सक्ती जिले में सरकार की गरीब हितैषी योजनाओं पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। एक व्यंग्यपूर्ण लेख के अनुसार, इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों की बजाय करोड़पतियों और प्रभावशाली लोगों को मिल रहा है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो "जिसके पास जितना ज्यादा है, उसे उतना और दो" का नया नियम बन गया हो। हाल ही में जारी आर्थिक सहायता की सूची से स्पष्ट होता है कि पात्रता का प्रमाण गरीबी नहीं, बल्कि रसूख और संपर्क है। जिनके घरों में सभी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं और जिनके नाम के साथ पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव जुड़ा है, उन्हें आसानी से सहायता मिल रही है। वहीं, जो लोग वास्तव में बीमारी, बेरोजगारी या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वे आज भी मदद की आस में कतार में खड़े हैं। गरीब व्यक्ति जब सहायता के लिए आवेदन करता है तो उसे जांच, दस्तावेज, सत्यापन और फ़ाइल घुमाने जैसी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसका अंतिम परिणाम अक्सर "पात्रता नहीं बनती" होता है। इसके विपरीत, कुछ खास लोगों के लिए पात्रता शायद घर बैठे ही तय हो जाती है। लाभार्थियों में अधिकांश लोगों का संबंध सत्ता, संगठन या जनप्रतिनिधियों के करीबी दायरे से बताया जा रहा है, जिससे जनता पूछ रही है कि यह आर्थिक सहायता है या "विशेष परिचय सम्मान योजना"? सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि जिन गरीबों के नाम पर योजनाएं बनती हैं, वे आज भी दर-दर भटक रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग सरकारी सहायता की छत्रछाया में सुरक्षित खड़े हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि गरीबों के हिस्से की रोटी भी यही प्रभावी लोग खा रहे हैं और फिर मंच से गरीबी उन्मूलन के भाषण भी दे रहे हैं। लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सवाल यह नहीं है कि सहायता किसे मिली, बल्कि यह है कि क्या गरीब इस व्यवस्था की प्राथमिकता में हैं भी या सिर्फ भाषणों और पोस्टरों की शोभा बढ़ाने के लिए बचे हैं। जब करोड़पति और लखपति आर्थिक सहायता के पात्र बन जाते हैं और गरीब केवल दर्शक बनकर रह जाता है, तब पूरी व्यवस्था कटघरे में खड़ी दिखाई देती है। जनता अब जवाब मांग रही है कि गरीबों के नाम पर चल रही इन योजनाओं में आखिर गरीब हैं कहां।
सक्ती जिले में सरकार की गरीब हितैषी योजनाओं पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। एक व्यंग्यपूर्ण लेख के अनुसार, इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों की बजाय करोड़पतियों और प्रभावशाली लोगों को मिल रहा है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो "जिसके पास जितना ज्यादा है, उसे उतना और दो" का नया नियम बन गया हो। हाल ही में जारी आर्थिक सहायता की सूची से स्पष्ट होता है कि पात्रता का प्रमाण गरीबी नहीं, बल्कि रसूख और संपर्क है। जिनके घरों में सभी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं और जिनके नाम के साथ पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव जुड़ा है, उन्हें आसानी से सहायता मिल रही है। वहीं, जो लोग वास्तव में बीमारी, बेरोजगारी या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वे आज भी मदद की आस में कतार में खड़े हैं। गरीब व्यक्ति जब सहायता के लिए आवेदन करता है तो उसे जांच, दस्तावेज, सत्यापन और फ़ाइल घुमाने जैसी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसका अंतिम परिणाम अक्सर "पात्रता नहीं बनती" होता है। इसके विपरीत, कुछ खास लोगों के लिए पात्रता शायद घर बैठे ही तय हो जाती है। लाभार्थियों में अधिकांश लोगों का संबंध सत्ता, संगठन या जनप्रतिनिधियों के करीबी दायरे से बताया जा रहा है, जिससे जनता पूछ रही है कि यह आर्थिक सहायता है या "विशेष परिचय सम्मान योजना"? सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि जिन गरीबों के नाम पर योजनाएं बनती हैं, वे आज भी दर-दर भटक रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग सरकारी सहायता की छत्रछाया में सुरक्षित खड़े हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि गरीबों के हिस्से की रोटी भी यही प्रभावी लोग खा रहे हैं और फिर मंच से गरीबी उन्मूलन के भाषण भी दे रहे हैं। लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सवाल यह नहीं है कि सहायता किसे मिली, बल्कि यह है कि क्या गरीब इस व्यवस्था की प्राथमिकता में हैं भी या सिर्फ भाषणों और पोस्टरों की शोभा बढ़ाने के लिए बचे हैं। जब करोड़पति और लखपति आर्थिक सहायता के पात्र बन जाते हैं और गरीब केवल दर्शक बनकर रह जाता है, तब पूरी व्यवस्था कटघरे में खड़ी दिखाई देती है। जनता अब जवाब मांग रही है कि गरीबों के नाम पर चल रही इन योजनाओं में आखिर गरीब हैं कहां।
- युवा नेता आशीष गांगुली ने सुशासन तिहर 2026 के अंतर्गत आयोजित जन समस्या शिविर में अपनी बात रखी।1
- कोरबा में इतिहास प्रसिद्ध समाजसेविका, कुशल प्रशासक, न्यायप्रिय शासक और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी जिला कोरबा द्वारा रिसदी स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि एवं माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी सहित पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों, सुशासन, जनसेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया। भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की ऐसी महान शासिका थीं, जिन्होंने सेवा, सुशासन, न्याय और जनकल्याण के क्षेत्र में अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने महिलाओं को सम्मान और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाते हुए समाज में सशक्त नेतृत्व की मिसाल कायम की। मोदी ने बताया कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा, और उन्होंने देशभर में मंदिरों, धर्मशालाओं, घाटों तथा जनहित के अनेक निर्माण कार्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके आदर्श आज भी समाज को नई दिशा दे रहे हैं और जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। कार्यक्रम में आरएसएस के जिला कार्यवाहक कैलाश नाहक ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को न्यायप्रियता और दूरदर्शिता की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि वे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में एक महान प्रेरणास्रोत थीं। नाहक ने बताया कि उन्होंने युवा काल में ही लाठी चलाना, तलवारबाजी, कूटनीति, विदेश नीति और शासन-प्रशासन की बारीकियों का गहन ज्ञान प्राप्त कर लिया था। अपनी अद्भुत नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता और न्यायप्रियता के बल पर उन्होंने समाज में एक आदर्श शासक के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए, जिसमें मुगलों और अंग्रेजों द्वारा खंडित तथा ध्वस्त किए गए 350 से अधिक मंदिरों का देश के विभिन्न हिस्सों में जीर्णोद्धार शामिल है। कैलाश नाहक ने जोर दिया कि उनका जीवन समाजसेवा, धर्म संरक्षण और जनकल्याण के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है, जो आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता है। इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आरएसएस के जिला कार्यवाहक कैलाश नाहक, डॉ. मनोज कुमार झा, हेमंत मोहलीकर, बालकृष्ण ठाकुर, जिला महामंत्री अजय विश्वकर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, जिला उपाध्यक्ष योगेश जैन, रूक्मणी नायर, वरिष्ठ भाजपा नेता विकास अग्रवाल, मंडल अध्यक्ष डॉ राजेश राठौर, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता, कुलसिंह कंवर, सरजू अजय, प्रकाश अग्रवाल, राजेश लहरे, संजीव शर्मा, संजय राठौर व मोंटी पटेल सहित कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने अहिल्याबाई होलकर के जनसेवा और धर्म संरक्षण के आदर्शों को स्मरण किया, जो आज भी समाज को एक नई दिशा प्रदान करते हैं और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।1
- कोरबा के बांकीमोंगरा में व्यापारी भीषण गर्मी के बीच अपने कारोबार को संचालित करने के लिए मजबूर हैं। बताया गया है कि 45 डिग्री सेल्सियस की चिलचिलाती धूप में भी उन्हें अपना व्यवसाय करना पड़ रहा है। यह स्थिति तब बनी हुई है जब उन्हें कोर्ट से राहत मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उनकी दुकानों के ताले अभी तक नहीं खुले हैं।1
- बिलासपुर में प्रेम करने की एक कथित घटना के बाद पांच परिवारों को एक भयावह सज़ा मिली है। इन पांचों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है, जिससे उन्हें समाज से अलग कर दिया गया है।1
- रायगढ़ के ग्राम जोरापाली में पूर्व महापौर मधु बाई किन्नर और कुंती बाई किन्नर के गुटों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक रूप ले चुका है। यह विवाद कहासुनी से बढ़कर मारपीट तक पहुंच गया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पूर्व महापौर मधु बाई किन्नर ने आरोप लगाया है कि कुंती बाई किन्नर के गुट के लोगों ने बाहरी व्यक्तियों को बुलाकर उनके साथियों और अन्य किन्नरों के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद मधु बाई किन्नर ने पुलिस अधीक्षक के नाम एक आवेदन सौंपा है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। मामले की जानकारी मिलने के बाद यह कोतरा रोड थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।3
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के सीतामढ़ी इलाके में एक घटना के बाद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे यह क्षेत्र रणभूमि जैसा बन गया। इस मामले में, संबंधित अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।1
- मालखरौदा और गोरखापाली के चर्चित कोटवार हत्या कांड में एक और फरार आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजकर जेल भेज दिया गया है।1