चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’!, अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’!, अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’! अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक श्रद्धालुओं की सुरक्षा से बड़ा क्या है ‘फाइलों का खेल’? हरिद्वार। चारधाम यात्रा का शुभारंभ कुछ ही दिनों में होने वाला है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से होकर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा के लिए निकलेंगे। ऐसे में प्रशासन और नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाने का दावा किया जा रहा है। ब्रह्मपुरी रोड़ी बेलवाला से लेकर सिंहद्वार तक अधिकारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर अभियान चला रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कार्रवाई के कुछ ही मिनटों बाद वही अतिक्रमण फिर से खड़ा हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन सिर्फ औपचारिकता निभाकर फाइलें पूरी करने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। शताब्दी पुल पर फिर वही खतरा मंडरा रहा हरिद्वार का शताब्दी पुल वह स्थान है, जहां 1996 की सोमवती अमावस्या पर एक भीषण हादसा हुआ था और दर्जनों श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। उस दर्दनाक घटना के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाएगा। लेकिन आज भी पुल के दोनों ओर नीचे फड़ लगाकर दुकानें सजी हुई हैं। भीड़ के समय यह स्थान फिर से खतरे का केंद्र बन सकता है। सवाल यह है कि जब इतिहास इतना बड़ा सबक दे चुका है, तो फिर प्रशासन की आंखें क्यों बंद हैं? विकलांग श्रद्धालुओं का रैंप बना अवैध पार्किंग स्थल हर की पौड़ी क्षेत्र में विकलांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया रैंप आज अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुका है। इस रैंप पर दोनों ओर अवैध रूप से दोपहिया वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं के लिए चलना तक मुश्किल हो गया है। श्रद्धालुओं के लिए बनाई गई यह सुविधा अब अवैध पार्किंग में तब्दील हो चुकी है, लेकिन इसे हटाने वाला शायद ही कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई देता है। सुभाष घाट और हर की पौड़ी पर अवैध फड़ों की भरमार हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों सुभाष घाट और हर की पौड़ी पर भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां बड़ी संख्या में फड़ लगाकर दुकानें संचालित हो रही हैं, जिससे घाटों की व्यवस्था और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। इतना ही नहीं, हर की पौड़ी पर प्रतिबंध के बावजूद सैकड़ों अवैध फूल-फरोशी के ठेले खुलेआम लगे हुए हैं। कानून स्पष्ट रूप से इन गतिविधियों पर रोक लगाता है, लेकिन हकीकत में कानून का खुला उल्लंघन देखने को मिल रहा है। भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध, फिर भी हर की पौड़ी पर भीख का सिलसिला जारी हर की पौड़ी क्षेत्र में भिक्षावृत्ति पर कानूनी प्रतिबंध है, फिर भी यहां बड़ी संख्या में भिखारी खुलेआम श्रद्धालुओं से भीख मांगते दिखाई देते हैं। प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद यह सब दिन-दहाड़े चलता रहता है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर इन नियमों का पालन कौन कराएगा? अभियान या सिर्फ दिखावा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन अतिक्रमण हटाने का दावा करता है, तो फिर अभियान खत्म होते ही वही अतिक्रमण वापस कैसे खड़ा हो जाता है? जैसे ही अधिकारी अतिक्रमण हटाकर आगे बढ़ते हैं, पीछे से वही दुकानें फिर से लग जाती हैं। ऐसे में यह अभियान केवल दिखावे और औपचारिकता तक सीमित नजर आता है। चारधाम यात्रा से पहले प्रशासन की परीक्षा चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, स्वच्छता और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन अगर शताब्दी पुल, सुभाष घाट और हर की पौड़ी जैसे प्रमुख स्थानों पर ही अतिक्रमण और अव्यवस्था बनी रहे, तो यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। अब सवाल यही है कि क्या प्रशासन वास्तव में इस समस्या का समाधान करेगा या फिर यह अभियान भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा? क्योंकि अंततः आस्था की इस नगरी की रक्षा का उत्तरदायित्व भी प्रशासन पर ही है — और इसका साक्षी स्वयं मां गंगा हैं। — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़, हरिद्वार ✍️
चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’!, अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’!, अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक चारधाम यात्रा से पहले हरिद्वार में अतिक्रमण पर ‘औपचारिक कार्रवाई’! अधिकारी हटाते हैं, पांच मिनट बाद फिर सज जाती हैं दुकानें — कानून का खुला मजाक श्रद्धालुओं की सुरक्षा से बड़ा क्या है ‘फाइलों का खेल’? हरिद्वार। चारधाम यात्रा का शुभारंभ कुछ ही दिनों में होने वाला है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से होकर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा के लिए निकलेंगे। ऐसे में प्रशासन और नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाने का दावा किया जा रहा है। ब्रह्मपुरी रोड़ी बेलवाला से लेकर सिंहद्वार तक अधिकारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर अभियान चला रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कार्रवाई के कुछ ही मिनटों बाद वही अतिक्रमण फिर से खड़ा हो जाता
है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन सिर्फ औपचारिकता निभाकर फाइलें पूरी करने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। शताब्दी पुल पर फिर वही खतरा मंडरा रहा हरिद्वार का शताब्दी पुल वह स्थान है, जहां 1996 की सोमवती अमावस्या पर एक भीषण हादसा हुआ था और दर्जनों श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। उस दर्दनाक घटना के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाएगा। लेकिन आज भी पुल के दोनों ओर नीचे फड़ लगाकर दुकानें सजी हुई हैं। भीड़ के समय यह स्थान फिर से खतरे का केंद्र बन सकता है। सवाल यह है कि जब इतिहास इतना बड़ा सबक दे चुका है, तो फिर प्रशासन की आंखें क्यों बंद हैं? विकलांग श्रद्धालुओं का रैंप बना अवैध पार्किंग स्थल हर की पौड़ी क्षेत्र में विकलांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया रैंप आज अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुका है। इस रैंप पर दोनों ओर अवैध रूप से दोपहिया वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं के लिए चलना तक मुश्किल हो गया है। श्रद्धालुओं के लिए
बनाई गई यह सुविधा अब अवैध पार्किंग में तब्दील हो चुकी है, लेकिन इसे हटाने वाला शायद ही कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई देता है। सुभाष घाट और हर की पौड़ी पर अवैध फड़ों की भरमार हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों सुभाष घाट और हर की पौड़ी पर भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां बड़ी संख्या में फड़ लगाकर दुकानें संचालित हो रही हैं, जिससे घाटों की व्यवस्था और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। इतना ही नहीं, हर की पौड़ी पर प्रतिबंध के बावजूद सैकड़ों अवैध फूल-फरोशी के ठेले खुलेआम लगे हुए हैं। कानून स्पष्ट रूप से इन गतिविधियों पर रोक लगाता है, लेकिन हकीकत में कानून का खुला उल्लंघन देखने को मिल रहा है। भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध, फिर भी हर की पौड़ी पर भीख का सिलसिला जारी हर की पौड़ी क्षेत्र में भिक्षावृत्ति पर कानूनी प्रतिबंध है, फिर भी यहां बड़ी संख्या में भिखारी खुलेआम श्रद्धालुओं से भीख मांगते दिखाई देते हैं। प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद यह सब दिन-दहाड़े चलता रहता है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर इन नियमों का पालन कौन कराएगा? अभियान या सिर्फ दिखावा? सबसे
बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन अतिक्रमण हटाने का दावा करता है, तो फिर अभियान खत्म होते ही वही अतिक्रमण वापस कैसे खड़ा हो जाता है? जैसे ही अधिकारी अतिक्रमण हटाकर आगे बढ़ते हैं, पीछे से वही दुकानें फिर से लग जाती हैं। ऐसे में यह अभियान केवल दिखावे और औपचारिकता तक सीमित नजर आता है। चारधाम यात्रा से पहले प्रशासन की परीक्षा चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, स्वच्छता और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन अगर शताब्दी पुल, सुभाष घाट और हर की पौड़ी जैसे प्रमुख स्थानों पर ही अतिक्रमण और अव्यवस्था बनी रहे, तो यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। अब सवाल यही है कि क्या प्रशासन वास्तव में इस समस्या का समाधान करेगा या फिर यह अभियान भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा? क्योंकि अंततः आस्था की इस नगरी की रक्षा का उत्तरदायित्व भी प्रशासन पर ही है — और इसका साक्षी स्वयं मां गंगा हैं। — स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़, हरिद्वार ✍️