98 साल पहले मुंबई में खुला था देश का पहला पेट्रोल पंप, हैंडपंप से होती थी सप्लाई; जानिए कैसे पहुंचता था पेट्रोल 98 साल पहले मुंबई में खुला था देश का पहला पेट्रोल पंप, हैंडपंप से होती थी सप्लाई; जानिए कैसे पहुंचता था पेट्रोल भारत में आज पेट्रोल पंप हर कुछ किलोमीटर पर नजर आ जाते हैं, लेकिन करीब 98 साल पहले जब देश का पहला पेट्रोल पंप मुंबई में खुला था, तब यह लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था। उस दौर में न आधुनिक मशीनें थीं और न ही बड़े-बड़े टैंकर ट्रक। साल 1927 में मुंबई में शुरू हुए इस पहले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल हाथ से चलने वाले हैंडपंप के जरिए गाड़ियों में भरा जाता था। उस समय पेट्रोल की सप्लाई मुख्य रूप से बड़े लोहे के ड्रमों में की जाती थी। पेट्रोल समुद्री जहाजों के जरिए बंदरगाह तक पहुंचता था, क्योंकि उस दौर में अधिकतर ईंधन विदेशों से आयात किया जाता था। बंदरगाह से पेट्रोल के ड्रम ट्रकों, बैलगाड़ियों और कभी-कभी छोटी मालवाहक गाड़ियों के जरिए पेट्रोल पंप तक लाए जाते थे। बाद में इन्हीं ड्रमों से हैंडपंप की मदद से गाड़ियों में पेट्रोल भरा जाता था। उस समय सड़कों पर बहुत कम वाहन चलते थे और पेट्रोल भी बेहद सस्ता माना जाता था। जानकारी के अनुसार, उस दौर में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 25 से 30 पैसे के बीच थी, हालांकि अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में इसमें थोड़ा अंतर मिलता है। मुंबई का यह पहला पेट्रोल पंप भारत में ऑटोमोबाइल युग की शुरुआत माना जाता है। आज जहां हाईटेक मशीनों और डिजिटल पेमेंट से सेकंडों में पेट्रोल भर जाता है, वहीं उस समय पूरा काम हाथों और साधारण साधनों से किया जाता था।
98 साल पहले मुंबई में खुला था देश का पहला पेट्रोल पंप, हैंडपंप से होती थी सप्लाई; जानिए कैसे पहुंचता था पेट्रोल 98 साल पहले मुंबई में खुला था देश का पहला पेट्रोल पंप, हैंडपंप से होती थी सप्लाई; जानिए कैसे पहुंचता था पेट्रोल भारत में आज पेट्रोल पंप हर कुछ किलोमीटर पर नजर आ जाते हैं, लेकिन करीब 98 साल पहले जब देश का पहला पेट्रोल पंप मुंबई में खुला था, तब यह लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था। उस दौर में न आधुनिक मशीनें थीं और न ही बड़े-बड़े टैंकर ट्रक। साल 1927 में मुंबई में शुरू हुए इस पहले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल हाथ से चलने वाले हैंडपंप के जरिए गाड़ियों में भरा जाता था। उस समय पेट्रोल की सप्लाई मुख्य रूप से बड़े लोहे के ड्रमों में की जाती थी। पेट्रोल समुद्री जहाजों के जरिए बंदरगाह तक पहुंचता था, क्योंकि उस दौर में अधिकतर ईंधन विदेशों से आयात किया जाता था। बंदरगाह से पेट्रोल के ड्रम ट्रकों, बैलगाड़ियों और कभी-कभी छोटी मालवाहक गाड़ियों के जरिए पेट्रोल पंप तक लाए जाते थे। बाद में इन्हीं ड्रमों से हैंडपंप की मदद से गाड़ियों में पेट्रोल भरा जाता था। उस समय सड़कों पर बहुत कम वाहन चलते थे और पेट्रोल भी बेहद सस्ता माना जाता था। जानकारी के अनुसार, उस दौर में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 25 से 30 पैसे के बीच थी, हालांकि अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में इसमें थोड़ा अंतर मिलता है। मुंबई का यह पहला पेट्रोल पंप भारत में ऑटोमोबाइल युग की शुरुआत माना जाता है। आज जहां हाईटेक मशीनों और डिजिटल पेमेंट से सेकंडों में पेट्रोल भर जाता है, वहीं उस समय पूरा काम हाथों और साधारण साधनों से किया जाता था।
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- बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच कर रही एसटीएफ ने बिहार में दबिश दी। बक्सर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पांडेयपट्टी के रहने वाले विशाल श्रीवास्तव को अपने साथ कोलकाता ले गई। पश्चिम बंगाल एसटीएफ की एक विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से पांडेयपट्टी इलाके में कार्रवाई की। बंगाल के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या की जांच के सिलसिले बिहार कनेक्शन सामने आया है। एसटीएफ ने यहां से विशाल श्रीवास्तव नाम के एक शक्स को पकड़ा है। विशाल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। बंगाल एसटीएफ ने बक्सर के मुफस्सिल थाना अंतर्गत पांडेयपट्टी इलाके में अचानक छापेमारी कर विशाल श्रीवास्तव को दबोच लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की कड़ियां विशाल से जुड़ती नजर आ रही हैं। एसटीएफ को संदेह है कि इस हत्याकांड की साजिश या इसके एग्जिक्यूशन से जुड़े महत्वपूर्ण राज विशाल के पास हो सकते हैं। बंगाल एसटीएफ की टीम उसे तुरंत अपने साथ लेकर पश्चिम बंगाल (कोलकाता) रवाना हो गई। #SuvenduAdhikari #ChandranathRath #WestBengal #Buxar #Bihar1
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- पीलीभीत के बूँदी भूड़ में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और पूरनपुर विधायक ने चौपाल लगाई। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं और शिकायतों को ध्यान से सुना।1
- Post by Sudheer Kumar1
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