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मनिका में अक्सा आई केयर क्लिनिक का पूर्व विधायक में फीता काटकर किया उद्घाटन संचालक ने बताया कि यहां पर सभी तरह का नेत्र रोग का इलाज किया जाएगा
Abhay Kumar
मनिका में अक्सा आई केयर क्लिनिक का पूर्व विधायक में फीता काटकर किया उद्घाटन संचालक ने बताया कि यहां पर सभी तरह का नेत्र रोग का इलाज किया जाएगा
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- सेरासाम में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, 237 ग्रामीणों ने लिया लाभ इस संबंध में आज शुक्रवार 12 बजे लार्सन एंड टुब्रो के मिस्टर मनोज कुमार ने बताया की रंका प्रखंड की खरडीहा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सेरासाम में Larsen & Toubro (L&T) एवं बदलाव फाउंडेशन के सहयोग से संचालित “नयी दिशा – Village Development Program” के तहत निःशुल्क सामान्य स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को घर के समीप स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ समय पर जांच, उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना था। शिविर का उद्घाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंका के BPM रामनारायण राम, विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिव कुमार राम, डॉ. नितीश परमार्थी, डॉ. उत्कर्ष मिश्रा, फिरोज खान, लवली कुमारी सहित अन्य टीम सदस्यों की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए जागरूक किया गया। शिविर में रक्तचाप, ब्लड शुगर, खांसी, सर्दी, बुखार सहित विभिन्न सामान्य बीमारियों की जांच कर चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। साथ ही नेत्र एवं दंत जांच की सुविधा भी उपलब्ध रही। टीबी जागरूकता सत्र में बीमारी के लक्षण, बचाव, जांच, नियमित उपचार एवं पोषण की जानकारी दी गई। L&T के सहयोग से आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण किया गया तथा तीन मरीजों को आगे के उपचार के लिए CHC रंका रेफर किया गया। शिविर में कुल 237 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। इनमें 136 महिलाएं, 101 पुरुष तथा 81 बच्चे शामिल रहे। आयोजन में बदलाव फाउंडेशन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- बारिश में रोड बना तालाब जनता परेशान.? #shorts #shortvideo #road #nadi #pani #gadi #aamjanata #new1
- बिहार राज्य किन्नर (ट्रांसजेंडर) कल्याण बोर्ड की सदस्य डॉ. राजन सिंह ने पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा है। [1] मुख्य बातें प्रस्ताव किसने रखा: बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य डॉ. राजन सिंह। स्थान: यह मंदिर पटना, बिहार में प्रस्तावित है। अनुमानित लागत: इस परियोजना की लागत लगभग 112 करोड़ रुपये बताई गई है। विशेषता: मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने की मूर्ति लगाने की चर्चा है। वर्तमान स्थिति: यह अभी केवल एक बोर्ड द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव है। इसे राज्य सरकार और कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।1
- यशस्वी प्रधानमंत्री एवं युवा प्रदेश उपाध्यक्ष का जन्मदिन सेवा सप्ताह के तहत कार्यक्रम आयोजित हुआ उक्त कार्यक्रम लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के सूदूरवर्ती ग्रामीण इलाके में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर भाजपाइयों द्वारा सेवा सप्ताह अभियान के तहत आयोजित हुआ स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर बच्चो को पाठ्यक्रम से संबंधित सामग्री वितरण किया गया। साथ ही सेवा सप्ताह के दौरान युवा प्रदेश उपाध्यक्ष का भी जन्मदिन मनाया गया इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र में जरूरतमंद को मिला चिकित्सा सेवा मुफ्त बीमारी से बचाव हेतु दिया गया परामर्श कार्यक्रम के दौरान पार्टी के आलाधिकारी एवं वरिष्ठ कनिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे।1
- चिनियां थाना के नए प्रभारी शेखर कुमार सिंह ने संभाली कमान, पदभार ग्रहण करते ही शुरू किया काम चिनियां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां थाना के नए थाना प्रभारी के रूप में शेखर कुमार सिंह ने शुक्रवार से विधिवत रूप से कामकाज संभाल लिया। हालांकि उन्होंने बीते बुधवार को ही थाना पहुंचकर पदभार ग्रहण किया था, लेकिन विभागीय स्तर पर कुछ प्रक्रिया के कारण तत्काल कार्यभार संभालने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। आवश्यक छानबीन एवं विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुक्रवार को उन्होंने थाना प्रभारी के रूप में अपना कार्यभार संभालते हुए काम शुरू कर दिया। पदभार संभालने के बाद थाना प्रभारी शेखर कुमार सिंह ने थाना क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सक्रियता के साथ कार्य करने की बात कही। उनके पदभार संभालने के बाद थाना कर्मियों एवं क्षेत्र के लोगों में भी नए प्रभारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं, इससे पहले चिनियां थाना के प्रभारी रहे बिकू कुमार रजक ने अपने करीब चार माह के कार्यकाल के दौरान थाना क्षेत्र में शांति एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय स्तर पर उनका तबादला पुलिस लाइन गढ़वा किया गया है। नए थाना प्रभारी के सामने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और आम लोगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी।1
- प्रखंड स्तरीय करमा पूर्व संध्या महोत्सव महुआडार प्रखंड मुख्यालय में गुरुवार की देर रात 10:00 बजे तक मनाया गया। उक्त आयोजन सरना आदिवासी विकास एकता मंच महुआडार के तत्वाधान में किया गया। इस मौके पर सरना आदिवासी विकास एकता मंच के कई पदाधिकारी एवं सदस्य मंच पर उपस्थित थे। वहीं इस मौके पर बड़ी संख्या में आए सरना आदिवासी युवक युवती बूढ़े बुजुर्ग बैगा पाहन दीवान बेल ने करमा पूजा आदिवासी रीति-रिवाज के साथ पूरे विधि विधान के साथ किया।यहां युवक एवं युवती बूढ़े एवं बुजुर्ग ने मंडर की थाप पर पारंपरिक नाच गान किया।1
- विश्वकर्मा जी को ऋषि महाज जी ने क्यों सराप दिए ? ऋषि महाराज जी का क्या नाम था ? जानने के लिए वीडियो देखें:- पौराणिक कथाओं (विशेषकर वामन पुराण) के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को एक ऋषि द्वारा बंदर बन जाने का श्राप मिला था। [1, 2] किसने दिया श्राप? ऋषि का नाम: यह श्राप एक ऋषि (कुछ कथा प्रसंगों में जिनका संबंध र्वेतध्वज/तपस्वी ऋषि से है) द्वारा दिया गया था। [1, 2] क्यों दिया श्राप? (कारण) घटना: पौराणिक प्रसंग के अनुसार, एक बार भगवान विश्वकर्मा ने अपनी पुत्री चित्रांगदा के साथ बहुत कठोर या अनुचित व्यवहार किया था। क्रोध: जब उस ऋषि को विश्वकर्मा द्वारा अपनी पुत्री के प्रति किए गए इस क्रूर या कठोर व्यवहार का पता चला, तो वे अत्यधिक क्रोधित हो गए। श्राप: ऋषि ने क्रोधित होकर भगवान विश्वकर्मा को श्राप दिया कि "जिस विश्वकर्मा ने अपनी पुत्री के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार किया है, वह बंदर बन जाए"। [1] श्राप का निवारण कैसे हुआ? कथा के आगे के भाग के अनुसार, जब विश्वकर्मा जी को बंदर का रूप मिला, तो उन्होंने अप्सरा घृताची के संपर्क से बलवान पुत्रों (जैसे नल और नील) को जन्म दिया। [1] पुत्रों के जन्म और आगे चलकर प्रभु श्रीराम की सहायता करने तथा त्रेतायुग/द्वापर की लीला पूरी होने पर विश्वकर्मा जी इस श्राप से मुक्त हुए और उन्हें अपना वास्तविक दिव्य रूप वापस मिल गया। [1, 2]1
- गांगपुर नदी में कथित अवैध बालू निकासी, जंगल के रास्ते गुजर रही गाड़ियों पर उठे सवाल चतरा के गांगपुर क्षेत्र में नदी से कथित रूप से बालू निकासी और जंगल के रास्ते वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां से लगातार बालू बाहर ले जाया जा रहा है। जंगल के अंदर नदी तक जाने वाले रास्तों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराने और नदी व जंगल के संरक्षण की मांग की है। साथ ही लंबे समय से लंबित वन समिति के चुनाव को जल्द कराने की मांग भी उठाई गई है। रिपोर्ट: विनोद कुमार पाठक देश लाइव न्यूज चतरा1
- *चंदवा-लोहरदगा पथ की मौत की घाटी, अधूरे निर्माण से फिर मंडरा रहा हादसे का साया डेढ़टंगवा में बेकाबू हो रहे ट्रेलर* *आजादी के जश्न पर खूनी घाटी बनी डेढ़टंगवा, 6 लाशों पर जागा सिस्टम फिर सो गया* *चंदवा (लातेहार)।* 15 अगस्त 2026 का दिन। एक तरफ पूरा देश 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था, तिरंगे लहरा रहे थे, देशभक्ति के गीत गूंज रहे थे, तो वहीं दूसरी ओर चंदवा-लोहरदगा मुख्य पथ की *डेढ़टंगवा घाटी* में मातम पसरा था। एक अनियंत्रित कंटेनर ने मौत बनकर बाइक सवार और सवारी टेंपो को अपनी चपेट में ले लिया। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए। इस हृदय विदारक हादसे में *8 साल के एक मासूम बच्चे और एक महिला सहित 6 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई* थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस दिन घाटी की सड़क खून से लाल हो गई थी और घायलों की चीखों से पूरा इलाका दहल उठा था। *6 लाशों के बाद जागा था सिस्टम* हादसे के बाद जनाक्रोश और मीडिया में खबरें आने के बाद लातेहार और लोहरदगा जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटी। आनन-फानन में अधिकारियों ने घाटी का दौरा किया। घाटी के तीखे, अंधे और जानलेवा मोड़ों को काटने, चौड़ीकरण करने और सड़क की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू करने का बड़ा-बड़ा दावा किया गया। कुछ दिनों तक जेसीबी और मजदूर घाटी में दिखे भी। *दावा फिर निकला हवा-हवाई* लेकिन जैसे-जैसे मामला ठंडा पड़ा, सिस्टम फिर से गहरी नींद में सो गया। हकीकत यह है कि डेढ़टंगवा घाटी का निर्माण कार्य आज भी आधा-अधूरा पड़ा है। अधबने मोड़ों, बिखरी गिट्टियों और बिना डायवर्सन के ही इस घाटी से बड़े-बड़े वाहन गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लोहरदगा की ओर से आने वाले भारी कंटेनर और ट्रेलर आज भी इस ढलान पर बेकाबू हो जाते हैं और आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। ब्रेक फेल होने की घटनाएं आम हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन को फिर से 6 लाशों का इंतजार है? अधूरे निर्माण के बीच वाहनों को घाटी में भेजना मौत को खुला न्योता देना नहीं तो और क्या है? जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक जिम्मेदार मौन साधे रहते हैं।2