उत्तर प्रदेश सरकार और पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीणों की सहभागिता से गांवों के विकास के दावों के बीच, चंदौली जनपद के नौगढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायत बरबसपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के ग्रामीण आरोप लगाते हैं कि उनकी ग्राम पंचायत में जमीनी स्तर पर कभी भी 'खुली बैठक' (आम सभा) का आयोजन नहीं किया जाता। इसके बजाय, सरकार की सभी योजनाएं और प्रस्ताव केवल बंद कमरों में, फाइलों और कागजों पर ही मंजूर कर लिए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नियमों के तहत किसी भी विकास कार्य को अमलीजामा पहनाने से पहले ग्रामीणों की मौजूदगी में खुली बैठक कर प्रस्ताव पास करना अनिवार्य होता है। हालांकि, बरबसपुर के ग्रामीणों को कभी भी इन बैठकों की तारीख या समय की सूचना नहीं दी जाती। उन्हें इस बात की भी भनक नहीं लगने दी जाती कि गांव के विकास के लिए कौन सा बजट आ रहा है और कहां खर्च हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित ब्लॉक स्तरीय कर्मचारी मिलीभगत कर 'कार्यवाही रजिस्टर' में फर्जी तरीके से कोरम पूरा दिखा देते हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर लोकतंत्र और पंचायती राज व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने जैसी है, क्योंकि जन-सुनवाई और ग्रामीणों की सहमति के बिना ही कागजों पर बैठकें दर्शाई जा रही हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि बैठकों के अभाव में गांव की मुख्य समस्याओं, जैसे नाली, खड़ंजा, पेयजल और मनरेगा पर कोई चर्चा नहीं हो पाती, जिससे भ्रष्टाचार को सीधा बढ़ावा मिल रहा है। इस प्रकार, बरबसपुर ग्राम पंचायत में जनता को अपने हक की खबर तक नहीं है, और गांव का भविष्य बंद कमरों में तय हो रहा है, जो लोकतंत्र की हत्या या अधिकारियों की सुस्ती का स्पष्ट परिचायक है।
उत्तर प्रदेश सरकार और पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीणों की सहभागिता से गांवों के विकास के दावों के बीच, चंदौली जनपद के नौगढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायत बरबसपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के ग्रामीण आरोप लगाते हैं कि उनकी ग्राम पंचायत में जमीनी स्तर पर कभी भी 'खुली बैठक' (आम सभा) का आयोजन नहीं किया जाता। इसके बजाय, सरकार की सभी योजनाएं और प्रस्ताव केवल बंद कमरों में, फाइलों और कागजों पर ही मंजूर कर लिए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नियमों के तहत किसी भी विकास कार्य को अमलीजामा पहनाने से पहले ग्रामीणों की मौजूदगी में खुली बैठक कर प्रस्ताव पास करना अनिवार्य होता है। हालांकि, बरबसपुर के ग्रामीणों को कभी भी इन बैठकों की तारीख या समय की सूचना नहीं दी जाती। उन्हें इस बात की भी भनक नहीं लगने दी जाती कि गांव के विकास के लिए कौन सा बजट आ रहा है और कहां खर्च हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित ब्लॉक स्तरीय कर्मचारी मिलीभगत कर 'कार्यवाही रजिस्टर' में फर्जी तरीके से कोरम पूरा दिखा देते हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर लोकतंत्र और पंचायती राज व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने जैसी है, क्योंकि जन-सुनवाई और ग्रामीणों की सहमति के बिना ही कागजों पर बैठकें दर्शाई जा रही हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि बैठकों के अभाव में गांव की मुख्य समस्याओं, जैसे नाली, खड़ंजा, पेयजल और मनरेगा पर कोई चर्चा नहीं हो पाती, जिससे भ्रष्टाचार को सीधा बढ़ावा मिल रहा है। इस प्रकार, बरबसपुर ग्राम पंचायत में जनता को अपने हक की खबर तक नहीं है, और गांव का भविष्य बंद कमरों में तय हो रहा है, जो लोकतंत्र की हत्या या अधिकारियों की सुस्ती का स्पष्ट परिचायक है।
- उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहाँ थाना रामपुर बर्कोनिया के धर्मदासपुर गांव में अराजकतत्वों ने एक मंदिर पर हमला किया है। इस हमले में उपद्रवियों ने हनुमानजी की मूर्ति को तोड़कर नाली में फेंक दिया। हमलावरों ने मंदिर को भी काफी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने मंदिर के शिखर को क्षत-विक्षत कर दिया और मंदिर में लगे घंटे तथा झंडे को निकालकर खेत में फेंक दिया। यह हनुमानजी की मूर्ति शीतला मंदिर के प्रांगण में रखी गई थी। यह भी बताया गया है कि पूर्व में भी सोनभद्र के कई अलग-अलग इलाकों में मंदिरों पर हमले हो चुके हैं।4
- बिहार के कैमूर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक पति ने अपनी पत्नी को BPSC टीचर बनाने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी। हालाँकि, अब इसी पति ने अपनी पत्नी को एक कमरे में उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया है। इस घटना ने पति के द्वारा किए गए त्याग और फिर मिली धोखेबाजी को उजागर किया है।1
- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी दिल्ली पहुंचे हैं। इस दौरान, मीडिया ने मंत्री जमा खान से सवाल किया कि क्या बिहार में कोई नई राजनीतिक हलचल होने वाली है या नहीं।1
- सोनभद्र जिले के बालू टोला के ग्रामीण पिछले 17 दिनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं। 13 मई को आई आंधी के कारण ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे गिरने के बाद से बालू टोला के दर्जनों परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जिससे भीषण गर्मी में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि नया ट्रांसफार्मर पहुंच जाने के बावजूद उसकी स्थापना नहीं की गई है और न ही क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को बदला गया है। इस गंभीर मुद्दे पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।1
- कैमूर जिला परिषद की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला परिषद सदस्य भाग संख्या-3 और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विकास सिंह उर्फ लल्लू पटेल ने जिला परिषद अध्यक्ष रिंकी सिंह को 2 करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस सिविल कोर्ट भभुआ के वरीय अधिवक्ता कौशल पति पाण्डेय के माध्यम से भेजा गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 26 मई 2026 को जिला परिषद कार्यालय भभुआ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष रिंकी सिंह ने विकास सिंह के संबंध में आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं। नोटिस में कहा गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए इन कथित बयानों से विकास सिंह की सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया है। विकास सिंह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उनकी सामाजिक पहचान कैमूर सहित बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित है, ऐसे में सार्वजनिक मंच से दिए गए कथित बयान से उनकी मान-प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है। अधिवक्ता द्वारा भेजे गए इस नोटिस में जिला परिषद अध्यक्ष रिंकी सिंह से एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब देने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध सिविल एवं आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। नोटिस में 2 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की भी मांग की गई है। इस कानूनी नोटिस के बाद जिला परिषद की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक जिला परिषद अध्यक्ष रिंकी सिंह की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।4
- सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।4
- कैमूर के दुर्गावती स्थित कुंडेश्वरी देवी धाम के महंत पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया है। इस हमले का सीसीटीवी वीडियो फुटेज सामने आया है, जिसमें घटना का दृश्य कैद है।1