कालपी तहसील का उपनिबंधक कार्यालय अब सरकारी दफ्तर कम और गुंडागर्दी का अड्डा ज्यादा नज़र आ रहा है, जहाँ एक बैनामा कराने आए युवक के साथ सरेआम लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। उरई से आए युवक ने केवल अपनी फाइल के पहले होने के बावजूद पीछे कर दिए जाने का सवाल पूछा था। आरोप है कि इस मामूली फाइल नंबर के विवाद ने ऐसा विकराल रूप ले लिया कि रजिस्ट्रार ऑफिस के अंदर ही कानून की धज्जियां उड़ गईं। वायरल वीडियो के अनुसार, बैनामा लेखक और बाबुओं ने युवक के सवाल पर जवाब देने की बजाय उससे गाली-गलौज, धमकी और फिर खुलेआम लात-घूंसे चलाने शुरू कर दिए। यह बवाल सरकारी दफ्तर के अंदर शुरू हुआ और बाहर सड़क तक आ गया, जहाँ दबंगई जारी रही। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि बैनामा लेखक और बाबुओं ने मिलकर युवक को पीटा, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कोई भी जिम्मेदार सिस्टम नज़र नहीं आया। इस वायरल वीडियो ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि क्या कालपी तहसील में अब बिना 'सेटिंग' के काम नहीं होता और क्या फाइलों की हेराफेरी पर सवाल उठाना गुनाह हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस गुंडागर्दी पर कोई एक्शन लेगा या फिर सबकुछ 'मैनेज' कर लिया जाएगा। यदि तहसील जैसे संवेदनशील सरकारी दफ्तर में ही आम आदमी सुरक्षित नहीं है, तो न्याय की उम्मीद कहाँ से की जाए। अब यह देखना बाकी है कि इस वीडियो के बाद कोई कार्रवाई होगी या फिर सिस्टम इसे भी ‘निगल’ जाएगा।
कालपी तहसील का उपनिबंधक कार्यालय अब सरकारी दफ्तर कम और गुंडागर्दी का अड्डा ज्यादा नज़र आ रहा है, जहाँ एक बैनामा कराने आए युवक के साथ सरेआम लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। उरई से आए युवक ने केवल अपनी फाइल के पहले होने के बावजूद पीछे कर दिए जाने का सवाल पूछा था। आरोप है कि इस मामूली फाइल नंबर के विवाद ने ऐसा विकराल रूप ले लिया कि रजिस्ट्रार ऑफिस के अंदर ही कानून की धज्जियां उड़ गईं। वायरल वीडियो के अनुसार, बैनामा लेखक और बाबुओं ने युवक के सवाल पर जवाब देने की बजाय उससे गाली-गलौज, धमकी और फिर खुलेआम लात-घूंसे चलाने शुरू कर दिए। यह बवाल सरकारी दफ्तर के अंदर शुरू हुआ और बाहर सड़क तक आ गया, जहाँ दबंगई जारी रही। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि बैनामा लेखक और बाबुओं ने मिलकर युवक को पीटा, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कोई भी जिम्मेदार सिस्टम नज़र नहीं आया। इस वायरल वीडियो ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि क्या कालपी तहसील में अब बिना 'सेटिंग' के काम नहीं होता और क्या फाइलों की हेराफेरी पर सवाल उठाना गुनाह हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस गुंडागर्दी पर कोई एक्शन लेगा या फिर सबकुछ 'मैनेज' कर लिया जाएगा। यदि तहसील जैसे संवेदनशील सरकारी दफ्तर में ही आम आदमी सुरक्षित नहीं है, तो न्याय की उम्मीद कहाँ से की जाए। अब यह देखना बाकी है कि इस वीडियो के बाद कोई कार्रवाई होगी या फिर सिस्टम इसे भी ‘निगल’ जाएगा।
- इटावा से सामने आए एक मामले में, एक अजीब विडंबना देखने को मिल रही है, जहाँ लोग पुलिस के हाथों पकड़े जाने के डर से घबराए हुए हैं। हालाँकि, विरोधाभास यह है कि अपनी किसी समस्या के समाधान के लिए उन्हें खुद पुलिस के पास ही जाना पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति पर सोशल मीडिया पोस्ट में हल्की व्यंग्यात्मकता और अचरज के साथ टिप्पणी की गई है, 'वाह रे भैया!'।1
- जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र स्थित पीएल कमला हॉस्पिटल में एक प्रसूता की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृत प्रसूता के शव को जबरन एम्बुलेंस में डालकर कहीं और रेफर कर दिया। मृतिका के परिजनों ने डॉक्टरों पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है, जिसे उन्होंने प्रसूता की मौत का कारण बताया। यह पूरा मामला जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र के पीएल कमला हॉस्पिटल से जुड़ा हुआ है।4
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि देश और समाज के लिए खतरा बनने वाले तत्वों के विरुद्ध आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, "देश और समाज के लिए खतरा बनने वालों के लिए जरूर पड़ने पर हिंसा अपनानी पड़ती है।" उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अपराध, अराजकता और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है। उनका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना है, क्योंकि समाज में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए कानून का शासन आवश्यक है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर विभिन्न वर्गों में चर्चा जारी है। समर्थकों का मानना है कि समाज की सुरक्षा के लिए कठोर कानून व्यवस्था आवश्यक है, जबकि आलोचक इन बयानों पर अपने-अपने अलग दृष्टिकोण रखते हैं।1
- जालौन जिले के उरई स्थित पीएल कमला हॉस्पिटल नामक एक निजी अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जिसके बाद घटना की जांच शुरू कर दी गई है। आक्रोशित परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की मौत के उपरांत अस्पताल प्रशासन ने शव को जबरन एंबुलेंस में डालकर कहीं और रेफर करने का प्रयास किया। इस घटना के बाद, अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जालौझंडा चौराहा के पास अपने परिजनों से बिछड़ गए एक बच्चे को ड्यूटी पर तैनात होमगार्डों ने ढूंढ निकाला। इन होमगार्डों ने बच्चे को सुरक्षित उसके परिवार को सौंप दिया, जिसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने दोनों जवानों के इस सराहनीय कार्य की जमकर तारीफ की।1
- उत्तर प्रदेश के 18 वर्षीय नरेंद्र कुमार के एक चिकित्सीय मामले ने डॉक्टरों को भी आश्चर्यचकित कर दिया है। नरेंद्र लंबे समय से पेट दर्द, उल्टियों और तेजी से वजन घटने जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसके बाद की गई जांच में एक अत्यंत दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति का खुलासा हुआ। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने उनके पेट से लगभग ढाई किलो वजनी असामान्य ऊतक निकाला, जिसमें बाल, दांत और हड्डियों जैसी संरचनाएं मौजूद थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला 'फीटस इन फीटू' नामक एक बेहद दुर्लभ स्थिति से जुड़ा है, जिसमें जन्म से पहले विकास प्रक्रिया के दौरान ही असामान्य ऊतक शरीर के अंदर रह जाते हैं। सफल सर्जरी के बाद अब मरीज की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।1
- पटना में शिक्षक खान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर फायरिंग की घटना सामने आई है। सूत्र के मुताबिक, इस दौरान 5 से 6 राउंड गोलियां चलाई गईं। इस घटना में एक गार्ड को गोली लगी है, हालांकि उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।1