*मेहनत के स्वाद ने दिलाई नई पहचान, चार दिन में 19 हजार 500 रुपये की बिक्री* *राखी मेले में नाश्ते की दुकान लगाकर समूह की दीदी ने हुनर को आमदनी से जोड़ा* सुनील डण्डोतिया मुरैना/ कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। मुरैना में आयोजित चार दिवसीय आजीविका राखी मेला ऐसी ही महिलाओं के लिए अपने हुनर को पहचान और मेहनत को आमदनी में बदलने का अवसर लेकर आया। इन्हीं में से एक हैं तहसील कैलारस की ग्राम पंचायत मानपुर निवासी एवं बजरंग बाबा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा बघेल। श्रीमती प्रेमा बघेल ने राखी मेले में नाश्ते की दुकान लगाई। उनके हाथों से तैयार स्वादिष्ट नाश्ते को मेले में आने वाले लोगों ने खूब पसंद किया। इसका परिणाम यह रहा कि महज चार दिनों में उन्होंने 19 हजार 500 रुपये की बिक्री कर अपने परिवार की आय में योगदान का एक नया रास्ता तैयार किया। *पहले दिन से बढ़ता गया हौसला* श्रीमती प्रेमा बघेल बताती हैं कि मेले का पहला दिन उनके लिए उत्साह और उम्मीद लेकर आया। पहले ही दिन उनकी दुकान पर 5 हजार 500 रुपये की बिक्री हुई। दूसरे दिन 3 हजार रुपये, तीसरे दिन 4 हजार रुपये और मेले के अंतिम दिन लगभग 7 हजार रुपये की बिक्री हुई। इस तरह चार दिनों में कुल 19 हजार 500 रुपये की बिक्री ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया। वे कहती हैं कि मेले में दुकान लगाना उनके लिए केवल कमाई का अवसर नहीं था, बल्कि अपने काम को लोगों तक पहुंचाने और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का अनुभव भी था। मेले में अलग-अलग स्थानों से आए लोगों ने उनके बनाए नाश्ते को पसंद किया और इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि यदि मेहनत और हुनर को सही बाजार मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकती हैं। *मेहनत को मिला बाजार, बढ़ा आत्मविश्वास* श्रीमती बघेल कहती हैं, “राखी मेले में दुकान लगाने का अवसर मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। चार दिनों में अच्छी बिक्री हुई और मुझे अपनी मेहनत का लाभ मिला। सबसे बड़ी बात यह रही कि ग्राहकों से सीधे बातचीत करने और अपने काम को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला।” उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा मेले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए दुकान एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे उन्हें बिना किसी परेशानी के अपने उत्पादों एवं सेवाओं को ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। उन्होंने प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने का हौसला देते हैं। *78 समूहों की 415 दीदियों ने लिया हिस्सा* आजीविका राखी मेले में जिले के सभी 7 विकासखंडों के 34 ग्रामों के 78 स्व-सहायता समूहों की 415 समूह दीदियों ने सहभागिता की। समूहों द्वारा लगभग 9 लाख 89 हजार रुपये मूल्य की राखियां तैयार की गईं, जिनसे लगभग 3 लाख 65 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। मेले के दौरान राखियों एवं अन्य उत्पादों की कुल 4 लाख 78 हजार 900 रुपये की बिक्री हुई। इन आंकड़ों के बीच श्रीमती प्रेमा बघेल की 19 हजार 500 रुपये की बिक्री एक छोटी लेकिन प्रेरक कहानी है—एक ऐसी कहानी, जिसमें हुनर को मंच मिला, मेहनत को बाजार मिला और आत्मविश्वास को नई उड़ान मिली। आजीविका राखी मेला श्रीमती प्रेमा बघेल जैसी अनेक समूह दीदियों के लिए केवल बिक्री का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना। मेले ने यह संदेश दिया कि जब ग्रामीण महिलाओं को अवसर, बाजार और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे अपनी मेहनत और हुनर के बल पर परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की मजबूत राह भी तैयार कर सकती हैं।
*मेहनत के स्वाद ने दिलाई नई पहचान, चार दिन में 19 हजार 500 रुपये की बिक्री* *राखी मेले में नाश्ते की दुकान लगाकर समूह की दीदी ने हुनर को आमदनी से जोड़ा* सुनील डण्डोतिया मुरैना/ कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। मुरैना में आयोजित चार दिवसीय आजीविका राखी मेला ऐसी ही महिलाओं के लिए अपने हुनर को पहचान और मेहनत को आमदनी में बदलने का अवसर लेकर आया। इन्हीं में से एक हैं तहसील कैलारस की ग्राम पंचायत मानपुर निवासी एवं बजरंग बाबा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा बघेल। श्रीमती प्रेमा बघेल ने राखी मेले में नाश्ते की दुकान लगाई। उनके हाथों से तैयार स्वादिष्ट नाश्ते को मेले में आने वाले लोगों ने खूब पसंद किया। इसका परिणाम यह रहा कि महज चार दिनों में उन्होंने 19 हजार 500 रुपये की बिक्री कर अपने परिवार की आय में योगदान का एक नया रास्ता तैयार किया। *पहले दिन से बढ़ता गया हौसला* श्रीमती प्रेमा बघेल बताती हैं कि मेले का पहला दिन उनके लिए उत्साह और उम्मीद लेकर आया। पहले ही दिन उनकी दुकान पर 5 हजार 500 रुपये की बिक्री हुई। दूसरे दिन 3 हजार रुपये, तीसरे दिन 4 हजार रुपये और मेले के अंतिम दिन लगभग 7 हजार रुपये की बिक्री हुई। इस तरह चार दिनों में कुल 19 हजार 500 रुपये की बिक्री ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया। वे कहती हैं कि मेले में दुकान लगाना उनके लिए केवल कमाई का अवसर नहीं था, बल्कि अपने काम को लोगों तक पहुंचाने और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का अनुभव भी था। मेले में अलग-अलग स्थानों से आए लोगों ने उनके बनाए नाश्ते को पसंद किया और इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि यदि मेहनत और हुनर को सही बाजार मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकती हैं। *मेहनत को मिला बाजार, बढ़ा आत्मविश्वास* श्रीमती बघेल कहती हैं, “राखी मेले में दुकान लगाने का अवसर मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। चार दिनों में अच्छी बिक्री हुई और मुझे अपनी मेहनत का लाभ मिला। सबसे बड़ी बात यह रही कि ग्राहकों से सीधे बातचीत करने और अपने काम को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला।” उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा मेले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए दुकान एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे उन्हें बिना किसी परेशानी के अपने उत्पादों एवं सेवाओं को ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। उन्होंने प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने का हौसला देते हैं। *78 समूहों की 415 दीदियों ने लिया हिस्सा* आजीविका राखी मेले में जिले के सभी 7 विकासखंडों के 34 ग्रामों के 78 स्व-सहायता समूहों की 415 समूह दीदियों ने सहभागिता की। समूहों द्वारा लगभग 9 लाख 89 हजार रुपये मूल्य की राखियां तैयार की गईं, जिनसे लगभग 3 लाख 65 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। मेले के दौरान राखियों एवं अन्य उत्पादों की कुल 4 लाख 78 हजार 900 रुपये की बिक्री हुई। इन आंकड़ों के बीच श्रीमती प्रेमा बघेल की 19 हजार 500 रुपये की बिक्री एक छोटी लेकिन प्रेरक कहानी है—एक ऐसी कहानी, जिसमें हुनर को मंच मिला, मेहनत को बाजार मिला और आत्मविश्वास को नई उड़ान मिली। आजीविका राखी मेला श्रीमती प्रेमा बघेल जैसी अनेक समूह दीदियों के लिए केवल बिक्री का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना। मेले ने यह संदेश दिया कि जब ग्रामीण महिलाओं को अवसर, बाजार और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे अपनी मेहनत और हुनर के बल पर परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की मजबूत राह भी तैयार कर सकती हैं।
- *पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर के निर्देशन में मिशन मजनू अभियान के तहत थाना धनघटा पुलिस द्वारा चलाया गया वृहद चेकिंग एवं निगरानी अभियान* महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा तथा सार्वजनिक स्थानों पर मनचलों एवं अराजक तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में थाना धनघटा पुलिस द्वारा *मिशन मजनू अभियान* के तहत वृहद चेकिंग एवं निगरानी अभियान चलाया गया । अभियान के दौरान स्कूल-कॉलेज, प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सघन चेकिंग करते हुए संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गयी । पुलिस टीम द्वारा अनावश्यक रूप से घूमने वाले तथा संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों से पूछताछ कर उन्हें आवश्यक हिदायत दी गयी । महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के दृष्टिगत संवेदनशील स्थानों पर सादे वस्त्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती कर सतत निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे मनचलों एवं अराजक तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके । *चेकिंग अभियान के दौरान 335 की चेकिंग करते हुए 102 वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जुर्माना किया गया, जबकि 30 व्यक्तियों से माफीनामा भरवाकर भविष्य में किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में संलिप्त न होने की कड़ी हिदायत दी गयी ।* *एवं दो मनचलों के विरुद्ध 296 बीएनएस की धारा का अभियोग थाना स्थानीय पर पंजीकृत किया गया है।* थाना धनघटा पुलिस द्वारा आमजन से अपील की गयी कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस का सहयोग करें । किसी भी व्यक्ति द्वारा छेड़छाड़, पीछा करने, अभद्रता अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधि किए जाने की जानकारी होने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें ।2
- ईद मिलादुन्नबी पर मोहिउद्दीनपुर मोहल्ले में धूमधाम से निकल गया जुलुश1
- सरयू के तेज बहाव में युवती लापता, छोटी बहन को ग्रामीणों ने बचाया आलापुर। बहिंगवा जोगीपुर (जगदीशपुर) क्षेत्र के चहोड़ा घाट पर बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया। सरयू नदी किनारे फोटो खिंचवाते समय पैर फिसलने से जया पाण्डेय तेज धारा में बह गईं। बहन को बचाने के लिए छोटी बहन शुभी पाण्डेय भी नदी में कूद पड़ीं, जिन्हें ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। शुभी पाण्डेय का रामनगर पीएचसी में उपचार चल रहा है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं आलापुर पुलिस, गोताखोर और ग्रामीण जया पाण्डेय की तलाश में जुटे हुए हैं। सरयू नदी के तेज बहाव के कारण तलाशी अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। परिजनों की निगाहें सरयू की लहरों पर टिकी हैं। परिवार और ग्रामीण जया पाण्डेय के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। 🙏 #अम्बेडकरनगर #आलापुर #सरयू_नदी #चहोड़ा_घाट #जया_पाण्डेय #रेस्क्यू_ऑपरेशन #BreakingNews #LocalNews1
- Nepal ke liye Bharat ki Rahat sahayata lagata jari hai dusri Udaan abhi khana pahuncha hai.. kya iske bad Nepal ne Bharat ko samajh payega..1
- गोरखपुर से अबू धाबी तक बड़ी उपलब्धि!,रॉयल टूर्स ग्रुप को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान,अबू धाबी के वीजा सब्सिडी कार्यक्रम में हुआ चयन,भारत की 11 चुनिंदा ट्रैवल कंपनियों में रॉयल टूर्स ग्रुप शामिल,अबू धाबी यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी जानिए रॉयल टूर्स ग्रुप से.......1
- अखिलेश-जयंत भयंकर भिड़े ,अब अखिलेश के पलटवार पर जयंत का पलटवार, मायावती भी क्या बोली ? अखिलेश-जयंत भयंकर भिड़े ,अब अखिलेश के पलटवार पर जयंत का पलटवार, मायावती भी क्या बोली ?1
- गोरखपुर में पुलिस मुठभेड़ के बाद 50 हजारी इनामी गुड्डू ढाढ़ी गिरफ्तार लूट के मामले में फरार चल रहा 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश गुड्डू ढाढ़ी पुलिस मुठभेड़ गिरफ्तार हुआ। सहजनवा-पीपीगंज की सीमा सिसई घाट के पास हुई मुठभेड़ में पुलिस की जवाबी कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया। पुलिस ने उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। बदमाश पर गोरखपुर समेत अन्य जिलों के थानों में 45 मुकदमें दर्ज है। पुलिस के अनुसार, पीपीगंज निवासी गुड्डू ढाढ़ी लूट के एक मामले में फरार चल रहा था। गुरुवार सुबह पुलिस टीम को उसके सिसई घाट के आसपास मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया। पुलिस को देखते ही आरोपित ने फायरिंग शुरू कर दी और भागने लगा। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लग गई घायल होने के बाद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से असलहा और कारतूस बरामद हुआ। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है।1
- रक्षाबंधन पर्व के दृष्टिगत महुली पुलिस की मुस्तैदी — सुरक्षा के साथ विश्वास का संकल्प* पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के आदेश के क्रम में आज *रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बाजारों में राखी, मिठाई एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में आमजन के घरों से निकलने के कारण बाजारों में भारी भीड़ देखी जा रही है। आमजन की सुरक्षा, सुगम आवागमन एवं शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए थाना महुली पुलिस द्वारा पर्याप्त पुलिस बल के साथ प्रमुख बाजारों, चौराहों एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी की जा रही है।* पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार पैदल गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की निगरानी तथा यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भीड़ वाले स्थानों पर पुलिस की सक्रिय उपस्थिति के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और सहज वातावरण प्राप्त हो। *रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, रिश्तों की सुरक्षा का संदेश भी है* रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए महुली पुलिस का संकल्प है कि पर्व की खुशियों के बीच प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। *ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी स्वयं अपने परिवार से दूर रहकर भी हजारों परिवारों की खुशियों की सुरक्षा में तत्पर हैं। किसी बहन की राखी सुरक्षित घर पहुँचे, किसी परिवार की खुशी में कोई व्यवधान न आए और हर नागरिक निश्चिंत होकर पर्व मना सके—यही पुलिस की सच्ची सेवा है।* महुली पुलिस का संदेश स्पष्ट है— “पर्व आपका, खुशियाँ आपकी, सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी।” जनपद पुलिस द्वारा आमजन से अपील की जाती है कि बाजारों में अनावश्यक भीड़ न लगाएं, यातायात नियमों का पालन करें, अपने सामान एवं वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। सुरक्षित समाज—सशक्त समाज। जनता का विश्वास—पुलिस की सबसे बड़ी ताकत।4