गोवर्धन के तहसील सभागार में रविवार दोपहर को आयोजित मुड़िया पूनों मेले की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उस समय भारी विवाद खड़ा हो गया, जब बैठक में मौजूद स्थानीय पत्रकारों को अचानक सभागार से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। प्रशासन के इस रवैये से भड़के पत्रकारों ने तत्काल बैठक की कवरेज का बहिष्कार कर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण कर रहे थे। बैठक में जिलाधिकारी, एसपी देहात सहित जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मुड़िया पूनों मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। पत्रकारों का आरोप है कि बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद उन्हें बाहर जाने के निर्देश दे दिए गए, जबकि कई ऐसे लोग सभागार के भीतर मौजूद रहे जिनका प्रशासनिक प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। स्थानीय पत्रकारों ने सीधे तौर पर प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि मुड़िया मेले की अधूरी तैयारियों और बदहाल व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जनता तक न पहुंचे, इसीलिए मीडिया को बैठक से जानबूझकर दूर रखा गया। मीडियाकर्मियों का कहना है कि पत्रकारों को इस तरह बाहर रखना पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है। पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और सार्वजनिक महत्व की बैठकों से उन्हें बाहर करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सूचना के अधिकार की भावना के खिलाफ है। इस घटना से आक्रोशित पत्रकारों ने बैठक की कवरेज का सामूहिक बहिष्कार करने का फैसला लिया। पत्रकारों ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी मीडिया के साथ ऐसा व्यवहार दोहराया गया तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल मुड़िया पूनों मेले की समीक्षा बैठक में इस तरह मीडिया को बाहर रखना प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाता है, हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गोवर्धन के तहसील सभागार में रविवार दोपहर को आयोजित मुड़िया पूनों मेले की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उस समय भारी विवाद खड़ा हो गया, जब बैठक में मौजूद स्थानीय पत्रकारों को अचानक सभागार से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। प्रशासन के इस रवैये से भड़के पत्रकारों ने तत्काल बैठक की कवरेज का बहिष्कार कर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण कर रहे थे। बैठक में जिलाधिकारी, एसपी देहात सहित जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मुड़िया पूनों मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। पत्रकारों का आरोप है कि बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद उन्हें बाहर जाने के निर्देश दे दिए गए, जबकि कई ऐसे लोग सभागार के भीतर मौजूद रहे जिनका प्रशासनिक प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। स्थानीय पत्रकारों ने सीधे तौर पर प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि मुड़िया मेले की अधूरी तैयारियों और बदहाल व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जनता तक न पहुंचे, इसीलिए मीडिया को बैठक से जानबूझकर दूर रखा गया। मीडियाकर्मियों का कहना है कि पत्रकारों को इस तरह बाहर रखना पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है। पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और सार्वजनिक महत्व की बैठकों से उन्हें बाहर करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सूचना के अधिकार की भावना के खिलाफ है। इस घटना से आक्रोशित पत्रकारों ने बैठक की कवरेज का सामूहिक बहिष्कार करने का फैसला लिया। पत्रकारों ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी मीडिया के साथ ऐसा व्यवहार दोहराया गया तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। गौरतलब है कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल मुड़िया पूनों मेले की समीक्षा बैठक में इस तरह मीडिया को बाहर रखना प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाता है, हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
- मथुरा के थाना रिफाइनरी क्षेत्र के अंतर्गत हरिधाम कॉलोनी में एक नवनिर्माणाधीन मकान में अज्ञात शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई है। आज दिनांक 12.07.2026 को सुबह लगभग 11:00 बजे डायल 112 के माध्यम से पुलिस को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद तत्काल उच्च अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया। फील्ड यूनिट द्वारा घटनास्थल से साक्ष्य संकलन की कार्यवाही की गई, जिसके बाद मृतक की पहचान कुलदीप पुत्र हुकम सिंह, निवासी हेतलपुर, थाना टप्पल, जनपद अलीगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक कुलदीप के ऊपर विभिन्न जनपदों में एक दर्जन से अधिक अभियोग पंजीकृत हैं। क्षेत्राधिकारी रिफाइनरी के अनुसार, प्रारंभिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्य संकलन की कार्यवाही में प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण दुर्घटना होना प्रतीत हो रहा है। फिलहाल पुलिस द्वारा शव के पंचायतनामा की कार्यवाही कराकर पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और मामले में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।1
- मथुरा के नए नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि वे सफाई को नंबर 1 बनाएंगे।1
- मथुरा महानगर कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और अध्यक्ष यतेंद्र मुकदम ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताओं और चंदे की चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों देशवासियों की आस्था का केंद्र है, लेकिन इसके नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है। मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता ने कहा कि यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था पर लगी गहरी चोट है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर वह पवित्र स्थान है जिसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के समय से प्रयास और आस्था की शुरुआत हुई थी, लेकिन आज भगवान राम के नाम पर जो करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा हुआ है, उसमें भारी चोरी की जा रही है। वर्तमान सरकार और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने इसे सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि राम भक्तों की भावनाओं की चोरी करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता और राम भक्त सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक चंदे और आस्था की चोरी करने वाले लोग सलाखों के पीछे नहीं जाते, तब तक राम भक्तों को न्याय और उनकी आहत भावनाओं को राहत नहीं मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि प्रभु श्री राम के नाम का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश और देश की सत्ता पर काबिज होने वाले लोग अगर थोड़ी भी नैतिकता रखते हैं, तो वे इस विफलता को अपनी उपलब्धि मानते हुए तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दें।4
- मथुरा-वृंदावन में ई-रिक्शा चालकों की हड़ताल जारी है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चालकों का कहना है कि उनके ₹20,000 तक के चालान काटे जा रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कार्रवाई के विरोध में ही ई-रिक्शा चालकों ने हड़ताल कर दी है।1
- मथुरा में कार्यकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अपने पर्सनल झगड़ों में संगठन को न लाएं। इसके साथ ही, डीएम साहब से भी यह विशेष निवेदन किया गया है कि वे गाड़ियों में बेवजह हूटर लगाकर चलने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करें।1
- आगरा कैंट रेलवे प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया जब डीएसएस (DSS) के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इस मारपीट के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लेते हुए चार आरपीएफ (RPF) कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।1