गौतम बुद्ध नगर ग्रेटर नोएडा तहसील दादरी गाँव झमुनपूरा मे सरकारी जमीन कलर मे रात के समय मे मिट्टी का खनन 📺 **N-MEDIA NEWS: ग्राउंड जीरो रिपोर्ट** 📺 #### **[ 🔴 LIVE BREAKING ]** # **बड़ी लापरवाही: दादरी में 'खाकी' बनी खनन माफिया की ढाल!** ### **मोटे अक्षरों में मुख्य समाचार:** * **📍 लोकेशन:** गाँव झमुनपुरा, पास ग्रेटर नोएडा (दादरी) * **🚜 मुख्य आरोपी:** पास के गाँव के दबंग और भ्रष्ट तंत्र * **🚛 मशीनरी:** जेसीबी (JCB) और हायवा का रात भर तांडव * **💰 ज़मीन का प्रकार:** सरकारी गारमेंट्स (कलर) की सुरक्षित भूमि ### **[ 📋 न्यूज़ बुलेटिन ]** **ग्रेटर नोएडा (दादरी):** मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद दादरी के **झमुनपुरा** में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस सरकारी जमीन की रक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है, उसी जमीन को माफिया पुलिस के साये में खोद रहे हैं। **सनसनीखेज खुलासे:** 1. **पुलिस का संरक्षण:** ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस मौके पर खड़ी होकर अवैध खनन करवाती है। 2. **अंधेरे का फायदा:** दिन में शांति का ढोंग और रात होते ही दर्जनों हायवा और जेसीबी मिट्टी की चोरी में जुट जाते हैं। 3. **सरकारी संपत्ति की लूट:** गारमेंट्स (कलर) की कीमती सरकारी जमीन को गड्ढों में तब्दील किया जा रहा है। ### **⚠️ कड़े सवाल - जवाब कौन देगा?** > * क्या दादरी पुलिस प्रशासन माफियाओं के आगे नतमस्तक हो चुका है? > * सरकारी जमीन पर अवैध 'परमिशन' का खेल आखिर किसके इशारे पर चल रहा है? > * रात के अंधेरे में निकलने वाले हायवा ट्रकों पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ती? > #### **📢 'जनता की पुकार'** **"हम मांग करते हैं कि शासन इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और दोषी पुलिसकर्मियों व माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करे।"** **🔥 हेडलाइन टिकर (नीचे की पट्टी):** **[BREAKING NEWS]** झमुनपुरा में मिट्टी का काला कारोबार जारी... **[UPDATE]** स्थानीय दबंगों के हौसले बुलंद, पुलिस बनी मूकदर्शक... **[ACTION]** जल्द हो सकती है बड़ी शिकायत... **#IllegalMining #GautamBuddhNagar #CMYogi #UPPolice #DadriNews #Jhampunpura #BreakingNews**
गौतम बुद्ध नगर ग्रेटर नोएडा तहसील दादरी गाँव झमुनपूरा मे सरकारी जमीन कलर मे रात के समय मे मिट्टी का खनन 📺 **N-MEDIA NEWS: ग्राउंड जीरो रिपोर्ट** 📺 #### **[ 🔴 LIVE BREAKING ]** # **बड़ी लापरवाही: दादरी में 'खाकी' बनी खनन माफिया की ढाल!** ### **मोटे अक्षरों में मुख्य समाचार:** * **📍 लोकेशन:** गाँव झमुनपुरा, पास ग्रेटर नोएडा (दादरी) * **🚜 मुख्य आरोपी:** पास के गाँव के दबंग और भ्रष्ट तंत्र * **🚛 मशीनरी:** जेसीबी (JCB) और हायवा का रात भर तांडव * **💰 ज़मीन का प्रकार:** सरकारी गारमेंट्स (कलर) की सुरक्षित भूमि ### **[ 📋 न्यूज़ बुलेटिन ]** **ग्रेटर नोएडा (दादरी):** मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद दादरी के **झमुनपुरा** में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस सरकारी जमीन की रक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है, उसी जमीन को माफिया पुलिस के साये में खोद रहे हैं। **सनसनीखेज खुलासे:** 1. **पुलिस का संरक्षण:** ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस मौके पर खड़ी होकर अवैध खनन करवाती है। 2. **अंधेरे का फायदा:** दिन
में शांति का ढोंग और रात होते ही दर्जनों हायवा और जेसीबी मिट्टी की चोरी में जुट जाते हैं। 3. **सरकारी संपत्ति की लूट:** गारमेंट्स (कलर) की कीमती सरकारी जमीन को गड्ढों में तब्दील किया जा रहा है। ### **⚠️ कड़े सवाल - जवाब कौन देगा?** > * क्या दादरी पुलिस प्रशासन माफियाओं के आगे नतमस्तक हो चुका है? > * सरकारी जमीन पर अवैध 'परमिशन' का खेल आखिर किसके इशारे पर चल रहा है? > * रात के अंधेरे में निकलने वाले हायवा ट्रकों पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ती? > #### **📢 'जनता की पुकार'** **"हम मांग करते हैं कि शासन इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और दोषी पुलिसकर्मियों व माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करे।"** **🔥 हेडलाइन टिकर (नीचे की पट्टी):** **[BREAKING NEWS]** झमुनपुरा में मिट्टी का काला कारोबार जारी... **[UPDATE]** स्थानीय दबंगों के हौसले बुलंद, पुलिस बनी मूकदर्शक... **[ACTION]** जल्द हो सकती है बड़ी शिकायत... **#IllegalMining #GautamBuddhNagar #CMYogi #UPPolice #DadriNews #Jhampunpura #BreakingNews**
- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी3
- Post by Sonu Kanaujiya1
- लोकसभा में महिला बिल पर मोदीजी का संबोधन, पहुंची महिलाएं, बीजेपी महिला सांसदों के साथ नितिन नबीन का संसद प्रवेश, पिछड़ा आदिवासी महिलाओं को आरक्षण की राहुल ने की मांग, शाह बोले मुस्लिम महिला आरक्षण तो दूर बात धर्म के आधार पर आरक्षण मंजूर नहीं, प्रियंका ने घेरा शाह को और अखिलेश ने रेखा गुप्ता को बताया बीजेपी की एकमात्र और वो भी आधी मुख्यमंत्री... देखिए महिला आरक्षण बिल पर नोंकझोंक राजपथ न्यूज़ पर....1
- गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।4
- गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर थाना पुलिस ने चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की एक मोटरसाइकिल भी बरामद की है। यह कार्रवाई 15 अप्रैल 2026 को दर्ज मुकदमे के बाद की गई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने चंदन वाटिका के पास पार्किंग से ट्रॉली के पीछे खड़ी बाइक चोरी की थी और उसे बेचने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नदीम, सोहबे और साहिब के रूप में हुई है। पुलिस ने साक्ष्य के आधार पर धाराएं बढ़ाते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
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- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी1