हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी* *जब समुदाय अपनी आंगनवाड़ी को अपना समझे* * श्रीमती अन्नपूर्णा देवी 2047 के भारत का निर्माण वे बच्चे करेंगे जिन्होंने अभी स्कूल में कदम भी नहीं रखा है। एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सक्षम वयस्क बनने की उनकी यह यात्रा बहुत पहले, विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में ही शुरू हो जाती है। लाखों भारतीय बच्चों और उनकी माताओं के लिए इस यात्रा का सबसे बड़ा संबल उनके पड़ोस की एक जानी-पहचानी संस्था है: आंगनवाड़ी। कक्षा में प्रवेश करने से बहुत पहले ही बच्चों का आंगनवाड़ी में वजन और कद नापा जाता है, उन्हें गर्म पौष्टिक भोजन मिलता है और वे घर के बाहर पहली बार बाल-गीत सुनते हैं। यहीं गर्भवती माता-पिता को परामर्श भी दिया जाता है। आज 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र नागरिक और सरकार के बीच पहले संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं, जो 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। यहां कार्यरत 25.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं उसी समाज से आती हैं जिसकी वे सेवा करती हैं। आंगनवाड़ी हमेशा से स्थानीय समुदाय का ही एक हिस्सा रही है। मार्च 2018 में जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'पोषण अभियान' की शुरुआत की, तब यह जानी-पहचानी संस्था एक राष्ट्रीय आंदोलन की आधारशिला बन गई। 9 सितंबर 2026 को ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी’ थीम के साथ 9वें 'राष्ट्रीय पोषण माह' का शुभारंभ हुआ। गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह सरकार की है और यह प्रतिबद्धता अडिग है, लेकिन कोई भी आंगनवाड़ी केंद्र सही मायने में तभी सशक्त बनता है जब समुदाय उसे अपना माने। एक 'विकसित भारत' का निर्माण केवल 'सबके प्रयास' से ही संभव है; पोषण को केवल एक सरकारी सेवा के रूप में नहीं देखा जा सकता। लाभार्थी से भागीदार तक समुदाय का स्वामित्व अक्सर केवल एक अपील बनकर रह जाता था, लेकिन इस वर्ष इसे एक संस्थागत रूप दिया गया है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों को केंद्र से जोड़ती हैं ताकि हर पात्र बच्चे तक लाभ पहुंच सके। सोशल ऑडिट के माध्यम से समुदाय सेवाओं की समीक्षा करता है, अधिकारों की पुष्टि करता है और औपचारिक रूप से अपने निष्कर्ष दर्ज करता है। इस तरह जवाबदेही उन परिवारों की आंतरिक निगरानी में बदल जाती है जो इन सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में माताएं हैं। 'पूरक पोषण कार्यक्रम' (SNP) का मेनू बोर्ड गर्म पके भोजन और 'टेक-होम राशन' (घर ले जाने वाले राशन) के दैनिक विवरण को प्रदर्शित करता है। जब एक मां को पता होता है कि उसके बच्चे का क्या अधिकार है, तो पारदर्शिता रोज़मर्रा की आदत बन जाती है। इस प्रकार समुदाय गुणवत्ता सुनिश्चित करने में एक जागरूक भागीदार बन जाता है। पोषण माह 2026 के दौरान इन समितियों, सोशल ऑडिट और मेनू बोर्ड को सक्रिय किया जा रहा है; साथ ही 'तिथि भोज', चखने के सत्र और व्यंजन विधियों के प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मेनू बोर्ड से परे पहला पहलू स्वयं भोजन है। 'सुपोषित भारत' के लिए संतुलित आहार आवश्यक है: अनाज और श्रीअन्न (मिलेट्स), दालें, मेवे और बीज, दूध और दुग्ध उत्पाद, अंडे, मौसमी फल और हरी सब्ज़ियां। जुलाई में जारी 'पूरक पोषण कार्यक्रम के लिए व्यापक दिशानिर्देश, 2026' में गर्म पके भोजन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत सूक्ष्म पोषक तत्वों के मानकों को सुदृढ़ किया गया है। दूसरा पहलू प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा है। बच्चा क्या खाता है और क्या सीखता है, ये दोनों आपस में गहरे जुड़े हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चे के शुरुआती तीन वर्षों में 34 विकासात्मक पड़ावों पर नज़र रखती हैं। 'नवचेतना' और 'आधारशिला' पाठ्यक्रम पोषण और देखभाल को स्कूल जाने की तैयारी से जोड़ते हैं। तीसरा पहलू बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण ही बच्चे के जीवन की शुरुआत तय करता है। यह पोषण माह 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के दस वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है, जो प्रधानमंत्री के इस विश्वास को दर्शाता है कि किसी भी महिला को अपनी आजीविका और स्वास्थ्य के बीच किसी एक को चुनने के लिए विवश नहीं होना चाहिए। एक दशक में 4.65 करोड़ लाभार्थियों को उनके खातों में सीधे 21,511 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। 'मिशन शक्ति' के तहत इसे और मजबूत करते हुए दूसरी संतान कन्या होने पर अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 स्पष्ट करता है कि ऐसी वित्तीय सहायता तभी पूरी तरह प्रभावी होती है जब उसके साथ उचित परामर्श भी मिले, जिससे परिवार के भीतर समझदारी से निर्णय लिए जा सकें। राजस्थान के 'कैश प्लस' मॉडल की समीक्षा—जिसमें इस वित्तीय सहायता को निरंतर व्यवहार परिवर्तन संचार से जोड़ा गया था—दर्शाती है कि इस लाभ को भोजन पर खर्च करने वाली महिलाओं का अनुपात 30 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया। साथ ही, जब पतियों और परिवारों को इस संवाद में शामिल किया गया तो मातृ पोषण से जुड़े भ्रम और भ्रांतियां भी दूर हुईं। यह साझेदारी आंगनवाड़ियों के इर्द-गिर्द इसलिए पनपती है क्योंकि मां का पोषण कभी भी केवल उसकी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं रहा है। केंद्र में मौजूद नारी शक्ति का सम्मान इस पूरे तंत्र के केंद्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता खड़ी हैं। सामुदायिक स्वामित्व का अर्थ यह कतई नहीं है कि पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल का सारा भार उन्हीं पर डाल दिया जाए। इसका वास्तविक अर्थ उनका सम्मान करना, उनका सहयोग करना और उन्हें सशक्त बनाना है। उनका अनुभव और उन पर बना विश्वास अमूल्य है। इस सितंबर, मैं प्रत्येक नागरिक से आग्रह करती हूं कि वे अपने क्षेत्र के कम से कम एक आंगनवाड़ी केंद्र का दौरा अवश्य करें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बात करें, मेनू बोर्ड देखें और पूछें कि आप किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं। पिताओं, दादा-दादी/नाना-नानी, पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों—सभी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। इस सितंबर हमारी आंगनवाड़ियों में जिन बच्चों का वजन नापा जा रहा है, वे उस समय अपने जीवन के तीसरे दशक (20s) में होंगे जब भारत अपनी आज़ादी के सौ वर्ष पूरे करेगा। उस वर्ष वे जिस स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के साथ खड़े होंगे, उसे आज गढ़ा जा रहा है। जब प्रत्येक समुदाय अपनी आंगनवाड़ी की ज़िम्मेदारी लेगा, तभी भारत अपने हर बच्चे के भविष्य की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित कर सकेगा। (लेखक केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार हैं।)
हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी* *जब समुदाय अपनी आंगनवाड़ी को अपना समझे* * श्रीमती अन्नपूर्णा देवी 2047 के भारत का निर्माण वे बच्चे करेंगे जिन्होंने अभी स्कूल में कदम भी नहीं रखा है। एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सक्षम वयस्क बनने की उनकी यह यात्रा बहुत पहले, विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में ही शुरू हो जाती है। लाखों भारतीय बच्चों और उनकी माताओं के लिए इस यात्रा का सबसे बड़ा संबल उनके पड़ोस की एक जानी-पहचानी संस्था है: आंगनवाड़ी। कक्षा में प्रवेश करने से बहुत पहले ही बच्चों का आंगनवाड़ी में वजन और कद नापा जाता है, उन्हें गर्म पौष्टिक भोजन मिलता है और वे घर के बाहर पहली बार बाल-गीत सुनते हैं। यहीं गर्भवती माता-पिता को परामर्श भी दिया जाता है। आज 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र नागरिक और सरकार के बीच पहले संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं, जो 8.9 करोड़ से अधिक बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। यहां कार्यरत 25.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं उसी समाज से आती हैं जिसकी वे सेवा करती हैं। आंगनवाड़ी हमेशा से स्थानीय समुदाय का ही एक हिस्सा रही है। मार्च 2018 में जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'पोषण अभियान' की शुरुआत की, तब यह जानी-पहचानी संस्था एक राष्ट्रीय आंदोलन की आधारशिला बन गई। 9 सितंबर 2026 को ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी’ थीम के साथ 9वें 'राष्ट्रीय पोषण माह' का शुभारंभ हुआ। गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह सरकार की है और यह प्रतिबद्धता अडिग है, लेकिन कोई भी आंगनवाड़ी केंद्र सही मायने में तभी सशक्त बनता है जब समुदाय उसे अपना माने। एक 'विकसित भारत' का निर्माण केवल 'सबके प्रयास' से ही संभव है; पोषण को केवल एक सरकारी सेवा के रूप में नहीं देखा जा सकता। लाभार्थी से भागीदार तक समुदाय का स्वामित्व अक्सर केवल एक अपील बनकर रह जाता था, लेकिन इस वर्ष इसे एक संस्थागत रूप दिया गया है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों को केंद्र से जोड़ती हैं ताकि हर पात्र बच्चे तक लाभ पहुंच सके। सोशल ऑडिट के माध्यम से समुदाय सेवाओं की समीक्षा करता है, अधिकारों की पुष्टि करता है और औपचारिक रूप से अपने निष्कर्ष दर्ज करता है। इस तरह जवाबदेही उन परिवारों की आंतरिक निगरानी में बदल जाती है जो इन सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में माताएं हैं। 'पूरक पोषण कार्यक्रम' (SNP) का मेनू बोर्ड गर्म पके भोजन और 'टेक-होम राशन' (घर ले जाने वाले राशन) के दैनिक विवरण को प्रदर्शित करता है। जब एक मां को पता होता है कि उसके बच्चे का क्या अधिकार है, तो पारदर्शिता रोज़मर्रा की आदत बन जाती है। इस प्रकार समुदाय गुणवत्ता सुनिश्चित करने में एक जागरूक भागीदार बन जाता है। पोषण माह 2026 के दौरान इन समितियों, सोशल ऑडिट और मेनू बोर्ड को सक्रिय किया जा रहा है; साथ ही 'तिथि भोज', चखने के सत्र और व्यंजन विधियों के प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मेनू बोर्ड से परे पहला पहलू स्वयं भोजन है। 'सुपोषित भारत' के लिए संतुलित आहार आवश्यक है: अनाज और श्रीअन्न (मिलेट्स), दालें, मेवे और बीज, दूध और दुग्ध उत्पाद, अंडे, मौसमी फल और हरी सब्ज़ियां। जुलाई में जारी 'पूरक पोषण कार्यक्रम के लिए व्यापक दिशानिर्देश, 2026' में गर्म पके भोजन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत सूक्ष्म पोषक तत्वों के मानकों को सुदृढ़ किया गया है। दूसरा पहलू प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा है। बच्चा क्या खाता है और क्या सीखता है, ये दोनों आपस में गहरे जुड़े हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चे के शुरुआती तीन वर्षों में 34 विकासात्मक पड़ावों पर नज़र रखती हैं। 'नवचेतना' और 'आधारशिला' पाठ्यक्रम पोषण और देखभाल को स्कूल जाने की तैयारी से जोड़ते हैं। तीसरा पहलू बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण ही बच्चे के जीवन की शुरुआत तय करता है। यह पोषण माह 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के दस वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है, जो प्रधानमंत्री के इस विश्वास को दर्शाता है कि किसी भी महिला को अपनी आजीविका और स्वास्थ्य के बीच किसी एक को चुनने के लिए विवश नहीं होना चाहिए। एक दशक में 4.65 करोड़ लाभार्थियों को उनके खातों में सीधे 21,511 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। 'मिशन शक्ति' के तहत इसे और मजबूत करते हुए दूसरी संतान कन्या होने पर अतिरिक्त लाभ प्रदान किया जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 स्पष्ट करता है कि ऐसी वित्तीय सहायता तभी पूरी तरह प्रभावी होती है जब उसके साथ उचित परामर्श भी मिले, जिससे परिवार के भीतर समझदारी से निर्णय लिए जा सकें। राजस्थान के 'कैश प्लस' मॉडल की समीक्षा—जिसमें इस वित्तीय सहायता को निरंतर व्यवहार परिवर्तन संचार से जोड़ा गया था—दर्शाती है कि इस लाभ को भोजन पर खर्च करने वाली महिलाओं का अनुपात 30 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया। साथ ही, जब पतियों और परिवारों को इस संवाद में शामिल किया गया तो मातृ पोषण से जुड़े भ्रम और भ्रांतियां भी दूर हुईं। यह साझेदारी आंगनवाड़ियों के इर्द-गिर्द इसलिए पनपती है क्योंकि मां का पोषण कभी भी केवल उसकी अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं रहा है। केंद्र में मौजूद नारी शक्ति का सम्मान इस पूरे तंत्र के केंद्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता खड़ी हैं। सामुदायिक स्वामित्व का अर्थ यह कतई नहीं है कि पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल का सारा भार उन्हीं पर डाल दिया जाए। इसका वास्तविक अर्थ उनका सम्मान करना, उनका सहयोग करना और उन्हें सशक्त बनाना है। उनका अनुभव और उन पर बना विश्वास अमूल्य है। इस सितंबर, मैं प्रत्येक नागरिक से आग्रह करती हूं कि वे अपने क्षेत्र के कम से कम एक आंगनवाड़ी केंद्र का दौरा अवश्य करें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बात करें, मेनू बोर्ड देखें और पूछें कि आप किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं। पिताओं, दादा-दादी/नाना-नानी, पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों—सभी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। इस सितंबर हमारी आंगनवाड़ियों में जिन बच्चों का वजन नापा जा रहा है, वे उस समय अपने जीवन के तीसरे दशक (20s) में होंगे जब भारत अपनी आज़ादी के सौ वर्ष पूरे करेगा। उस वर्ष वे जिस स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के साथ खड़े होंगे, उसे आज गढ़ा जा रहा है। जब प्रत्येक समुदाय अपनी आंगनवाड़ी की ज़िम्मेदारी लेगा, तभी भारत अपने हर बच्चे के भविष्य की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित कर सकेगा। (लेखक केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार हैं।)
- मिर्ज़ापुर: डेनमार्क के राजदूत ने दुहौआ में किया 'जल अर्पण', समुदाय को सौंपी जलापूर्ति की कमान।1
- दिल्ली - भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन कल मुंबई में श्री सिद्धिविनायक मंदिर,लाल बाग के राजा , CM, DCM द्वय के आवास आदि स्थानों पर श्री गजानन की पूजा अर्चना करेंगे, मुंबई से पुणे जाएँगे नवीन, पुणे में भी कई पंडालों में दर्शन पूजन करेंगे !!1
- Mirzapur: दबंग कब्जेधारियों के विरुद्ध मुखर किया आवाज़, न्याय के लिए बेटी बैठी धरने पर मिर्जापुर। शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी भूमि संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होने से लोगों धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। विंध्याचल थाना क्षेत्र के निफरा गैपुरा निवासी जोखू लाल यादव पुत्र राम उजागर यादव व उनकी पुत्री कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में बताया है कि उनकी भूमि आराजी नंबर 393 व 339 व 351 नंबरों की भूमि संक्रमणीय भूमिधर कागजात खतौनी में दर्ज है। जबकि आराजी नंबर 339 में ट्यूबवेल और गौशाला है और 351 आराजी नंबर में खाली जमीन है। जिसमें विपक्षी भी कब्जा किए हुए हैं और 393 भूमि में नाली बना दिए हैं। जबकि हम प्रार्थी के पूरे भूमि में सात बीघा खेत में कहीं न कहीं बढ़ाकर कब्जा करके जोत बो दिए हैं। उक्त भूमि पर विपक्षीगण जबरिया गुंडई के बल पर उनके खेत में काफी दूरी तक कब्जा करके धान का फसल व बजरी की बुवाई कर दिए हैं। जिसकी शिकायत हलके थाना इलाका व उप जिलाधिकारी सदर को दिया गया, किंतु इसके बावजूद भी आज तक अभी तक कोई सुनवाई नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया है कि विपक्षी गण बोले की देखते रहना तुम्हारा पुरा जमीन हम लोग कब्जा कर लेंगे। अगर इसकी शिकायत कहीं और दोगे तो तुम्हें और तुम्हारे परिवार वालों को जान से मार कर फेंक देंगे। तुम हम लोगों को जानते नहीं हो कि हमारा कितना ऊंचा तक पकड़ है।2
- आशुतोष पांडेय ने निफारा में किया जनसभा ### जनता की समस्याओं को लेकर उठाई आवाज, युवाओं को आगे बढ़ाने का दिया भरोसा आशुतोष पांडेय ने निफारा में किया जनसभा ### जनता की समस्याओं को लेकर उठाई आवाज, युवाओं को आगे बढ़ाने का दिया भरोसा **मिर्जापुर।** 396 नगर विधानसभा से विधायक प्रत्याशी निर्दलीय**आशुतोष पांडेय** ने मंगलवार को ग्राम सभा **निफारा* में जनसभा कर क्षेत्र की जनता से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जनता की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए उनके समाधान के लिए संघर्ष करने का भरोसा दिलाया। जनसभा को संबोधित करते हुए आशुतोष पांडेय ने कहा कि **युवाओं को साथ लेकर उन्हें आगे बढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।** उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए जनता की आवाज को मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने **गैपुर से जोप मार्ग** की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। साथ ही नाली की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश एवं अन्य समय में पानी का अत्यधिक बहाव रहता है, जिससे राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में **निफारा गांव में बिजली की समस्या** को भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि गांव के आधे हिस्से में बिजली पहुंचती है, जबकि आगे के हिस्से में अभी भी बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए भी उन्होंने आवाज उठाने का भरोसा दिया। आशुतोष पांडेय ने **शिक्षा व्यवस्था में सुधार** की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार कर बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि **“एक बार हमें सेवा का अवसर दें। हम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम करेंगे।”** उन्होंने क्षेत्र से गरीबी दूर करने, युवाओं को आगे बढ़ाने तथा बुनियादी सुविधाओं में सुधार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। जनसभा के दौरान **शुभम यादव, सूरज मिश्रा, दीपक मिश्रा, सत्यम मिश्रा, जितेंद्र बिंद, सजन तिवारी, विशाल पांडेय, सचिन दुबे** सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।3
- मिर्जापुर में भू माफियाओं द्वारा गरीब महिला की पुस्तैनी भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा तत्काल हटाया जाए मिर्जापुर में भू माफियाओं द्वारा गरीब महिला की पुस्तैनी भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा तत्काल हटाया जाए सुनील कुमार पांडे एडवोकेट वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश फुलरी देवी पत्नी स्वर्गीय भगवान दास सोनकर निवासी परमापुर रमई पट्टी की पुश्तैनी जमीन आराजी नंबर 89 रकबा 2.5 बिस्वा स्थित ग्राम तरकापुर थाना शहर का कोतवाली तहसील सदर में स्थित जमीन पर भू माफियाओं द्वारा किए गए कब्जे के विरोध में गरीब महिला के परिजनों के साथ आम आदमी पार्टी मिर्जापुर के कार्यकर्ताओं ने किया जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कुमार पांडे एडवोकेट द्वारा जिलाधिकारी मिर्जापुर से पीड़ित महिला के साथ मुलाकात करके भूमाफियाओं द्वारा किए गए कब्जा को हटाने की किया गया मांग मिर्जापुर, आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मिर्जापुर के सेवक सुनील कुमार पांडे एडवोकेट की अगवाई में मिर्जापुर के परमापुर निवासी फुलरी देवी पत्नी स्वर्गीय भगवान दास सोनकर के पुश्तैनी जमीन आराजी नंबर 89 रकबा 2.5 बिस्वा स्थित ग्राम तरकापुर थाना शहर का कोतवाली तहसील सदर में स्थित जमीन पर भू माफियाओं ने शासन सत्ता का प्रभाव दिखाकर जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के विरोध में पीड़ित महिला के साथ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कुमार पांडे एडवोकेट की अगवाई में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया और पीड़ित महिला को लेकर जिलाधिकारी मिर्जापुर से मुलाकात करके महिला की जमीन को मुक्त कराने का प्रार्थना पत्र दिया गया आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दिया यदि इस गरीब अनुसूचित जाति की महिला की जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा प्रशासन द्वारा नहीं हटाया गया तो आम आदमी पार्टी मिर्जापुर जिला मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेगी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कुमार पांडे एडवोकेट ने कहा कि वर्तमान समय में मिर्जापुर में भू माफिया हावी है गरीबों दलितों की जमीनों को अपने ताकत के बल पर कब्जा करके उसका अवैध प्लाटिंग का कार्य नियम विरुद्ध किया जा रहा है जिसे आम आदमी पार्टी कदापि बर्दाश्त नहीं करेगी उन्होंने कहा कि सोनकर बिरादरी की फुलरी देवी की पुश्तैनी जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा कूट रचित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जबरदस्ती कब्जा करके प्लाटिंग का कार्य किया जा रहा है जिसे प्रशासन को तत्काल बंद कराकर भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना चाहिए कार्यक्रम में पीड़ित महिला फुलरी देवी ने कहा कि हमारी पुश्तैनी जमीन पर अकबर इमाम,सुनील सिंह, सोनू शर्मा ,द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है और हमारी जमीन पर बाउंड्री बाल खड़ा कर के उसका प्लाटिंग किया जा रहा है हम गरीब है हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है प्रशासन से निवेदन है कि जिला प्रशासन हमारी जमीन हमें वापस कराए और भू माफियाओं पर विधिक कार्रवाई करें प्रदर्शन में प्रमुख रूप से रीता सोनकर रोहित सोनकर रमापति मौर्य महेश चंद्र प्रजापति अशोक कुमार गुप्ता जयकुमार प्रजापति राकेश वर्मा एडवोकेट अर्जुन सेठ दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे1
- घर में घुसकर युवक की पिटाई का आरोप, शरीर पर गंभीर चोटें… फिर भी थाने में नहीं हो रही सुनवाई दबंग सभासद किशन मोदनवाल पर साथियों के साथ घर में घुसकर मारपीट करने का गंभीर आरोप कुछ दिन पहले पुलिस से झड़प का वीडियो भी हुआ था वायरल मारपीट में युवक को गंभीर चोटें आईं, वहीं परिवार की लड़की के साथ भी मारपीट की गई जिस बेटी के इलाज के लिए परिवार ने अपनी जमीन तक बेच दिया, आरोप है कि दबंगों ने उसी लड़की को भी नहीं बख्शा इलाज के लिए खेत बेचने वाला परिवार अब न्याय के लिए थाने की चौखट पर पहुंचने को मजबूर अब बड़ा सवाल—आखिर दबंग सभासद के खिलाफ कार्रवाई से क्यों पीछे हट रही पुलिस? क्या रसूख के आगे कानून बेबस है या फिर पुलिस किसी बड़े दबाव में है? अब देखना है—पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या दबंगई के आगे उसकी फरियाद यूं ही दबकर रह जाएगी मामला चुनार थाना क्षेत्र का2
- मीरजापुर: जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप, पीड़ित ने जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार मीरजापुर: जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप, पीड़ित ने जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार मीरजापुर। कोतवाली शहर थाना क्षेत्र के गोसाई तालाब निवासी भरत लाल ने विपक्षियों पर जमीन पर जबरन कब्जा करने और निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार मोहल्ला फतहां, परगना कांतित, तहसील सदर स्थित आराजी नंबर 62, 69, 109 और 129 में कुल 0.1390 हेक्टेयर भूमि में से दो विश्वा जमीन का बैनामा उनकी ओर से कराया गया था। आरोप है कि विपक्षियों द्वारा दबंगई के बल पर आराजी नंबर 129 में करीब दो विश्वा भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि 24 अगस्त 2026 को उनके गेट का ताला तोड़कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जबकि जमीन को लेकर मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है। पीड़ित का कहना है कि न्यायालय की ओर से अमीन जांच के दौरान जमीन की पैमाइश भी कराई गई थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विपक्षी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा अपने पद और संपर्कों का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए पुलिस के माध्यम से कब्जा कराने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि शिकायत के बावजूद कब्जे और निर्माण कार्य को रोका नहीं जा रहा है। भरत लाल ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित कब्जे और निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाने तथा शिकायत में नामजद मुस्तकीम अहमद का जिलाधिकारी कार्यालय से स्थानांतरण किए जाने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जमीन विवाद की जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।2
- मिर्ज़ापुर: 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर निकले स्केटिंग यात्री अजय विश्वकर्मा का गैपुरा में भव्य स्वागत।1