बाराबंकी की राजनीति का मजबूत स्तंभ गिरा, संग्राम सिंह वर्मा नहीं रहे* * बाराबंकी की राजनीति का वह चेहरा, जिसकी आवाज पर कभी हजारों लोग जुट जाया करते थे, आज हमेशा के लिए खामोश हो गई। पूर्व कैबिनेट मंत्री संग्राम सिंह वर्मा के निधन की खबर ने जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है। 94 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन अपने पीछे संघर्ष, जनसेवा और सियासत की एक ऐसी विरासत छोड़ गए, जिसे शायद ही कोई भुला पाए। उनके चाहने वालों के लिए यह सिर्फ एक नेता का निधन नहीं, बल्कि जिले की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ का गिरना है। लखनऊ के शेखर अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार दोपहर करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही बाराबंकी की गलियां, गांव, कस्बे और राजनीतिक गलियारे शोक में डूब गए। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी— “अब संग्राम सिंह वर्मा जैसा नेता कहां मिलेगा।” बाराबंकी सदर से कई बार विधायक रहे संग्राम सिंह वर्मा ने सत्ता में रहते हुए भी जनता से अपना रिश्ता कभी कमजोर नहीं होने दिया। गांव का किसान हो, गरीब परिवार हो या कोई जरूरतमंद, उनके दरवाजे से शायद ही कोई खाली लौटा हो। यही वजह थी कि लोग उन्हें नेता नहीं, अपना संरक्षक मानते थे। उनके निधन के साथ ही बाराबंकी की राजनीति का एक सुनहरा अध्याय खत्म हो गया। सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपाल तक, हर तरफ सिर्फ उनकी यादें, उनके किस्से और उनके जाने का दर्द दिखाई दे रहा है।
बाराबंकी की राजनीति का मजबूत स्तंभ गिरा, संग्राम सिंह वर्मा नहीं रहे* * बाराबंकी की राजनीति का वह चेहरा, जिसकी आवाज पर कभी हजारों लोग जुट जाया करते थे, आज हमेशा के लिए खामोश हो गई। पूर्व कैबिनेट मंत्री संग्राम सिंह वर्मा के निधन की खबर ने जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है। 94 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन अपने पीछे संघर्ष, जनसेवा और सियासत की एक ऐसी विरासत छोड़ गए, जिसे शायद ही कोई भुला पाए। उनके चाहने वालों के लिए यह सिर्फ एक नेता का निधन नहीं, बल्कि जिले की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ का गिरना है। लखनऊ के शेखर अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार दोपहर करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही बाराबंकी की गलियां, गांव, कस्बे और राजनीतिक गलियारे शोक में डूब गए। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी— “अब संग्राम सिंह वर्मा जैसा नेता कहां मिलेगा।” बाराबंकी सदर से कई बार विधायक रहे संग्राम सिंह वर्मा ने सत्ता में रहते हुए भी जनता से अपना रिश्ता कभी कमजोर नहीं होने दिया। गांव का किसान हो, गरीब परिवार हो या कोई जरूरतमंद, उनके दरवाजे से शायद ही कोई खाली लौटा हो। यही वजह थी कि लोग उन्हें नेता नहीं, अपना संरक्षक मानते थे। उनके निधन के साथ ही बाराबंकी की राजनीति का एक सुनहरा अध्याय खत्म हो गया। सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपाल तक, हर तरफ सिर्फ उनकी यादें, उनके किस्से और उनके जाने का दर्द दिखाई दे रहा है।
- मुज़फ्फरनगर खतौली मे सड़क हादसे के दौरान खबर बना रहे पत्रकार के साथ खतौली थाने मे तैनात दरोगा कर्मवीर ने की अभद्रता.अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल1
- लखनऊ में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सेविकाओं को माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी स्वास्थ्य सम्बन्धी उपकरण वितरित करते हुए1
- सड़क हादसे में मृत देवरानी-जेठानी के जेवर पोस्टमार्टम हाउस से गायब होने का आरोप सामने आया है। दोनों महिलाओं की तहसील फतेहपुर के इसेपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रक की टक्कर में मौके पर मौत हो गई थी, जबकि पंचनामा रिपोर्ट में उनके सोने-चांदी के जेवर पहने होने का उल्लेख बताया गया है। परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम हाउस में शव की सील खोलकर जेवर गायब किए गए। जेवर वापस न मिलने पर परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और मौके पर हंगामा किया। बताया गया कि घंटों समझाने के बाद भी परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। हादसे में एक 3 साल की बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई है, पीड़ित परिवार सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र का निवासी है। मामला कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा बताया जा रहा है1
- *मथुरा में हंगामा: बांके बिहारी मंदिर में सुरक्षा के नाम पर गुंडई, श्रद्धालुओं और दुकानदार से मारपीट—8 हिरासत में* मथुरा। वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब व्यवस्थाओं के नाम पर तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों पर श्रद्धालुओं से मारपीट का गंभीर आरोप लगा। बताया जा रहा है कि मामूली विवाद के बाद सुरक्षाकर्मियों ने न सिर्फ श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता की, बल्कि बीच-बचाव करने आए एक स्थानीय दुकानदार को भी बेरहमी से पीट दिया। घटना के बाद मंदिर परिसर में तनाव का माहौल बन गया और मौके पर भारी भीड़ जुट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार बेहद आक्रामक था, जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया। *व्यवस्था या मनमानी? उठे बड़े सवाल* मंदिर जैसी आस्था की जगह पर इस तरह की घटना ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर मनमानी और बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। *पुलिस ने संभाला मोर्चा* सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों के कुल 8 लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है। *जांच जारी, कार्रवाई के संकेत* पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाएगी। *निष्कर्ष* आस्था के केंद्र में इस तरह की घटना न सिर्फ व्यवस्थाओं की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सुरक्षा व्यवस्था को संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की सख्त जरूरत है।1
- *वाराणसी में एबीवीपी कार्यकर्ताओं में आपसी झड़प* वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच आपसी झड़प हुई है। नवीन कार्यकारणी के दौरान हंगामा हुआ, जिसमें बाहरी लोगों को कार्यभार देने का आरोप लगाया गया है। बैठक के दौरान हंगामे का वीडियो वायरल हो गया है ¹ ²। *क्या है मामला?* एबीवीपी और आइसा संगठन के छात्रों के बीच जमकर बवाल हुआ, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रों को खदेड़ा। आरोप है कि आइसा और बीएसएम के सदस्यों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया, जिसमें कई छात्राएं घायल हो गईं ³। *एबीवीपी का आरोप* एबीवीपी ने एक बयान जारी कर दावा किया कि आइसा और बीएसएम के गुंडों द्वारा किये गये हमले में उनकी कार्यकर्ता अदिति और मेघा घायल हो गयीं। एबीवीपी ने दोनों छात्राओं की तस्वीर भी जारी की, जिसमें एक के पैर और एक के हाथ में प्लास्टर लगा दिख रहा है ³। क्या आप जानना चाहेंगे कि इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है या एबीवीपी ने इस पर क्या बयान दिया है?1
- *चंदौली में गेहूं की खड़ी फसल में लगी भीषण आग* चंदौली के बबुरी क्षेत्र के जलखोर गांव में गेहूं की खड़ी फसल में भीषण आग लग गई, जिससे 50 बीघा के करीब फसल जलकर राख हो गई। तेज हवा के चलते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिसे ग्रामीणों ने बमुश्किल बुझाया। ग्रामीणों ने दमकल टीम पर देरी से पहुंचने का आरोप लगाया है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण थाने पहुंचकर मदद की गुहार लगाई है ¹। क्या आप जानना चाहेंगे कि आग लगने के कारणों का पता चला है या प्रशासन ने पीड़ित किसानों को कोई राहत दी है?1
- बाराबंकी के फतेहपुर में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सुबह से ही विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सोमवार सुबह श्रद्धालुओं ने प्रभात फेरी निकाली, जो श्री महावीर चैत्यालय तक पहुंची। इस दौरान पूरे नगर में 'जियो और जीने दो' का संदेश गूंजता रहा। इसके बाद श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में विधिवत पूजन-अर्चन, अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। दोपहर में नगर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो आकर्षण का केंद्र रही। फूलों से सुसज्जित रथ पर भगवान महावीर की मनमोहक प्रतिमा विराजमान थी। अनमोल जैन को भगवान को रथ पर विराजमान कराने का सौभाग्य मिला। उमाशंकर जैन ने सारथी की भूमिका निभाई, जबकि आशीष जैन और राहुल जैन ने चंवर डुलाकर सेवा की। शोभायात्रा पचघरा, जोशीटोला, मेन रोड और भगवान महावीर मार्ग से होती हुई जैन धर्मशाला पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया और प्रसाद वितरित किया। भजनों की धुन पर युवा श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। विभिन्न आकर्षक झांकियों ने शोभायात्रा की भव्यता को बढ़ाया। नेता सुभाष चौराहे पर विधायक साकेन्द्र वर्मा ने शोभायात्रा का स्वागत किया और भगवान की आरती उतारी। शाम को जैन धर्मशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें भगवान महावीर के जीवन, सिद्धांतों और उपदेशों को भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया गया।1
- मुज़फ्फरनगर खतौली मे सड़क हादसे के दौरान खबर बना रहे पत्रकार के साथ खतौली थाने मे तैनात दरोगा कर्मवीर ने की अभद्रता.अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल1