तीन वर्ष बीतने के बाद भी नेबुआ नौरंगिया ब्लाक के 44 गांवों में निर्माणाधीन पड़ी है पानी टंकियां, स्वच्छ पानी पर ग्रहण। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 अरब 32 लाख रुपए से संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय अभिलेखों में जहां 44 गांवों में पानी टंकी निर्माण और 30 गांवों में सीधे पम्प से जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट सामने आ रही है। कार्य प्रारंभ होने के दो वर्ष बाद भी आधे से अधिक गांवों में न तो पानी टंकी का निर्माण पूरा हुआ है और न ही नियमित जलापूर्ति हो रही है। सौरहा खुर्द, सौरहा बुजुर्ग, कलवारी पट्टी, खानुछपरा, पिपरा वर सिवान, पिपरा बुजुर्ग, पिपरा खुर्द, ढोलहा, कोहरगड्डी सहित कुल 44 गांवों में एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पानी टंकी निर्माण अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर सिर्फ फाउंडेशन डालकर छोड़ दिया गया है तो कहीं अधूरे पीलर खड़े हैं। पाइप लाइन बिछाने और वाटर पोस्ट बनाने के बाद कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति के नाम पर सीधे पम्प से केवल “टेस्टिंग” कर कागजों में जलापूर्ति दर्शा दी गई। सौरहा खुर्द के रमायन पटेल ने बताया कि करीब दो माह पहले एक बार पानी आया था, लेकिन उसके बाद से आपूर्ति पूरी तरह बंद है। गांव में आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई। दुसरा विकल्प न होने के चलते छः सौ रुपए पानी पर खर्च करना पड़ रहा है। पिपरा वर सिवान गांव के राकेश मोहन ने बताया कि दो वर्ष से पानी टंकी निर्माण अधूरा है और केवल पाइप लाइन बिछाकर छोड़ दी गई है। वहीं पिपरा खुर्द गांव के रविन्द्र पाण्डेय ने बताया कि पाइप लाइन बिछाने के बाद सीधे पम्प से टेस्टिंग की गई थी, लेकिन लिकेज होने के बाद से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। मजबूरन पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश गांवों में जलापूर्ति की स्थिति सिर्फ कागजों में दुरुस्त दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविकता में नलों से पानी नहीं आ रहा। कहीं-कहीं आंशिक रूप से पानी पहुंच भी रहा है तो वह केवल औपचारिकता भर है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अधूरे निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच सके। ________________________________________________________________ जल जनित बिमारी से पांच माह पूर्व हुई थी पांच बच्चों की मौत। नेबुआ नौरंगिया ब्लाक के गुलहरिया गांव में पिछले वर्ष नवम्बर माह में तीन बच्चे और पिपरा खुर्द गांव में दिसम्बर माह में दो बच्चों की मौत बुखार से हुई थी। जिसमें एम्स के रिपोर्ट के मुताबिक जलजनीत रोग का बताया गया। मौत के बाद जिले के आलाधिकारियों के साथ साथ कमिश्नर और राज्य स्तर की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया था। उसके बाद भी दोनों गांव में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पाई है। पूर्व में 18 करोड़ खर्च कर बनी है नौव पानी टंकी में छः हैं बेकार,तीन से आपूर्ति _______________________________________________________ नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र मे जल निगम उत्तर प्रदेश कार्यदायी संस्था द्वारा स्वच्छ जल धारा योजना के तहत महुअवा वर्ष 2004, कुर्मी पट्टी में 2016,मड़ार विंदवलिया में 2012,सेखुई खास में 2014,पकड़ियार में 2014,हरपुर माफ़ी मे 2014 में सहीत कुल नौव टंकियों का निर्माण हुआ है। लेकिन उपयोग लायक नहीं है।
तीन वर्ष बीतने के बाद भी नेबुआ नौरंगिया ब्लाक के 44 गांवों में निर्माणाधीन पड़ी है पानी टंकियां, स्वच्छ पानी पर ग्रहण। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 अरब 32 लाख रुपए से संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय अभिलेखों में जहां 44 गांवों में पानी टंकी निर्माण और 30 गांवों में सीधे पम्प से जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट सामने आ रही है। कार्य प्रारंभ होने के दो वर्ष बाद भी आधे से अधिक गांवों में न तो पानी टंकी का निर्माण पूरा हुआ है और न ही नियमित जलापूर्ति हो रही है। सौरहा खुर्द, सौरहा बुजुर्ग, कलवारी पट्टी, खानुछपरा, पिपरा वर सिवान, पिपरा बुजुर्ग, पिपरा खुर्द, ढोलहा, कोहरगड्डी सहित कुल 44 गांवों में एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के
बाद भी पानी टंकी निर्माण अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर सिर्फ फाउंडेशन डालकर छोड़ दिया गया है तो कहीं अधूरे पीलर खड़े हैं। पाइप लाइन बिछाने और वाटर पोस्ट बनाने के बाद कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति के नाम पर सीधे पम्प से केवल “टेस्टिंग” कर कागजों में जलापूर्ति दर्शा दी गई। सौरहा खुर्द के रमायन पटेल ने बताया कि करीब दो माह पहले एक बार पानी आया था, लेकिन उसके बाद से आपूर्ति पूरी तरह बंद है। गांव में आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई। दुसरा विकल्प न होने के चलते छः सौ रुपए पानी पर खर्च करना पड़ रहा है। पिपरा वर सिवान गांव के राकेश मोहन ने बताया कि दो वर्ष से पानी टंकी निर्माण अधूरा है और केवल पाइप लाइन
बिछाकर छोड़ दी गई है। वहीं पिपरा खुर्द गांव के रविन्द्र पाण्डेय ने बताया कि पाइप लाइन बिछाने के बाद सीधे पम्प से टेस्टिंग की गई थी, लेकिन लिकेज होने के बाद से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। मजबूरन पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश गांवों में जलापूर्ति की स्थिति सिर्फ कागजों में दुरुस्त दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविकता में नलों से पानी नहीं आ रहा। कहीं-कहीं आंशिक रूप से पानी पहुंच भी रहा है तो वह केवल औपचारिकता भर है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अधूरे निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच सके। ________________________________________________________________ जल जनित बिमारी से पांच माह पूर्व हुई थी पांच बच्चों की मौत। नेबुआ नौरंगिया ब्लाक के गुलहरिया गांव में
पिछले वर्ष नवम्बर माह में तीन बच्चे और पिपरा खुर्द गांव में दिसम्बर माह में दो बच्चों की मौत बुखार से हुई थी। जिसमें एम्स के रिपोर्ट के मुताबिक जलजनीत रोग का बताया गया। मौत के बाद जिले के आलाधिकारियों के साथ साथ कमिश्नर और राज्य स्तर की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया था। उसके बाद भी दोनों गांव में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पाई है। पूर्व में 18 करोड़ खर्च कर बनी है नौव पानी टंकी में छः हैं बेकार,तीन से आपूर्ति _______________________________________________________ नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र मे जल निगम उत्तर प्रदेश कार्यदायी संस्था द्वारा स्वच्छ जल धारा योजना के तहत महुअवा वर्ष 2004, कुर्मी पट्टी में 2016,मड़ार विंदवलिया में 2012,सेखुई खास में 2014,पकड़ियार में 2014,हरपुर माफ़ी मे 2014 में सहीत कुल नौव टंकियों का निर्माण हुआ है। लेकिन उपयोग लायक नहीं है।
- कितना दर्दनाक मंजर सामने दिख रहा है गांव सिटी के लिए जाने वाली 220 वोल्टेज की लाइन पर एक युवक/युवती का अंत हो गया। ऐसी घटनाएं तब होती है जब लोग डिप्रेशन में होते हैं या बिना सोचे समझे विद्युत तार पर चढ़ जाते है। ट्रांसफॉर्म पर चढ़ने की क्या जरूरत थी जबकि मालूम होता है कि बिजली पकड़ लेती है तो छोड़ती भी नहीं। मुझे समझ नहीं आ रहा है यह लापरवाही है या जानबूझकर किया गया है स्वयं द्वारा। पर ऐसे हाई इलेक्ट्रिक खंबे एवं तारों से दूर रहना चाहिए स्वयं की सुरक्षा पहले करो।1
- कुशीनगर जनपद के नौरंगिया थाना क्षेत्र अंतर्गत सबया आबादकारी गांव में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। आग की चपेट में कई घर आ गए, जिससे लाखों रुपये का कीमती सामान जलकर खाक हो गया। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तेज लपटों के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है, हालांकि शॉर्ट सर्किट या चूल्हे की चिंगारी की आशंका जताई जा रही है। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और पीड़ितों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1
- क्षेत्र के गंगारानी गांव के आस पास से गेहूं की खेत के लगी आग तेज हवा के झोंके के साथ जलता हुआ कुबेरस्थान पडरौना सड़क पर पेट्रोल पंप के पास पहुंचकर बडगांव गांव में आग पकड़ लिया जिससे आधा दर्जन लोगों की झोपड़ी लकड़ी आदि जलकर राख हो गया है। क्षेत्र के गांव गंगारानी के आस पास गेहूं की खेत के डंठल में लगी आग तेज आंधी वाली हवा के साथ विकराल रूप में आग पूरब दिशा में तेजी के साथ बढ़ रहा था इसे देख आस पास के गावो के लोग अपने घर के आस पास पानी डालना शुरू कर दिए ।देखते देखते आग कुबेरस्थान पडरौना मार्ग पर पहुंच गया जो बेलवानिया गांव के उत्तर से सड़क पार कर हमारा पंप के बगल में फ्रेस मड में पकड़ लिया। आग का विकराल रूप देख ग्रामीणों ने फायर सर्विस को सूचित किया जिसके बाद गेहूं के खेत के डंठल का आग ग्रामीणों सहित फायर सर्विस बुझाने लगा तब तक फायर सर्विस का पानी समाप्त हो गया और आग बडगांव गांव में पहुंच गया जिसमें ग्रामीण काफी मशक्कत के बाद किसी प्रकार आग पर काबू पा लिए।आग से बडगांव के टीमल,हलीम,अकबर,मंजूर, अभिबुल्लाह, बसीर, सकल प्रसाद, ब्रिझन, फेंकू नरसिंह,दिलीप आदि का झोपडी लकड़ी आदि जल गया।1
- अचानक मौसम में बदला करवट लोगों का हुआ बुरा हाल तेज हवा के साथ उड़ती रहा धूल तेज हवा के साथ उमस भरी गर्मी से लोग हुवे परेशान मौसम का मिजाज बदला अप्रैल माह में ही आपको लू का मजा। ऊपर से तेज हवा और उड़ते धूल ने लोगों को किया सराबोर। आज के दिन का तापमान लगभग 40 से 45 डिग्री के बीच रहा तेज हवा और धूल से लोगो को शांस लेने मे हो रही है दिक्क़त4
- Post by Times of Uttar Pradesh1
- adhikariyon ki laparvahi1
- Post by मुन्ना पड़रौना कुशीनगर1
- खबर का असर संवाददाता कुशीनगर जनपद के नौरंगिया थाना क्षेत्र अंतर्गत सबया आबादकारी गांव में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। आग की चपेट में कई घर आ गए, जिससे लाखों रुपये का कीमती सामान जलकर खाक हो गया।स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तेज लपटों के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है, हालांकि शॉर्ट सर्किट या चूल्हे की चिंगारी की आशंका जताई जा रही है। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और पीड़ितों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1