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उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में करोड़ों रुपये के सरकारी अनुदान में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने मत्स्य राज्य मंत्री के एक करीबी पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने परिवार और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ दिलाने का दावा किया है। इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
TEESRI AANKHEN
उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में करोड़ों रुपये के सरकारी अनुदान में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने मत्स्य राज्य मंत्री के एक करीबी पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने परिवार और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ दिलाने का दावा किया है। इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
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- पंजाब में बिहार के लड़कों को बेरहमी से पीटा गया है। यह पहली बार नहीं है, बल्कि बिहार या उत्तर प्रदेश के लोगों को अक्सर छोटी गलतियों के लिए कठोर दंड मिलता है। पुलिस पर भी ऐसे मामलों में बिहार के लड़कों को दोषी ठहराने का आरोप है।1
- अंबेडकर नगर के अल्लापुर ब्लॉक के ग्राम सभा इटावा में डांस के दौरान डीजे रोहित की जान चली गई। बताया जा रहा है कि कुछ लोग डांस करते हुए बेकाबू हो गए, जिसके बाद यह घटना हुई।1
- उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्राचीन केवटला मठ की जमीन को लेकर विवाद गरमा गया है। यहाँ एक लेखपाल पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण और बाबा मनीष दास मठ की जमीन बेचने की कथित साजिश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।1
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- बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! अजीत मिश्रा (खोजी) खाकी और खादी के संरक्षण में 'हरा शिकार', लालगंज में कानून को ठेंगा दिखा रहे वन माफिया! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश लालगंज में बेखौफ कुल्हाड़ी: खाकी और खादी के संरक्षण में फल-फूल रहे वन माफिया, कौन है इनका आका? क्या विभाग की 'सेटिंग' से कट रहे हैं हरे पेड़? सूचना के बाद भी क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार? कागजों पर पौधारोपण, जमीन पर उजाड़ रहे बाग; आखिर माफियाओं के सामने क्यों नतमस्तक है प्रशासन? पसड़ा गांव में सरेआम कटा आम का पेड़; डीएम साहब! इन बेखौफ लकड़कट्टों पर कब कसेगा कानूनी शिकंजा? लालगंज में हरियाली का विनाश, ग्रामीणों में उबाल, कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात! बेखौफ माफिया, लाचार प्रशासन और कटती हरियाली; पसड़ा गांव से ग्राउंड रिपोर्ट। लालगंज में माफियाओं का तांडव, सरेआम काटा हरा पेड़, मुकदमा दर्ज करने की मांग तेज। बस्ती में गजब का 'ग्रीन मिशन': एक तरफ लग रहे पौधे, दूसरी तरफ माफिया सरेआम साफ कर रहे हरे बाग! वाह रे प्रशासन! माफिया काट ले गए हरा पेड़ और जिम्मेदार कर्मचारी अब तक देख रहे हैं 'मुहूर्त'। बस्ती। एक तरफ सरकार 'हरिशंकरी' और 'अमृत वन' के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर पौधारोपण का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र का पसड़ा गांव वन माफियाओं की क्रूरता का गवाह बन रहा है। यहाँ माफियाओं की कुल्हाड़ी सिर्फ पेड़ पर नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के 'ग्रीन यूपी' के सपनों पर चल रही है। दिनदहाड़े 'हरियाली का कत्ल', जिम्मेदार बने तमाशबीन पसड़ा गांव में माफियाओं ने दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए सरेआम हरे आम के पेड़ पर आरा चला दिया। ताज्जुब की बात यह है कि यह कत्लेआम किसी अंधेरी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में प्रशासन की नाक के नीचे हुआ। बिना किसी विभागीय अनुमति के फलदार पेड़ों को काट दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के कारिंदों ने अपनी आँखें बेच दी हैं या फिर माफियाओं के नोटों की खनक ने उनकी ज़मीर को खामोश कर दिया है? सत्ता की हनक या विभाग की मिलीभगत? सूचना मिलने के घंटों बाद भी किसी जिम्मेदार कर्मचारी का मौके पर न पहुंचना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर ये कौन से 'सफेदपोश' हैं जिनके संरक्षण में ये माफिया इतने बेखौफ हैं? क्या विभाग की मिलीभगत से हो रहा है हरियाली का विनाश? आखिर क्यों इन लकड़कट्टों पर नहीं कसा जा रहा कानूनी शिकंजा? ग्रामीणों का आक्रोश: "कागजों पर हरियाली, जमीन पर खाली" प्रशासन की इस लचर कार्यशैली से पसड़ा गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ आम आदमी को अपनी सूखी लकड़ी काटने के लिए भी सौ चक्कर लगाने पड़ते हैं, वहीं माफिया बेधड़क होकर हरे बाग उजाड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। DM साहब! अब तो फाइल छोड़िए, संज्ञान लीजिए! बस्ती के जिलाधिकारी और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से जनता यह पूछ रही है कि क्या इन माफियाओं पर मुकदमा दर्ज होगा? क्या ये माफिया सलाखों के पीछे जाएंगे, या फिर एक और 'जांच' का कोरम पूरा करके फाइल दबा दी जाएगी? निष्कर्ष: अगर समय रहते इन वन माफियाओं और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्ती मंडल की पहचान सिर्फ 'सूखे जंगलों' के रूप में होगी। दोषियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी समय की मांग है। बस्ती की जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं!2
- 16 फरवरी 2027 से होगा दिव्य भव्य रामकथा,राजन जी के भजनों का रसपान कर सकेंगे श्रद्धालु अश्विनी कुमार पाण्डेय संतकबीरनगर जनपद के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य की बात है कि पहली बार पूज्य राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह दिव्य कथा 16 फरवरी से 24 फरवरी तक मुखलिसपुर गायघाट में आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी स्वयं पूज्य राजन जी महाराज ने गोंडा में चल रही कथा के दौरान श्रद्धालुओं को दी। सूचना मिलते ही भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कथा आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कथा के संयोजक महंत बलराम दास वेदांती जी ने बताया कि कथा स्थल को भव्य रूप से सजाया जाएगा तथा हजारों श्रद्धालुओं के बैठने, प्रसाद एवं अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। पूज्य राजन जी महाराज अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण कथा शैली के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनकी कथा सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। संत कबीर नगर में पहली बार उनका आगमन होने से भक्तों में विशेष उत्साह बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।।1
- अपने शहर खलीलाबाद का कार्यक्रम.......... SHAILENDRA KUMAR PANDEY1
- बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज अजीत मिश्रा (खोजी) अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है। नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल' पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है। डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट? हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया? ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा? SARFAESI एक्ट की धज्जियां नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। जनता पूछ रही है सवाल: क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया? 18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है? जांच की मांग तेज अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।1