पशु सेवा केंद्र बदहाली का शिकार है। कभी पशुपालकों की उम्मीद रहा यह केंद्र अब पूरी तरह से वीरान हो चुका उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के मेजा स्थित अकोड़ा गांव का पशु सेवा केंद्र बदहाली का शिकार है। कभी पशुपालकों की उम्मीद रहा यह केंद्र अब पूरी तरह से वीरान हो चुका है। केंद्र का मुख्य भवन झाड़ियों और घास-फूस से घिरा है। देखरेख के अभाव में इसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं, और खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं। परिसर शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है और आवारा पशुओं का बसेरा बन जाता है। अकोड़ा और आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए यह केंद्र कभी एक महत्वपूर्ण सहारा था। इसके निष्क्रिय होने से ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मामूली बीमारियों के लिए भी पशुपालकों को अपने मवेशियों को दूर स्थित निजी क्लीनिकों या तहसील मुख्यालय ले जाना पड़ता है। सरकारी सुविधा न मिलने के कारण उन्हें निजी डॉक्टरों को मोटी फीस देनी पड़ रही है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। गंभीर स्थिति में समय पर डॉक्टरी सहायता न मिलने से कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग ने केंद्र के जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की तैनाती केवल कागजों तक ही सीमित दिखती है। यदि समय रहते इस पशु सेवा केंद्र की मरम्मत कराकर यहां स्टाफ की तैनाती की जाए, तो यह क्षेत्र के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसकी सुरक्षा के लिए इस निष्क्रिय केंद्र को पुनः सक्रिय करना आवश्यक है।
पशु सेवा केंद्र बदहाली का शिकार है। कभी पशुपालकों की उम्मीद रहा यह केंद्र अब पूरी तरह से वीरान हो चुका उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद के मेजा स्थित अकोड़ा गांव का पशु सेवा केंद्र बदहाली का शिकार है। कभी पशुपालकों की उम्मीद रहा यह केंद्र अब पूरी तरह से वीरान हो चुका है। केंद्र का मुख्य भवन झाड़ियों और घास-फूस से घिरा है। देखरेख के अभाव में इसकी दीवारों में दरारें आ गई हैं, और खिड़की-दरवाजे टूट चुके हैं। परिसर शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है और आवारा पशुओं का बसेरा बन जाता है। अकोड़ा और आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए यह केंद्र कभी एक महत्वपूर्ण सहारा था। इसके निष्क्रिय होने से ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मामूली बीमारियों के लिए भी पशुपालकों को अपने मवेशियों को दूर स्थित निजी क्लीनिकों या तहसील मुख्यालय ले जाना पड़ता है। सरकारी सुविधा न मिलने के कारण उन्हें निजी डॉक्टरों को मोटी फीस देनी पड़ रही है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। गंभीर स्थिति में समय पर डॉक्टरी सहायता न मिलने से कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग ने केंद्र के जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की तैनाती केवल कागजों तक ही सीमित दिखती है। यदि समय रहते इस पशु सेवा केंद्र की मरम्मत कराकर यहां स्टाफ की तैनाती की जाए, तो यह क्षेत्र के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसकी सुरक्षा के लिए इस निष्क्रिय केंद्र को पुनः सक्रिय करना आवश्यक है।
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- *बालू लदे ट्रक ने कार में मारी जोरदार टक्कर कार अनियंत्रित हो कर रोड के किनारे गड्ढे में जा कर पलटी* *विनय कुमार रिपोर्टर हिन्दी दैनिक समाचार पत्र नेजा 8174801662* जनपद कौशाम्बी जिले के थाना करारी क्षेत्र अन्तर्गत म्योहर गांव के पास 18 2 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे ओवरलोड ट्रक ने सामने से आ रही कार में मारी जोरदार टक्कर जिससे कार अनियंत्रित हो कर सड़क के किनारे गड्ढे में जा कर पलट गई कार सवार डॉ०अलीम प्रयागराज एक बच्चे को लेकर जा रही थीं हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचे और कार में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकल लिए और मामले कि सूचना पुलिस दे दिया गया मौके पर पहुंची करारी थाना पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दिया है1
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- प्रयागराज: थाना उतराव अंतर्गत 2 दिन पहले हुई मारपीट में दर्ज हुयी एफआईआर में वादी मुकदमा अपनी गाड़ी से घटनास्थल दिखाने जा रहे थे,फिर से घटनास्थल पर दबंगों द्वारा पहले से घेराबंदी करके वादी मुकदमा व उनके साथ आए 4 लोगों को फिर से मारा पीटा गया,उनकी गाड़ी तोड़ी गई,उसके बाद उनको दबाव बनाया गया कि,मुकदमा वापस ले लो!1