समर्थित पेज से गालियों की राजनीति? पत्रकारों को ‘दलाल’आमजन को गालियां कहे जाने पर बवाल, मंत्री पर खड़े हुए गंभीर सवाल संबंधित पेज की हो निष्पक्ष जांच, शाहाबाद/हरदोई। एक कथित राज्यमंत्री के समर्थित फेसबुक पेज की भाषा ने अब राजनीतिक शिष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। आरोप है कि इस पेज से न सिर्फ पत्रकारों—यानी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ—को खुलेआम “दलाल” कहा गया, बल्कि आमजन के लिए भी मां-बहन की गालियों का बेहिचक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट का मामला नहीं, बल्कि उस सोच का आईना माना जा रहा है जिसमें असहमति को गाली से कुचलने की कोशिश की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी मंत्री के समर्थित मंच से इस तरह की अभद्रता हो रही है, और अगर हां, तो अब तक उस पर लगाम क्यों नहीं लगी? पत्रकारों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जो सत्ता में हैं, अगर वही चौथे स्तम्भ को अपमानित करेंगे, तो फिर लोकतंत्र की बुनियाद कितनी सुरक्षित रह जाएगी? स्थानीय पत्रकारों ने इसे सीधा हमला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आम जनता भी खुद को अपमानित महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि जो जनप्रतिनिधि जनता के वोट से सत्ता तक पहुंचे, उन्हीं के समर्थित प्लेटफॉर्म से जनता को गालियां देना न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला मजाक है। खासतौर पर तब, जब मामला एक महिला मंत्री से जुड़ा हो, जिनसे संवेदनशीलता और संयम की अपेक्षा की जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कहीं न कहीं हताशा और असुरक्षा का संकेत देता है। सवाल उठ रहा है कि क्या आलोचनाओं का जवाब अब तथ्यों और काम से नहीं, बल्कि गालियों और डराने-धमकाने से दिया जाएगा? गंभीर प्रश्न: क्या मंत्री इस पेज से खुद को अलग बताकर जिम्मेदारी से बच सकती हैं? क्या सोशल मीडिया के नाम पर किसी को भी अपशब्द बोलने की खुली छूट है? क्या प्रशासन इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा, या सब कुछ यूं ही चलता रहेगा? जनता और पत्रकारों की मांग: इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित पेज की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, जनप्रतिनिधियों से यह स्पष्ट किया जाए कि वे इस तरह की भाषा और व्यवहार का समर्थन करते हैं या नहीं। यह विवाद सिर्फ एक फेसबुक पेज का नहीं, बल्कि उस गिरते हुए राजनीतिक स्तर का प्रतीक बनता जा रहा है, जहां बहस और संवाद की जगह गालियों ने ले ली है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में लोकतंत्र की भाषा और भी ज्यादा विषैली हो सकती है।
समर्थित पेज से गालियों की राजनीति? पत्रकारों को ‘दलाल’आमजन को गालियां कहे जाने पर बवाल, मंत्री पर खड़े हुए गंभीर सवाल संबंधित पेज की हो निष्पक्ष जांच, शाहाबाद/हरदोई। एक कथित राज्यमंत्री के समर्थित फेसबुक पेज की भाषा ने अब राजनीतिक शिष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। आरोप है कि इस पेज से न सिर्फ पत्रकारों—यानी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ—को खुलेआम “दलाल” कहा गया, बल्कि आमजन के लिए भी मां-बहन की गालियों का बेहिचक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट का मामला नहीं, बल्कि उस सोच का आईना माना जा रहा है जिसमें असहमति को गाली से कुचलने की कोशिश की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी मंत्री के समर्थित मंच से इस तरह की अभद्रता हो रही है, और अगर हां, तो अब तक उस पर लगाम क्यों नहीं लगी? पत्रकारों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना
है कि जो सत्ता में हैं, अगर वही चौथे स्तम्भ को अपमानित करेंगे, तो फिर लोकतंत्र की बुनियाद कितनी सुरक्षित रह जाएगी? स्थानीय पत्रकारों ने इसे सीधा हमला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आम जनता भी खुद को अपमानित महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि जो जनप्रतिनिधि जनता के वोट से सत्ता तक पहुंचे, उन्हीं के समर्थित प्लेटफॉर्म से जनता को गालियां देना न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला मजाक है। खासतौर पर तब, जब मामला एक महिला मंत्री से जुड़ा हो, जिनसे संवेदनशीलता और संयम की अपेक्षा की जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कहीं न कहीं हताशा और असुरक्षा का संकेत देता है। सवाल उठ रहा है कि क्या आलोचनाओं का जवाब अब तथ्यों और काम से नहीं, बल्कि गालियों और डराने-धमकाने से दिया
जाएगा? गंभीर प्रश्न: क्या मंत्री इस पेज से खुद को अलग बताकर जिम्मेदारी से बच सकती हैं? क्या सोशल मीडिया के नाम पर किसी को भी अपशब्द बोलने की खुली छूट है? क्या प्रशासन इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा, या सब कुछ यूं ही चलता रहेगा? जनता और पत्रकारों की मांग: इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित पेज की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, जनप्रतिनिधियों से यह स्पष्ट किया जाए कि वे इस तरह की भाषा और व्यवहार का समर्थन करते हैं या नहीं। यह विवाद सिर्फ एक फेसबुक पेज का नहीं, बल्कि उस गिरते हुए राजनीतिक स्तर का प्रतीक बनता जा रहा है, जहां बहस और संवाद की जगह गालियों ने ले ली है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में लोकतंत्र की भाषा और भी ज्यादा विषैली हो सकती है।
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- लखनऊ पारा ओवरब्रिज पर आज एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पलट गई हादसे के वक्त कार में चालक समेत अन्य लोग सवार थे जो चमत्कारिक रूप से बाल बाल बच गए प्रत्यक्षर्शिरयों के अनुसार गाड़ी की गति अधिक होने के कारण चालक नियंत्रण खो बैठा और डिवाइडर में जा घुसा गनीमत रही की सभी को सिर्फ हल्की छोटे आई है पर कार के उड़े परखच्चे हादसे इतना खतरनाक था कि मौके पर मची अफरा-तफरी। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस जांच में जुटी, यातायात कुछ देर रहा बाधित1
- खड़ी गाड़ी में लगी आग रेनाल्ट की थी डीजल गाड़ी पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भरतकुंड टोल प्लाजा के पास आ रहे यात्री ने रुक कर दुकान पर चाय पिया जैसे ही गाड़ी की तरफ बढ़े एकाएक गाड़ी तेज आग के गोले में बदल गई आशंका सार्क सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जताई जा रही है पूराकलंदर थाना के भरतकुंड टोल प्लाजा का मामला1
- लखनऊ में पारा ओवरब्रिज पर देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार, कार सवारों को मामूली चोटें आई हैं और सभी सुरक्षित हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। हादसे के चलते कुछ समय के लिए ट्रैफिक भी प्रभावित रहा।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- Para Overbridge पर देर रात तेज रफ्तार का खतरनाक मंजर देखने को मिला, जब एक कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि कार सवारों को मामूली चोटें आई हैं और बड़ा हादसा टल गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। हादसे के चलते कुछ देर के लिए ट्रैफिक भी प्रभावित रहा।1
- ब्राह्मण परिवार, लखनऊ, के द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव मनाया गया1
- रुदौली (अयोध्या)। रुदौली तहसील परिसर में आज भारतीय किसान यूनियन और अधिवक्ता साथियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पत्रकार पर लगाए गए कथित झूठे आरोप और दर्ज मुकदमे के विरोध में सभी लोग धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने सीएचसी अधीक्षिका फातमा हसन रिजवी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग उठाई। साथ ही, इनके ऊपर सुहावल सीएचसी वा रुदौली सीएचसी में विवादों में रहती रही जिस पर त्वरित उच्च स्तरीय जांच टीम बनाकर कार्रवाई करने वा जांच के दौरान पदभार से मुक्त किए जाने के बात पर किसान यूनियन के कार्यकर्ता अड़े । धरने के दौरान नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सीएमओ अयोध्या वा रुदौली क्षेत्र प्रशासन मौके पर आने की मांग की चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मौके पर बड़ी संख्या में किसान यूनियन के कार्यकर्ता और अधिवक्ता मौजूद रहे।1