम नगर सत्यम मिश्रा ने शंकरगढ़ की जनता को आश्वस्त किया कि यह कोई खानापूर्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि: "कागजी और स्थलीय जांच पूरी हो चुकी है। गड़बड़ी की परतें खुल रही हैं, जांच रिपोर्ट आते ही संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई होगी जो मिसाल बनेगी।" जनता का दिल खुश: शंकरगढ़ की जनता में आज इस बात की खुशी है कि उनके हक की आवाज अब अधिकारियों के कानों तक पहुँच चुकी है। बोरवेल की जांच और एडीएम के सख्त तेवरों ने साफ कर दिया है कि अब भ्रष्टाचारियों के दिन गिनती के रह गए हैं।4
- प्रयागराज जनपद के यमुनापार क्षेत्र में स्थित गौहनिया चौराहे के पास देसी शराब के ठेके पर नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ठेके पर निर्धारित समय से पहले सुबह करीब 6 बजे से ही शराब की बिक्री शुरू हो जाती है। सरकारी नियमों के मुताबिक देसी शराब की दुकानें सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक ही संचालित की जा सकती हैं। इसके बावजूद आरोप है कि यहां तय समय से पहले और अधिक कीमत पर “ब्लैक” में शराब बेची जा रही है। सुबह के समय, जब आसपास की अधिकतर दुकानें बंद रहती हैं, उस दौरान भी ठेके पर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह गतिविधि लंबे समय से जारी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की अवैध बिक्री से क्षेत्र का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। खासकर युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ठेका संचालकों के हौसले बढ़े हैं। हालांकि, आबकारी इंस्पेक्टर आनंद पाठक ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही संबंधित दुकानदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए दंडित किया गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस तरह की अवैध गतिविधियों पर स्थायी रूप से रोक लगाने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।1
- थाना मुठ्ठीगंज पुलिस द्वारा 02 अभियुक्त गिरफ्तार, उनकी निशानदेही पर 02 ड्रम विद्युत तार (33 केवी) वजन करीब 13 टन (अनुमानित कीमत लगभग 35 से 40 लाख रूपये) बरामदगी के संबंध मे पुलिस उपायुक्त नगर द्वारा दी गई बाईट।1
- प्यासी जनता पानी बिना परेशान पानी नहीं कई वर्षों से मेजा: पहाड़ी पर 'पानी-पानी' को तरसती आदिवासी बस्ती, अस्पताल बना आखिरी सहारा प्रयागराज के मेजा खास की पहाड़ी पर स्थित आदिवासी बस्ती में हालात इसके ठीक उलट हैं। यहाँ के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। आलम यह है कि अगर पास में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मेजा न होता, तो यहाँ के लोगों का जीवित रहना भी मुश्किल हो जाता। खराब हैंडपंप और बदबूदार पानी की मार बस्ती के लोगों का कहना है कि पूरे इलाके में कहने को तो हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर खराब पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया: जो हैंडपंप चालू भी होते हैं, उनसे गंदा और बदबूदार पानी निकलता है, जो पीने लायक बिल्कुल नहीं है। वर्तमान में हैंडपंप पूरी तरह ठप है, जिससे लोगों को बाल्टी और डिब्बे लेकर दूर स्थित अस्पताल की ओर दौड़ना पड़ता है। दिन का आधा समय सिर्फ पानी ढोने में ही बीत जाता है, जिससे मजदूरी और अन्य काम प्रभावित हो रहे हैं। वोट के समय हाथ-पैर, जीतने के बाद बेरुखी' बस्ती की महिलाओं और पुरुषों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने तीखे लहजे में कहा कि जब चुनाव आता है, तो विधायक, सांसद और प्रधान सब हाथ-पैर जोड़ने चले आते हैं। लेकिन जीतने के बाद कोई दोबारा शक्ल दिखाने नहीं आता। हैरानी की बात: जब लोगों से पूछा गया कि उनके क्षेत्र का विधायक कौन है, तो अधिकांश को नाम तक नहीं पता। लोगों का कहना है कि वे केवल मोदी और योगी के नाम पर वोट देते हैं, स्थानीय नेता से उन्हें कोई उम्मीद नहीं बची है। अस्पताल न होता तो हो जाती अनहोनी बस्ती के लोगों ने साफ कहा कि मेजा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उनके लिए जीवनदान बना हुआ है। यदि वहां से पानी न मिले, तो प्यास के कारण लोग दम तोड़ दें। भीषण गर्मी में पहाड़ी पर चढ़कर पानी ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। प्रशासन से अपील: मेजा खास की इस आदिवासी बस्ती की पुकार क्या अधिकारियों के कानों तक पहुंचेगी? क्या चुनावी वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे या इन प्यासे कंठों को पानी नसीब होगा?1
- Post by Vaibhav Yadav India Tv1
- मैं श्रीराम भक्त प्रभाकर राम एडवोकेट मीडिया जन सेवक तहसील मेजा खास में हरिजन कॉलोनी है जहां पर रहने के लिए हरिजनों को आवास मुहैया कराया गया है लेकिन लेकिन उनके स्थान पर कोई दूसरा कॉलोनी का उपयोग कर रहा है.जय श्री राम1
- Post by दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा1
- श्री जंगी राम इंटर कॉलेज पर संकट के बादल, वन विभाग की जमीन पर कब्जे और मान्यता में धांधली का आरोप संगम नगरी प्रयागराज के यमुनानगर (बारा) क्षेत्र स्थित श्री जंगी राम इंटर कॉलेज इन दिनों गंभीर विवादों और प्रशासनिक जांच के घेरे में है। विद्यालय पर सरकारी जमीन कब्जाने और मान्यता के नियमों के उल्लंघन जैसे संगीन आरोप लगे हैं, जिसकी जांच के लिए प्रशासनिक अमला जमीन पर उतर आया है। क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, लोहगरा में स्थित यह इंटर कॉलेज वन विभाग की आरक्षित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित किया गया है। इसके अलावा, विद्यालय की मान्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मान्यता प्राप्त करते समय कागजों में 16 कमरों का संचालन दिखाया गया था, लेकिन धरातल पर कमरों की संख्या इससे कहीं कम है। प्रशासनिक अमले ने की छापेमारी और जांच शिकायत की गंभीरता को देखते हुए बारा के उपजिलाधिकारी (SDM) गणेश कनौजिया और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) पी एन सिंह ने संयुक्त रूप से विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विद्यालय परिसर में जाकर कमरों की गिनती की और भौतिक ढांचे का जायजा लिया। विद्यालय की मान्यता संबंधी फाइल और राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) का मिलान किया गया ताकि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक की पुष्टि हो सके। प्रबंधक ने आरोपों को बताया निराधार वहीं दूसरी ओर, विद्यालय के प्रबंधक भोलानाथ दुबे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने मीडिया और अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि: "विद्यालय पूरी तरह से हमारी अपनी आरजी (राजस्व) संख्या की निजी जमीन पर बना है। वन विभाग की जमीन से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हमारे खिलाफ की गई शिकायत द्वेषपूर्ण और निराधार है।" *जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई* निरीक्षण के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थलीय निरीक्षण और कागजी दस्तावेजों में कोई भिन्नता पाई जाती है या मान्यता की शर्तों का उल्लंघन मिलता है, तो विद्यालय के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार है। यह जांच तय करेगी कि विद्यालय का भविष्य क्या होगा और क्या छात्रों की पढ़ाई पर इसका असर पड़ेगा। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो विद्यालय की मान्यता रद्द होने के साथ-साथ बेदखली की कार्रवाई भी संभव है।4