तमिलनाडु में टीवीके सरकार ने डीएमके शासनकाल में मंदिर निधियों से प्रस्तावित 46 परियोजनाओं को रद्द कर दिया है, जिनमें 29 विवाह मंडप और 17 वाणिज्यिक परिसर शामिल थे। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि मंदिरों की आय और संपत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक, आध्यात्मिक और मंदिर-संबंधित कार्यों के लिए किया जाएगा। इस फैसले को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं। समर्थकों का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग मंदिरों के संरक्षण, पूजा-पाठ, जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ही होना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ लोगों का तर्क है कि रद्द किए गए विवाह मंडप और व्यावसायिक परिसर भविष्य में मंदिरों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते थे, साथ ही समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सस्ती सुविधाएं भी उपलब्ध करा सकते थे। आधिकारिक तौर पर सरकार ने बताया है कि जिन परियोजनाओं पर अभी काम शुरू नहीं हुआ था, उन्हें मंदिरों पर संभावित वित्तीय बोझ और अन्य व्यावहारिक कारणों को देखते हुए रद्द किया गया है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि संसाधनों को अब मंदिर परिसरों और श्रद्धालु सुविधाओं के विकास में लगाया जाएगा। इसलिए, इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक या धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मंदिर निधियों के उपयोग, धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन के प्रश्न के रूप में भी देखा जा रहा है।
तमिलनाडु में टीवीके सरकार ने डीएमके शासनकाल में मंदिर निधियों से प्रस्तावित 46 परियोजनाओं को रद्द कर दिया है, जिनमें 29 विवाह मंडप और 17 वाणिज्यिक परिसर शामिल थे। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि मंदिरों की आय और संपत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक, आध्यात्मिक और मंदिर-संबंधित कार्यों के लिए किया जाएगा। इस फैसले को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं। समर्थकों का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग मंदिरों के संरक्षण, पूजा-पाठ, जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ही होना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ लोगों का तर्क है कि रद्द किए गए विवाह मंडप और व्यावसायिक परिसर भविष्य में मंदिरों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते थे, साथ ही समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सस्ती सुविधाएं भी उपलब्ध करा सकते थे। आधिकारिक तौर पर सरकार ने बताया है कि जिन परियोजनाओं पर अभी काम शुरू नहीं हुआ था, उन्हें मंदिरों पर संभावित वित्तीय बोझ और अन्य व्यावहारिक कारणों को देखते हुए रद्द किया गया है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि संसाधनों को अब मंदिर परिसरों और श्रद्धालु सुविधाओं के विकास में लगाया जाएगा। इसलिए, इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक या धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मंदिर निधियों के उपयोग, धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन के प्रश्न के रूप में भी देखा जा रहा है।
- भारत भूषण तिवारी का एक लाइव एनकाउंटर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप से कई गोलियां चलती दिख रही हैं। वीडियो के माध्यम से दर्शाया गया है कि कैसे एक अकेले इंसान पर कई गोलियां चलाई गईं और उसे "फील्डिंग लगाकर" घेरा गया। वायरल वीडियो के साथ यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को यह ज्ञात हो जाए कि उसे पागलखाने भेजकर सच में पागल करने की साजिश रची जा रही है, तो उसके पास केवल एक ही विकल्प बचता है। ऐसे में, उस व्यक्ति ने सचमुच पागल बनने की बजाय एक क्रांतिकारी बनकर सीने में गोली लेना बेहतर समझा। इस घटना के संदर्भ में, लोगों से अपनी राय मांगी गई है कि क्या यह कदम सही था।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेशवासियों को एक संदेश दिया है। उन्होंने योग दिवस के इस खास मौके पर राज्य के निवासियों को संबोधित करते हुए यह संदेश जारी किया।1
- कोरिया कलेक्टर ने एक स्कूल का दौरा कर बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान, उन्होंने वहां के शिक्षकों को भी फटकार लगाई। कलेक्टर ने कड़े शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।3
- अनूपपुर जिले के निगवानी के मुख्य बाजार में लंबे समय से एक खतरनाक गड्ढा लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। हाल ही में एक छोटी बच्ची इस गड्ढे में गिर गई, हालांकि गनीमत रही कि एक बड़ा हादसा टल गया। पीड़ित बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत ग्राम पंचायत के सरपंच से की तो उन्होंने गंभीरता दिखाने के बजाय "जो करना हो कर लो" जैसा असंवेदनशील जवाब दिया। यदि यह आरोप सही है, तो यह जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाजार क्षेत्र में रोजाना सैकड़ों लोग और बच्चे आते-जाते हैं, ऐसे में प्रशासन और पंचायत से तत्काल इस गड्ढे की मरम्मत कर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ऐसी लापरवाही पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए।1
- मरवाही वनमंडल के मरवाही वन परिक्षेत्र में, सिवनी प. स. वृत्त के घुसरिया बीट में 21 जून 2026 को दोपहर 12:30 बजे चार हाथियों का एक दल विचरण करते देखा गया है। इन हाथियों के कारण घुसरिया, चिचगोहना और कुम्हारी क्षेत्रों में कुल 11 फसलों का नुकसान हुआ है, हालांकि किसी भी मकान को कोई क्षति या जनहानि की सूचना नहीं है। वर्तमान में, ये चारों हाथी मरवाही वनमंडल के मरवाही परिक्षेत्र में घुसरिया परिसर के कक्ष क्रमांक 2051 के नजदीकी राजस्व क्षेत्र सोन नदी के किनारे पलास और लेंटाना के झुरमुट में घूम रहे हैं। ये हाथी मध्यप्रदेश से घुसरिया परिसर में प्रवेश किए हैं और इनके मरवाही परिसर, सचराटोला परिसर और पंडरी परिसर की ओर जाने की संभावना है। परिसर रक्षक नागेश साहू (घुसरिया) और रामकुमार ओटृऻ (मरवाही) सहित मरवाही वन परिक्षेत्र के कर्मचारी हाथियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और हाथियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग ने स्थिति को सामान्य बताया है। अधिक जानकारी के लिए मरवाही वन मंडल, वन परिक्षेत्र मरवाही के मोबाइल नंबर 7828465059 और 8718915506 पर संपर्क किया जा सकता है।4
- सरगुजा जिले के लखनपुर इलाके में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पुरानी रंजिश और गुस्से में अंधे एक सगे भाई ने अपने ही भाई को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। 'अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज (ACCG NEWS)' के अनुसार, यह मामला समाज में बढ़ते क्रोध और गिरते संस्कारों पर सोचने पर मजबूर करता है। यह नृशंस वारदात 20 जून की दोपहर, लखनपुर थाने के अंतर्गत ग्राम अलगा बेन्दोपानी (बेलदगी) में घटी। 32 वर्षीय पांडे कोरवा का अपने ही सगे भाई, 25 वर्षीय श्रवण कोरवा, और एक नाबालिग (विधि से संघर्षरत बालक) के साथ पुरानी रंजिश और आपसी विवाद को लेकर भयंकर झगड़ा हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि श्रवण कोरवा ने पांडे कोरवा की नाक दाँतों से काट ली और फिर नाबालिग के साथ मिलकर ईंट-पत्थरों से उसके सिर और कान के पास इतने गंभीर वार किए कि पांडे कोरवा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही, सरगुजा के डीआईजी एवं एसएसपी श्री राजेश अग्रवाल के सख्त निर्देश पर लखनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक संपत पोटाई के नेतृत्व में पुलिस और FSL की टीम ने मौके का मुआयना किया और घटना स्थल से खून से सने ईंट के टुकड़े व पत्थर बरामद किए। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर हत्या के आरोपी भाई श्रवण कोरवा और नाबालिग को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने खून से सने कपड़े भी ज़ब्त कर लिए। बालिग आरोपी को न्यायालय और नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है। ACCG NEWS और चीफ एडिटर शुभम पाठक ने इस घटना को सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के माथे पर एक कलंक बताया है, और समाज में बढ़ते क्रोध तथा गिरते संस्कारों पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में लखनपुर पुलिस (एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह और पूरी टीम) की त्वरित एवं मुस्तैद कार्रवाई की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही यह भी अपील की गई है कि आपसी विवादों को खून-खराबे की बजाय बातचीत और समझदारी से सुलझाने की पहल होनी चाहिए।1
- सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते दो छोटे भाइयों ने मिलकर अपने बड़े भाई पांडे कोरवा की ईंट-पत्थर से ताबड़तोड़ प्रहार कर हत्या कर दी। यह घटना 20 जून की दोपहर को उनके घर में हुई थी, जिसके बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। लखनपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रविवार को दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें एक आरोपी नाबालिग है। मृतक पांडे कोरवा (32 वर्ष), पिता रामधन कोरवा, ग्राम अलगा के बेंदोपानी निवासी था। उसके 25 वर्षीय छोटे भाई सरवन कोरवा और एक नाबालिग भाई उससे पुरानी रंजिश रखते थे। 20 जून की दोपहर उनके बीच फिर किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर सरवन कोरवा और नाबालिग भाई ने पांडे कोरवा को पहले पीटा, फिर ईंट-पत्थर से उसके सिर और कनपटी पर लगातार हमला किया, जिससे गंभीर चोट लगने के कारण वह लहूलुहान होकर मौके पर ही दम तोड़ गया। हत्या के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए, जिसकी सूचना परिजनों ने लखनपुर पुलिस को दी। हत्या की सूचना मिलने पर लखनपुर पुलिस और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद, पुलिस ने मुखबिर की जानकारी पर दोनों आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों भाइयों ने अपने बड़े भाई से पुरानी रंजिश के कारण हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 103 (1) और 3 (5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की है। सरवन कोरवा को जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी लखनपुर एसआई संपत पोटाई, प्रधान आरक्षक सतीश कुमार सिंह, पीतांबर सिंह, आरक्षक सुरेश गुप्ता, रामकुमार यादव, आशीष चौहान और सोहन राजवाड़े शामिल थे।1
- एक पोस्ट में भरत तिवारी और एक पत्रकार के बीच की उस बातचीत को सुनने का निमंत्रण दिया गया है, जो किसी एनकाउंटर से ठीक 30 मिनट पहले हुई थी। पोस्ट के माध्यम से उपयोगकर्ताओं से इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करने और संबंधित पेज को फॉलो करने का भी आग्रह किया गया है।1