मत खोइए कलम की धार: श्रवण व मूक बाधित समाज की विश्वसनीयता को निजी स्वार्थ से न करें कलंकित" भोजपुर जिले के आरा से एक मुखर अपील सामने आई है जिसमें श्रवण व मूक बाधित समाज की साख को बचाने और उसके मूल आदर्शों की रक्षा करने की बात कही गई है। यह अपील एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स विथ डिसएबिलिटीज़ (APwD) भोजपुर आरा के DPO प्रभारी भूली कुमार यादव द्वारा की गई है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि कुछ लोग दिव्यांग समाज की छवि को अपने निजी हितों के लिए कलंकित कर रहे हैं, जो न केवल पूरे समाज को धोखा देने जैसा है बल्कि दिव्यांगों की संघर्षों की भी अवहेलना है। भूली कुमार यादव का कहना है कि यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति सिर्फ किसी विशेष व्यक्ति के दबाव में, डर या भय के कारण अपनी लेखनी चला रहा है तो वह अपनी ही समाज की विश्वसनीयता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने ऐसे लेखन को खारिज करते हुए कहा कि यह न तो नैतिक है और न ही सामाजिक दृष्टि से स्वीकार्य। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी में भ्रष्टाचार उजागर करने की हिम्मत नहीं है, तो उसे भ्रष्टाचारियों का महिमामंडन करने का भी कोई नैतिक अधिकार नहीं है। समाज के सच्चे मूक एवं श्रवण बाधित वो होते हैं जो अपनी कलम के माध्यम से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, ना कि चुपचाप तमाशा देखते हैं या सत्ताधारियों की चाटुकारिता करते हैं। भूली कुमार यादव ने यह भी कहा कि मूक और श्रवण बाधित समाज की ताकत उनकी कलम है। यही कलम उन्हें उपेक्षित, पीड़ित, दबे-कुचले लोगों की आवाज़ बनाने की ताकत देती है। यही लेखनी सामाजिक बदलाव की प्रेरणा बनती है, जिससे हक, अधिकार और न्याय की राह आसान होती है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि दिव्यांगता कोई व्यापार या धंधा नहीं है। इसे धंधे में बदलने की कोशिश करना, पूरे समुदाय के संघर्ष को ठेस पहुँचाना है। जो लोग कलम के नाम पर सिर्फ स्वार्थ साधने का कार्य कर रहे हैं, वे समाज को पीछे धकेलने का काम कर रहे हैं। DPO प्रभारी ने यह भी आगाह किया कि श्रवण बाधित समाज को किसी व्यक्ति विशेष की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब अपने आत्मबल, साहस और सच्चाई से समाज के हित में कार्य करेगा तभी दिव्यांग समाज को उसका वास्तविक हक मिलेगा और समाज में बदलाव संभव होगा। भूली कुमार यादव ने अंत में अपील की कि दिव्यांगजन कलम की ताकत को पहचानें, उसका सही दिशा में उपयोग करें और कभी भी व्यक्तिगत लाभ के लिए समाज की साख को दांव पर न लगाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज जब समाज में भ्रष्टाचार और अन्याय की दीवारें खड़ी हो रही हैं, ऐसे में मूक व श्रवण बाधित समाज को कलम के माध्यम से क्रांति का वाहक बनना होगा। यह संदेश न केवल भोजपुर के दिव्यांग समाज बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा दोनों है कि अपनी पहचान और विश्वास को बचाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है अन्याय के विरुद्ध उठ खड़ा होना।
मत खोइए कलम की धार: श्रवण व मूक बाधित समाज की विश्वसनीयता को निजी स्वार्थ से न करें कलंकित" भोजपुर जिले के आरा से एक मुखर अपील सामने आई है जिसमें श्रवण व मूक बाधित समाज की साख को बचाने और उसके मूल आदर्शों की रक्षा करने की बात कही गई है। यह अपील एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स विथ डिसएबिलिटीज़ (APwD) भोजपुर आरा के DPO प्रभारी भूली कुमार यादव द्वारा की गई है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि कुछ लोग दिव्यांग समाज की छवि को अपने निजी हितों के लिए कलंकित कर रहे हैं, जो न केवल पूरे समाज को धोखा देने जैसा है बल्कि दिव्यांगों की संघर्षों की भी अवहेलना है। भूली कुमार यादव का कहना है कि यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति सिर्फ किसी विशेष व्यक्ति के दबाव में, डर या भय के कारण अपनी लेखनी चला रहा है तो वह अपनी ही समाज की विश्वसनीयता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने ऐसे लेखन को खारिज करते हुए कहा कि यह न तो नैतिक है और न ही सामाजिक दृष्टि से स्वीकार्य। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी में भ्रष्टाचार उजागर करने की हिम्मत नहीं है, तो उसे भ्रष्टाचारियों का महिमामंडन करने का भी कोई नैतिक अधिकार नहीं है। समाज के सच्चे मूक एवं श्रवण बाधित वो होते हैं जो अपनी कलम के माध्यम से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, ना कि चुपचाप तमाशा देखते हैं या सत्ताधारियों की चाटुकारिता करते हैं। भूली कुमार यादव ने यह भी कहा कि मूक और श्रवण बाधित समाज की ताकत उनकी कलम है। यही कलम उन्हें उपेक्षित, पीड़ित, दबे-कुचले लोगों की आवाज़ बनाने की ताकत देती है। यही लेखनी सामाजिक बदलाव की प्रेरणा बनती है, जिससे हक, अधिकार और न्याय की राह आसान होती है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि दिव्यांगता कोई व्यापार या धंधा नहीं है। इसे धंधे में बदलने की कोशिश करना, पूरे समुदाय के संघर्ष को ठेस पहुँचाना है। जो लोग कलम के नाम पर सिर्फ स्वार्थ साधने का कार्य कर रहे हैं, वे समाज को पीछे धकेलने का काम कर रहे हैं। DPO प्रभारी ने यह भी आगाह किया कि श्रवण बाधित समाज को किसी व्यक्ति विशेष की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब अपने आत्मबल, साहस और सच्चाई से समाज के हित में कार्य करेगा तभी दिव्यांग समाज को उसका वास्तविक हक मिलेगा और समाज में बदलाव संभव होगा। भूली कुमार यादव ने अंत में अपील की कि दिव्यांगजन कलम की ताकत को पहचानें, उसका सही दिशा में उपयोग करें और कभी भी व्यक्तिगत लाभ के लिए समाज की साख को दांव पर न लगाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज जब समाज में भ्रष्टाचार और अन्याय की दीवारें खड़ी हो रही हैं, ऐसे में मूक व श्रवण बाधित समाज को कलम के माध्यम से क्रांति का वाहक बनना होगा। यह संदेश न केवल भोजपुर के दिव्यांग समाज बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा दोनों है कि अपनी पहचान और विश्वास को बचाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है अन्याय के विरुद्ध उठ खड़ा होना।
- Post by Chandan chook kaup1
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- Post by Jitendra Kumar1
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