डूंगरपुर के सीमलवाड़ा स्थित पीठ विद्या निकेतन में विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान द्वारा नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विद्या भारती जनजाति समिति के अध्यक्ष प्रभुलाल कटारा मुख्य वक्ता रहे, जबकि प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दीनदयाल सिंह चौहान ने अध्यक्षता की। चौरासी क्षेत्र के निवर्तमान प्रधान कारीलाल ननोमा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, और विभाग प्रमुख दिनेश डामोर ने कार्यक्रम का संचालन किया। अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रभुलाल कटारा ने जोर देकर कहा कि भील समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने बताया कि भील समाज शबरी माता के वंशज हैं और सदियों से सनातन संस्कृति एवं परंपराओं से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। कटारा ने भगवान राम और माता शबरी की कथा को भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया, जो भील समाज और सनातन परंपरा के अटूट संबंध को प्रदर्शित करती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कुछ बाहरी ताकतें भील समाज को उसकी जड़ों से अलग करने और विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं, साथ ही भ्रम फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। कटारा ने इस बात पर विशेष रूप से चिंता जताई कि कुछ लोग यह प्रचारित कर रहे हैं कि भील समाज हिंदू नहीं है, जिसे उन्होंने समाज के इतिहास, परंपराओं और पूर्वजों के जीवन मूल्यों के पूर्णतः विपरीत बताया। कटारा ने आगे कहा कि भील समाज के पूर्वज सदियों से सनातन संस्कृति, देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को मानते आए हैं, और ऐसे में अपने इतिहास तथा पूर्वजों से विमुख होना उनके सम्मान के विरुद्ध है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे अपने गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को समझते हुए एकजुट रहें। उन्होंने यह भी बताया कि अंग्रेजी शासनकाल में जनजातीय समाज की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना को प्रभावित करने वाली कई नीतियां लागू की गईं, फिर भी समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवंत रखा। कटारा ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सहित देश की आजादी के विभिन्न आंदोलनों में जनजातीय समाज के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और इसे इतिहास में उचित स्थान दिए जाने की मांग की। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों के योगदान, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति के संस्कारों से परिचित कराएं, क्योंकि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि कारीलाल ननोमा ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी विकसित होने चाहिए। उन्होंने विद्या भारती के शिक्षण संस्थानों द्वारा शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान कर राष्ट्र निर्माण में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य की सराहना की। अध्यक्षीय उद्बोधन में दीनदयाल सिंह चौहान ने भारतीय संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को एक-दूसरे का पूरक बताया, और समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए शिक्षा व संगठन के माध्यम से आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस उद्घाटन सत्र में उपस्थित आचार्यों को संस्कारयुक्त शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति तथा समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों पर मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवीन आचार्यों को संगठन की कार्यपद्धति, शिक्षा दर्शन, भारतीय संस्कृति और जनजातीय समाज के इतिहास से परिचित कराना था।
डूंगरपुर के सीमलवाड़ा स्थित पीठ विद्या निकेतन में विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान द्वारा नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विद्या भारती जनजाति समिति के अध्यक्ष प्रभुलाल कटारा मुख्य वक्ता रहे, जबकि प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दीनदयाल सिंह चौहान ने अध्यक्षता की। चौरासी क्षेत्र के निवर्तमान प्रधान कारीलाल ननोमा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, और विभाग प्रमुख दिनेश डामोर ने कार्यक्रम का संचालन किया। अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रभुलाल कटारा ने जोर देकर कहा कि भील समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने बताया कि भील समाज शबरी माता के वंशज हैं और सदियों से सनातन संस्कृति एवं परंपराओं से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। कटारा ने भगवान राम और माता शबरी की कथा को भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया, जो भील समाज और सनातन परंपरा के अटूट संबंध को प्रदर्शित करती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कुछ बाहरी ताकतें भील समाज को उसकी जड़ों से अलग करने और विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं, साथ ही भ्रम फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। कटारा ने इस बात पर विशेष रूप से चिंता जताई कि कुछ लोग यह प्रचारित कर रहे हैं कि भील समाज हिंदू नहीं है, जिसे उन्होंने समाज के इतिहास, परंपराओं और पूर्वजों के जीवन मूल्यों के पूर्णतः विपरीत बताया। कटारा ने आगे कहा कि भील समाज के पूर्वज सदियों से सनातन संस्कृति, देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को मानते आए हैं, और ऐसे में अपने इतिहास तथा पूर्वजों से विमुख होना उनके सम्मान के विरुद्ध है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे अपने गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को समझते हुए एकजुट रहें। उन्होंने यह भी बताया कि अंग्रेजी शासनकाल में जनजातीय समाज की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना को प्रभावित करने वाली कई नीतियां लागू की गईं, फिर भी समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवंत रखा। कटारा ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सहित देश की आजादी के विभिन्न आंदोलनों में जनजातीय समाज के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और इसे इतिहास में उचित स्थान दिए जाने की मांग की। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों के योगदान, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति के संस्कारों से परिचित कराएं, क्योंकि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि कारीलाल ननोमा ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी विकसित होने चाहिए। उन्होंने विद्या भारती के शिक्षण संस्थानों द्वारा शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान कर राष्ट्र निर्माण में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य की सराहना की। अध्यक्षीय उद्बोधन में दीनदयाल सिंह चौहान ने भारतीय संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को एक-दूसरे का पूरक बताया, और समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए शिक्षा व संगठन के माध्यम से आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस उद्घाटन सत्र में उपस्थित आचार्यों को संस्कारयुक्त शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति तथा समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों पर मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवीन आचार्यों को संगठन की कार्यपद्धति, शिक्षा दर्शन, भारतीय संस्कृति और जनजातीय समाज के इतिहास से परिचित कराना था।
- डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा क्षेत्र में, अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन त्रिनेत्र व एरिया डोमिनेशन' के तहत वरदा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने वरदा थाना क्षेत्र के गांव हिराता फला धरतीमाता निवासी 70 वर्षीय मंगला पुत्र भेमजी रोत को गिरफ्तार कर उसके घर से 51 हरे गांजे के पौधे जब्त किए हैं। इन पौधों का कुल वजन 5 किलो 292 ग्राम पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार (आईपीएस) के निर्देशन में हुई, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह का मार्गदर्शन और वृत्ताधिकारी रूपसिंह का नेतृत्व शामिल था। थानाधिकारी रिजवान खान को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि आरोपी मंगला रोत ने अपने घर में गांजे के पौधे छिपाए हुए हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मंगला रोत के घर की तलाशी ली, जहाँ प्लास्टिक के कट्टों में सुखाने के लिए रखे गए गांजे के हरे पौधे बरामद हुए। आरोपी ने पूछताछ में इन पौधों का अपना होना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने गांजे के पौधों को जब्त कर मंगला रोत को गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि आरोपी ने किन-किन लोगों को गांजा बेचा है, जिससे मामले में अन्य नामों का खुलासा होने और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना है। इस कार्रवाई में थानाधिकारी रिजवान खान के नेतृत्व में पुलिस चौकी आंतरी के सुरेश कुमार, हेड कांस्टेबल यशपालसिंह, धर्मेन्द्र कुमार, घनेश्वर तथा कांस्टेबल लोकेन्द्रसिंह, पवन पाटीदार, श्रवण कुमार और अनिल कुमार सहित पूरी पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक ने इस टीम की सराहना करते हुए अवैध मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान को लगातार जारी रखने का निर्देश दिया है।3
- अधिक जेठ माह के पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर पुष्टि संप्रदाय के अंतर्गत सिमलवाडा स्थित द्वारकाधीश हवेली में ठाकुरजी का पालना उत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस भक्तिमय आयोजन में वैष्णव भक्तों ने नंदालय के भाव से ठाकुरजी के दर्शन कर धर्मलाभ लिया। न्यास मंडल अध्यक्ष नवीन मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्सव के दौरान ठाकुरजी को मोरपिच मुकुट, पाठचंद्रिका की जोड़ एवं गैरदार वागा धारण कराकर आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसके बाद अष्टसखा भाव से सुंदर कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जहाँ कीर्तनकारों ने “प्रिय नवनीत पाल ने झूले श्री विट्ठलनाथ जुलावे हो” और “चिरंजीव गोपाल रानी केरो” जैसे विभिन्न मधुर पदों का गायन कर ठाकुरजी को रिझाया। उत्सव में सरोज शाह, रेखा शाह, इंदिरा पंड्या, विभा पंड्या और गायत्री शाह सहित महिला वैष्णवों ने भक्ति रस से सराबोर कीर्तन प्रस्तुत किए, वहीं हेमंत शाह, दत्तेश मेहता, पराग सोनी, राकेश शाह और महेश सोनी ने हवेली को नंदालय के भाव से आकर्षक सजावट कर आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। मुखियाजी ने यशोदा माता के वात्सल्य भाव से ठाकुरजी को पालने में झुलाया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रातः 10 बजे दर्शन खुलते ही बड़ी संख्या में वैष्णव भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पालना उत्सव में प्रवीण कोठारी, नवीन मेहता, जयेश कोठारी, अनिल कोठारी और सुरेंद्र शाह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने पालने में झूले द्वारकाधीश के दर्शन कर अष्टसखा कीर्तन के साथ हवेली को भक्तिमय होते देखा।2
- डूंगरपुर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' और 'एरिया डॉमिनेशन' अभियान के तहत जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला अधीक्षक महोदय श्री आईपीएस मनीष कुमार के निर्देशन में, वरदा पुलिस थाना ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ यह लगातार तीसरी कार्रवाई की है। पुलिस ने गांव हिराता फला धरतीमाता में मंगला रोत के घर के अंदर से काट कर छुपाए गए गांजे के 51 हरे पौधे बरामद किए, जिनका कुल वजन 5 किलो 292 ग्राम है। जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 80 हजार रुपए बताई गई है। इस कार्रवाई के दौरान आरोपी मंगला रोत को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस आरोपी से यह पता लगाने के लिए पूछताछ कर रही है कि उसने अब तक किस-किस को गांजा बेचा है, जिससे और भी नामों का खुलासा होने की संभावना है। इस सराहनीय कार्य में वरदा थानाधिकारी रिजवान खान के नेतृत्व में संपूर्ण वरदा पुलिस थाना का महत्वपूर्ण योगदान रहा।2
- डूंगरपुर की वागड़ धर्म नगरी में स्थित पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत गौतमदास महाराज की तपोभूमि श्री कल्लाजी शिव अन्नपूर्णा पंच धाम राजपुर में आगामी 13 जून (शनिवार) से दो दिवसीय भव्य 'श्री विष्णु महायाग' का ऐतिहासिक शुभारंभ होने जा रहा है। अखिल भारतीय कल्लाजी सम्प्रदाय के राष्ट्रीय महासचिव गुरुदेव महंत गोपालदास महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस महाधार्मिक अनुष्ठान को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह व्याप्त है। इस धार्मिक महोत्सव में वागड़, मेवाड़ और मारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद जताई गई है। महोत्सव के पहले दिन शनिवार प्रातः 10 बजे एक विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें मातृशक्ति मंगल कलश धारण कर सहभागिता करेंगी। इसके उपरांत, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र पीपल वृक्ष के नीचे श्रद्धालुओं द्वारा प्रायश्चित संकल्प लिया जाएगा। धार्मिक विधि-विधान के अंतर्गत स्थापित देवताओं का पूजन, रुद्राभिषेक और यज्ञवेदी में होमात्मक आहुतियां भी दी जाएंगी। इसी कड़ी में, एक भव्य संत सम्मेलन का आयोजन भी होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात संत-महात्मा और गादीपति शिरकत कर भक्तों को सनातन धर्म की महिमा से अवगत कराएंगे। इस कार्यक्रम में बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर गुरुदेव महंत अच्यूतानंद जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में अपना पावन सानिध्य प्रदान कर श्रद्धालुओं को दिव्य आशीर्वाद देंगे। संध्याकाल में ठाकुर जी की दिव्य महाआरती के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए राजपुर गांव और पूरे डूंगरपुर शहर में तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। धाम के गादीपति महंत गोपालदास वैष्णव, महंत वैष्णव परिवार और राजपुर के समस्त ग्रामवासियों ने क्षेत्र के सभी सनातन प्रेमियों से इस पावन आयोजन में सपरिवार पधारकर धर्म लाभ लेने और ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त करने की भावभीनी अपील की है।1
- बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी क्षेत्र की सेरानगला ग्राम पंचायत में एक ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव पहुँचे। कलेक्टर ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और वहाँ मौजूद ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। शिविर के दौरान नामांतरण, शुद्धिकरण, पेंशन, बिजली और अन्य सरकारी योजनाओं से संबंधित मामलों पर सुनवाई की गई, जिनमें से कई प्रकरणों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। इस अवसर पर कलेक्टर ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए कि जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचे। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर डॉ. यादव ने पाटनवधरा में बन रहे उप स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्य को गुणवत्ता के साथ और निर्धारित समय पर पूरा किया जाए।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा ज़िले में चल रही भागवत कथा के कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ सामने आई हैं।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ में, मोहकमपुरा से श्रद्धालुओं को नानी बाईं रो मायरो भरने के लिए जाते हुए देखा गया। इस दौरान, वे सनातनी नृत्य करते हुए निकले, जिसकी लाईव झलकियाँ देखने को मिलीं।2
- सीमलवाड़ा के गेंजी क्षेत्र में भीषण गर्मी और लगातार गहराते पेयजल संकट के बीच, गेंजी गांव के समाजसेवी अनिल जैन ने जरूरतमंद परिवारों तक टैंकरों के माध्यम से पेयजल पहुंचाकर बड़ी राहत प्रदान की है। ग्रामवासियों ने उनके इस जनसेवा कार्य की खुले दिल से सराहना करते हुए इसे मानवता की मिसाल बताया। जानकारी के अनुसार, गर्मी के मौसम में गांव के कई मोहल्लों और बस्तियों में गंभीर पेयजल समस्या उत्पन्न हो गई थी। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, समाजसेवी अनिल जैन ने तुरंत पहल की और गांव की विभिन्न गलियों तथा जरूरतमंद परिवारों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की। उन्होंने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पानी वितरण का संचालन किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी परिवार पेयजल से वंचित न रहे। इस सेवा कार्य में उनकी धर्मपत्नी मेनका जैन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने महिलाओं और परिवारों की आवश्यकताओं को समझते हुए सक्रिय सहयोग किया। दोनों ने मिलकर घर-घर पहुंचकर जरूरतमंद लोगों तक पानी उपलब्ध कराया, जिससे ग्रामीणों को अत्यधिक राहत मिली। ग्रामीणों ने बताया कि अनिल जैन हमेशा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में अग्रणी रहते हैं, चाहे वह किसी जरूरतमंद परिवार की सहायता हो, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सहयोग हो या आपदा में लोगों के साथ खड़ा होना। इस बार उन्होंने पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की सहायता कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भीषण गर्मी में जब लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है, ऐसे में अनिल जैन और मेनका जैन द्वारा किया गया यह कार्य न केवल राहत देने वाला है बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक भी है, जिससे सहयोग, संवेदना और मानवता की भावना को बल मिला है। गांव के लोगों ने दोनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा है' की भावना से किया गया यह कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला है। ग्रामवासियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक सहयोग और जनसेवा के कार्य निरंतर जारी रहेंगे।1