जीव को अपना दुख संसार के सामने नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिये ,आचार्य रामाभिलाष मिश्र सेमरिया,श्रीराम-जानकी मन्दिर प्रांगण,लक्ष्मणबाग संस्थान, रानी तलैया,सेमरिया में नगर निवासी सभी भक्तों के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत् सप्ताह कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस की कथा पर यह अध्यात्मिक उद्गार व्यक्त करते हुए श्रीधाम वृन्दावन से पधारे भागवत कृपाकांक्षी आचार्य श्री रामाभिलाष मिश्र जी ने कहा कि भगवान का परम भक्त प्रह्लाद जिसे कि पिता हिरण्यकशिपु के द्वारा अति भयंकर कष्ट दिये गये। यहाँ तक कि श्री प्रह्लाद जी को विष पिलाया गया. हाथियों से कुचलवाया गया. अग्नि में जलाया गया। तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, परन्तु श्री प्रह्लाद जी हर जगह अपने प्रभु का ही दर्शन करते थे। इसलिए उन्हें कहीं भी किसी भी प्रकार की पीड़ा का एहसास नहीं हुआ। उन्हें विश्वास था कि हमारे प्रभु सदा-सर्वदा सर्वत्र विराजमान रहते हैं। तो प्रभु श्रीनृसिंह भगवान भक्त के विश्वास को पूर्ण करते हुए खम्भ से प्रगट होकर यह दिखा दिया कि भक्त की इच्छा एवं विश्वास को पूर्ण करने के लिये वह कहीं भी किसी भी समय किसी भी रूप में प्रगट हो सकते है। आचार्य श्री ने कहा कि अपना कल्याण चाहने वाले मानव को किसी की निन्दा स्तुति करने के बजाय भगवान की ही चर्चा करनी एवं सुननी चाहिये। प्रभु चरित्रों को श्रवण करने से भगवान का चिन्तन करने से उनकी कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विशाल पेड़ जिस प्रकार छोटी सी कुल्हाड़ी से कट जाता है उसी प्रकार प्रभु के चरण कमल का स्मरण करने से जीव के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके लिये उसे प्रभु की शरण में आना होगा। प्रभु की हर इच्छा, प्रत्येक लीला को प्रसन्नता से स्वीकार करने वाला ही अपने प्रभु का सच्चा भक्त होता है। भक्त को अपने आदर सत्कार या सम्मान की कामना नहीं होती। वह तो हर कार्य प्रभु की सेवा समझकर करता है, और ऐसी भावना को ही प्रभु स्वीकार करते हैं वह तो केवल भाव के भूखे हैं क्योंकि परमात्मा न तो साकार है न निराकार है वो तो भक्त की इच्छा के अनुसार तदाकार हैं। जैसे भक्त चाहता है उसे उसी रूप में प्रभु प्रगट होते हैं। नन्दबाबा को प्रभु की बाल लीला दर्शन की अभिलाषा थी तो परमात्मा ने उन्हें अपनी बाल लीला का आनन्द प्रदान किया, विशेष महोत्सव के रूप में आज श्री कृष्ण जन्म (नन्दोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया गया। प्रभु के प्रगट होने पर सेमरिया नगर वासी भक्तों ने बधाई का सामान बालकृष्ण भगवान को भेंट किया,। सम्पूर्ण मन्दिर प्रांगण में यही आवाज गूंज रही थी "नन्द के आनन्द भयो जै कन्हैया लाल" की। सभी ने श्री कृष्ण जन्म का प्रसाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य माना। कल (आज)श्री गिरिराज पूजन(छप्पन भोग महोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया जायेगा। आप सभी कथा प्रेमी भक्त जन सपरिवार सादर आमंत्रित हैं, कथा का समय प्रतिदिन की भांति दोपहर 3:30 से सायं 7:00 बजे तक रखा गया है,
जीव को अपना दुख संसार के सामने नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिये ,आचार्य रामाभिलाष मिश्र सेमरिया,श्रीराम-जानकी मन्दिर प्रांगण,लक्ष्मणबाग संस्थान, रानी तलैया,सेमरिया में नगर निवासी सभी भक्तों के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत् सप्ताह कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस की कथा पर यह अध्यात्मिक उद्गार व्यक्त करते हुए श्रीधाम वृन्दावन से पधारे भागवत कृपाकांक्षी आचार्य श्री रामाभिलाष मिश्र जी ने कहा कि भगवान का परम भक्त प्रह्लाद जिसे कि पिता हिरण्यकशिपु के द्वारा अति भयंकर कष्ट दिये गये। यहाँ तक कि श्री प्रह्लाद जी को विष पिलाया गया. हाथियों से कुचलवाया गया. अग्नि में जलाया गया। तरह-तरह की यातनाएं दी गईं, परन्तु श्री प्रह्लाद जी हर जगह अपने प्रभु का ही दर्शन करते थे। इसलिए उन्हें कहीं भी किसी भी प्रकार की पीड़ा का एहसास नहीं हुआ। उन्हें विश्वास था कि हमारे प्रभु सदा-सर्वदा सर्वत्र विराजमान रहते हैं। तो प्रभु श्रीनृसिंह भगवान भक्त के विश्वास को पूर्ण करते हुए खम्भ से प्रगट होकर यह दिखा दिया कि भक्त की इच्छा एवं विश्वास को पूर्ण करने के लिये वह कहीं भी किसी भी समय किसी भी रूप में प्रगट हो सकते है। आचार्य श्री ने कहा कि अपना कल्याण चाहने वाले मानव को किसी की निन्दा स्तुति करने के बजाय भगवान की ही चर्चा करनी एवं सुननी चाहिये। प्रभु चरित्रों को श्रवण करने से भगवान का चिन्तन करने से उनकी कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विशाल पेड़ जिस प्रकार छोटी सी कुल्हाड़ी से कट जाता है उसी प्रकार प्रभु के चरण कमल का स्मरण करने से जीव के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके लिये उसे प्रभु की शरण में आना होगा। प्रभु की हर इच्छा, प्रत्येक लीला को प्रसन्नता से स्वीकार करने वाला ही अपने प्रभु का सच्चा भक्त होता है। भक्त को अपने आदर सत्कार या सम्मान की कामना नहीं होती। वह तो हर कार्य प्रभु की सेवा समझकर करता है, और ऐसी भावना को ही प्रभु स्वीकार करते हैं वह तो केवल भाव के भूखे हैं क्योंकि परमात्मा न तो साकार है न निराकार है वो तो भक्त की इच्छा के अनुसार तदाकार हैं। जैसे भक्त चाहता है उसे उसी रूप में प्रभु प्रगट होते हैं। नन्दबाबा को प्रभु की बाल लीला दर्शन की अभिलाषा थी तो परमात्मा ने उन्हें अपनी बाल लीला का आनन्द प्रदान किया, विशेष महोत्सव के रूप में आज श्री कृष्ण जन्म (नन्दोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया गया। प्रभु के प्रगट होने पर सेमरिया नगर वासी भक्तों ने बधाई का सामान बालकृष्ण भगवान को भेंट किया,। सम्पूर्ण मन्दिर प्रांगण में यही आवाज गूंज रही थी "नन्द के आनन्द भयो जै कन्हैया लाल" की। सभी ने श्री कृष्ण जन्म का प्रसाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य माना। कल (आज)श्री गिरिराज पूजन(छप्पन भोग महोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया जायेगा। आप सभी कथा प्रेमी भक्त जन सपरिवार सादर आमंत्रित हैं, कथा का समय प्रतिदिन की भांति दोपहर 3:30 से सायं 7:00 बजे तक रखा गया है,
- Post by Prakash Pathak Satna1
- आज कल के दौर में ऑनलाइन ठगी आम बात है गए हैं लोगों को अपना कमाया हुआ धन भी नहीं बचा पा रहे लोग इसी तरह का मामला जैतवारा थाना क्षेत्र के एक युवक के साथ घटना हुई युवक के मोबाइल पर अज्ञात लोग फोन किए युटुब वाले बाबा के नाम से और करीब 10000रु की हेरा फेरी की गई युवक द्वारा थाना जैतवारा में मामला की शिकायत की गई और प्रशासन से न्याय की मांग की गई युवक मनोज का कहना है कि दोनों नो राजस्थान से है और यूट्यूब वाले बाबा के नाम से फेस बुक भी चल रहा है साइबर क्राइम 1030पर भी कॉल करके रिपोर्ट दर्ज कराई गई2
- Post by Bolti Divare1
- Post by Devendra yadav1
- बेला-सिलपरी रिंग रोड की खराब स्थिति, यात्रियों को हो रही परेशानी सतना रीवा जिले में बेला से सिलपरी जाने वाली रिंग रोड की स्थिति बहुत खराब है, खासकर बड़ाहरी मोड़ पर। स्थानीय लोगों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, धूल और ट्रैफिक जाम आम समस्या है। रिंग रोड के निर्माण कार्य के कारण ऐसी समस्याएं आम हैं।1
- सरकर परिजनों ने रीवा सीधी नेशनल हाईवे किया जाम जानकारी निकलकर सामने आ रही युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या घटना की वजह अभी तक अनजान है पुलिस समझाएं करके किसी तरह से मामले को काबू में लिया1
- सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा जी ने लोगों के बीच में बैठकर उनकी समस्याएं सुनी1
- Post by Prakash Pathak Satna1