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चम्बा जिला मुख्यालय स्थित सैनिक कल्याण विभाग कार्यालय में आज पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल ने बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम में शिरकत की। सैनिक कल्याण बोर्ड चम्बा की उपनिदेशक सेवानिवृत्त कैप्टन सुमेहा पराशर ने मुख्यातिथि को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा में उत्कृष्ट सेवा देने वाले पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित भी किया गया। वॉयस ओवर: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल ने कहा कि उन्हें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि चम्बा में पहली बार पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस मनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पूरे जिला से पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने भाग लिया, जिन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। बाइट – ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल वॉयस ओवर: वहीं इस मौके पर सैनिक कल्याण विभाग चम्बा की उपनिदेशक सेवानिवृत्त कैप्टन सुमेहा पराशर ने बताया कि 10वें पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस के उपलक्ष्य में चम्बा में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि जिन सैनिकों ने अपना जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया, उन्हें आज के दिन सम्मानित किया गया। साथ ही पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जो भविष्य में उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगी। बाइट – कैप्टन सुमेहा पराशर

22 hrs ago
user_Mohd Ashiq
Mohd Ashiq
Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
22 hrs ago

चम्बा जिला मुख्यालय स्थित सैनिक कल्याण विभाग कार्यालय में आज पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल ने बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम में शिरकत की। सैनिक कल्याण बोर्ड चम्बा की उपनिदेशक सेवानिवृत्त कैप्टन सुमेहा पराशर ने मुख्यातिथि को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान देश की रक्षा में उत्कृष्ट सेवा देने वाले पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित भी किया गया। वॉयस ओवर: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल ने कहा कि उन्हें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि चम्बा में पहली बार पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस मनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पूरे जिला से पूर्व सैनिकों और वीर नारियों ने भाग लिया, जिन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। बाइट – ब्रिगेडियर आर. एस. जमवाल वॉयस ओवर: वहीं इस मौके पर सैनिक कल्याण विभाग चम्बा की उपनिदेशक सेवानिवृत्त कैप्टन सुमेहा पराशर ने बताया कि 10वें पूर्व सशस्त्र सैनिक दिवस के उपलक्ष्य में चम्बा में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि जिन सैनिकों ने अपना जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया, उन्हें आज के दिन सम्मानित किया गया। साथ ही पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जो भविष्य में उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगी। बाइट – कैप्टन सुमेहा पराशर

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  • चंबा शहर का सबसे बड़ा वार्ड सुल्तानपुर इन दिनों सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े और घनी आबादी वाले वार्ड में वर्तमान में केवल एक ही सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध है, जो यहां की जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाफी साबित हो रहा है। सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण स्थानीय निवासियों के साथ-साथ महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बाहर से आने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र में गंदगी बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का मानना है कि इतने बड़े वार्ड में पर्याप्त सार्वजनिक शौचालयों का न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। वार्डवासियों ने प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि सुल्तानपुर वार्ड में विभिन्न स्थानों पर शीघ्र पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाए, ताकि आम जनता को इस समस्या से राहत मिल सके और स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। बाइट स्थानीय निवासी।
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    चंबा शहर का सबसे बड़ा वार्ड सुल्तानपुर इन दिनों सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े और घनी आबादी वाले वार्ड में वर्तमान में केवल एक ही सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध है, जो यहां की जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाफी साबित हो रहा है।
सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण स्थानीय निवासियों के साथ-साथ महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बाहर से आने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र में गंदगी बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का मानना है कि इतने बड़े वार्ड में पर्याप्त सार्वजनिक शौचालयों का न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
वार्डवासियों ने प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि सुल्तानपुर वार्ड में विभिन्न स्थानों पर शीघ्र पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाए, ताकि आम जनता को इस समस्या से राहत मिल सके और स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
बाइट स्थानीय निवासी।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    22 hrs ago
  • ॐ नमो नारायण महाराज जी
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    ॐ नमो नारायण महाराज जी
    user_Shivinder singh Bhadwal
    Shivinder singh Bhadwal
    Journalist कठुआ, कठुआ, जम्मू और कश्मीर•
    7 hrs ago
  • सारली गांव में चोरी वाली रात एक अन्य घर की रेकी करते हुए सीसीटीवी में कैद हुए 4 संदिग्ध।
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    सारली गांव में चोरी वाली रात एक अन्य घर की रेकी करते हुए सीसीटीवी में कैद हुए 4 संदिग्ध।
    user_Ankit Kumar
    Ankit Kumar
    Journalist जोगिंदरनगर, मंडी, हिमाचल प्रदेश•
    18 hrs ago
  • रात के अंधेरे में साइकिल चला रही युवती को पीछे से कार चालक ने हॉर्न मारा। गुस्से में युवती ने कार वाले को धमकाया, लेकिन मामला बढ़ाने के बजाय ड्राइवर ने अलग ही तरीका अपनाया। उसने बिना बहस या झगड़े के अपनी कार की लाइट बंद कर दी और चुपचाप बदला ले लिया। यह “बिना मारपीट, गांधी स्टाइल बदला” वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। #viralvideo #gandhigiri #nonviolence #roadsafety #cycling #nightdriving #reels #shorts #trending
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    रात के अंधेरे में साइकिल चला रही युवती को पीछे से कार चालक ने हॉर्न मारा। गुस्से में युवती ने कार वाले को धमकाया, लेकिन मामला बढ़ाने के बजाय ड्राइवर ने अलग ही तरीका अपनाया। उसने बिना बहस या झगड़े के अपनी कार की लाइट बंद कर दी और चुपचाप बदला ले लिया। यह “बिना मारपीट, गांधी स्टाइल बदला” वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
#viralvideo #gandhigiri #nonviolence #roadsafety #cycling #nightdriving #reels #shorts #trending
    user_द संक्षेप
    द संक्षेप
    Media company Chhatroo, Kishtwar•
    6 hrs ago
  • lunapaani ke pass hua hadsa
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    lunapaani ke pass hua hadsa
    user_Hem Singh Chauhan
    Hem Singh Chauhan
    Engineer Balh, Mandi•
    10 hrs ago
  • Post by Dinesh Kumar
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    Post by Dinesh Kumar
    user_Dinesh Kumar
    Dinesh Kumar
    Farmer Bhota, Hamirpur•
    4 hrs ago
  • Transform your daily routine into a spa-like experience with these luxury bathroom design ideas—where premium finishes, elegant lighting, and refined details define everyday indulgence. For interior design ideas and customized solutions, contact Decoory Interiors 📩 DM for inquiries 📞 Contact us: 9821545511 🌐 www.decoory.com 📍Location: GF -71, Gaur City Center, Greater Noida West, Gautam Buddha Nagar, Uttar Pradesh 201318
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    Transform your daily routine into a spa-like experience with these luxury bathroom design ideas—where premium finishes, elegant lighting, and refined details define everyday indulgence.
For interior design ideas and customized solutions, contact Decoory Interiors
📩 DM for inquiries
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📍Location: GF -71, Gaur City Center, Greater Noida West, Gautam Buddha Nagar, Uttar Pradesh 201318
    user_Decoory Interiors
    Decoory Interiors
    Interior designer कुल्लू, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    11 hrs ago
  • देशभर में लोहड़ी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व चंबा में मनाई जाने वाली लोहड़ी अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अनोखी परंपराओं के कारण विशेष पहचान रखती है। सदियों पुरानी यह परंपरा चंबा रियासत की स्थापना से जुड़ी मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, दसवीं शताब्दी में राजा साहिल वर्मन द्वारा चंबा रियासत की स्थापना के समय नगर को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रखने के उद्देश्य से विभिन्न मोहल्लों में मढ़ियों की स्थापना करवाई गई थी। एक माह तक इन मढ़ियों में अलाव जलाए जाते थे। इस अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप राज मढ़ी से त्रिशूलनुमा मशाल, जिसे राज मुशहरा कहा जाता है, निकाली जाती है। परंपरा की शुरुआत सुराड़ा मोहल्ला स्थित शिव मंदिर से होती है, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद राज मुशहरा निकाला जाता है। वहीं चौंतड़ा मोहल्ले से बजीर मुशहरा निकाला जाता है। रात लगभग ग्यारह बजे दोनों मुशहरों का एक स्थान पर मिलन होता है। इसके उपरांत राज मुशहरा पूरे शहर की मढ़ियों में डुबोया जाता है, जिसे नगर की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। जानकारों का कहना है कि करीब 450 वर्ष पुरानी इस परंपरा में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहती है। पहले इस परंपरा में पशु बलि की प्रथा प्रचलित थी, जिसे समय के साथ समाप्त कर अब नारियल फोड़ने की परंपरा अपनाई गई है। आज भी चंबा की लोहड़ी आस्था, इतिहास और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनी हुई है। बाइट: स्वामी भुवनेश्वर शर्मा, इतिहासकार “चंबा की लोहड़ी केवल पर्व नहीं, बल्कि रियासत काल से चली आ रही एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जो नगर की सुरक्षा और समृद्धि से जुड़ी हुई है।” बाइट: मंगलेश शर्मा, स्थानीय निवासी “चंबा की लोहड़ी में हर वर्ग के लोग एक साथ शामिल होते हैं। यह पर्व हमें हमारी परंपराओं और आपसी भाईचारे से जोड़ता है।”
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    देशभर में लोहड़ी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व चंबा में मनाई जाने वाली लोहड़ी अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अनोखी परंपराओं के कारण विशेष पहचान रखती है। सदियों पुरानी यह परंपरा चंबा रियासत की स्थापना से जुड़ी मानी जाती है।
इतिहासकारों के अनुसार, दसवीं शताब्दी में राजा साहिल वर्मन द्वारा चंबा रियासत की स्थापना के समय नगर को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रखने के उद्देश्य से विभिन्न मोहल्लों में मढ़ियों की स्थापना करवाई गई थी। एक माह तक इन मढ़ियों में अलाव जलाए जाते थे। इस अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप राज मढ़ी से त्रिशूलनुमा मशाल, जिसे राज मुशहरा कहा जाता है, निकाली जाती है।
परंपरा की शुरुआत सुराड़ा मोहल्ला स्थित शिव मंदिर से होती है, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद राज मुशहरा निकाला जाता है। वहीं चौंतड़ा मोहल्ले से बजीर मुशहरा निकाला जाता है। रात लगभग ग्यारह बजे दोनों मुशहरों का एक स्थान पर मिलन होता है। इसके उपरांत राज मुशहरा पूरे शहर की मढ़ियों में डुबोया जाता है, जिसे नगर की सुख-शांति, समृद्धि और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
जानकारों का कहना है कि करीब 450 वर्ष पुरानी इस परंपरा में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहती है। पहले इस परंपरा में पशु बलि की प्रथा प्रचलित थी, जिसे समय के साथ समाप्त कर अब नारियल फोड़ने की परंपरा अपनाई गई है। आज भी चंबा की लोहड़ी आस्था, इतिहास और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनी हुई है।
बाइट:
स्वामी भुवनेश्वर शर्मा, इतिहासकार
“चंबा की लोहड़ी केवल पर्व नहीं, बल्कि रियासत काल से चली आ रही एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जो नगर की सुरक्षा और समृद्धि से जुड़ी हुई है।”
बाइट:
मंगलेश शर्मा, स्थानीय निवासी
“चंबा की लोहड़ी में हर वर्ग के लोग एक साथ शामिल होते हैं। यह पर्व हमें हमारी परंपराओं और आपसी भाईचारे से जोड़ता है।”
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    22 hrs ago
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